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बगल में काम करने वाली लड़की को स्टोर रूम में चोदा

Chut chudai ki kahani, antarvasna hindi sex story मेरे दोस्तों, यह बात आज से लगभग दो साल पुरानी की है…। जब मैं एक शौपिंग मॉल में काम करता था, यहाँ मुझे काम करते हुए 6 महीने हो गए थे।

एक दिन मेरी साथ वाली दुकान पर एक नई लड़की ने ज्वाइन किया… उसका नाम रितिका था। वो दिखने में बहुत सुन्दर थी… या ऐसा कह सकते हैं कि वो मुझे बहुत सुंदर लगी। उसका फिगर 34:-26:-34 का था… गोरा रंग था।
वो अक्सर जीन्स और टॉप पहनती थी जिसमें उसका फिगर अलग से दिखता था।

माल में बहुत से लड़के उस पर लाइन मारते थे… मैंं भी उन्हीं में से एक था। मैंं जब भी उसे देखता था… सोचता था कि काश ये मुझसे सैट हो जाए। इसलिए मैंं उसकी शॉप के सामने से आने:-जाने लगा और उससे देखता रहता था… वो भी मुझे देखती थी।
शायद वो समझ गई थी… कि मैंं उसे चाहने लगा हूँ… पर बात नहीं हो पाती थी।

एक दिन मैंं उसकी शॉप में चला गया और उसके मैंनेजर से बात करने लगा। बात करते हुए मैंंने रितिका से भी पूछा:- आपकी नई जॉइनिंग है?
तो उसने कहा:- हाँ जी…
और फिर मैंंने इधर:-उधर की बात करना शुरू की।
उसने अपने हाथ में फोन लिया हुआ था… मैंंने पूछा:- कौन सा फोन है?

तो उसने अपना फोन मेरे हाथ में दे दिया… मैंंने फट से उससे अपने फोन पर घन्टी मारी और अपना नंबर डिलीट कर दिया।
फिर मैंं अपनी शॉप में आ गया… अब वो मेरी शॉप के सामने से निकलती और मुझे देखते हुए जाती थी।
मैंंने फोन पर बात करनी शुरू की… फिर हमारी दोस्ती हो गई। एक दिन मैंंने उससे पूछा:- मूवी देखने चलें?

उस दिन वो बहुत सेक्सी लग रही थी उसने पिंक कलर का पटियाला सूट डाला हुआ था। तो पहले तो उसने मना कर दिया… फिर मेरे ज़ोर देने पर उसने अपनी शॉप से ऑफ लिया और हम महारथी मूवी देखने चले गए।
दस बजे का शो था… ज़्यादा लोग नहीं थे… पर मैंं पहली बार किसी लड़की के साथ मूवी देखने गया था… तो हालत खराब हो रही थी।

शायद उसका भी यही हाल था… फिल्म शुरू हो गई।
हम आपस में कोई बात नहीं कर रहे थे और फिल्म देखते रहे।
तभी इंटरवल हो गया, मैंंने उससे कुछ खाने के लिए पूछा… तो उसने मना कर दिया… फिल्म फिर से शुरू हो गई।

मैंंने आराम से उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और उसके हाथ को चूम लिया। उसने कोई विरोध नहीं किया। फिर मैंंने उसके गाल को चूमा और उसके कान में आराम से कहा:- रितिका… आई लव यू…
उसने मेरी तरफ देखा और बोली:- आई लव यू टू…

फिर हम एक:-दूसरे को चूमने लगे… मैंंने अपने होंठ उसके होंठ से मिला दिए, यह मेरा पहला अनुभव था, मुझे उसके नरम गरम होंठों का स्पर्श बहुत मुलायम लगा।
मैंं उसकी सांसों को महसूस कर रहा था… जो अब तेज हो चुकी थीं।

मैंं उसके सूट के ऊपर से उसके मम्मों को दबाने लगा। फिर मैंंने सूट की पीछे से जिप खोल दी… जिससे उसका कसा हुआ सूट ढीला हो गया और उसके गले में से मैंंने उसके मम्मों को अपने हाथों से स्पर्श किया और उन्हें दबाने लगा।

मैंं उसके निप्पलों को भी दबाने लगा… ये सब कुछ मेरे साथ और उसके साथ पहला अनुभव था… इसलिए हम दोनों बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गए थे।
ज्यादा लोग भी नहीं थे… कुछ जोड़े ही थे। पूरे थियेटर में… इसलिए कोई डर भी नहीं था।

मैंंने उसके एक मम्मे को उसके सूट से बाहर निकाला और उसे चूसने लगा, उसके मुँह से सिसकारी निकलने लगी।
फिर मैंं उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा… तो उसने मना कर दिया और बोली:- कोई आ जाएगा…

मैंंने उसे विश्वास दिलाया कि कोई नहीं आएगा… और वो मान गई, मैंंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी पैन्टी के अन्दर हाथ डाला।
जैसे ही मैंंने उसकी चुत को ऊपर से रगड़ा… मुझे बहुत ही गरम और गीला एहसास हुआ।
उसका पानी निकल चुका था।

फिर कुछ देर बाद ही फिल्म भी खत्म होने वाली थी… हम अपने कपड़े ठीक करने लगे। मैंंने उसके सूट की जिप लगाई और बाहर आ गए।
वो मुझसे नज़र नहीं मिला रही थी।

हमने खाना खाया और मैंंने उससे दूसरी फिल्म देखने का ऑफर किया और हम दूसरी फिल्म देखने गए। हमने फिर से वही सब किया… जो पहले किया था और उससे ज्यादा हम कुछ नहीं कर पाए।

फिर मैंंने उसे उसके घर पर छोड़ा और मैंं अपने घर आ गया। फिर हम फोन पर घंटों बात करने लगे। मुझे उससे बहुत लगाव हो गया था।

हम फोन पर सेक्स की बातें करने लगे और हमने कहीं अकेले मिलने का प्रोग्राम बनाया… जहा पर हमें किसी का डर ना हो… पर हमें कोई भी होटल में रूम नहीं मिला।

फिर मैंंने उससे एक दिन जल्दी आने को कहा और वो मेरे टाइम पर आई। उसने उस दिन ब्लू टॉप और ब्लैक जीन्स पहनी थी… बाल खुले हुए थे… वो आज बहुत सेक्सी लग रही थी। हमने गार्ड से छुप कर शॉप का लॉक खोला और दोनों अन्दर घुस गए।

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मैंंने शॉप को अन्दर से लॉक कर दिया और शॉप की लाइट ऑन नहीं की। फिर मैंं उससे शॉप में स्टोर रूम में ले गया। स्टोर रूम में काफ़ी स्पेस था। मैंंने उसे अपनी तरफ़ खींचा और अपने आप से चिपका लिया।

हम दोनों के होंठ आपस में मिल गए बारी:-बारी वो मेरे होंठों को चूसने लगी शायद मुझसे ज्यादा वो इस दिन का इंतजार कर रही थी। मैंं टॉप के ऊपर से ही उसके मम्मों को दबाने लगा। पीछे की गैलरी के गेट से कुछ रोशनी आ रही थी… जिससे हम एक:-दूसरे को देख सकते थे।

मैंंने उसका टॉप उतार दिया… उसने ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी। उस रोशनी में उसका गोरा बदन चमक रहा था। मैंं उसके मम्मों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा।

फिर उसके होंठों को छोड़ कर मैंं घुटनों पर बैठ कर उसके गोरे पेट को चूमने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मैंंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और वो नीचे गिर गई… उसके दोनों मम्मे मेरे सामने बिल्कुल नंगे हो गए थे जिन्हें वो अपने हाथों से छुपाने का असफल प्रयास करने लगी।

मैंंने उसके हाथों को हटाया और उसके मम्मों को मुँह में ले कर चूसने लगा। उसके मम्मे कड़क हो कर ऊपर की तरफ उठ रहे थे, निप्पल एकदम कठोर हो गए थे।

उसने मेरे सिर को पकड़ कर अपने मम्मों पर दबा लिया और मेरे बालों में हाथ घुमाने लगी। लगभग 5 मिनट तक मम्मों को चूसने के बाद मैंंने उसे जैकेटों के ढेर के ऊपर लेटाया और अपने बैग से तौलिया निकाल कर उसके नीचे बिछाया।

फिर मैंंने उसकी जीन्स उतार दी… आह्ह… इतनी गोरी जांघें मैंंने पहले कभी नहीं देखी थीं।
उसकी छोटी सी ब्लैक कलर की पैन्टी की डोरी को मैंंने खींचा… तो वो खुल कर पूरी ढीली हो गई, उसकी मखमली चुत पर एक भी बाल नहीं था। उसकी चुत भी काफ़ी फूली हुई थी… उसकी पैन्टी गीली हो गई थी।

मैंंने जल्दी से अपने भी सारे कपड़े उतार दिए और उससे अपना लंड चूसने को कहा… पर उसने मना कर दिया। टाइम भी कम था… इसलिए मैंंने ज्यादा फोर्स भी नहीं किया।
मैंं उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों को चूमने और चूसने लगा।

मैंं एक हाथ से उसके मम्मों को दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चुत सहला रहा था।
वो बहुत अधिक उत्तेज़ित हो गई थी… वो चुदासवश कहने लगी:- प्लीज़… जो भी करना है… जल्दी करो… नहीं तो कोई आ जाएगा।
मैंंने उससे कहा:- थोड़ा दर्द होगा… सहन कर लेना।

उसने ‘हाँ’ का इशारा किया… उसकी चुत से पानी निकल रहा था… जिससे वो चिकनी हो गई थी।
मैंंने अपनी एक उंगली उसकी चुत में डाली… तो उससे हल्का सा दर्द हुआ… जो उसके चेहरे पर दिख रहा था।
मैंंने अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और उसकी चुत पर रगड़ने लगा।

मैंंने उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया और चूसने लगा और आराम से लंड को चुत में घुसाने लगा। जैसे ही लंड का अगला हिस्सा अन्दर गया… उसने मेरे बालों को खींचना शुरू कर दिया और अपनी गर्दन इधर:-उधर करके अपने होंठों को छुड़ाने का प्रयास करने लगी।

मैंं वैसे ही लेटा रहा… जब वो कुछ नॉर्मल हुई… तो मैंं आराम से लंड अन्दर घुसड़ेने लगा।
अभी आधा लंड ही घुसा होगा कि उसकी आँखों से आसू आने लग गए।
मैंंने थोड़ा रुक कर एक ज़ोर का झटका मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया। मेरे लंड में बहुत तेज जलन होने लगी।

उसने मेरे बाल खींच कर मुझे अपने होंठों से अलग किया और चिल्लाने लगी:- बाहर निकालो… इससे बहुत दर्द हो रहा है…
मैंंने उसके मुँह पर हाथ रखा और उसके मम्मों को दबाने लगा।
जब वो कुछ नॉर्मल हो गई… तो मैंंने हल्के:-हल्के झटके लगाने शुरु किए।
दर्द तो मुझे भी हो रहा था… पर तभी मुझे याद आया कि अनाड़ी आदमी… चुत का सत्यानास… इसलिए मैंंने झटके लगाने चालू रखे।

कुछ ही पलों बाद वो अब नॉर्मल लग रही थी, उसने अपने पैरों को थोड़ा फैला लिया था… अब उससे भी मज़ा आ रहा था।
मैंंने अपनी रफ़्तार थोड़ी तेज कर दी और 40:-45 झटकों के बाद मैंंने अपना सारा पानी उसकी चुत में छोड़ दिया।
इसी के साथ रितिका ने भी मुझे कस कर पकड़ लिया और उसका पानी भी निकल गया।

लगभग 2 ही मिनट बाद मैंं उठा और देखा कि रितिका की चुत में से मेरा वीर्य और खून मिला हुआ निकल रहा था, उससे उठा नहीं जा रहा था, मैंंने सहारा देकर उससे उठाया और ब्लड देख कर वो थोड़ा घबरा गई।

मैंंने उससे समझाया:- तुमने पहली बार किया है ना… इसलिए निकला है… अब कभी नहीं निकलेगा।

मैंंने तौलिया से उसे साफ किया और उससे कपड़े पहना कर स्टूल पर बिठाया। फिर मैंंने अपने कपड़े पहने।
उससे सही से चला नहीं जा रहा था।

मैंंने उसे कैश काउंटर पर बिठाया और शॉप का लॉक खोला… लाइट जलाई। जैसे ही मैंंने लाइट जलाई… एक गार्ड ने मुझे देख लिया। उससे 500 का नोट देकर मैंंने मुँह बंद रखने को कहा और वो मान गया।
उस दिन के बाद रितिका अगले दिन तक नॉर्मल हो गई… इसके बाद हमने बहुत बार सेक्स किया पर होटल में…

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