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बारिश के मौसम में मस्त चूत की चुदाई

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एक ही बिस्तर पर मैं और वो मेरी अनजान दोस्त लेट गए थे पर जब तक उसकी सहमति न हो तब तक मुझे कुछ भी करने से डर लग रहा था.
तभी उसने मुझसे अपने मन की बात कह दी.

मैं उसके दिल की बात समझ गया कि वो आज रात यहाँ क्यों रुकी.

मैंने उसे कसकर गले से लगा लिया मानो वो मुझसे कहीं दूर ना चली जाए. मैं कोई जल्दबाजी करके मजा खराब नहीं करना चाहता था. मैं उसके बदन पर हाथ फिरा रहा था और उसके हर अंग को टटोल रहा था.

वो मुझे अपने अन्दर समा लेना चाहती थी. धीरे-धीरे उसकी एक टाँग मेरे ऊपर आती जा रही थी. फिर मैं उसके ऊपर आ गया और उसके हाथों को अपने हाथों से दबा लिया.
मैं उसको चूमने लगा,, मगर मैंने उसे सीधे होंठों पर किस नहीं किया. मैंने पहले उसके माथे को,, फिर उसके गालों को,, फिर गर्दन और उसकी छाती को चूमते हुए उसके दोनों चूचों,, उसके पेट,, नाभि,, दोनों हाथों,, फिर उसके वस्ति स्थल… जंघाओं,, घुटनों और पैरों को चूमा.
फिर इसी क्रम को नीचे से ऊपर की ओर दोहराया.
जब मैं उसकी योनि के पास से निकला था,, तो मुझे उसमें से अजीब सी खुश्बू आ रही थी.

वो उत्तेजित हो रही थी। ऊपर पहुँचते ही उसने मेरे होंठों को बुरी तरह से चूमना शुरू कर दिया.
मैं उसके चूचों को मसलने लगा.

चूँकि ये मेरा पहली बार था तो मैं बुरी तरह से काँप रहा था,, पर वो बिल्कुल सहज लग रही थी,, शायद वो पहले भी ये सब कर चुकी थी.
उसने मेरी शर्ट के बटन खोल लिए थे और मेरी छाती पर हाथ फिरा रही थी.

फिर उसने मुझे हटाया और हाँफते हुए कहा- सिर्फ चूमोगे ही या और भी कुछ करोगे.
मैं बिना उसकी मर्जी के कोई जबरदस्ती नहीं करना चाहता था ताकि उसे बाद में कोई पछतावा ना हो,, इसलिए उसके इतना कहते ही मैंने पहले उसके होंठों की एक चुम्मी ली और अपनी शर्ट उतार कर उसके चूचे मसलने लगा,, उसे जगह-जगह चूमने लगा.
उसकी सांसें तेज होती जा रही थीं. फिर मैंने उसका टॉप उतारा. उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी,, जिसे देख कर मेरा मन ललचा गया और मैंने उसकी पैंट भी उतार दी.
उसने पैंटी भी काले रंग की ही पहनी हुई थी,, जिसमें वो बेहद खूबसूरत लग रही थी,, जिसे मैं बयां भी नहीं कर सकता.
मैं उसके मम्मों को ऊपर से ही चूसने और मसलने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं.
मैंने उसकी नाभि को चूमा और उसके नंगे बदन पर अपनी जीभ फिराने लगा। फिर उसकी जांघों को चूमा और चाटा.

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अब मैं उसकी चुत को पैंटी के ऊपर से ही चूमने लगा.
उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। उसके मुँह से ‘आहह उहह वाहहहहह आहहहह’ जैसी आवाजें निकल रही थीं.

उसने मेरा मुँह अपनी टाँगों में दबा लिया और अपने हाथ से मेरा सिर अपनी चुत पर दबाने लगी.
मैं उसे इसी तरह तड़फाना चाहता था,, जिसमें मुझे बहुत मजा़ भी आ रहा था मगर मेरा सिर उसने इतनी जोर से दबाया हुआ था कि मेरा दम घुटने लगा और मुझे हटना पड़ा.
मैं फिर उसके होंठों को चूमने लगा. पाँच मिनट बाद उसने मुझे हटाकर मेरी पैंट खोल दी और मेरे सारे कपड़े उतारने लगी.

वो मेरे कपड़े उतारने के साथ-साथ मेरे बदन को चूमती भी जा रही थी जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
मेरे लिंग को देख कर वो मुस्कुराई और
उसे बड़े प्यार से चूमा और बोली- सो

गुड,, बहुत मोटा है तुम्हारा,

वो उसे अपने होंठों पर पटकने लगी.

आगे की कहानी पेज 2 पर

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