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चोद पाओ तो मेरी चूत तुम्हारी

Chut chudai ki kahani, hindi sex stories, antarvasna sex kahani, desi kahani, ki chudai story, friends , मै आपकी प्यारी चुदक्कड़ जुली. एक बार फिर अपनी सेक्सी वाले प्यार की दास्तान लेकर प्रस्तुत हुई हूँ.
आप लोगों ने जो मेरी सभी चुदाइयों की कहानियों को सराहा उसके लिए मै झुक कर नमन करती हूँ. आशा है आप यों ही मेरी चूत और चुदाई की सराहना करते रहेंगे.
मैने कुछ दिनों पहले ही जिम ज्वाइन किया था, मेरा ट्रेनर दीपक बहुत ही गठीला और तंदरुस्त है. शुरू में तो उसने मुझे सिर्फ कार्डिओ ही करवाया जिसमें बहुत मज़ा आ रहा था, पर धीरे धीरे अब वो मुझसे डम्बेल भी उठवाने लगा जिससे मै बहुत थक जाती.
अब चूंकि कसरत करते थे अंग से अंग मिलना तो लाज़मी था और एक दूसरे के प्रति थोड़ी बहुत भावनाओं का जागृत होना ही बनता ही है.
अब चूंकि वो लड़का है, उसका खड़ा होता है और लड़के तो चूत चोदने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते फ़िर लड़की से चिपकना तो कौन से खेत की मूली थी.
अब मुझे तो एक्सरसाइज करनी थी, चाहे जैसे करवाए, मै कहाँ कुछ कर सकती थी और फिर इन चीज़ों में मुझे भी मज़ा आता है.
एक दिन उसने मुझे थाईज़ लगवा दी. अब उसके बाद तो जैसे मेरे टांगो और गाण्ड की बैंड बज चुकी थी, अब तो न उठा जाये ना चला जाये. दर्द इतना हो रहा था कि ठीक से चला भी नहीं जा रहा था.
मैने दीपक को कहा:- तुम मुझे घर छोड़ दो.
दीपक मुझे जैसे तैसे बाइक पे बिठा के घर ले आया. घर पर कोई नहीं था इसलिए मैने दीपक से रिक्वेस्ट की कि मेरी मालिश कर दे. शायद थोड़ा दर्द कम हो जाये और मै ठीक से कम से कम चल तो पाऊँ.

दीपक ने मुझे औंधे लिटा दिया और मेरे पैरो की नसों को दबाने लगा. बीच बीच में उसके हाथ घुटनों के ऊपर मेरी कोमल जाँघों पर भी आते रहते थे, मुझे भी हल्का महसूस हो रहा था.
करीब पंद्रह मिनट तक टांगों की मालिश के बाद मुझे थोड़ी राहत मिली पर दर्द अभी भी बहुत था.
मैने दीपक से कहा:- दर्द हल्का कम है पर अब भी इतना ज्यादा है कि मुझे चला नहीं जायेगा.
दीपक बोला:- अगर सरसों के तेल से मालिश हो तो दर्द बहुत हद तक कम हो.
मैने दीपक से कहा:- गैस चूल्हे के पास सरसों के तेल की बोतल रखी है, ले आओ.
दीपक तेल ले आया, बोला:- कपडे के ऊपर लगाऊँ?
मैने कहा:- ठीक है, लोअर निकाल दो.
दीपक ने धीरे अपने हाथ मेरे गाण्ड की तरफ बढ़ाये और फिर लोअर पकड़ कर मेरी जाँघों से होता हुआ मेरे पैरों से निकाल दिया.
जब उसने मेरी लोअर निकलनी शुरू की थी तभी लोअर की आड़ लेकर मेरी पैंटी भी थोड़ी नीचे कर दी जिससे मेरी पैंटी मेरी कमर के बजाय मेरे गाण्ड की दरार पे आ गई थी.
दीपक ने तेल लिया और ज़ोर से मेरी जांघों से पैरों तक की मालिश करने लगा और साथ ही साथ बीच बीच में उनको दबाने का पूर्ण आनन्द ले रहा था, मुझे भी अच्छा लग रहा था इसलिए मैने भी विरोध नहीं जताया.
धीरे धीरे उसके हाथ मेरे चूतड़ों पर आ गए और चढ़ाई करने लगे. कभी उनको ज़ोर से दबा के मसलने लगता तो कभी सीधा ऊपर से नीचे छलांग लगाने लगता. मैने भी इशारा समझने की देर किये बिना उसका हाथ पकड़ा और उसका हाथ मेरी पैंटी में घुसा दिया.

संकेत साफ़ था कि ‘चोद सको तो चूत तुम्हारी.’
मैने जहाँ उसका एक हाथ घुसाया उसने दूसरा खुद घुसा लिया और दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को मसलने लगा, बड़ी राहत महसूस हो रही थी. ऐसा लग रहा था मानो दर्द धीरे धीरे शरीर से निकलता जा रहा हो.
कुछ ही पलों में मेरी पैंटी को भी मेरा साथ छोड़ना पड़ा क्यूंकि अब दीपक का मूड बन रहा था और मैने तो पहले ही हरी झंडी दे दी थी.
दीपक ने जैसे ही मेरी पैंटी निकाली, मैने दीपक से साफ़ साफ़ कह दिया:- जो तुम्हारी इच्छा हो, कर लो क्यूंकि मुझसे तो तो कुछ नहीं किया जायेगा.
दीपक ने भी हाँ से कहकर आगे बढ़ा दी. अब प्यासे को कुआं मिल गया तो फिर कितना पानी मिलेगा इससे उसे क्या फर्क पड़ना था, यही हाल दीपक का था.
दीपक अपनी ऊँगली में तेल लगाकर मेरी गाण्ड की दरार में रगड़ने लगा और कुछ ही पलों के भीतर ये उँगलियाँ मेरी गाण्ड के अन्दर थी.
थोड़ी देर तक मेरी गाण्ड में ऊँगली करने के बाद दीपक ने मेरे बिस्तर से दो तीन तकिये मेरे कमर के नीचे रख दिए जिसे मेरे चूतड़ ऊपर उठ गए. दीपक ने फटाफट अपनी पैंट और चड्डी उतारी और फिर मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और धीरे धीरे मेरी गाण्ड में दीपक का लंड घुस रहा था, मुझे थोड़ा सा भी दर्द नहीं हो रहा था क्यूंकि जो दर्द मुझे जिम के बाद हो रहा था, यह उसके मुकाबले सहनीय था.

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धीरे धीरे दीपक अपने लण्ड के टोपे का बड़ा भाग़ जो टोपे के आखिरी सिरे होता है, मेरे अंदर जाने लगा. उसका आधा लंड लंड मेरी गाण्ड के अंदर जा चुका था और वो धीरे धीरे पीछे का अपना मोटा लम्बा लण्ड भी मेरी गाण्ड में घुसाता जा रहा था.
और अब मुझे थोड़ा थोड़ा दर्द हुआ, अब मुझे दोनों दर्दों का एहसास अच्छे से हो था और धीरे धीरे मालिश का असर कम हो रहा था,
मै दर्द से चीखने लगी:- आअह्ह. ह्ह्ह. अह. ऊऊह. ऊओह्ह्ह. ह्ह.
थोड़ी देर में उसने धीरे धीरे अपना लण्ड बाहर की तरफ खींचा और आधा बाहर आते ही फिर से अंदर घुसा दिया और फिर उसने मेरी गाण्ड में लण्ड को तेजी से घुसा लिया दिया और फिर धक्कमपेल:-अन्दर बाहर गाण्ड चुदाई का खेल शुरू हो गया, कभी लंड अंदर तो कभी बाहर, कभी मेरी सांस अंदर और लंड बाहर तो कभी मेरी सांस बाहर और लंड अंदर, यह खेल यूँ ही चलता रहा और करीब 15 मिनट तक तो मुझे बहुत ज्यादा दर्द हुआ पर धीरे धीरे दर्द कम और मज़ा ज्यादा आने लगा और धीरे धीरे दर्द कम होने लगा, शिथिल शरीर में हरकत होने लगी, बदन में जान आने लगी.
थोड़ी देर तक लंड को विराम देने के बाद दीपक फिर हरकत में आ गया और इस बार मुझे भी हल्की सी गर्मी आ गई थी इसलिए मैने अपने चूतड़ और ऊपर उठा लिए.
दीपक तुरंत नीचे झुका और और मेरे कूल्हे को किसी सेब के भांति अपने मुँह में भर लिया और काटने लगा, कभी ऊपर तो कभी नीचे कभी दाएँ तो कभी बाएँ.
यह कहानी आप रियल कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं .
यह बिलकुल ठीक वैसे ही प्रतीत हो रहा था जैसे जब आपको सर में बहुत दर्द हो और आपका कोई मसाज कर दे.

मेरी बदन में दर्द और कम हो गया.
थोड़ी देर बाद दीपक फिर हरकत में आया. उसके छपाक से अपना लंड मेरी गाण्ड के गोल पोस्ट दे मारा और फिर लपालप मेरी गाण्ड बजाता रहा और मै दर्द से राहत भरी आहें भरती रही.
जब दोनों चुदाई से थक गए तो वहीं लेट गए. दीपक की इच्छा तो चूत बजाने की भी थी, पर मैने किसी और दिन का बहाना मार टाल दिया.
भला चूत इतनी आसानी से थोड़े ने दूंगी.

 

इस भाग में इतना ही. अगले भाग में मै आपको बताऊँगी कि कैसे दीपक को मेरी चूत चोदने का मौका मिला और उसके लिए क्या पापड़ बेलने पड़े.
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, जरूर बताना .
आपकी इकलौती प्यारी चुदक्कड़ जुली

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