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तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-2

मेरे पास उसे गोद में उठाने का सुनहरा अवसर था. मैने उसे गोद में उठा लिया. उसे भला क्या ऐतराज़ हो सकता था. 
इस कहानी के अन्य भाग

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-1
तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-2
तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-3
तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-4
तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-5
तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-6
तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-7
तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-8 [last]

उसके पैर में तो चोट लगी थी और वो अपने पैरों से चल कर तो नीचे नहीं जा सकती थी. मैं उसे गोद में उठाये सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा. उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी और अपनी आँखें बंद करके मेरे सीने पर अपना सिर रख दिया. उसके छोटे-छोटे नींबू मेरे सीने से लगे थे.

 मैं तो जैसे निहाल ही हो गया. मोना को बेड-रूम में छोड़ कर मैं ऊपर आ गया. मेरा पप्पू तो पैन्ट में धमा-चौकड़ी मचा रहा था. अब मेरे पास मुठ मारने के अलावा और क्या रास्ता बचा था. मैने बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया !! और ????
दोस्तों मोना और मेरा यह पहला किस्स था. आप सोच रहे होंगे इस किस्स लेने में क्या मजा आया होगा. क्या नैतिक और सामाजिक रूप से मुझ जैसे पढ़े लिखे और शरीफ समझे जाने वाले व्यक्ति के लिए ऐसा करना ठीक था,? मैने क्या गलत किया है मैने तो एक चतुर भंवरे की तरह एक कच्ची-कलि का रस उसे बिना कोई नुक्सान पहुंचाए पी लिया था. मैने उसकी कोमल भावनाओं से बिना खिलवाड़ किये एक किस्स ही तो लिया है? इसमें इतना हो हल्ला मचाने की क्या जरूरत है. आप शायद अभी मेरी इन बातों को नहीं समझेंगे.

दूसरा किस्स :-
बाथरूम के बाहर खड़ा मैं आज से कोई चार साल पहले घटी उस घटना के बारे में सोच ही रहा था,कि मोना की आवाज मेरे कानों के बिलकुल पास में गूंजी.
‘फूफाजी कहाँ खोये हुए हो ?’ मोना शरारत भरी मुस्कान के साथ मुझे देख रही थी.
मैने उसके हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए कहा ‘क्यों आज पप्पी नहीं देनी ?’
वो शर्म से लाल हो गई और मैं रोमांच से लबालब भर गया. मैं उसके गालों पर एक चिकोटी काटी और उसे अपनी ओर खींचने लगा. वो कुनमुनाती हुई सी बोली, ‘हटो अब मैं बड़ी हो गई हूँ !’
‘अरे ! कहाँ से बड़ी हो गई हो, हम भी तो देखे !’ मैने भी शरारत भरे लहजे में कहा.
‘वो ! वो,,, . ओह ! मुझे नहीं पता !’ अब तो उसके चेहरे की लाली देखने लायक थी. शर्म से पुरखुमार आँखें नीची झुकी हुई थी. मुझे पूरा यकीन हो गया वो चार साल पुरानी बात को भूली नहीं है.
‘तो किसे पता होगा ?’ मैने पूछा.
‘माँ ऐसा कहती हैं.’

‘अरे माँ को क्या पता ! तुम तो मेरे लिए अभी भी वो ही छोटी सी मुनिया हो.’ मैने उसकी ठुड्डी को ऊपर उठते हुए कहा. उसकी आंखें बंद थी. मैने बड़े प्यार से एक किस्स उसके गालों पर ले ही लिया.
मेरी आँखें उसकी छोटी छोटी गोलाईयों पर थी जो अब नींबू से बढ़कर अमरुद बन रहे थे. आगे से तीखे नुकीले, जैसे पेंसिल की टिप. उसके मोटे मोटे होंठ तो सुर्ख लाल थे. जीन में कसे हुए उसके नितम्ब ऐसे लग रहे थे मानो दो छोटे छोटे खरबूजे हो उनके बीच की गहरी दरार साफ़ नजर आ रही थी.
गुरूजी कहते हैं किसी जवान लड़की या औरत की बुर या चुत का अंदाजा उसके होंठो को देख कर लगाया जा सकता है. इस हिसाब से तो उसके निचले होंठ भी अब क़यामत बन गए होंगे. या अल्लाह,,, . !! क्या मैं कभी उनको देख पाऊंगा और,,, . और,,, . खैर ये तो अन्दर की नहीं बाद की बात है.
मोना हाल में चली गई और मैं बाथरूम में उसकी वोही पुरानी खुशबू लेने अन्दर चला गया. मेरे नथुनों में उसके जवान होते जिस्म की खुशबू भर गई. मैं कोई चार-पाँच मिनट तक आँखें बंद किये पुरानी यादों और नए किस्स के ख्यालों में खोया रहा. मैं सोच रहा था,कि इस क़यामत को कैसे पटाया जाए. मुझे कुछ कुछ अंदाजा तो हो ही गया था,कि वो हमारे पहले किस्स को नहीं भूली है. मैं भी कितना गाडूँ हूँ इतने दिनों तक मुझे यह ख़याल ही नहीं आया कि माधवी डार्लिंग अब इतनी बड़ी और रस भरी हो गई है.
18 साल में ही वो इतनी गदरा जायेगी मुझे अंदाजा नहीं था. मैं शर्त लगा सकता हूँ कि अगर वो अपने होंठों पर लाल रंग की लिपस्टिक लगा ले तो ऐसा लगेगा जैसे वो किसी का खून पीकर आई हो. उसके सुन्दर अमृत कलश हालांकि अभी छोटे ही है पर बिजलियाँ गिराने के लिए काफी हैं. अब ये नींबू की जगह अमरूदों के आकार के तो हो ही गए हैं. उसकी बिल्लौरी आँखें तो ऐसी हैं जैसे नशे में पुरखुमार मस्त हिरणी हो. आप अंदाजा लगा सकते हैं उसकी पिक्की बुर बनने के लिए तड़प रही होगी. अब तो उसने रस बनाना भी शुरू कर दिया होगा. जिस तरह से मेरे किस्स लेने के बाद वो शरमाई थी मुझे पूरा यकीन है की उसका किसी हम उम्र सहेली या मैडम के साथ जरूर कोई चक्कर होगा. और अगर ऐसा है तो मेरे लिए तो ये और भी ख़ुशी की बात होगी कि मेरा प्यार वो जल्दी ही स्वीकार कर लेगी.

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आप सोच रहे होंगे क्या बकवास लगा रखी है. क्या सिर फिरी बातें कर रहा हूँ. भला इस उम्र में सेक्स की इतनी समझ आ जाती है. तो दोस्तों सुनो हमारे गुरूजी कहते हैं कि लड़की जब रजस्वला होने लग जाती है और उसकी पिक्की बुर बन जाती है यानि कि उसकी भोस पर बाल आने शुरू हो जाते हैं तो वो सम्भोग के लिए तैयार हो जाती है. ये दोनों चीजें ही उसके सम्भोग के लिए तैयार होने की निशानी हैं.
और मोना तो 18 साल की हो गई है. मोना के बारे में मुझे बाद में पता चला कि वो अपने माँ पापा को कई बार सेक्स करते और चूसा चुसाई करते देख चुकी है और सेक्स के बारे में उसने अपनी सहेलियों से भी बहुत कुछ जानकारियां ले रखी हैं. अकेले में कई बार उसने हस्त मैथुन तो नहीं किया पर अपनी पिक्की से छेड़खानी और छोटी मोटी चुहलबाजी जरूर की है. पर ये सब बातें अभी नहीं.
उस दिन रविवार था,मुझे ऑफिस नहीं जाना था. बस मैं तो कोई न कोई बहाना बना कर अपनी मोना के पास बना रहना चाहता था. सभी ने चाय पी और नहाने की तैयारी करने लगे. रमेश और शितल गेस्टरूम से लगे बाथरूम में चले गए. मैने जानबूझकर मोना को अपने बेडरूम से लगे बाथरूम में जाने को कहा. वो अदा से अपने कूल्हे मटकाती हुई बाथरूम चली गई. मैं तो बस उसके ख्यालों में ही खोया रह गया. वो कैसे अपनी पेंटी उतारेगी ! उसकी कच्छी गुलाबी रंग की होगी या फिर काले रंग की? उसने ब्रा पहन रखी होगी या अभी शमीज से ही काम चला रही है !
अरे यार ! छोड़ो इन फजूल बातों को !
मैं तो बस यही सोच रहा था,कि उसकी पिक्की (नहीं बुर नहीं भोस नहीं पुस्सी) कैसी होगी. काश मैं कोई भंवरा होता या कम से कम छिपकली ही होता तो बाथरूम में छुप कर बैठ जाता और अपनी इस नन्ही कली को जी भर कर नंगे नहाते और मूतते हुए देख सकता.

बाथरूम के अन्दर से शावर चलने की आवाज और मोना के इंग्लिश गाने की मिलीजुली आवाज मुझे मदहोश कर रही थी. मेरा पप्पू तो छलांगें लगाने लगा था. कोई आधे घंटे के बाद मोना बाथरूम से निकली. उफ्फ्फ,,, .!
भीगे बाल और उनसे टपकती हुई शबनम जैसी पानी की बूँदें, टांगो से चिपकी लाल सलेक्स और ऊपर ढीली सी शर्ट. पता नहीं उसने पेंटी और ब्रा जानबूझ कर नहीं डाली या कोई और बात थी. सलेक्स इतनी टाइट थी कि उसकी योनि का भूगोल और इतिहास साफ़ नजर आ रहा था. चुत का चीरा तीन इंच से कम तो क्या होगा. मेरा पप्पू तो मस्त हिरण की तरह कुलांचें भरने लगा. उसके बदन से आती मस्त खुश्बू से मैं तो मदहोश सा हो गया.
इस से पहले कि कोई मेरी हालत देख कर कोई अंदाजा लगाए, मैं बाथरूम में घुस गया. सबसे पहले मैने उसकी पेंटी को ढूंढा. एक कोने में किसी मरी हुई चिड़िया की तरह मुझे उसकी नीली पेंटी और ब्रा मिल गए. मैने उसकी पेंटी को उठाया और गौर से देखा. योनि-छिद्र वाली जगह कुछ गीली थी और उस पर सफ़ेद लार जैसा कुछ लगा हुआ था. शायद ये उसका योनि-रस था. मैने उसे नाक के पास लगा कर सूंघा. ईईईईइस्स्श,,, .!! इतनी मादक, तीखी, खट्टी, कोरी पुस्सी की महक मेरे तन मन को अन्दर तक भिगो गई. मैने उस पर अपनी जीभ लगा दी.
आईला,,, .! क्या खट्टा, मीठा, नमकीन, कच्चे नारियल जैसा स्वाद था. मैने उसकी पेंटी और ब्रा को एक बार और सूंघा और फिर उसकी पेंटी को अपने 7″ के पत्थर की तरह अकड़े पप्पू के चारों और लिपटा कर शीशे में देखा. पप्पू तो अड़ियल टट्टू ही बन गया था,जैसे मार खाए बिना आज नहीं मानेगा. जी तो कर रहा था,कि एक बार मुठ मार लूँ. पर मैं तो अपना प्रेम रस आज रात के लिए बचा कर रखना चाहता था. मैने उसकी पेंटी को अपनी पेंट की जेब में रख लिया अपने प्यार की निशानी मानकर.

जब मैं फ्रेश होकर बाहर आया तो सभी मेरा खाने की मेज़ पर इंतजार कर रहे थे. नाश्ता करने के बाद रमेश मार्केट और मधु और शितल हमारे बेडरूम में गप्प लगाने चली गई. मैं और मोना अब दोनों अकेले रह गए. जैसे ही मधु और शितल गई मोना झट से उठ कर मेरे पास सोफे पर बैठ गई और मेरी आँखों में झांकते हुए बोली,’जिज्जू ! क्या आप मुझे कंप्यूटर सिखा सकते हो ?’
जिज्जू,,, ,,, .. ? आप चौंक गए ना !
ओह,,, .!
मैं बताना ही भूल गया ! मोना जब मुझे फूफाजी बुलाती तो मुझे लगता कि मैं कुछ बूढ़ा हो गया हूँ. मैं अपने आप को बूढा नहीं कहलवाना चाहता था,तो हमारे बीच ये तय हुआ घरवालों के सामने वो मुझे फूफाजी कह सकती है पर अकेले में या घर के बाहर जीजाजी कहकर बुलाएगी.
‘ओह,,, . येस,,, .येस,,, .! हाँ हाँ ! क्यों नहीं !’ मैं हकलाता हुआ सा बोला क्योंकि मेरी निगाहें तो उसके स्तनों पर थी. पतले शर्ट में उसके बूब्स की छोटी छोटी घुन्डियाँ चने के दाने की तरह साफ़ नजर आ रही थी.
‘चलो स्टडी-रूम में चलते हैं !’ मैं उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे स्टडी-रूम की ओर ले जाने लगा.
उसकी लम्बाई मेरे कन्धों से थोड़ी ही ऊपर थी. उसके नाजुक बदन की कुंवारी खुशबू और चिकना स्पर्श मुझे मदहोश किये जा रहा था. मैं तो उसके साथ चूमने चिपटने का कोई न कोई बहाना ढूंढ़ ही रहा था. उसे भी कोई परवाह नहीं थी. इस उम्र में इन बातों की परवाह वैसे भी नहीं की जाती. मैं तो बस किसी तरह उसे चोदना चाहता था. पर ये इतना जल्दी कहाँ संभव था. खैर मुझे भी कोई जल्दी नहीं थी.

मेरे मस्तिष्क में कई योजनाएँ घूम रही थी. एक प्लान तो मैं काफी देर से सोच रहा था. मोना को कोल्ड ड्रिंक्स और फ़्रूटी पीने का बहुत शौक है उसमें नींद की गोलियाँ डाल दी जाएँ और रात में ? पर घर में इतने सब मेहमानों के होते यह प्लान थोड़ा मुश्किल था. काश कुछ ऐसा हो कि मैं और सिर्फ मेरी प्यारी मोना डार्लिंग अकेले हों, हमें डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं हो. काश किसी टापू या महल में हम दोनों अकेले हों और नंगधड़ंग बिना रोकटोक घूमते रहें. काश इस शहर में कोई जलजला या तूफ़ान ही आ जाए सब कुछ उजड़ जाए और बस हम दोनों ही अकेले रह जाए,,, . ओह्ह्ह्ह्,,, . पर यह कहाँ संभव है ,,, .!
खैर कोई न कोई रास्ता तो भगवान् जरूर निकालेगा.
मैं मोना को अपनी बाहों में लिए स्टडी रूम में आ गया जिसमे मैने कंप्यूटर, प्रिंटर और अपनी बहुत सी फाइल्स और पुस्तकें रखी हुई हैं. स्टडी-रूम में सामने की दीवार पर एक सीनरी लगी है जिसमें एक तेरह-चौदह साल की बिल्लौरी आँखों वाली लड़की तितली पकड़ रही है, बिलकुल मोना जैसी.
मोना ने गौर से पेंटिंग को देखा पर कोई कमेन्ट नहीं किया. मैने उसे कन्धों से पकड़ते हुए अपने साथ वाली कुर्सी पर इस तरीके से बैठाया कि मेरे हाथ उसके उरोजों को छू गए.

वाह ! क्या मस्त चिकना अहसास था,!
स्टडी-रूम में आने के बाद मैने उसे कंप्यूटर के बारे में बताना शुरू किया. वो थोड़ा-बहुत कंप्यूटर के बारे में पहले से जानती थी. सबसे पहले उसे कंप्यूटर चालू करने ओपरेट करने और बंद करने के बारे में बताया. जब स्क्रीन ऑन हुई तो पासवर्ड डालना बताया. मैने उसे ये पासवर्ड याद रखने के लिए बोला ताकि जब वो इस पर प्रेक्टिस करे तो कोई परेशानी न हो. वो सारी बातें एक कागज़ पर लिखती जा रही थी. फिर मैने उसे इन्टरनेट और ई-मेल आदि के बारे में भी बताया. फाइल्स खोलना और देखना भी उसे समझाया. हमें कोई एक घण्टा तो इस चक्कर में लग ही गया.
ऐसा नहीं है कि मैं उसे सिर्फ कंप्यूटर ही समझा रहा था. मैने तो उसके हाथ, गाल, कंधे, होंठ, सिर के बाल और बूब्स को छूने और दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ा. कई बार तो मैने उसकी जाँघों पर भी हाथ साफ़ किया, वो कुछ नहीं बोली. एक दो बार तो मैने उसके गालों पर प्यार भरी चपत भी लगा दी. मेरे लतीफों से तो वो हंसते हंसते उछल ही पड़ती थी.
एक बार जब उसने अपना एक हाथ ऊपर किया तो उसकी ढीले शर्ट के अन्दर कांख में उगे छोटे छोटे सुनहरे रेशम से रोएँ नजर आ ही गए. हे भगवान् ! उसकी बुर पर भी ऐसी ही सुनहरी केशर-क्यारी बन गई होगी. उसकी थोड़ी खुली और ढीली शर्ट में कैद छोटे छोटे चीकू ? अमरुद? संतरे ? मुझे नजर आ ही गए. उनके उपर मूंग के दाने जितने चूचुक और अट्ठन्नी के आकार का गुलाबी रंग का एरोला.
मेरी आँखें तो फटी की फटी ही रह गई.
मेरा पप्पू तो अब पैन्ट के अन्दर घमासान मचाने पर तुला हुआ था. मुझे लगा कि आज ये मार खाए बिना नहीं मानेगा. मैने जल्दी से एक किताब अपनी गोद में रख ली. एक दो बार तो मैने उसकी जांघों पर हाथ रखने के बहाने उसकी पुस्सी को भी टच कर दिया. पता नहीं वो मेरे मन के अन्दर की बात जानती होगी या नहीं ? हाँ मैने देखा कि उसकी पिक्की के सामने वाला हिस्सा कुछ फूल सा गया है और पिक्की के छेद वाली जगह एक रुपये के सिक्के जितनी जगह गीली हो गई है.
हमें कंप्यूटर पर बैठे हुए डेढ़ दो घंटे तो हो ही गए थे. मैं भी निरा बेवकूफ हूँ इस डेढ़ दो घंटे में मतलब की बात तो भूल ही गया. अचानक मेरे दिमाग में एक प्लान घूम गया और मेरी आँखें तो नए प्लान के बारे में सोच कर चमक ही उठी.
आप जानते होंगे कि अगर किसी चीज को देखने या जानने के लिए मना किया जाए तो उस चीज के प्रति उत्सुकता ज्यादा बढ़ जाती है, ख़ास कर छोटे बच्चों में. और मोना भले ही मेरी नजरों में जवान मस्त प्रेमिका हो लेकिन थी तो अभी बच्ची ही. मैने कुछ हिरोइनों की नंगी फोटो, पिक्चर, फिल्म्स और रियलकहानी.कॉम की कहानियाँ एक फोल्डर में सेव कर रखी हैं. इस से अच्छा मौका और क्या हो सकता था,मैने बातो बातों में उस फोल्डर और फाइल्स का पासवर्ड हटा दिया. अब मैने मोना से कहा- तुम इस फोल्डर को मत खोलना !
‘क्यों ऐसा क्या है इसमें ?’ मोना ने हैरानी से पूछा.

‘अरे, इसमें डरावनी फोटो हैं, तुम डर जाओगी !’

‘क्या जंगली छिपकलियाँ हैं ?’

मैं जानता था,उसे छिपकलियों से बहुत डर लगता है.
मैने कहा,’हाँ हाँ ! ना ! असली छिपकलियाँ नहीं, पर वैसी ही है !’
मैं अपने मकसद में कामयाब हो चुका था. मैने कंप्यूटर ऑफ करते समय कनखियों से देखा था,कि मोना ने पेंसिल से फोल्डर का नाम नोट कर लिया है. हे भगवान् ! तेरा लाख लाख शुक्र है. मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा अब मंजिल नजदीक आ गई है.

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