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तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-3

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इस कहानी के अन्य भाग

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-1

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-2

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-3

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-4

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-5

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-6

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-7

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-8 [last]

शाम के चार बज चुके थे. मधु ने कहा मोना को बाजार घुमा लाओ. मैं और मोना बाजार जाने की तैयारी करने लगे. मुझे तो क्या तैयारी करनी थी मोना ने जरूर अपने कपड़े बदल लिए. हलके पिस्ता रंग की टी-शर्ट और सफ़ेद जीन मेरे कत्ल का पूरा इंतजाम किया था,उसने. आप तो जानते है जीन पहने गोल गोल कूल्हे मटकाती लड़कियां मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है.

हम लोग मोटरसाइकल पर बाजार के लिए निकल पड़े. मैने उसे यहाँ का किला, गणेशस्थान मंदिर और लोहागढ़ फोर्ट आदि दिखाया. हमने एक रेस्तरां में पिज्जा और मटके वाली कुल्फी भी खाई. कुल्फी खाते हुए मैने उसे मजाक में कहा कि इसे पूरा मुंह में लेकर चूसो बहुत मजा आएगा. मैं तो बस ये देखना चाहता था,कि उसे अंगूठे के अलावा भी कुछ चूसना आता है या नहीं. एक स्टाल पर हमने गोलगप्पे भी खाए. गोलगप्पों का साइज़ थोड़ा बड़ा था. जिस अंदाज में पूरा मुंह खोलकर वो गोलगप्पे खा रही थी मैं तो बस यही अंदाजा लगा रहा था,कि अगर मेरा डेढ़ इंच मोटा लण्ड ये मुंह में ले ले तो कोई परेशानी नहीं होगी.

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आते समय हमने चॉकलेट के चार-पाँच पैकेट, चुइंगम के दो पैकेट, वीडियो गेम्स की सीडी, 2 कॉमिक्स, एक रिस्ट वाच, नाइके की एक टोपी और न जाने क्या क्या अल्लम-गल्लम चीजें खरीदी. मैं तो आज उसे तोहफों से लाद देना और हर तरीके से खुश कर देना चाहता था.
हाँ ! एक खास बात- मोना के लिए मैने दो फोम वाली पेंटीज, पैडेड ब्रा और एक झीनी सी नाइटी भी खरीदी. मैने उसे समझाया कि इसके बारे में अपनी बुआजी या माँ से न बताये. उसने मेरी और प्रश्नवाचक निगाहों से देखा पर बोली कुछ नहीं और हाँ में सिर हिला दिया.

मैने जब उससे कहा कि ये पहनकर भी मुझे दिखानी होगी तो उसने मेरी ओर भोलेपन से देखा पर जब बात का मतलब उसके समझ में आया तो वो शरमा गई. ईईईश्श्श,,, …

हाय.. ,,, . इस अदा पर कौन न मर जाये ए खुदा !
मैने उस से कहा, ‘देखो मैने तुम्हारे लिए कितने गिफ्ट खरीदे हैं तुम मुझे क्या गिफ्ट दोगी ?’

तो वो बड़े ही भोले अंदाज में बोली ‘मेरे पास क्या है गिफ्ट देने के लिए ?’

मैने अपने मन में कहा, ‘अरे तुम्हारे पास तो कारूं का खजाना है मेरी बुलबुल !’
पर फिर मैने कहा ‘अगर चाहो तो कोई न कोई गिफ्ट तो दे ही सकती हो !’
वो सोच में पड़ गई, फिर बोली ‘अच्छा एक गिफ्ट है मेरे पास, पर पता नहीं आपको पसंद आएगा या नहीं?’
‘क्या है ? प्लीज बताओ न ?’ उसने अपनी जेब से एक रेशमी रुमाल निकाला और बोली, ‘मेरे पास तो देने को बस यही है.’
‘पता है यह रुमाल मैने पिछले साल आगरा से खरीदा था,?’
‘अरे कहीं इस से नाक तो नहीं साफ़ की है ?’ मैने हंसते हुए कहा ‘नहीं तो पर,,, .! हाँ ! जब मैं मटके वाली कुल्फी चूस रही थी मैने अपने होंठ जरूर साफ़ किये थे’ उसने बड़ी मासूमियत से कहा. मैं तो इस अदा पर दिलो जान से फ़िदा हो गया, मर ही मिटा. मैने उसके हाथ से रुमाल लेकर उसे चूम लिया. मोना जोर से शरमा गई पता नहीं क्यों ?
घर आते समय रास्ते में मैने उसे बताया कि कल हम सभी लिंग महादेव का मंदिर देखने चलेंगे. शहर से 15-16 किलोमीटर की दूरी पर एक छोटी सी पहाड़ी पर यह शिव मंदिर है जिसमे पाँच फुट का शिवलिंग बना हुआ है. यहाँ मान्यता है कि कोई पैदल नंगे पाँव आकर शिवलिंग पर सोलह सोमवार कच्चा दूध चढ़ाये तो उसकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. मैने कभी इसे आजमाया नहीं था,पर
अब मेरा मन कर रहा था,कि एक बार यह टोटका भी आजमा कर देख ही लूँ पर 16 सोमवार यानी 4-5 महीने,,, .. यार थोड़ा कम नहीं हो सकता ?
इन बातों से दूर मोना तो मेरी बात सुनकर झूम ही उठी. उसकी आँखों की चमक तो देखने लायक थी. लेकिन फिर उसने थोड़ी मायूसी से पूछा,’क्या आप कल ऑफिस नहीं जाओगे?’

‘अरे मेरी बिल्लो रानी तुम्हारे लिए छुट्टी ले लेंगे तुम क्यों चिंता करती हो’ मैने उसके गालों को सहलाते हुए कहा. वो शरमा गई. उसके गाल अचानक लाल हो गए और उसने रस भरी आवाज और कातिलाना अंदाज में कहा,’थैंक यू मेरे प्यारे फ़ू..फा,,, . अर्ररर जी.. जा जी.. ईईईस्स्स्सश्श..

आज अगर इसी क्षण मृत्यु भी आ जाये तो कोई गम नहीं.
जब हम घर पहुंचे तो वहाँ बम फूट चुका था. रमेश अपने मार्केटिंग के काम से वापस आ गया था. उसने बताया कि शितल के चाचा का एक्सीडेंट हो गया है और उन्हें आज ही दिल्ली जाना होगा. खबर सुनकर मेरा तो दिल ही बैठ गया. हे भगवान्. मोना ने जब सुना तो वो भी उदास हो गई. उसके चेहरे से लगता था,कि वो अभी रो पड़ेगी.
‘प्रेम हमें आज रात ही निकलना होगा. क्या दिल्ली के लिए अभी कोई ट्रेन है ? रमेश ने पूछा.

‘हाँ ट्रेन तो है रात दस बजे पर,,,  रिज़र्वेशन?’

‘कोई बात नहीं मैनेज कर लेंगे. अरे शितल, जल्दी करो, सामान देख लो ! मोना कहाँ है ?’ रमेश ने शितल को आवाज दी.

‘भाई साहब क्या सुबह नहीं जा सकते ?’ मैने पूछा.
‘अरे यार शितल और मेरा जाना बहुत जरूरी है !’
मुझे थोड़ी सी आशा बंधी मैने कहा ‘पर मोना तो यहाँ रह सकती है ?’

‘वो अकेली यहाँ क्या करेगी ?’
‘बच्ची है पहली बार आई है थोड़ा घूम फिर लेगी वापस लौटते समय आप उसे भी साथ ले जाना !’ मैने कहा.
‘चलो ठीक है !’
रमेश गेस्टरूम की ओर चला गया जहां शितल और मधु बैठी थी. मैं भागता हुआ अपने बेडरूम में गया मैने देखा मोना बेड पर ओंधे मुंह लेटी रो रही है. हे भगवान् क्या कयामत के गोल गोल नितम्ब थे. मैने उसकी जाँघों और नितम्बों पर हाथ फेरा और उसे प्यार से आवाज दी,’अरे मोना माउस ! क्या हुआ ?’

‘जिज्जू मैं माँ-पापा के साथ नहीं जाना चाहती ! प्लीज माँ पापा को मना लो ! प्लीज जिज्जू !’ उसने लगभग रोते हुए कहा.
‘अच्छा ! चलो, पहले अपने आंसू पौंछो ! शाबास ! गुड गर्ल ! अच्छे बच्चे रोते नहीं हैं !’ मैने उसके गालों पर हाथ फेरते हुए कहा. इतना बढ़िया मौका मैं भला कैसे छोड़ सकता था.
‘क्या पापा मान जायेंगे ?’
‘तुम चिंता मत करो मैने उन्हें मना लिया है !’
‘ओह मेरे अच्छे जिज्जू !’
मोना यकायक मुझसे लिपट गई और उसने मेरे गालों पर चूम लिया. मैं तो अवसर की तलाश में था,!
मैने झटसे मोना को अपनी बाहों मे जकड़ लिया और अपने लब उसके गुलाबी लबों से मिला दिए. मेरे दोनों हाथ उसकी पीठ पर थे और मेरी जीभ उसके होठों के बीच में अपना रास्ता तलाशते तलाशते उसकी जीभ से जा मिली.

कुछ पलों के लिए तो मैं अपनी सुधबुध ही खो बैठा और शायद वो भी !
लेकिन मोना होश में आई और अपने आप को मुझसे छुड़ा कर मेरे गाल पर एक किस्स ले कर बाथरूम में भाग गई अपना मुंह धोने. ये सब बहुत जल्दी और अप्रत्याशित हुआ था. मैने अपने गालों को दो तीन बार उसी जगह सहलाया और फिर अपनी अंगुलियों को चूम लिया.

तो दोस्तो, यह था,हमारा दूसरा किस्स !
जब मैं रमेश और शितल को स्टेशन छोड़ कर वापस आया तो लगभग साढ़े ग्यारह बज चुके थे. मोना गेस्टरूम में सो चुकी थी. मैने उस रात मधु को दो बार कस कस कर चोदा और एक बार उसकी गांड भी मारी. आज जिस तरीके से मैने मधु को रगड़ा था,मुझे नहीं लगता वो अगले दो दिनों तक ठीक से चल फिर पाएगी.

आज मेरा उतावलापन और बेकरारी देखकर मधु आखिर बोल ही पड़ी, ‘आज आपको क्या हो गया है ? मुझे मार ही डालोगे क्या ? कहीं आप नशा तो नहीं कर आये हो.’
अब मैं उसे क्या बताता कि मैं तो मोना के नशे में अन्दर तक डूबा हुआ हूँ. मैं तो बस इतना ही बोल पाया आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो मेरी जान और तीन चार किस्स उसके गालों पर ले लिए तो वो बोली- उन्ह्ह्ह,,, . हटो परे झूठे कहीं के,,, . !हम लोगो को रात को सोने में दो बज गए थे.
रात के घमासान के बाद सुबह उठाने में देर तो होनी ही थी. मैं कोई आठ बजे उठा. मधु पहले ही उठ चुकी थी. मधु ने मुझे जगाया और उलाहना देते हुए बोली- रात में तो तुमने मेरी कमर ही तोड़ डाली.
मैने उसे फिर बाहों में भरने कि कोशिश की तो अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली ‘सुबह सुबह छेड़खानी नहीं ! जाओ मोना को जगा दो ! मैं चाय बनाती हूँ ‘
मैं बाथरूम से फ्रेश होकर गेस्ट रूम में गया जहां मोना सोई हुई थी. मोना अभी भी बेसुध पड़ी सो रही थी. उसने अपना अंगूठा मुंह में ले रखा था,और दूसरे हाथ से बेबी डॉल को सीने से चिपका रखा था. बालों की एक आवारा लट उसके गालों पर बिखरी पड़ी थी. जिस अंदाज में वो सोई थी मुझे लगा कि वो अभी निरी मासूम बच्ची ही है. मुझ जैसे पढ़े लिखे आदमी के लिए ऐसी भावनाए रखना कदापि उचित नहीं है।

पर मेरा ये ख़याल अगले ही पल हवा में काफूर हो गया. उसने फूलोंवाली फ़्रॉक और गुलाबी रंग की पेंटी पहन रखी थी. वो करवट लेकर लेटी हुई थी. एक टांग थोड़ी सी ऊपर की ओर मुड़ी हुई. उसकी पुष्ट जाँघों को देखकर तो लगा जैसे वो कोई हॉकी की खिलाड़ी हो. पेंटी के अन्दर कसी हुई उसकी बुर एकदम फूली हुई थी. रोम विहीन टाँगे घुटनों से ऊपर उठी उसकी फ़्रॉक से झांकती हुई उसकी जाँघों की रंगत तो शरीर के दूसरे हिस्सों से कहीं ज्यादा गोरी थी. मैं तो बेसाख्ता आँखें फाड़े उस रूप की देवी को देखता ही रह गया. मेरा पप्पू तो बेकाबू होने लगा.

मैं सोच रहा था,कि उसे जगाने के लिए उसकी संगमरमरी जाँघों पर हाथ फेरूँ या नितम्बों पर जोर की थप्पी लगाऊं या उसके गालों पर एक पप्पी लेकर उसे जगाऊं. धड़कते दिल से मैने अपना एक हाथ और मुंह उसकी जाँघों की ओर बढाया ही था,कि पीछे से मधु की आवाज आई,’अरे मोना अभी उठी नहीं ? ऑफ.. ये लड़की भी कितना सोती है ?’
मैं तो इस अप्रत्याशित आवाज से हड़बड़ा ही गया. मुझे तो ऐसा लगा जैसे मेरा सारा खून रगों में जम ही गया है. आज तो मेरी चोरी पकड़ी गई है. पता नहीं मेरे मुंह से कैसे निकल गया.
‘हाँ हाँ उठ ही रही है !’
मुझे लगा अगर मैने मधु की ओर देखा तो जरूर वो जान जायेगी और मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगी मैं तो कहीं का नहीं रहूँगा. पर भगवान् का लाख लाख शुक्र है वो रसोई में चली गई थी. अगर एक दो सेकंड की भी देरी हो जाती तो ??

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