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तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-6

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इस कहानी के अन्य भाग

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-1

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-2

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-3

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-4

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-5

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-6

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-7

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-8 [last]

‘ठीक है’
‘प्रोमिस?’
‘हाँ प्रोमिस ! पक्का !!’ मोना ने हामी भरी.
दोस्तों ! अब तो बस मेरी मंजिल का फासला कोई दो कदम का ही रह गया था.

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लेकिन दिल्ली अभी दूर थी. अचानक एक बन्दर उछलता हुआ पता नहीं कब हमारे बीच आया और मोना के हाथों से मिठाई और चने का पैकेट छीन कर भाग गया. मोना की घिघ्घी बंध गई और डर के मारे मुझ से लिपट गई. उफ़्फ़,,, .! उसके नाजुक कबूतर (उरोज) मेरे दोनों हाथों में आ गए मैने उसे अपनी बाहों में समेट लिया, वो माँ ! माँ ! चिल्ला रही थी.
मैं उसको चुप कराने की कोशिश कर रहा था,और कोशिश क्या मैं तो इस सुखद घटना का पूरा फायदा उठा रहा था. कभी उसके नरम गालों पर हाथ फेरता कभी उसके नितम्बों पर कभी उसके उरोजों पर. मोना किसी अबोध डरे हुए बच्चे की तरह मुझसे लिपटी थी जैसे कोई लता किसी पेड़ से. उसका दिल बहुत जोर से धड़क रहा था. वो मेरे सीने से चिपटी रोए जा रही थी.
इतने में दो तीन आदमी और औरतें भागते हुए आये और पूछने लगे क्या हुआ. मैने उन्हें कहा कुछ नहीं थोड़ा सा डर गई है एक बन्दर मिठाई का लिफाफा छीन कर भाग गया और ये डर गई.
अब वहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं रह गया था. हमने जल्दी जल्दी वहाँ से उतरना चालू कर दिया. शाम होने वाली थी. मोना डर के मारे एक बच्चे कि तरह मेरा बाजू पकड़े मुझसे चिपकी हुई थी. मेरे लिए तो ये स्वर्णिम अवसर था. मैं भला ऐसा सुन्दर मौका कैसे छोड़ सकता था,मैने भी उसे अपने से चिपटा लिया. हे महादेव ! तुमने तो मेरी एक ही सोमवार में सुन ली.
कोई सात बजे का समय रहा होगा. अब एक और खूबसूरत हादसा होने वाला था. मोना ने चढ़ाई शुरू करने से पहले पूरी एक बोतल पानी और दो-तीन फ्रूटी भी पी थी. अब भला पेट का क्या कसूर ! सू सू तो आना ही था,?
‘फूफाजी ! मुझे.. सू..-सू.. आऽ रहाऽ हैऽ !’ वो संकुचाते हुए बोली. अब वहाँ बाथरूम तो था,नहीं, मैने कहा ‘जाओ उस बड़े पत्थर के पीछे कर आओ.’

वो डर के मारे अकेली नहीं जाना चाहती थी,’नहीं आप मेरे साथ चलो आप मुंह दूसरी तरफ कर लेना !’
आप सोच सकते हैं मेरी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत पल आने वाला था. मेरी तो मनमांगी मुराद ही पूरी होने वाली थी.
हम पत्थर के पीछे चले गए. मैने थोड़ा सा मुंह घुमा लिया.
उसने अपनी सफ़ेद पेंट नीचे सरकाई- काली पेंटी में फंसी उसकी खूबसूरत हलके हलके सुनहरी रोएँ से सजी नाज़ुक सी बुर अब केवल दो तीन फीट की दूरी पर ही तो थी. जिसके लिए आदमी तो क्या देवदूत भी स्वर्ग जाने से मना कर दें. मैने अपने आप को बहुत रोका पर उसकी बुर को देख लेने का लोभ संवरण नहीं कर पाया.

मेरे जीवन का ये सबसे खूबसूरत नजारा था. उसकी नाभि के नीचे का भाग (पेड़ू) थोड़ा सा उभरा हुआ. उफ़ .. भूरे भूरे छोटे छोटे सुनहरे बालो (रोएँ) से लकदक उसकी बुर का चीरा कोई 3 इंच का तो जरूर होगा. गुलाबी पंखुड़ियां. ऊपर चने के दाने जीतनी रक्तिम मदन मणि गुलाबी रंगत लिए भूमिका चावला और करीना कपूर के होंठों जैसी लाल सुर्ख फांके. फूली हुई तिकोने आकार की उसकी छोटी सी बुर जैसे गुलाब की कोई कली अभी अभी खिल कर फूल बनी है.
मैं उसे छू तो नहीं सकता था,पर उसकी कोमलता का अंदाजा तो लगा ही सकता था. अगर चीकू को बीच में से काट कर उसके बीज निकाल दिए जाएँ और उसे थोड़ा सा दबाया जाए तो पुट की आवाज के साथ उसका छेद थोड़ा सा खुल जायेगा अब आप आँखें बंद करके उसे प्यार से स्पर्श कर के देखिये उस लज्जत और नज़ाकत को आप महसूस कर लेंगे. बुर के चीरे से कोई एक इंच नीचे गांड का गुलाबी भूरा छेद खुल और बंद होता ऐसे लग रहा था,जैसे मर्लिन मुनरो अपने होंठों को सीटी बजाने के अंदाज में सिकोड़ रही हो. उसके गोल गोल भरे नितम्ब जैसे कोई खरबूजे गुलाबी रंगत लिए हुए किसी को भी अपना ईमान तोड़ने पर मजबूर कर दे. केले के पेड़ जैसी पुष्ट चिकनी जंघाएँ और दाहिनी जांघ पर एक काला तिल. हे भगवान् मैं तो बस मंत्रमुग्ध सा देखता ही रह गया. ये हसीं नजारा तो मेरे जीवन का सबसे कीमती और अनमोल नजारा था.

मोना एक झटके के साथ नीचे बैठ गई. उसकी नाजुक गुलाबी फांके थोड़ी सी चौड़ी हुई और उसमें से कल-कल करती हुई सू-सू की एक पतली सी धार,,, .शुर्रर..ऽ,,,  शिच्च्च्च,,, .!! सीईईई,,, . पिस्स्स्स ! करती लगभग डेढ़ या दो फ़ुट तो जरूर लम्बी होगी.
कम से कम दो मिनट तक वो बैठी सू-सू करती रही. पिस्स्स्स,,, .! का मधुर संगीत मेरे कानो में गूंजता रहा. शायद पिक्की या बुर को पुस्सी इसी लिए कहा जाता है कि उसमे से पिस्स्स्स,,, . का मधुर संगीत बजता है. छुर्रर,,, .. या फल्ल्ल्ल्ल,,, .. की आवाज तो चुत या फिर फुद्दी से ही निकलती है. अब तक मोना ने कम से कम एक लीटर सू-सू तो जरूर कर लिया होगा. पता नहीं कितनी देर से वो उसे रोके हुए थी. धीरे धीरे उसके धार पतली होती गई और अंत में उसने एक जोर की धार मारी जो थोड़ी सी ऊपर उठी और फिर नीचे होती हुई बंद हो गई. ऐसे लगा जैसे उसने मुझे सलामी दी हो. दो चार बूंदें तो अभी भी उसकी बुर के गुलाबी होंठों पर लगी रह गई थी.
इस जन्नत भरे नजारे को देखने के बाद अब अगर क़यामत भी आ जाए तो कोई डर नहीं. बरसों के सूखे के बाद सावन जैसी पहली बारिश की फुहार से ओतप्रोत मेरा तन मन सब शीतल होता चला गया. उस स्वर्ग के द्वार को देख लेने के बाद अब और क्या बचा था. मुझे लगा कि मैं तो बेहोश ही हो जाऊँगा. मेरे शेर ने तो पैन्ट में ही अपना दम तोड़ दिया. पर इस दृश्य के बाद मेरे शेर के शहीद होने का मुझे कोई गम नहीं था.

मैं यही सोच रहा था,कि स्वर्ग के द्वार से अभी तक मोना ने केवल मूतने का ही काम क्यों लिया है. जब वो उठी तो किसी पेड़ से एक पक्षी पंख फड़फड़ाता कर्कश आवाज करता हुआ उड़ा तो मोना फिर डर गई और इस बार फिर मेरी और दौड़ने के चक्कर में उसका पैर फिसला और पैर में थोड़ी सी मोच आ गई. इतने खूबसूरत हादसे के बाद फिर ये तकलीफदेह दुर्घटना हे भगवान् क्या सब कुछ आज ही होने वाला है ??
जब हम घर पहुंचे तो मोना को लंगड़ाते हुए देख कर मधु ने घबरा कर पूछा ‘अरे कहीं एक्सीडेंट तो नहीं हो गया ? क्या हुआ मोना को ?’
‘अरे कुछ ख़ास नहीं, थोड़ा सा फिसल गई थी, लगता है मोच आ गई है !’
‘हे भगवान् ध्यान से नहीं चल सकते थे क्या ? ऑफ,,, . इधर आओ जल्दी करो लाओ आयोडेक्स मल देती हूँ’ मधु घबरा सी गई.
‘नहीं बुआजी कोई ज्यादा चोट नहीं लगी है ‘ मोना ने बताया.
‘चुप ! तुझे क्या पता कहीं फ्रेक्चर तो नहीं हो गया ? किसी डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाया उसी समय ?’ मधु बिना किसी की बात सुने बोलती जा रही थी.
आयोडेक्स लगाने, नमक वाले पानी से सिकाई करने, हल्दी वाला दूध पिलाने और इतनी गर्मी में भी चद्दर उढ़ा कर सुलाने के बाद ही मधु ने उसका पीछा छोड़ा.

मैं बाथरूम में जाकर अपना अंडरवियर चेंज करके जब ड्राइंग रूम में आया तो वहाँ पर मिठाई का एक डिब्बा पड़ा हुआ नज़र आया. मैने मधु से जब इसके बारे में पुछा तो उसने बताया ‘अरे वो निशा है ना !’
‘कौन निशा ?’
‘तुम्हें तो कुछ याद ही नहीं रहता ! अरे वो मेरी झाँसी वाली कजिन की रिश्तेदार है न स्कूल में ?’
ये औरतें भी अजीब होती है कोई भी बात सीधे नहीं करेगी घुमा फिर कर बताने और बात को लम्बा खीचने में पता नहीं इनको क्या मज़ा आता है.
‘हाँ हाँ तो ?’
‘अरे भई उसके देवर की शादी है. वो तो मुझे कल रात को उनके यहाँ होने वाले फंक्शन में बुलाने का कह कर गई है. रिसेप्सन में तो जाना पड़ेगा ही सोच रही हूँ रात वाले फंक्शन में जाऊं या नहीं ?’

मैं जानता था,मैं मना करू या हाँ भरूं, मधु नाचने गाने का ये चांस बिलकुल नहीं छोड़ने वाली. मधु बहुत अच्छी डांसर है. शादी के बाद तो उसे किसी कॉम्पिटिशन में नाचने का अवसर तो नहीं मिला पर शादी विवाह या पार्टीज में तो मधु का डांस देख कर लोग तौबा ही कर उठते हैं. इस होली पर भांग पीकर उसने जो ठुमके लगाए थे और कूल्हे मटकाए थे, कालोनी के बड़े बुजुर्गों का भी ‘ढीलू प्रसाद’ धोती में उछलने लगा था. क्या कमाल का नाचती है.
आप की जानकारी के लिए बता दूँ राजस्थान में शादी वाली रात जब लड़की के घर फेरे होतें है तो लड़के वालों के घर पर रात को नाच गाना होता है. उसमे सिर्फ मोहल्ले वाली और नजदीकी रिश्तेदार औरतें ही शामिल होती है. मैं तो सपने में भी नहीं सोच सकता था,इतना सुनहरा मौका इतनी जल्दी मुझे मिल जायेगा. सच कहते है सचे मन से भगवान् को याद किया जाए तो वो जरूर सुनाता है. अब तक आपने अंदाजा लग ही लिया होगा कि मेरे जैसे चुद्दकड़ आदमी की भगवान् में कितनी आस्था,होगी ? वैसे देखा जाये तो मैं भगवान्, स्वर्ग-नर्क, पाप-पुण्य, पूजा-पाठ आदि में ज्यादा विश्वास नहीं रखता पर इन खूबसूरत हादसों के बाद तो उसे मान लेने को जी चाहता है.
मैने आज पहली बार पूजा घर में जाकर भगवान का धन्यवाद किया.
आगे….

दोस्तों, आज दिन भर मैं ऑफिस में सिर्फ मोना के बारे में ही सोचता रहा. कल जिस तरह से खूबसूरत घटनाएँ हुई थी, मेरे रोमांच का पारावार ही नहीं था. इतना खुश तो मैं सुहागरात मना कर भी नहीं हुआ था. मैं दिन भर इसी उधेड़बुन में लगा रहा कि कैसे मोना और मैं एक साथ अकेले सारी रात भर मस्ती करेंगे. न कोई डर न कोई डिस्टर्ब करनेवाला. सिर्फ मैं और मोना बस.
मैं सोच रहा था,मोना को कैसे तैयार करूँ. कभी तो लगता कि मोना सब कुछ जानती है पर दूसरे ही पल ऐसा लगता कि अरे यार मोना तो अभी अट्ठारह साल की ही तो है उसे भला मेरी भावनाओं का क्या पता होगा. अगर जल्दबाजी में कुछ गड़बड़ हो गई और मोना ने शोर मचा दिया तो ???

मैं ये सब सोच सोच कर ही परेशान हो गया. क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा. गुरूजी सच कहते है चुदी चुदाई औरतों को चोदना बहुत आसान होता है पर इन कमसिन बे-तजुर्बेकार लड़कियों को चोदना वाकई दुष्कर काम है. मैने अपनी योजना पर एक बार फिर गौर किया. हल्दी मिले दूध में अगर नींद की दो तीन गोलियाँ मिला दी जाएँ तो पता ही नहीं चलेगा. गहरी नींद में मैं उसके कोरे बदन की खुशबू लूट लूँगा.
मैने एक दो दिन पहले ही नींद की गोलियों का इंतजाम भी कर लिया था. लेकिन फिर ख़याल आया मोना की बुर अगर मेरा इतना मोटा और लम्बा लंड सहन नहीं कर पाई और कुछ खून खराबा ज्यादा हो गया और कहीं डॉक्टर की नौबत आ पड़ी तो तो ? मैं तो सोच कर ही काँप उठा ?
आपको बता दूं कि मैं किसी भी तरह की जोर जबरदस्ती या बलात्कार पर आमादा नहीं था. मैं तो मोना से प्यार करता था,मैं उसे कोई नुक्सान या कष्ट कैसे पहुंचा सकता था. काश मोना अपनी बाँहें फैलाए मेरे आगोश में आ जाए और अपना सब कुछ मेरे हवाले कर दे जैसे एक दुल्हन सुहागरात में अपने दुल्हे को समर्पित कर देती है. इस समय मुझे रियाज़ खैराबादी का एक शेर याद आ गया :-
हम आँखें बंद किये तस्सवुर में बैठे हैं !
ऐसे में कहीं छम्म से वो आ जाए तो क्या हो !!
जब कुछ समझ नहीं आया तो मैने सब कुछ भगवान् के भरोसे छोड़ दिया. हालात के हिसाब से जो होगा देखा जायेगा.
शाम को मैं जानबूझकर देरी से घर पहुंचा. कोई आठ साढ़े-आठ का समय रहा होगा. खाना तैयार था. मधु पार्टी में जाने की तैयारी कर रही थी. इन औरतों को भी तैयार होने में कितना वक़्त लगता है. उसने शिफ़ॉन की काली साड़ी पहनी थी और लो कट ब्लाउज. मधु साड़ी इस तरह से बांधती है कि उसके नितम्ब भरे-पूरे नज़र आते हैं. सच पूछो तो उसकी सबसे बड़ी दौलत ही उसके नितम्ब है. और मैं तो ऐसे नितम्बों का मुरीद हूँ. जब वो कोई साढ़े नौ बजे तक मुश्किल से तैयार हुई तो मैने मज़ाक में उससे कहा ‘आज किस किस पर बिजलियाँ गिराओगी !!’

वो अदा से आईने में अपने नितम्बों को देखते हुए बोली ‘अरे वहाँ तो आज सिर्फ औरतें ही होंगी, मनचले भंवरे और परवाने नहीं !’
‘कहो तो मैं साथ चलूँ?’ मैने उसे बांहों में लेना चाहा.
‘ओफ़्फ़ ! छोड़ो न तुम्हें तो बस इस एक चीज के अलावा कुछ सूझता ही नहीं ! पता है मैं दो दिनों से ठीक से चल ही नहीं पा रही हूँ.’ उसने मुझे परे धकेलते हुए कहा.

‘अच्छा, यह बताओ, मैं कैसी लग रही हूँ?’ औरतों को अपनी तारीफ़ सुनाने का बड़ा शौक होता है. सच पूछो तो उसके कसे हुए नितम्बों को देख कर एक बार तो मेरा मन किया कि उसे अभी उलटा पटक कर उसकी गांड मार लूँ पर अभी उसका वक़्त नहीं था.
मैने कहा ‘एक काजल का टीका गालों पर लगा लो कहीं नज़र न लग जाए !’

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