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तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-7

मधु किसी नव विवाहिता की तरह शरमा गई ! ईईईईस्स्स्स्स्श,,, ..

इस कहानी के अन्य भाग

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-1

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-2

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-3

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-4

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-5

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-6

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-7

तीसरा किस्स (Nice sex story) Part-8 [last]

कोई दस बजे वो कार से अपनी सहेली के घर चली गई. (मधु कार चला लेती है) जब मैं गेट बंद करके मैं ड्राइंग रूम में वापस आया तो मोना बाथरूम में थी शायद नहा रही थी.

मैं स्टडी रूम में चला गया. मैने दो दिनों से अपने मेल चेक नहीं किये थे. मैने जब कम्प्यूटर ओन किया तो सबसे पहले स्टार्ट मेन्यू में जाकर रिसेंट डॉक्यूमेंट्स देखे तो मेरी बांछे ही खिल गई. जैसा मैने सोचा था,वो ही हुआ. वीडियो पिक्चर की फाइल्स खोली गई थी और ये फाइलें तो मेरी चुनिन्दा ब्ल्यू-फिल्मों की फाइलें थी. आईला,,, !! मेरा दिल बेतहाशा धड़कने लगा. अब मेरे समझ में आया कि कल दोपहर में मोना स्टडी रूम से घबराई सी सीधे रसोई में क्यों चली गई थी.
माधवी डार्लिंग तूने तो कमाल ही कर दिया. मेरे रास्ते की सारी बाधाएं कितनी आसानी से एक ही झटके में इस कदर साफ़ कर दी जैसे किसी ने कांटेदार झाड़ियाँ जड़ समेत काट दी हो और कालीन बिछा कर ऊपर फूल सजा दिए हो. अब मैं किसे धन्यवाद दूँ, अपने आपको, कंप्यूटर को, मोना को या फिर लिंग महोदय को ?

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मैने इन फाइल्स को फिर से पासवर्ड लगा कर लॉक कर दिया और अपनी आँखें बंद कर के सोचने लगा. मोना ने इन फाइल्स और पिक्चर्स को देख कर कैसा अनुभव किया होगा ? कल पूरे दिन में उसने कम्प्यूटर की कोई बात नहीं की वरना वो तो मेरा सिर ही खा जाती है. मैं भी कतई उल्लू हूँ मोना की आँखों की चमक, उसका सजाना संवारना, मेरे से चिपक कर बाइक पर बैठना, शुक्र पर्वत की बात करना, बंदरों की ठोका-ठुकाई की बात इससे ज्यादा बेचारी और क्या इशारा कर सकती थी. क्या वो नंगी होकर अपनी बुर हाथों में लिए आती और कहती लो आओ चोदो मुझे ? मुझे आज महसूस हुआ कि आदमी अपने आप को कितना भी चालाक, समझदार और प्रेम गुरु माने नारी जाति को कहाँ पूरी तरह समझ पाता है फिर मेरी क्या बिसात थी.
कम्प्यूटर बंद करके मैं आँखें बंद किये अभी अपने ख्यालों में खोया था,कि अचानक मेरी आँखों पर दो नरम मुलायम हाथ और कानों के पास रेंगते हुए साँसों की मादक महक मेरे तन मन को सराबोर कर गई. इस जानी पहचानी खुशबू को तो मैं मरने के बाद भी नहीं भूल सकता, कैसे नहीं पहचानता. मेरे जीवन का यह बेशकीमती लम्हा काश कभी ख़त्म ही न हो और मैं क़यामत तक इसी तरह मेरी मोना मेरी मोना मेरी माधवी के कोमल हाथों का मखमली स्पर्श महसूस करता रहूँ. मैने धीरे से अपने हाथ कुर्सी के पीछे किए. उसके गोल चिकने नितम्ब मेरी बाहों के घेरे में आ गए, बीच में सिर्फ़ नाईटी और पैन्टी की रुकावट थी.

उफ्फ्फ,,,  मोना की संगमरमरी जांघे उस पतली सी नाइटी के अन्दर बिलकुल नंगी थी. मैं इस लम्हे को इतना जल्दी ख़त्म नहीं होने देना चाहता था. पता नहीं कितनी देर मैं और मोना इसी अवस्था,में रहे. फिर मैने हौले से उसकी नरम नाज़ुक हथेलियों को अपने हाथों में ले लिया और प्यार से उन्हें चूमने लगा. मोना ने अपना हाथ छुड़ा लिया और मेरे सामने आ कर खड़ी होकर पूछने लगी- कैसी लग रही हूँ?

मैने उसके हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लिया और अपनी गोद में बैठा कर अपने जलते होंठ उसके होंठों पर चूमते हुए कहा- सुन्दर, सेक्सी ! बहुत प्यारी लग रही है मेरी, सिर्फ़ मेरी मोना !

मोना ने शरमाते हुए गर्दन झुका ली !

मैने उसकी ठुड्डी पकड़ कर उसके चेहरे को ऊपर उठाया और फ़िर से उसके गुलाबी लब मेरे प्यासे होंठों की गिरफ़्त में आ गए. बरसों से तड़फती मेरी आत्मा उस रसीले अहसास से सराबोर हो गई. जैसे अंधे को आँखें मिल गई हो, भूले को रास्ता और बरसों से प्यासी धरती को सावन की पहली फुहार. जैसे किसी ने मेरे जलते होंटों पर होले से बर्फ की नाज़ुक सी फुहार छोड़ दी हो.
अब तो मोना भी सारी लाज़ त्याग कर मुझे इस तरह चूम रही थी कि जैसे वो सदियों से कैद एक ‘अभिशप्त राजकुमारी’ है, जैसे उसे केवल यही एक पल मिला है जीने के लिए और अपने बिछुड़े प्रेमी से मिलने का. मैं अपनी सुधबुध खोये कभी मोना की पीठ सहलाता कभी उसके नितम्बों को और कभी होले से उसकी नरम नाज़ुक गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठो को डरते डरते इस कदर चूम रहा था,कि कहीं भूल से भी मेरे होंठो और अंगुलियों के खुरदरे अहसास से उसे थोड़ा सा भी कष्ट न हो. मेरे लिए ये किस्स उस ‘अनमोल रत्न’ की तरह था,जिसके बदले में अगर पूरे जहां की खुदाई भी मिले तो कम है.

आप जानते होंगे मैं स्वर्ग-नर्क जैसी बातों में विश्वास नहीं रखता पर मुझे आज लग रहा था,कि अगर कहीं स्वर्ग या जन्नत है तो बस यही है यही है यही है,,, !

अचानक ड्राइंग रूम में रखे फ़ोन की कर्कश घंटी की आवाज से हम दोनों चौंक गए. हे भगवान् इस समय कौन हो सकता है ? किसी अनहोनी और नई आफत की आशंका से मैं काँप उठा. मैने डरते डरते फ़ोन का रिसीवर इस तरह उठाया जैसे कि ये कोई जहरीला बिच्छू हो. मेरा चेहरा ऐसे लग रहा था,जैसे किसी ने मेरा सारा खून ही निचोड़ लिया हो.
मैं धीमी आवाज में हेल्लो बोला तो उधर से मधु की आवाज आई, ‘आपका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है !’
‘ओह ! क्या बात है?’ मैने एक जोर की सांस ली.
‘वो वो मैं कह रही थी कि.. कि.. हाँ .. मैं ठीक ठाक पहुँच गई हूँ और हाँ !’
पता नहीं ये औरतें मतलब की बात करना कब सीखेंगी ‘हाँ मैं सुन रहा हूँ’
‘आर.. हाँ वो मोना को दवाई दे दी क्या ? उसे हल्दी वाला दूध पिलाया या नहीं ?’
‘हाँ भई हाँ दूध और दवाई दोनों ही पिलाने कि कोशिश ही कर रहा था,!’ मैने मोना की ओर देखते हुए कहा ‘हाँ एक बात और थी कल सुबह भैया और भाभी दोनों वापस आ रहे हैं उन्होंने मोबाइल पर बताया है कि अंकल अब ठीक हैं.’ मधु बस बोले जा रही थी ‘सुबह मैं आते समय उन्हें स्टेशन से लेती आउंगी तुम परेशान मत होना. ओ के ! लव ! गुड नाईट एंड स्वीट ड्रीम्स !’
मधु जब बहुत खुश होती है तो मुझे लव कहकर बुलाती है (मेरा नाम प्रेम है ना). लेकिन आज जिस अंदाज़ में मुझे उसने लव के साथ गुड नाईट और स्वीट ड्रीम्स कहा था,मैं उसके इस चिढ़ाने वाले अंदाज़ को अच्छी तरह समझ रहा था. सारी रात उससे दूर ? पर उसे क्या पता था,कि आज तो सारी रात ही मेरे स्वीट ड्रीम्स सच होने वाले हैं ?

मोना मेरे चेहरे की ओर देख रही थी. मैने उसे जल्दी से सारी बात बता दी. वो पहले तो थोड़ा हंसी और फिर दौड़ कर मेरी बाहों में समा गई. मैने उसे अपनी गोद में उठा कर उसके गालों पर एक करारा सा किस्स ले लिया. जवाब में उसने मेरे होंठ काट खाए जिससे उन पर थोड़ा सा खून भी निकल आया. इस छोटे से दर्द का मीठा अहसास मेरे से ज्यादा भला और कौन जान सकता है. मैं उसे गोद में उठाये अपने बेडरूम में आ गया. मोना की आँखें बंद थी. वो तो बस हसीं ख़्वाबों की दुनिया में इस कदर खोई थी कि कब मैने उसकी नाइटी उतार दी उसे कोई भान ही नहीं रहा.
और अब बेजोड़ हुस्न की मल्लिका मेरे आगोश में आँखें बंद किये बैठी थी. अगर ठेठ उज्जड भाषा में कहा जाए तो मेरी हालत उस भूखे शेर की तरह थी जिसके सामने बेबस शिकार पड़ा हो और वो ये सोच रहा हो कि कहाँ से शुरू करे. लेकिन मैं कोई शिकारी या जंगली हिंसक पशु नहीं था. मैं तो प्रेम का पुजारी था. अगर रोमांटिक भाषा में कहा जाए तो मेरे सामने छत्तीस प्रकार के व्यंजन पड़े थे और मैं फैसला नहीं कर पा रहा था,कि कौन सा पकवान पहले खाऊं .
मैने अभी कपड़े नहीं उतारे थे. मैने कुर्ता-पायजामा पहने हुआ था. मेरा लंड मेरे काबू में नहीं था,वो किसी नाग की तरह फुफकार मार रहा था. 120 डिग्री के कोण में पायजामे को फाड़ कर बाहर आने की जी तोड़ कोशिश कर रहा था. मोना मेरी गोद में बैठी थी. हमारे होंठ आपस में चिपके हुए थे. मोना ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और मैं उसे रसभरी कुल्फी की तरह चूसने लगा.

मेरा लंड उसकी नाज़ुक नितम्बों की खाई के बीच अपना सिर फोड़ता हुआ बेबस नज़र आ रहा था. मैं कभी मोना के गालों को चूमता कभी होंठो को कभी नाक को कभी उसके कानो को और कभी पलकों को. मोना मेरे सीने से छिपाते हुए मुझे बाहों में जकड़े गोद में ऐसे बैठी थी जैसे अगर थोड़ा भी उसका बंधन ढीला हुआ तो उसके आगोश से उसका ख्वाब कोई छीन कर ले जायेगा. कमोबेश मेरी भी यही हालत थी.
कोई 10-15 मिनट के बाद जब हमारी पकड़ कुछ ढीली हुई तो मोना को अपने बदन पर नाइटी न होने का भान हुआ. उसने हैरानी से इधर उधर देखा और फिर मेरी गोद से थोड़ा सा छिटक कर मारे शर्म के अपने हाथ अपनी आँखों पर रख लिए. नाइटी तो कब की शहीद होकर एक कोने में दुबकी पड़ी थी जैसे मरी हुई चिड़िया.

  • ‘मेरी नाइटी?’
  • ‘मेरी प्रियतमा, आँखें खोलो !’
  • ‘नहीं पहले मेरी नाइटी दो, मुझे शर्म आ रही है !’
  • ‘अरे मेरी बिल्लो रानी !
  • अब शर्म छोड़ो ! 

तुम इस ब्रा पेंटी में कितनी खूबसूरत लग रही हो जरा मेरी आँखों से देखो तो सही अपने आपको ! तुम यही तो दिखाने आई थी ना !’
‘नहीं पहले लाईट बंद करो !’
‘लाइट बंद करके मैं कैसे रसपान करूंगा तुम्हारी इस नायाब सुन्दरता का, यौवन का !’
‘जिज्जू ! प्लीज़ ! मुझे शर्म आ रही है !’
मैने न चाहते हुए भी उठ कर लाईट बंद कर दी पर बाथरूम का दरवाजा खोल दिया जिसमे से हलकी रोशनी आ रही थी.
‘अब तो आँखे खोल दो मेरी प्रियतमा !’
‘नहीं पहले खिड़की का पर्दा करो !’
‘क्यों वह कौन है ?’
‘अरे वह मेरे मामाजी खड़े है जो हमारी रासलीला देख रहे हैं.’
‘मामाजी ? कौन मामाजी ?’ मैने हैरानी से पूछा.
‘ओफ्फ ओ !! आप भी निरे घोंचू है अरे बाबा ! चन्दा मामा !’
मेरी बेतहाशा हंसी निकल गई. बाहर एकम का चाँद खिड़की के बाहर हमारे प्यार का साक्षी बना अपनी दूधिया रोशनी बिखेर रहा था.
मैने उसे बिस्तर पर लिटा लिया और खुद उसकी बगल में लेट कर अपनी एक टाँग उसकी जाँघों पर रख ली और उसके चेहरे पर झुक कर उसे चूमने लगा. मेरा एक हाथ उसके गाल पर था,और दूसरा उसके बालों, लगे और कन्धे को सहला रहा था. मेरी जीभ उसके मुख के अनदर मुआयना कर रही थी. अब वो भी अपनी जीभ मेरी जीभ से टकरा टकरा कर मस्ती ले रही थी.

धीरे धीरे मेरा हाथ उसके यौवन कपोतों पर आ गया, वो जैसे सिहर सी गई, उसने मेरी आँखों में झांका और मेरा हाथ उसके कंधे से ब्रा की पट्टी को बाजू पर सरकाने लगा. मेरी उंगलियां उसकी ब्रा के कप में घुस गई और उसके तने हुए चूचुक से जा टकराई. मैने उसके स्तनाग्र को दो उंगलियों में लेकर हल्के से मसला वो सीत्कार उठी.
फ़िर मेरा हाथ उसकी पीठ पर सरकता हुआ उसकी ब्रा के हुक तक पहुँच गया और हुक खुलते ही मैं ब्रा को उसके बदन से अलग करने की कोशिश करने लगा तो मोना जैसे तन्द्रा से जागी और अपनी सम्भालने लगी. लेकिन तब तक तो उसकी ब्रा मेरे हाथ में झूलने लगी थी और मोना फ़िर से मेरी आँखों में आँखें डाल कर मानो पूछ रही थी कि ‘यह क्या हो रहा है?’
काले रंग की ब्रा जैसे ही हटी, दोनों कबूतर ऐसे तन कर खड़े हो गए जैसे बरसों के बाद उन्हें आजादी मिली हो. छोटे नागपुरी संतरों की साइज़ के दो गोल गोल रस्कूप मेरे सामने थे. बादामी और थोड़ी गुलाबी रंगत लिए उसके एरोला कोई एक रुपये के सिक्के से बड़े तो नहीं थे. अनार के दाने जीतनी सुर्ख लाल रंग की छोटी सी घुंडी. आह्ह्ह,,, ..
मैने तड़ से एक किस्स उस पर ले ही लिया. मोना सिहर उठी. पहले मैने उनपर होले से जीभ फिराई और अब मैने अपने आप को पूरी तरह से मोना के ऊपर लाकर उसके गोरे, चिकने बदन को अपने बदन से ढक दिया और उसके एक चूचुक को होठों में दबा कर जैसे उसमें से दूध पीने का प्रयत्न करने लगा. मेरा लण्ड उसकी जांघों के बीच में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा था.
और बाद में मैने एक संतरा पूरे का पूरा अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा. मोना की सिसकारियां गूंजने लगी. मेरा एक हाथ उसकी पीठ और गोल गोल नितम्बों पर घूम रहा था. और दूसरे हाथ से उसका दूसरा स्तन दबा रहा था. मैने जानबूझ कर उसकी बुर पर हाथ नहीं फेरा था,इसका कारण मैं आपको बाद में बताऊंगा.

मेरे दस मिनट तक चूसने के कारण उसके उरोज साइज़ में कोई दो इंच तो जरूर बढ़ गए थे और निप्पल्स तो पेंसिल की नोक की तरह एकदम तीखे हो गए. मैने उसे बेड पर लिटा दिया. उसका एक हाथ थोड़ा सा ऊपर उठा हुआ था. उसकी कांख में उगे सुनहरे रंग के रोएँ देख कर मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपना मुंह वहाँ पर टिका दिया. हालांकि वो नहा कर आई थी पर उसके उभरते यौवन की उस खट्टी, मीठी, नमकीन सी खुशबू से मेरा स्नायु तंत्र एक मादक महक से भर उठा. मैने जब जीभ से चाटा तो मोना उतेजना और गुदगुदी से रोमांचित हो उठी.
अब मैने पहले उसके गालों पर आई बालो की आवारा लट को हटा कर उसका चेहरा अपनी हथेलियों में ले लिया. थरथराते होंठो से उसके माथे को, फिर आँखों की पलकों को, कपोलों को, उसकी नासिका, उसके कानों की लोब और अधरों को चूमता चला गया. मोना पलकें बंद किये सपनों की दुनिया में खोई हुई थी. उसकी साँसे तेज चल रही थी होंठ कंपकपा रहे थे. मैने उसके गले और फिर उसके बूब्स को चूमा. दोनों उरोजों की घाटी में अपनी जीभ लगा कर चाटा तो मोना के होंठो से बस एक हलकी सी कामरस में भीगी सित्कार निकल गई. हालांकि रौशनी में चमकता उसका चिकना सफ्फाक बदन मेरे सामने सब कुछ लुटाने के लिए बिखरा पड़ा था.
अचानक उसे ध्यान आया कि मैं तो पूरे कपड़े पहने हुए हूँ, उसने मुझे उलाहना देते हुए कहा ‘अच्छा जी आपने तो अपने कपड़े उतारे ही नहीं !’

मैं तो इसी ताक में था. दरअसल मैने अपने कपड़े पहले इस लिए नहीं उतारे थे कि कहीं मोना मेरा सात इंच का फनफनाता हुआ लंड देखकर डर न जाए और ये न सोचे कि मैं जबरन कुछ कर देने पर तुला हुआ हूँ या कहीं उसका बलात्कार ही तो नहीं करना चाहता. कपड़े उतार कर मैं डबल बेड पर सिरहाने की ओर कमर टिका कर बैठ गया. मेरी एक टांग सीधी थी और दूसरी कुछ मुड़ी हुई जिसकी जांघ पर मोना अपना सिर रखे आँखें बंद किये लेटी थी. मैने नीचे झुक कर उसका किस्स लेने की कोशिश की तो वो थोड़ा सा नीचे की ओर घूम गई. मेरा आधा लंड चड्डी के बाहर निकला हुआ था,वो उसके होंठों से लग गया. मुझे तो मन मांगी मुराद मिल गई.

मैने उसे कहा- मोना देखो इसे कैसे मुंह उठाए तुम्हें देख रहा है ! हाथ में लो ना इसे.

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