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नई नवेली रेन्टर भाभी की चुत की ठुकाई

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एक कमरा लेकर रहता था। वहाँ मेरी पढ़ाई चल रही थी। छुट्टियों में मै अपने घर चला गया था।
इस बार जब छुट्टियों के बाद मै दिल्ली वापिस आया तो मकान मालकिन आंटी ने बताया उन्होंने मेरे साथ वाला बड़ा वाला हिस्सा भी किराए पर दे दिया है।
मुझे अच्छा नहीं लगा। क्योंकि उस हिस्से में मै और स्नेहा (मकान:-मालिकिन की बेटी) मस्ती किया करते थे। पर अब क्या कर सकते थे।
संडे सुबह नए किराएदार का सामान आ गया और एक और हफ्ते में उन्होंने सारी व्यवस्था ठीक कर ली।
वो बस दो लोग थे। राकेश एक बैंक में जॉब करता था। उसकी पत्नी यानि भाभी:-जी एक टीचर थी।
मै राकेश को भैया कहने लगा, उसकी अभी दो महीने पहले ही शादी हुई थी।
भाई सुबह 8 बजे जाकर रात को आता था और भाभी:-जी दोपहर 2 बजे वापिस आ जाती थी।
एक दिन सुबह के समय छत पर एक्सरसाइज़ कर रहा था तो भाभी:-जी अचानक कपड़े सुखाने के लिए आ गईं।
मै अपनी एक्सरसाइज़ करता रहा।
मैने देखा कि कपड़े सुखाते:-सुखाते भाभी:-जी चोर निगाहों से मुझे और मेरे मसल्स को देख रही थीं।
वो कपड़े सूखने डाल कर चली गई तो मैने देखा कि उन कपड़ों में एक सुर्ख लाल रंग की सेक्सी ब्रा और पैन्टी भी थी।
उनके जाने के बाद मैने वो ब्रा:-पैन्टी उठा ली और अपने कमरे में आकर उसे सूंघने लगा।
भाभी:-जी की चुत की कामुक महक अब भी उस पैन्टी में से आ रही थी।
मैने भाभी:-जी के नाम की मुठ मारी और सारा माल उस ब्रा:-पैन्टी में छोड़ दिया।
फिर कुछ देर बाद मैने उसे धो कर वापिस सूखने के लिए डाल दिया।
मेरी छुट्टी थी। तो मै सो गया। दोपहर को अचानक मेरे दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।
साधारणत, इस वक्त स्नेहा अपनी ठरक मिटाने के लिए आती थी तो मैने बिना ध्यान किया ही दरवाजा खोल दिया।
सामने देखा तो भाभी:-जी सामने खड़ी थी।
नींद से उठने की वजह से मेरा लौड़ा खड़ा था और इस वजह से वो इधर:-उधर देखने लगी।
मुझे अचानक होश आया तो मैने झट से तौलिया बाँध लिया। लेकिन लौड़ा अभी भी खड़ा था।
मैने उन्हें नमस्ते की और पूछा:- क्या काम है?
बोली:- बेड को थोड़ा एक तरफ को सरकाना है। क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?
‘हाँ हाँ। मै 10 मिनट में आता हूँ…’
दस मिनट बाद मै अपनी कैपरी और टी:-शर्ट पहन कर उनके कमरे में चला गया।
इस बीच उन्होंने भी ड्रेस चेंज कर ली थी और अब वो एक सफ़ेद लैगीज और ढीली सी टी:-शर्ट में थी।
मेरा तो मन किया कि अभी टी:-शर्ट के नीचे से हाथ डाल कर चूची मसल दूँ। लेकिन मैने संयम कर लिया।
बिस्तर की स्थिति को भाभी:-जी जी के मुताबिक़ ठीक करते वक्त हम दोनों झुके हुए थे। भाभी:-जी के मम्मे दिख रहे थे और मैने ध्यान दिया तो देखा के जिस लाल ब्रा में मैने मुठ मारी थी। वो अब भाभी:-जी के गोरे:-गोरे मम्मों को सम्भाल रही थी।
मेरा लौड़ा फिर से खड़ा होने लगा।
भाभी:-जी भी ये सब देख रही थी और कातिल सी मुस्कान बिखेर रही थीं।
जब मै वापिस जाने लगा तो भाभी:-जी ने ‘थैंक्स’ बोला और कहा:- रुकिए न। चाय पीकर जाना…
मैने कहा:- मै चाय नहीं पीता।
वो हँसते हुए कहने लगी:- तो क्या दूध पियोगे…
मैने उनके मम्मों की तरफ देखते हुए कहा:- हाँ। दूध के लिए तो मै कभी इन्कार नहीं करता…
वो थोड़ा शरमाते हुए बोली:- ठंडा या गरम?
मैने कहा:- गरम हो तो बेहतर है…
हम दोनों समझ गए थे कि आग दोनों तरफ लगी है। लेकिन खुल नहीं पा रहे थे।
वो दूध गर्म करके ले आई थी, दूध पीते हुए भी मेरा ध्यान टीवी से ज्यादा उनके मम्मों पर था।
भाभी:-जी ने बात करनी शुरू की और मेरे शारीरिक सौष्ठव की तारीफ़ करने लगी और मेरे पास आकर बिल्कुल मुझसे सट कर बैठ गई।
मैने अपना हाथ उनकी जाँघों पर रखा तो वो अचानक चुप हो गई और फिर एक हल्की सी ‘आह’ ली। उसकी साँस फूलने लगी।
मै समझ गया कि लोहा गरम है। मैने कहा:- भाभी:-जी ये दूध तो मैने पी लिया। लेकिन मै और पीना चाहता हूँ।
उसने अपनी आँखें बन्द करते हुए कहा:- आकाश। जो पीना है पी लो। सब कुछ तुम्हारा है। लेकिन ध्यान रखना मुझे भी दूध के बदले में अच्छी मलाई मिले…
अब सब कुछ साफ़ हो गया था।
मैने कहा:- जान। ऐसी मलाई खिलाऊँगा कि मज़ा आ जाएगा।
अब मै उसे चुम्बन करने लगा। वो मदमस्त हो गई और मेरी टी:-शर्ट फाड़ने लगी।
मैने उसे रोका और अपनी टी:-शर्ट उतार दी।
उसने भी अपनी टी:-शर्ट उतारी। लाल ब्रा में गोरे:-गोरे मम्मे। आह्ह। कहर ढा रहे थे।
मेरा लौड़ा तो मस्त हुआ जा रहा था।
उसने कहा:- उसकी ब्रा में से वीर्य की जो गन्ध आ रही है। क्या वो तुम्हारी है?
मैने ‘हाँ’ में सर हिला दिया।
उसने कहा:- यार जब मेरी चुत तुम्हारे लिए खुली पड़ी है। तो मुठ क्यों मारते हो?
मैने कहा:- अब मुठ नहीं मारूँगा। अब तो मेरा लौड़ा सिर्फ़ तेरा है…
यह कहते हुए मैने अपने अंडरवियर को भी उतार दिया।
वो एक पागल औरत की तरह लपकी और मेरा लौड़ा अपने मुँह में भर कर चुसाई करने लगी।
ओह। ये तो स्नेहा से भी अच्छा चूसती है। मेरा पूरा लौड़ा उसके थूक से गीला हो चुका था।
मैने उसकी ब्रा उतार दी। मेरा लौड़ा चूसते हुए उसके 36 इंच के थन आगे:-पीछे हो रहे थे।
उसके मम्मे इतने मुलायम थे कि उन्हें दबाने भर से ही मेरे लौड़ा की हरकत और तेज़ हो जाती।
थोड़ी देर बाद मैने उसे उठाया और उसी बिस्तर पर लिटा दिया।

उसकी सफ़ेद लैगीज उतारी तो देखा कि उसने नीचे कुछ नहीं पहना था।
मैने उसकी चुत पर अपना हाथ मला और हैरत में रह गया कि दो महीने हो गए थे उसकी शादी को।

लेकिन अभी भी चुत काफ़ी टाइट लग रही थी।
मैने उसकी चुत पर अपनी जीभ टिका दी और चुत चटाई शुरू कर दी।
कुछ देर बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैने उसकी चुत के कोरेपन के बारे में पूछा तो उसने कहा:- अभी बात मत करो। बस चाटते रहो।
चाटते:-चाटते उसकी चुत गुलाबी से लाल हो गई थी।
मैने चाहते हुए भी कहीं कट्टू नहीं किया क्यूंकि इससे उसके पति को पता चल सकता था।
अब वो बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी और अपने नाखून मेरी पीठ और चुतड़ों पर गड़ा रही थी।
वो काम की मस्ती में एक अजीब से नशे में बोल रही थी:- कम ऑन हेमन्त। आई एम लविंग इट। ये तो मेरी फ़ुद्दी को चाटते ही नहीं। और न ही लौड़ा चूसने देते हैं… मै बहुत प्यासी हूँ… प्लीज़ जीब घुसाओ न। और थोड़ी अन्दर। और आह। आहा। आह। और ज़ोर से। सक्क माई पुसी। स्क्क मी। रूको मत और ज़ोर से। कम ऑन। इस्स…”
और इस लम्बे सीत्कार के साथ ही उसने अपना सारा पानी मेरे मुँह पर छोड़ दिया और निढाल होकर लेट गई।
मैने उसे उल्टा कर उसके चुतड़ों पर 3:-4 चपतें मारीं और कहा:- उठ साली कुतिया। खुद ठंडी हो कर सो गई और जो ये लौड़ा खड़ा किया है। उसका क्या। इसकी प्यास कौन मिटाएगा?
वो हँसने लगी और बोली:- अच्छा जी। तो अब मै भाभी:-जी से कुतिया हो गई। खैर कोई बात नहीं भाभी:-जीचोद बोल ले। तूने मुझे वो दिया है जिसके लिए मै बहुत दिनों से तड़प रही थी। इतने दिनों बाद आज मस्त मजा आया है। तू टेन्शन मत ले। इस लौड़ा की प्यास मै ही मिटाऊँगी। बस एक बार मूत लेने दे…
वो मूतने के लिए बाथरूम चली गई।
मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था… मै भी बाथरूम में चला गया और उसे देखने लगा। जैसे ही उसने हाथ धोए। मैने उसे पकड़ लिया और उसके मम्मे दबाने लगा।
अब वो वापिस मूड में आ रही थी और मेरे बालों में हाथ फेरने लगी।
फिर अचानक भाग कर बिस्तर पर लेट गई।
उसने अपनी दोनों टाँगें हवा में उठा लीं। मैने उसकी गाण्ड के नीचे एक तकिया रखा।
वो बोली:- अब आजा कुत्ते। तेरी कुतिया की चुत। तेरे लौड़ा के लिए तरस रही है।
मै उसके मुँह से गालियाँ सुन कर हैरान था।

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लेकिन मुझे चुदाई करते वक्त गाली देना अच्छा लगता है।
मैने पूछा:- कन्डोम कहाँ है?
उसने कहा:- बिस्तर की दराज में ड्यूरेक्स का फैमिली पैक पड़ा है… ले ले…।

  • उसकी टाँगें अब भी हवा में थीं।
  • मैने लौड़ा पर कन्डोम चढ़ाया और उसकी चुत पर रख दिया।
  • मै उसके मम्मे दबाने लगा। तो लौड़ा का टोपा उसकी चुत से रगड़ खा रहा था।
  • उसने शरीर काँप रहा था। उसने कहा:- और मत तड़पा अपना भाभी:-जी को… पेल दे। अब बर्दाश्त नहीं होता…

मैने निशाना लगाया और धक्का दिया। तो लौड़ा का टोपा अन्दर चला गया।
उसने चादर को कस कर पकड़ लिया और अपने होंठ कस कर बंद कर लिए।
मै समझ गया कि उसे दर्द हो रहा है। लेकिन मैने एक और झटका मारा और सारा का सारा लौड़ा उसकी चुत की हर दीवार को तोड़ते हुए अन्दर घुसता चला गया।
मै तो मानो जन्नत में था।

उसकी चुत स्नेहा की चुत की तरह ही कसी हुई थी।
उसे दर्द हो रहा था। लेकिन वो तैयार थी। मैने अन्दर:-बाहर करना शुरू किया।
कुछ देर बाद वो भी साथ देने लगी और ‘आ। आ।’ करने लगी।
मैने रफ़्तार बढ़ा दी।

वो अपनी गाण्ड उठा:-उठा कर मेरा साथ दे रही थी।

मैने उसकी गाण्ड से भी खेलना शुरू कर दिया और उसकी गाण्ड में ऊँगली डालने लगा। लेकिन वो तो हद से ज़्यादा टाइट थी।

मैने वापिस चुत को ज़ोर:-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।
वो बोली:- धीरे। आकाश धीरे। चोद रहा है। या खोद रहा है। मै कोई रंडी नहीं हूँ। तेरी भाभी:-जी हूँ। आराम से कर। रात को राकेश ने भी लेनी है। मै तो मर ही जाऊँगी।
मैने कहा:- चुप कर साली। मेरे लिए तो तू रंडी ही है… अब से तू मेरी रंडी है। जब मेरे मन करेगा। मै तुझे रंडी की तरह चोदने आ जाया करूँगा। वैसे भी स्नेहा से मेरा मन भर रहा है…
उसने कहा:- इसका मतलब स्नेहा की भी लेते हो…
मैने उसे डांटते हुए कहा:- हाँ। और ज़्यादा दिमाग़ मत लगा कुतिया। अपनी गाण्ड उठा। मै झड़ने वाला हूँ। बोल कहाँ लेगी मेरा वीर्य।
उसने कहा:- मलाई तो मेरी है मेरे मुँह में आजा मेरे राजा।
मै बहुत रफ़्तार से उसे चोद रहा था। वो एक बार और झड़ चुकी थी और उसकी चिकनाई से पूरे कमरे में ‘छाप। छाप। छाप।’ की आवाज़ें गूँज रही थीं।
मैने लौड़ा को चुत से बाहर निकाला। चुत एकदम से फूल गई थी और चुत के होंठ खुले पड़े थे।
मैने कन्डोम उतारा और उसके मुँह में अपने लण्ड पेलने लगा।
वो भी पूरी मस्ती से मेरा लौड़ा चूस रही थी। फिर मेरा शरीर अकड़ने लगा मैने उसका सर अपने लौड़ा पर खींच लिया और एक जोरदार शॉट के साथ अपनी सारी मलाई उसके मुँह में डाल दी।
उसने एक बूंद भी बाहर नहीं छोड़ा और सारी मलाई पी गई।
उसके बाद भी उसने तब तक लौड़ा को चाटना बन्द नहीं किया जब तक कि वो वापिस नहीं सो गया।
फिर हम दोनों कुछ देर के लिए वहीं सो गए।
बाद में मै अपने कमरे में चला गया। अब भाभी:-जी मेरे लौड़े के लिए नया आइटम बन गई थी।
इसके बाद मै अगली बार भाभी:-जी की गांड मारने की कहानी को भी लिखने वाला हूँ।

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