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मस्त नगमा भाग -1 (hot sex kahani)

Hot sex kahani
मै Rd, उम्र 44 साल, अविवाहित पर चुदाई का मजा लेने मे खूब उस्ताद. मेरी इस कहानी मे जो लड़की है उसका नाम है:- नगमा खान.

वो मेरे एक दोस्त प्रोफ़ेसर रामिल खान की बेटी है.
नगमा के पिता और मै दोनों कॉलेज के दिनों से दोस्त हैं. उनकी शादी एम.ए. करते समय हीं हो गई.

मेरी भाभी जी यानि उनकी बेगम रिश्ते मे मौसेरी बहन थी.
खैर मै तो नगमा के बारे मे कहने वाला हूं उसके माँ:-बाप मे तो शायद ही आप:-लोगों को रुचि हो.
नगमा 18 साल की बी कॉम प्रथम वर्ष की छात्रा है, बहुत सुन्दर चेहरे की मालकिन है. एकदम गोरी, 5’5′ लम्बी, पतली छरहरी काया, लहराती:-बलखाती जब वो सामने से चलती तो मेरे दिल मे एक हूक सी उठती.

मेरे जैसे चुतखोर मर्द के लिए उसका बदन एक पहेली था, कैसी लगेगी बिना कपड़ों के नगमा?
तब मै भूल जाता कि वो मेरे गोद मे खेली है, उसके बदन को जवान होते मैने देखा है. उसकी बूब नींबू से छोटे सेब, संतरा, अनार होते देखा है, महसूस किया है.

सोच:-सोच कर मैने पचासों बार अपना लंड झाड़ा होगा पर उसका मुझे चाचा कहना, मुझे रोक देता था कुछ भी करने से. उसके दिल की बात मुझे पता नहीं थी न.

वैसे नगमा का चक्कर दो:-तीन लड़कों से चला था, घर पर उसे खूब डाँट भी पड़ी थी, पर उन लोगों ने हद पार की थी या नहीं मुझे पता न चल पाया.
और जब भी मेरे दोस्त और भाभी जी ने इस बात की चर्चा की, तब उनके भाषा से मुझे कुछ समझ नहीं आया.
और एक बार। भगवान की दया से कुछ ऐसा हुआ कि।
हुआ यह कि नगमा के नाना की तबियत खराब होने की खबर आई और नगमा के अम्मी:-अब्बा को उसके ननिहाल मेरठ जाना पड़ा.

नगमा की पढ़ाई चलते रहने की वजह से वो उसको नहीं ले जा सके.

उनके घर मे नीचे के हिस्से मे जो किरायेदार थे वो भी अपने गाँव गए हुए थे, सो नगमा को अकेला वहाँ न छोड़, उन लोगों ने उसको एक सप्ताह मेरे साथ रहने को कहा.

असल मे यह प्रस्ताव मैने ही उन लोगों को परेशान देख कर दिया था. वो तुरंत मान गए.
मेरे दोस्त ने तब कहा भी कि यार मै भी यही सोच रहा था पर तुम अकेले रहते हो, लगा कहीं तुम्हें कोई परेशानी ना हो.
बातचीत करते हुए जमील ने हल्की आवाज मे बताया कि एक बार पहले भी वो नगमा को अकेले तीन दिन के लिए छोड़े थे तो आने पर किरायेदार से पता चला कि दो दिन लगातार नगमा के साथ कोई लड़का रहा था, जो उसके साथ स्कूल मे पढ़ता था, अब कहीं इंजीनियरिंग पढ़ रहा है.
वो अपनी परेशानी मुझे बता रहा था और मै सोच रहा था कि जब नगमा अपने घर पर एक लड़के को माँ:-बाप के नहीं रहने पर रख सकती है, तो घर के बाहर तो वो जरूर ही चुदवाती होगी.
खैर! अगले दिन सुबह कोई 7 बजे वो लोग नगमा को मेरे अपार्ट्मेट पर छोड़ने आए, चाय पी और मेरठ चले गये. नगमा तब अपने स्लीपिंग ड्रेस मे ही थी:- एक ढ़ीली सा कैप्री और काला गोल गले का टी:-शर्ट.
उसको को नौ बजे कॉलेज जाना था, दो घंटे के लिए.
मेरी नौकरानी नाश्ता बना रही थी, जब नगमा किचन मे जाकर उससे पूछने लगी:- साबुन कहाँ है?
असल मे अकेले रहने के कारण मेरे कमरे के बाथरूम मे तो सब था पर दूसरे कमरे, जिसमे नगमा का सामान रखा गया था, वह बाथरूम कपड़े धोने के लिए ही इस्तेमाल होता था.
मैने तभी कहा:- नगमा, तुम मेरे कमरे का बाथरूम प्रयोग कर लो, मुझे नहाने मे अभी समय है.
और नगमा अपन कपड़े लेकर मुस्कुराते हुए चली गई. मै बाहर वाले कमरे मे अखबार पढ़ रहा था, जब नगमा तैयार हो, नाश्ता करके आई, बोली:- चाचा, मै करीब बारह बजे लौटूँगी, तब तो घर बंद रहेगा?
मैने उसके भीगे बालों से घिरे सुन्दर से चेहरे को देखते हुए कहा:- परेशान होने की कोई बात नहीं है, तुम एक चाबी रख लो!
और मैने नौकरानी से चाबी ले कर उसको दे दी. (मैने एक चाबी उसको इसलिए दी थी कि वो शाम को आ कर काम कर जाए और मेरा खाना पका जाए) साथ ही नौकरानी को शाम की छुट्टी कर दी कि शाम को हम लोग होटल मे खाना खा लेंगे.

थोड़ी देर मे नकरानी भी काम निपटा कर चली गई, और मै तैयार होने बाथरूम मे आया.
और.
बाथरूम मे नगमा की कैप्री और टी:-शर्ट खूँटी से टंगी थी और नीचे गीली जमीन पर नगमा की ब्रा:-पैन्टी पड़ी थी. ऐसा लग रहा था कि उसने उन्हें धोया तो है, पर सूखने के लिए डालना भूल गई. मेरे लन्ड मे सुरसुरी जगने लगी थी.
मैने उसके अन्तर्वस्त्र उठा लिए और उनका मुआयना शुरु कर दिया. सफ़ेद ब्रा का टैग देखा:-लवेबल 32 बी. सोचिए, 5’5′ की नगमा कितनी दुबली:-पतली है.
मैने अब उसकी पैन्टी को सीधा फ़ैला दिया.

वो एक पुरानी पन्टी थी:- रुपा सॉफ़्ट्लाईन 32 नम्बर।

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इतनी पुरानी थी कि उसके किनारे पर लगे लेस उघड़ने लगे थे और वो बीच से हल्का:-हल्का घिस कर फ़टना शुरु कर चुकी थी. मैने उसे सूँघा, पर उसमे से साबुन की ही खुशबू आई.
फ़िर भी मैने ऐसे तो कई बार उसके नाम की मुठ मारी थी, पर आज उसकी पैन्टी से लन्ड रगड़:-रगड़ कर मुठ मारी और अपना माल उसके पैन्टी के घिसे हुए हिस्से पर निकाला और फ़िर बिना धोये ही पैन्टी:-ब्रा को सूखने के लिए डाल दिया.
मेरे दिमाग मे अब ख्याल आने लगा कि एक बार कोशिश कर के देख लूँ, शायद नगमा पट जाए. पर मुझे अब देर हो रही थी सो मै जल्दी:-जल्दी तैयार हो कर निकल गया.
शाम को करीब सात बजे मै घर आया, नगमा बैठ कर टीवी देख रही थी. उसने ही मुझे चाय बना कर दी.
हम दोनों साथ चाय पी रहे थे, जब मैने कहा:- तैयार हो जाओ नगमा, आज बाहर ही खाएंगे!
खुशी उसके चेहरे पर झलक गई और मै उसके उस सलोने से चेहरे से नजर हटा न पाया.
हम लोग इधर:-उधर की बात कर रहे थे, तभी उसे ख्याल आया, बोली:- सॉरी चाचा, आज आपके बाथरूम मे गलती से मेरे कपड़े रह गए. असल मे मेरे जाने के बाद अम्मी जब सारे घर को ठीक करती है, तो वो यह सब भी कर देती है. कल से ऐसा नहीं होगा.
उसके चेहरे पे सारी दुनिया की मासूमियत थी.
मैने भी प्यार से कहा:- अरे, कोई बात नहीं बेटा, मुझे कोई परेशानी नहीं हुई. तुम तो धो कर गई ही थी, मैने तो सिर्फ़ सूखने के लिए तार पर डाल दिया.
फ़िर थोड़ी शरारत मन मे आई तो कह दिया:- वैसे भी तुम तो खुद दस किलो की हो, तो तुम्हारी ब्रा:-पैन्टी तो 10 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए न. उसको सूखने डालने मे कोई मेहनत तो करना नहीं पड़ा मुझे.
उसने अपनी बड़ी:-बड़ी आँखों को गोल:-गोल नचाया:- पूरे 41 किलो हूं मै!
मैने तड़ से जड़ दिया:- ठीक है, फ़िर तो मै सुधार कर देता हूं, फ़िर 41 ग्राम होगी ब्रा:-पैन्टी?
वो मुस्कुरा कर बोली:- मेरा मजाक बना रहे हैं, मै तैयार होने जा रही हूं.
और वो अपने कमरे मे चली गई, मै अपने कमरे मे.
कोई आधे घण्टे बाद हम घर से निकले. नगमा ने एक गहरे हरे रंग की कैप्री और गुलाबी टॉप पहनी थी. बालों को थोड़ा ऊपर उठा पैनीटेल बनाया था, पैर मे बिना मोजा रीबॉक के जूते.
मै उसकी खूबसूरती पर मुग्ध था.
हम लोग पैदल ही एक घण्टा घूमे और फ़िर करीब नौ बजे एक चाईनीज रेस्तराँ मे खाना खाकर दस बजे तक घर आ गए. थोड़ी देर टीवी देखने के बाद करीब 11 बजे नगमा अपने कमरा मे और मै अपने कमरा मे सोने चले गए. नगमा के बारे मे सोचते सोचते बड़ी देर बाद मुझे नींद आई.
अगले दिन करीब छः बजे नगमा ने मुझे जगाया, वो सामने चाय लेकर खड़ी थी. मेरे दिमाग मे पहला ख्याल आया कि आज का दिन अच्छा हो गया, उसकी सलोनी सूरत देख कर.
हमने साथ चाय पी. वो तब मेरे बिस्तर पे बैठी थी. उसने एक नाईटी पहनी हुई थी जो उसके घुटने से थोड़ा नीचे तक थी. रेडीमेड होने के कारण थोड़ा लूज थी, और उसके ब्रा के स्टैप्स दिख रहे थे. आज उसे साढ़े आठ बजे निकलना था, सो वो बोली:-‘आप बाथरूम से हो लीजिए, तब मै भी नहा लूँगी, आज थोड़ा पहले जाना है.
मै जब बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि उसने मेरा बिस्तर ठीक कर दिया है और अपने कपड़े हाथ मे लेकर मेरे बेड पर बैठी है.
जब वो बाथरूम की तरफ़ जाने लगी तब मैने छेड़ते हुए कहा:- आज भी अपना 41 ग्राम छोड़ देना.
वो यह सुन जोर से बोली:- छीः! और हल्के से हँसते हुए बाथरूम का दरवाजा बन्द कर लिया.
मै बाहर बैठ पेपर पढ़ रहा था, जब वो बोली:-‘मै जा रही हूं चाचू, करीब एक बजे लौटूँगी, मेरा लंच बनवा दीजिएगा, नस्ता मै कैंटीन मे कर लूँगी.
मै उसको कसे पीले सलवार कुर्ते मे जाते देखता रहा, जब तक वो दिखती रही. उसकी सुन्दर सी गांड हल्के हल्के मटक रही थी.
थोड़ी देर मे मेरी नौकरानी मैरी आ गई और अपना काम करने लगी, मै भी तैयार होने बाथरूम मे आ गया.

मुझे थोड़ा शक था कि आज शायद मुझे ब्रा:-पैन्टी ना दिखे, पर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा जब मैने देखा कि आज फ़िर उसने अपनी ब्रा:-पैन्टी धो कर कल की तरह ही जमीन पर छोड़ दी है.

कल शायद उससे गलती से छूट गया था, पर आज के लिए मै पक्का था कि उसने जान:-बूझ कर छोड़ा है.

मुझे लगने लगा कि यह साली पट सकती है.
मैने आज फ़िर उसकी पैन्टी लंड पे लपेट मूठ मारी और माल उसके पैन्टी मे डाल दिया. यह वाली पैन्टी कल वाली से भी पुरानी थी, और उसमे भी दो:-एक छोटे छेद थे. पर मुझे मजा आया. मैने अपने माल से लिपटी पैन्टी को ब्रा के साथ सूखने को डाल दिया.
शाम को मुझे आने मे थोड़ी देर हो गई, मैरी हम दोनों का खाना बना कर जा चुकी थी. मै जब आया तो नगमा ने चाय बनाई और हम दोनों गपशप करते हुए चाय पीने लगे.
नगमा ने ही बात छेड़ दी:- आज फ़िर आपको मजा आया मेरी सेवा करके?

मै समझ न सका तो उसने कहा:- वही 41 ग्राम, सुबह! और मुस्कुराई.
मैने भी कहा:- हाँ, मजा तो खूब आया पर नगमा, इतने पुराने कपड़े मत पहना करो, फ़टे कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता.
वो समझ गई, बोली:- ठीक है चाचू, आगे से ख्याल रखूँगी.
मैने देखा कि बात सही दिशा मे है तो आगे कहा:- अच्छा नगमा, थोड़ा अपने निजी जीवन के बारे मे बताओ. जमील कह रहा था कि तुम्हारा किसी लड़के के साथ चक्कर था. अगर न बताना चाहो तो मना कर दो.
वो थोड़ी देर चुप रही, फ़िर उसने रेहान के बारे मे कहा, जो उसके साथ स्कूल मे 5 साल पढ़ा था, दोनों अच्छे दोस्त थे पर ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको इतना डाँटा जाए, रेहान तो फ़िर उस डाँट के बाद कभी मिला भी नहीं. अब तो वो उसको अपना पहला क्रश मानती थी.
मैने तब साफ़ पूछ लिया:- क्यों, क्या चुदाई:-उदाई नहीं किया उसके साथ?
वो अपने गोल:-गोल आँख घुमा कर बोली:- छीः, क्या मै आपको इतनी गन्दी लड़की लगती हूं, रेहान मेरा पहला प्यार था, अब कुछ नहीं है!
मैने मूड को हल्का करने के लिए कहा:- अरे नहीं बेटी तुम और गन्दी, कभी नहीं, हाँ थोड़ी शरारती जरूर हो, बदमाश जो अपनी ब्रा:-पैन्टी अपने चाचू से साफ़ करवाती हो.
वो बोली:- गलत चाचू! साफ़ तो खुद करती हूं, आप तो सिर्फ़ सूखने को डालते हो.
हम दोनों हँसने लगे.
फ़िर खाना खा कर टहलने निकल गए. बातों बातों मे वो अपने कॉलेज के बारे मे तरह तरह की बात बता रही थी और मै उसके साथ का मजा ले रहा था.
तीसरे दिन भी सुबह नगमा के चेहरे पर नजर डाल कर ही शुरु हुई. उस दिन मैरी थोड़ा सवेरे आ गई थी, नगमा का नाश्ता बना रही थी. मै भी अपने औफ़िस के काम मे थोड़ा व्यस्त था कि नगमा तैयार हो कर आई.
मैन घड़ी देखी:- 8:30
नगमा बोली:- चाचू आज भी रख दिया है मैने आपके लिए 41 ग्राम… और आज धोई भी नहीं हैं.
और वो चली गई.
मैने भी अब जल्दी से फ़ाईल समेटी और तैयार होने चला गया.

आज बाथरूम मे थोड़ी चुदाईी किस्म की ब्रा:-पन्टी थी और उससे बड़ी बात कि आज नगमा ने उस पर पानी भी नहीं डाला था.
दोनों एक सेट की थी, गुलाबी लेस की. इतनी मुलायम कि दोनों मेरी एक मुट्ठी मे बन्द हो जाए.
मैने पैन्टी फ़ैलाई:-स्ट्रिन्ग बिकनी स्टाईल की थी. उसके सामने का भाग थोड़ा कम चौड़ा था, करीब 4 इंच और नीचे की तरफ़ पतला होते होते योनि:-स्थल पर दो इंच का हो गया था, फ़िर पीछे की तरफ़ थोड़ा चौड़ा हुआ पर 5 इंच का होते होते कमर के इलास्टिक बैंड मे जा मिला. साईड की तरफ़ से पुरा खुला हुआ, बस आधा इंच से भी कम की इलस्टिक.
मैने प्यार से उस गन्दी पैन्टी का मुआयना किया. चुत के पास हल्का सा एक दाग था, जो बड़े गौर से देखने पर पता चलता, मैने उस धब्बे को सूंघा. हल्की सी खट्टेपन की बू मिली और मेरा लन्ड को सुरूर आने लगा.

मैने प्यार से उसी धब्बे पर अपना लन्ड भिड़ा, पैन्टी को लन्ड पे लपेट मजे से मुठ मारने लगा और सारा माल उसी धब्बे पर निकाला, फ़िर उस पैन्टी:-और ब्रा को सिर्फ़ पानी से धो कर सुखने डाल दिया.
शाम साढ़े सात बजे घर आया, साथ चाय पीने बैठे तो मैने बात छेड़ दी:- आज तो नगमा बेटी, तुमने कमाल कर दिया.
वो कुछ नहीं बोली तो मैने कह दिया:- बिना धुली ब्रा:-पैन्टी से तुम्हारी खुशबू आ रही थी.
वो शर्माने लगी, तो मैने कहा:- सच्ची बोल रहा हूं, मैने सूँघ कर देखा था. तुम्हारे बाप की उम्र का हूं, पर आज वाली 41 ग्राम की खुशबू ने मेरे दिल मे अरमान जगा दिये.
वो थोड़ा असहज दिखी, तो मैने बात थोड़ा बदला:- पर मैने भी दिल पर काबू कर लिया, तुम परेशान न हो.
वो मुस्कुराई, तब मैने कहा:- पर आज वाली तो बहुत चुदाईी थी, अब कल क्या दिखाओगी मुझे?

शाम साढ़े सात बजे घर आया, साथ चाय पीने बैठे तो मैने बात छेड़ दी:- आज तो नगमा बेटी, तुमने कमाल कर दिया.
वो कुछ नहीं बोली तो मैने कह दिया:- बिना धुली ब्रा:-पैन्टी से तुम्हारी खुशबू आ रही थी.
वो शर्माने लगी, तो मैने कहा:- सच्ची बोल रहा हूं, मैने सूँघ कर देखा था. तुम्हारे बाप की उम्र का हूं, पर आज वाली 41 ग्राम की खुशबू

ने मेरे दिल मे अरमान जगा दिये.
वो थोड़ा असहज दिखी, तो मैने बात थोड़ा बदला:- पर मैने भी दिल पर काबू कर लिया, तुम परेशान न हो.
वो मुस्कुराई, तब मैने कहा:- पर आज वाली तो बहुत चुदाईी थी, अब कल क्या दिखाओगी मुझे?
वो मुस्कुराई:- कल 30 ग्राम मिलेगा.
मै:- क्यों?
वो बोली:- क्योंकि आज मैने नीचे पहनी ही नहीं है. वो दोनों पुरानी वाली पहननी नहीं थी और ये वाली तो आज धुली है, कल पहनूँगी.
मैने कहा:- ऐसी बात है तो चल आज ही खरीद कर लाते हैं. मैने आज तक कभी लेडीज पैन्टी नहीं खरीदी, आज यह भी कर लेते हैं.
वो थोड़ा सकुचाई तो मैने उसको हाथ पकड़ कर उठा दिया, बोला:- जल्दी तैयार हो जाओ.
मै तब जींस और टीशर्ट मे था, और वो अपने नाईटी मे.

वो दो मिनट मे चेंज करके आ गई:- नीले स्कर्ट और पीले टॉप मे वो जान:-मारू दिख रही थी.
उसने आते हुए कहा:- स्कर्ट मे सुविधा होगी, एक तो वहीं पहन लूँगी, और एक और ले लूंगी.
बहुत मस्त लौन्डिया थी वो. मेरे जैसे मर्द को टीज करना खूब जानती थी.
जब भी मै ये सोचता कि साली नंगी चुत ले कर बाजार मे है, मेरे दिल से एक हूक सी निकल जाती.
हम एक लेडीज अंडरगार्मेट्स स्टोर मे गए. मेरे लिए यह पहला अनुभव था. दो:-तीन और लेडीज ग्राहक थीं.

हमारे पास एक करीब 28:-30 साल की एक सेल्सगर्ल आई तो मैने उसे एक ब्र:-पैन्टी सेट दिखाने को कहा.
क्या साईज? और कोई खास स्टाईल? कहते हुए उसने एक कैटेलॉग हमे थमा दिया.
एक से एक मस्त माल की फ़ोटो थी, तरह तरह की ब्रा:-पैन्टी मे. मै फ़ोटो देखने मे व्यस्त हो चुका था कि नगमा बोली:- सिर्फ़ पैन्टी लेते हैं ना.
मैने नजर कैटेलग पर ही रखते हुए कहा:- एक इसमे से ले लो, फ़िर दो:-तीन पैन्टी ले लेना.

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