मस्त नगमा – भाग 2 (very hot sex kahani)

है मैने नजर कैटेलग पर तो ही रखते हुए एकदम से कहा:- एक इसमे से ले लो जल्दी से, फ़िर दो:-तीन पैन्टी भी ले लेना.
सेल्सगर्ल ने फिर पूछा:-‘क्या इनके के लिए लेना है या फिर मैडम जी के लिए?  तब मैने नगमा की तरफ़ इशारा कर दिया.
वो मुस्कुराते हुए बोली:- किस टाईप का दूँ, थोड़ी चुदाईी, हॉट या सॉबर?
मैने जब उसे थोड़ा चुदाईी टाईप दिखाने को बोला तो वो मुस्कुराई. वो समझ रही थी कि मै उस हूर के साथ लंपटगिरी कर रहा हूं.
उसने कुछ बहुत ही मस्त सेट निकल दिए. एक तो बस सिर्फ़ पैन्टी के नाम पर 2’ का सफ़ेद पारदर्शी जाली थी ब्रा भी ऐसा कि जितना छुपाती नहीं उतना दिखाती. मुझ वो ही खरीदने का मन हुआ, पर नगमा ने एक दूसरा पसंद किया.
जब मैने कहा कि एक वह चुदाईी टाईप ले कर देखे, तो वो बोली:- नहीं, पर अगर आपका मन है तो सिर्फ़ पैन्टी मे ऐसा कुछ देख लेंगे, पैसा भी कम लगेगा.
नगमा की पसंद की पैन्टी उसकी चुदाईी पैन्टी से थोड़ी और छोटी थी. चुतड़ तो लगभग 90% बाहर ही रहता, पर योनि ठीक ठाक से ढक जाती.

उसने उसका चटख लाल रंग पसंद किया.
फ़िर उसने हेन्स की स्ट्रींग बिकनी पैन्टी माँगी, तो सेल्सगर्ल ने एक 3 का सेट दिया.

अब मैने उस चुदाईी पैन्टी के बारे मे कहा और जोर दे कर एक सफ़ेद और एक काली पैन्टी खरीद ली.

नगमा ने हेन्स की एक पैन्टी पैक से निकाली और ट्रायल कमरा मे चली गई और पहन ली.
सामान पैक करते समय सेल्सगर्ल ने नगमा से उसकी पुरानी पैन्टी के बारे मे पूछा तो नगमा ने कहा:- इट्स ओ के ! आई हैडन्ट बीन वीयरिन्ग एनी !
(सब ठीक है, मैने नहीं पहना हुआ था)
सेल्सगर्ल ने भी चुटकी ली:- आजकल के बच्चे भी ना…? इस तरह बिना चड्डी बाजार मे निकल लेते हैं.
दुकान पर मौजूद तीनों सेल्सगर्ल और मै भी हँस दिया और नगमा झेंप गई.
अगले दिन सुबह चाय पीते हुए मैने कहा:- नगमा, अब आज का दिन मेरा कैसे अच्छा बीतेगा, आज तो 30 ग्राम ही मुझे मिलेगा.
वो मुस्कुराई और बोली:- सब ठीक हो जायेगा, फ़िक्र नॉट.
जब वो जाने लगी तो मुझे बोली:- चाचू, जरा अपने कमरे मे चलिए, एक बात है.
मुझे लगा कि वह शायद कुछ कहेगी पर वो कमरे मे मुझे लाई और मुझे बिस्तर पर बिठा दिया, फ़िर एक झटके मे अपनी जीन्स के बटन खोल कर उसे घुटने तक नीचे कर दिया, बोली:- देख कर आज का दिन ठीक कर लीजिए.
उसके बदन पर वही चुदाईी वाली सफ़ेद पैन्टी थी, उसकी त्रिभुजाकार सफ़ेद पट्टी से उसकी बुर एकदम से ढकी हुई थी, पर सिर्फ़ बुर ही, बाकी उस पैन्टी मे कुछ था ही नहीं सिवाय डोरी के ! उसकी जाँघ, चुतड़ सब बिल्कुल अनावृत थे एकदम साफ़ गोरे, दमकते हुए, झाँट की झलक तक नहीं थी.
मेरा गला सूख रहा था. वो 20:-25 सेकेन्ड वैसे रही फ़िर अपना जीन्स उपर कर ली, और मुस्कुराते हुए बाय कह बाहर निकल गई.

मैने वहीं बिस्तर पर बैठे:-बैठे मुठ मारी, यह भी भूल गया कि मैरी घर मे है.
उस दिन बाथरूम मे मुझे पता चला कि आज मेरे ही रेजर से नगमा झाँट साफ़ की थी, और अपने झाँट के बालों को वाश बेसिन पर ही रख छोड़ा है. दो इन्च की उसकी झाँट के काफ़ी बाल मुझे मिल गये, जिन्हें मैने कागज मे समेट कर रख लिया.

मैने फ़िर मुठ मारी.
शाम की चाय पीते हुए मैने बात शुरु किया:- बेटा, आज मेरे लिए पैन्टी नहीं थी तो तुमने मेरे लिए रेजर साफ़ करने का काम छोड़ दिया !

मेरे चेहरे पर हल्की हँसी थी.
वो शरमा गई.
तब मैने कहा:- किस स्टाईल मे शेव की है?

उसके चेहरे के भाव बदले, बोली:- मतलब?
मैने आगे कहा:- मतलब किस स्टाईल मे अपने बाल साफ़ किए हैं?
उसे समझ नहीं आया तो बोली:- अब इसमे स्टाईल की क्या बात है, बस साफ़ कर दी.
मैने अब आँख मारी:- पूरी ही साफ़ कर दी?
वो अब थोड़ा बोल्ड बन कर बोली:- और नहीं तो क्या, आधा करती? कैसा गन्दा लगता.
मैने सब समझ गया, कहा:- अरे नहीं बाबा, तुम समझ नहीं रही हो, लड़कियाँ अपने इन बालों को कई तरीके से सजा कर साफ़ करती हैं !
उसके लिए यह एक नई बात थी, पूछने लगी:- कैसे?
तब मैने उसको बताया कि झाँटों को कैसे अलग अलग स्टाईल मे बनाया जाता है, जैसे लैंडिन्ग स्ट्रीप, ट्रायन्गल, हिटलर मुश्टैश, बाल्ड, थ्रेड, हार्ट… आदि.

उसके लिए ये सब बातें अजूबा थीं, बोली:- मुझे नहीं पता ये सब ! मै तो जब भी करती हूं, हमेशा ऐसे ही पूरी ही साफ़ करती रही हूं. अभी दो महीने बाद किए हैं आज ! इतनी बड़ी:-बड़ी हो गई थी. अम्मी को पता चल जाए तो मुझे बहुत डाँटती, वो तो जबरदस्ती बचपन मे मेरा 15:-18 दिन पर साफ़ कर देती थी. वो तो खुद सप्ताह मे दो दिन साफ़ करती हैं अभी भी.
मैने भी हाँ मे हाँ मिलाई:- हाँ, सच बहुत बड़ी थी, दो इन्च के तो मै अपने नहीं होने देता, जबकि मै मर्द हूं.
मै महीने मे दो:-एक बार काल:-गर्ल घर लाता था. इसके लिए मै एक दलाल राजेन्दर रोशन की मदद लेता. उसके साथ मेरा 5:-6 साल पुराना रिश्ता था. वो हमेशा मुझे मेरे पसन्द की लड़की भेज देता. अब तो वो भी मेरी पसन्द जान गया था और जब भी कोई नई लड़की मेरे मतलब की उसे मिलती, वो मुझे बता देता.
ऐसे ही उस दिन शाम को हुआ. रोशन का फ़ोन आया करीब आठ बजे, तब मै और नगमा खाना खा रहे थे.
रोशन ने बताया कि एक माल आई है नई उसके पास, 18:-19 साल की. ज्यादा नहीं गई है, घरेलू टाईप है. आज उसकी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट सही आने के बाद वो सुबह मुझे बतायेगा. अगर मै कहूं तो वो कल उसकी पहली बुकिंग मेरे साथ कर देगा.
नगमा को हमारी बात ठीक से समझ मे नहीं आई, और जब उसने पूछा तो मैने सोचा कि अब इस लौन्डिया से सब कह देने से शायद मेरा रास्ता खुले, सो मैने उसको सब कह दिया कि मै कभी:-कभी दलाल के मार्फ़त काल:-गर्ल लाता हूं घर पर ! आज उसी दलाल का फ़ोन आया था, एक नई लड़की के बारे मे.
उसका चेहरा लाल हो गया.

काल:-गर्ल के बारे मे सुन कर नगमा का चेहरा लाल हो गया.
वो चुप:-चाप खाना खाने लगी. फ़िर हम टीवी देखने लगे, वो एक फ़िल्म लगा कर बैठ गई. मुझे लगा कि शायद काल:-गर्ल वाली बात उसे अच्छी नहीं लगी. पर मैने उसे अब नहीं छेड़ा, सोचा देखें अब वो खुद कैसे मुझे मौका देती है.
अगली सुबह फ़िर रोशन का फ़ोन आया. मुझे लगा कि यह शायद ज्यादा हो रहा है, सो मैने रोशन को मना कर दिया. नगमा फ़ोन पर मेरी जो बात हो रही थी, वो सुन रही थी. मेरे फ़ोन काटने पर उसने सब कुछ ठीक से जानना चाहा.
एक बार फ़िर उसकी इच्छा देख मुझे लगा कि बात फ़िर पटरी पर आने लगी है. मै चाहता था कि कैसे भी अब आगे का रास्ता खुले जिससे मै नगमा के मक्खन से बदन का मजा लूँ. पाँच दिन बीत चुके थे और दो:-तीन दिन मे उसके अम्मी:-अब्बू आ जाने वाले थे.
मैने गंभीर बनने की ऐक्टिंग करते हुए कहा:- बुरा मत मानना नगमा ! पर तुम्हें पता है कि मै अकेला हूं, इसलिए अपने जिस्म की जरूरत के लिए एक दलाल सेट किया हुआ है, वो हर महीने 5 और 25 तारीख को मुझे फ़ोन पर पूछता है. मेरा जैसा मूड हो मै उसको बता देता हूं, वो लड़की भेज देता है. अक्सर जैसी फ़र्माईश की जाती है, वो इन्तज़ाम कर देता है.
वो बोली:- प्लीज चाचू, आज बुला लीजिए ना. मैने कभी काल:-गर्ल नहीं देखी.
मैने कहा:- पर मै तो तुम्हारे बारे मे सोच कर मना कर रहा था, तुम क्या समझोगी मुझे अगर मै घर पर लड़की बुला लूँ तब? ना ! यह ठीक नहीं होगा, तुम्हारे रहते !

पर अब वो जिद कर बैठी. शनिवार का दिन था, बोली:- आज कॉलेज नहीं जाउंगी, अगर आपने हाँ नहीं कहा.
करीब एक घण्टे बाद मैने कह दिया:- ठीक है, पर…”
वो तुरन्त मेरा फ़ोन लाई, काल:-बैक किया और स्पीकर ऑन कर के सामने बैठ गई.
मै कह रहा था:- हाँ रोशन, भेज देना आज 8 बजे, कोई ठीक:-ठाक, घरेलू भेजना, पर नई भेजना, रचना या पल्लवी नहीं.
रोशन बोला:- नई वाली सही है सर, रेट थोड़ा ज्यादा लेगी, पर मस्त माल है. आप उसके पहले दस मे ही होंगे. मेरे से पहली बार बुक हो रही है. इसी साल +2 किया है और यहाँ पढ़ाई के लिए इस शहर मे आई तो हॉस्टल से उसको रोजी मेरे पास लाई. दिखने मे टॉप क्लास चीज है सर ! एकदम मस्त सर ! मैने कभी गलत सप्लाई आपको किया आज तक. 34:-23:-36 है सर, एक दम टाईट.
मैने रेट पूछा, तो उसने 6000 कहा, फ़िर 5000 पर बात पक्की हुई.अचानक मुझे थोड़ा मस्ती का मूड हुआ, मैने कहा:- रोशन, कहीं वो छुई:-मुई तो नहीं, जरा उससे बात करवा सकोगे पहले?
वो बोला:- नहीं सर ! घरेलू है, पर मस्त है, खूब मस्ती करती है, एक बार मैने भी चखा है उसको, तभी तो आपको कह रहा हूं. उसको मै आपका नम्बर दे देता हूं.
करीब दस मिनट बाद मेरा फ़ोन बजा, तो मैने स्पीकर ऑन कर के हैलो किया.
उधर से वही लड़की बोली:- जी, मेरा नाम श्वेता है, रोशन साहब ने मुझे आपसे बात करने को कहा है.
मैने गंभीर आवाज मे कहा:- हाँ श्वेता, आज रात तुम्हारी मेरे साथ ही बुकिंग है. असल मे मै तुमसे एक बात जानना चाहता हूं, तुम तो नई हो. रोशन जो पैसे देगा तुमको वो तो ठीक है, पर क्या तुम्हें ऐतराज होगा, अगर मेरे साथ कोई और भी हो तो. मै और पैसे दूंगा.
थोड़ी चुप्पी के बाद बोली:- दो के साथ कभी किया नहीं सर.
मेरे मन मे शैतान घुसा था कि आज जब नगमा साली खुद मुझे रन्डी बुलाने को कह रही है, तब आज उसको दिखाया जाए कि रन्डी चोदी कैसे जाती है.
मै योजना बना रहा था, कहा:- अरे नहीं, वैसा नहीं है, करना तुम्हें मेरे साथ हीं होगा. असल मे एक लड़की मेरे साथ होगी, वो देखेगी सब जो तुम करोगी.
मै यह सब बोलते हुए नगमा की तरफ़ देख रहा था. उसके चेहरे पे सुकून था, जैसे मैने उसके मन की बात की हो.
श्वेता ने अब थोड़ा सहज होकर पूछा:- कोई फ़ोटो:-वोटो नहीं होगा ना?
मैने कहा:- बिल्कुल नहीं”

वो राजी हो गई, फ़िर पूछने लगी:- सर, आपको कोई खास ड्रेस पसंद हो तो?
मैने कहा:-“नहीं, जो तुम्हें सही लगे. और कुछ याद करके पूछा:- श्वेता, बुरा मत मानना, पर तुम्हारी योनि साफ़ है या बाल हैं?
वो बोली:- जी बाल हैं, करीब महीने भर पहले साफ़ किया था, फ़िर अभी तक काम चल रहा है. रोशन सर ने भी कहा कि जब तक कोई आपत्ति ना करे मै ऐसे ही रहने दूँ. आप बोलेंगे तो साफ़ करके आऊँगी.
मैने खुश होकर कहा:- नहीं:-नहीं, तुम जैसी हो, वैसी आना. जरुरत हुई तो यहाँ कर लेंगे.
और फ़ोन बंद कर दिया.
इसके तुरंत बाद जमील का फ़ोन आया कि उन्हें अभी वहाँ दस दिन और रुकना होगा, जब तक ऑपरेशन नहीं हो जाता, नगमा के नाना का.
मेरे लिए यह अच्छा शगुन था. मेरे लिए श्वेता भाग्यदायिनी साबित हुई थी.
मै देख रहा था कि नगमा भी यह सब सुन खुश हो रही है. नगमा सब चुप:-चाप सुन रही थी.
मैने उसकी जाँघ पर हाथ फ़ेरा और कहा:- अब तो खुश हो नगमा ! तुम्हारे मन की ही हो गई.
वो बिना बोले बस मुस्कुरा रही थी.
मैने कहा:- आने दो श्वेता को, आज उसकी लैंडिंग स्ट्रीप स्टाईल मे बना कर बताउँगा. वो भी नई है, थोड़ा सीखेगी मेरे एक्स्पीरियेंस से.
नगमा कॉलेज़ चली गई. मैरी आकर घर का सारा काम कर गई. जाते समय मैने मैरी को शाम को आने को मना कर दिया.
जब नगमा कॉलेज़ से आई तो बहुत खुश दिख रही थी. मैने नगमा को बता दिया कि मैने मैरी को शाम को आने के लिए मना कर दिया था.
फ़िर शाम को वो बोली:- अब खाना बना लेते हैं, दो घण्टे मे तो वो आ जायेगी.
नगमा किचन मे गई, मै टीवी मे व्यस्त हो गया. साढ़े सात तक हमने डिनर कर लिया और बैठ कर श्वेता का इंतजार करने लगे.
8:10 पर काल:-बेल बजी, तो नगमा तुरंत कूद कर दरवाजे तक पहुँची और उसे खोला.
मैने देखा कि एक छरहरे बदन की थोड़ी सांवली लगभग नगमा की लम्बाई की ही लड़की सामने थी.
नगमा ने उसका नाम पूछा और भीतर ले आई.
मैने श्वेता को बैठने को कहा तो वो सामने सोफ़े पर बैठ गई. नगमा अभी भी खड़े होकर उसको घूर ही रही थी.
श्वेता ने चटख पीले रंग का सूती सलवार:-सूट पहना हुआ था, जो उसके बदन पर सही फ़िट था. लौन्डिया 18 की ही लग रही थी, 34:-26:-36 ! मेरी अनुभवी नजरों ने उसका माप ले लिया.
मै अपनी किस्मत पर खुद हैरान था. मेरे पास दो:-दो जवान लौन्डियाँ थी और दोनो बीस बरस से भी कम. श्वेता तो नगमा से भी उमर मे छोटी थी, नगमा ने दो साल पहले इंटर किया था जबकि श्वेता ने इसी साल किया. हाँ, उसका बदन थोड़ा नगमा से ज्यादा भरा था. पर फ़र्क सिर्फ़ उन्नीस:-बीस का ही था.
मैने श्वेता से कहा:- यह नगमा है, यही हमारे साथ मे रहेगी कमरे मे और सब देखेगी.
श्वेता ने अब भरपूर नजर से नगमा को घूरा ऊपर से नीचे तक.
मैने पूछा:- डिनर करके आई हो या करोगी?
उसने कहा:- नहीं, जिस दिन बुकिंग होती है, रात मे नहीं खाती.
श्वेता ने बताया कि वो सिर्फ़ शनिवार को ही रोशन से बुकिंग कराती है, और यह सब थोड़े मजे और थोड़े पैसे के लिए करती है.
बोली:- इजी मनी, यू नो.
मैने उसको 5000 दे दिये और कहा कि ये जो रोशन से बात थी, और फ़िर 2000 उसको देकर कहा:- कि ये उसका अलग से हैं मेरी बात मानने के लिए.
वो संतुष्ट थी, बोली:- एक बारऽऽ सर ! मै बाथरूम जाना चाहूंगी.
मैने कहा:- ठीक है ! थोड़ा साफ़ कर लेना साबुन से, आगे:-पीछे सब !
और मैने उसको आँख मारी ताकि पहली बार की झिझक कम हो. मुझे उसके चेहरे से लग रहा था कि वो सही मे नई थी. मैने नगमा को उसे पानी पिलाने को कहा और वो पानी लेने चली गई. पानी पीकर श्वेता ने अपना दुपट्टा सोफ़े पर डाला और नगमा से पूछा:- बाथरूम…?
करीब दस मिनट बाद वो आई और कहा:- मै तैयार हूं, किस कमरे मे ऽऽ ?
हम सब मेरे बेडरूम मे आ गए, तब श्वेता ने पूछा:- मै खुद कपड़े उतारूँ या आप दोनों मे से कोई?
मै नगमा की तरफ़ देख रहा था कि उसका क्या मिजाज है. उसे लगा कि मै शायद उसको कह रहा हूं कि वो कपड़े उतारे, इसलिए वो श्वेता की तरफ़ बढ़ गई.
श्वेता ने उसकी तरफ़ अपनी पीठ कर दी. जब नगमा उसके कुर्ते की जीप नीचे कर रही थी, श्वेता ने नगमा से हल्के से पूछा:- ये आपके पापा है?

हम सब मेरे बेडरूम मे आ गए, तब श्वेता ने पूछा:- मै खुद कपड़े उतारूँ या आप दोनों मे से कोई?
मै नगमा की तरफ़ देख रहा था कि उसका क्या मिजाज है. उसे लगा कि मै शायद उसको कह रहा हूं कि वो कपड़े उतारे, इसलिए वो श्वेता की तरफ़ बढ़ गई.
श्वेता ने उसकी तरफ़ अपनी पीठ कर दी. जब नगमा उसके कुर्ते की जीप नीचे कर रही थी, श्वेता ने नगमा से हल्के से पूछा:- ये आपके पापा है?

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