मस्त नगमा – भाग 3 (very hot sex kahani)

झटके से नगमा भी एकदम सिटपिटा गई.
उसे मैन उसके परेशान होने से बचाने के लिए मैने कुछ कहा:- नहीं ! नगमा मेरे दोस्त की बेटी है, अभी मेरे साथ रहेगी. इसका ही मन था कि वो एक बार यह सब देखे.
श्वेता के मुंह से एक हल्का सा सॉरी निकला.
नगमा ने उसकी कुर्ते को खोलने के बाद उसकी शमीज (स्लीप) भी निकाल दी. श्वेता काले रंग की एक साटन ब्रा पहने थी. श्वेता का सपाट पेट देख मै मस्त हो रहा था. बूब्स भी मस्त थी, एक दम ठोस ! 18 साल की लड़की की जैसी होनी चाहिए. मै उसकी गदराई जवानी को घूर रहा था.
नगमा ने उसके सलवार की डोरी खींची और उसको नीचे कर दिया. उसने काले रंग की जालीदार लेस वाली पैन्टी पहनी हुई थी. पैन्टी मे से भी उसकी चुत अपने फ़ूले होने का आभास दे रही थी. सुन्दर सी लम्बी टाँगें, एक दम हल्के:-हल्के रोएँ थे जाँघों पर. उसके जवान बदन को मस्त निगाह से देखते हुए मैने कहा:- अब रहने दो नगमा, तुम आराम से देखो बैठ कर, बाकी मै कर लूँगा.
फ़िर मैने प्यार से श्वेता को बाँहों मे उठाया और बेड पर लिटा उसके ओंठ चूमने शुरु किये. दो मिनट भी नहीं लगे और श्वेता के प्रत्युत्तर मुझे मिलने लगे. नगमा अपने कैप्री:-टी:-शर्ट मे पास ही कुर्सी पर बैठ गई थी. मैने श्वेता की ब्रा खोल दी और उसकी चूचियों से खेलने लगा. उसकी ठस्स चूचियाँ आजाद हो कर झूमने लगीं. एक बड़े से संतरे के आकार की थी उसकी चूचियाँ, जिन पर भूरे रंग के चुचूक मस्त लग रहा था. मै उन्हें कभी चूमता, कभी चाटता, कभी चुचूक खींचता, कभी दबाता… मेरे दोनों हाथ भी कभी इधर तो कभी उधर मजा ले रहे थे.
करीब दस मिनट की चुम्मा:-चाटी के बाद मैने श्वेता की पैन्टी उसकी कमर से खिसकाई, तो उसकी झाँटों भरी बुर के दर्शन हुए. मैने श्वेता की झाँटों पर हाथ फ़ेरा. उसकी झाँट करीब आधा:-पौन इंच की थी. उसकी चुत पर मैने अपनी ऊँगली घुमाई और अंदाजा लगाया कि सही मे उसकी अभी चुदाई ऐसी नहीं हुई है, जैसी आम रन्डी की हो जाती है. अभी भी वो घर का माल ही थी, रोशन ने सही कहा था.
उसकी चुतड़ों का भी मैने जायजा लिया, गोल:-गोल, मुलायम गद्देदार ! उन चुतड़ों को हल्के से मैने दबाया फ़िर उन पर एक हल्की चपत लगाई.
मैने उसकी योनि को सूँघा:- सुभानल्लाह… क्या जवानी की खुशबू मिली मुझे !
मेरे लंड ने एक अँगड़ाई ली, मेरे मुंह से निकला:- बहुत मस्त चीज हो मेरी जान !
उसे अब तक चुप देख मैने कहा:- थोड़ा बातचीत करती रहो स्वीटी, वरना मजा नहीं आयेगा.
उसने कहा:- ठीक है सर.
मेरे दिमाग ने मुझे उकसाया तो मै बोला:- अब ऐसे सर:-सर ना करो. मुझे तुम डार्लिंग कहो, राजा कहो, जानू कहो, ऐसा कुछ कहो.
तो श्वेता बोली:- अभी ऐसा सब बोलने की आदत नहीं हुई सर, सॉरी डार्लिंग !

फ़िर बोली:- मै डार्लिंग नहीं बोल पाउँगी, आप मेरे से बहुत सीनियर हैं.
मुझे मौका मिल गया, मै तो अब श्वेता मे नगमा को देख रहा था, सो मैने कहा:- ठीक है, तो तुम मुझे अंकल तो कह सकती हो.
श्वेता मुस्कुराई:- ठीक है अंकल.
अब मैने कहा:- श्वेता, आज मुझे अपनी झाँट बनाने दो, इसके तुम्हें मै 500 रूपए और दूँगा.
वो चुप रही तो मैने नगमा से कहा:- नगमा वो शेविंग किट और पानी ले आओ.
नगमा तुरंत उठ कर चली गई.
वो जब तक आई, मैने श्वेता को बेड पर तौलिया बिछा उस पर बैठा दिया था. मैने श्वेता को पहले पलट कर घोड़ी बनने को कहा, फ़िर पीछे से उसकी गाँड और योनि के आस:-पास के बाल पहले कैंची से काट कर फ़िर रेजर से शेव कर दिया.
बड़े प्यार से मैने उसकी झाँट बनाई थी, और सोच रहा था काश एक दिन इस नगमा की झाँट बनाने का मौका मिले तो मजा आए.
मैने श्वेता को अब सीधा लिटा दिया और साईड से उसकी झाँटों को कैंची से काटने लगा. चुत की फ़ाँक के ठीक ऊपर और चुत की होंठ पर निकले बाल रेजर से साफ़ कर दिए. अंत मे मैने उसकी झाँटों को दोनों तरफ़ से छीलना शुरु किया. सीधा:-उल्टा दोनों तरफ़ से रेजर चला कर मैने उसकी झाँट दोनों साईड से छील दी, और बीच मे जो जैसे था छोड़ दिया.

करीब दस मिनट बाद श्वेता की बुर एक दम साफ़ हो चमक उठी थी, उसके बुर के ठीक उपर से जहाँ से लड़कियों की झाँट शुरु होती है वहाँ तक करीब आध इंच चौड़ी एक पट्टी के तरह अब झाँट बची हुई थी. नाप के हिसाब से बोलूँ तो करीब तीन इंच लम्बी और आधा इंच चौड़ी और करीब पौना:-एक इंच लम्बी झाँटों से अब श्वेता की बुर की सुन्दरता बढ़ गई थी.
मैने अपने कलाकारी से संतुष्ट हो कर कहा:- देख लो नगमा, यही है, लैंडिंग स्ट्रीप, दुनिया की सबसे ज्यादा मशहूर झाँट की स्टाईल !
श्वेता की भी नजरें मेरे कला की दाद दे रहीं थी.
मैने कहा:- श्वेता, जाओ एक बार फ़िर से चुत धो कर आओ.
वो अपने कटे हुए झाँटों को तौलिए मे लेकर बाथरूम मे चली गई. नगमा भी शेविंग किट रखने चली गई, तो मैने अपने कपड़े उतार दिए, और पूरी तरह से नंगा होकर अपना लंड सहलाने लगा. मै सोच रहा था कि कैसे अब नगमा मेरा लंड देखेगी.
नगमा पहले लौटी. मुझे नंगा देख थोड़ा हिचकी, पर मै बेशर्म की तरह उससे नजरें मिला कर लंड से खेलते हुए बोला:- बैठो, आराम से डेढ़:-दो घन्टे तो पेलूँगा ही उसको. अगर तुम्हें बुरा लगे तो तुम चली जाना सोने के लिए. मुझे तो अपना पैसा भी वसूल करना है.
नगमा थोड़ा लजाते हुए कुर्सी पर बैठ गई. श्वेता अब तौलिए से अपनी चुत को पौंछते हुए कमरे मे आई और तौलिए को एक तरफ़ फ़ेंक दिया.
मैने उसको कहा:- आओ श्वेता, जरा लंड से खेलो, एक बार पहले निकाल दो, फ़िर तुम्हारी चुत चूस कर तुमको भी मजा दूँगा. कोई झिझक मत रखो. अब थोड़ी देर भूल जाओ कि तुम कालगर्ल हो और पैसे लेकर चुदाने आई हो. आराम से चुदाई करो, जैसे प्रेमी:-प्रेमिका करते हैं. तुम्हें भी मजा आयेगा और मुझे ही.
वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ गई और प्यार से मेरे लंड को, जो अभी तक लगभग ढीला ही था, अपने कोमल हाथों मे पकड़ लिया. मेरा लंड अभी कोई 5″ का था ढीला सा, काला. उसने दो चार बार अपने हाथ से पूरे लंड को हल्का:-हल्का खींचा और फ़िर मेरे लंड के टॉप से चमड़े को पीछे करने लगी. पर चमड़ा तो पीछे टिकता तब जब लंड कड़ा होता, सो वो बार:-बार आगे आ जा रहा था. मेरे हाथ उसके कंधों तक फ़ैले बालों के साथ खेल रहे थे.

श्वेता ने फ़िर मेरे लंड को मुंह मे ले लिया और चूसने लगी. धीरे:-धीरे मेरे लंड मे सुरूर आने लगा, वो अब थोड़ा खड़ा हो रहा था. करीब दो मिनट की चुसाई के बाद मेरा लंड ठीक से खड़ा हो गया. उसकी पूरी लम्बाई करीब 8″ थी. श्वेता भी मस्ती से लंड चूस रही थी, और मेरे अंडकोष तथा झाँटों से खेल रही थी. लड़की धंधे मे नई जरूर थी, पर लंड चूसने मे उस्ताद थी. मुझे खूब मजा दे रही थी.
मैने श्वेता की तारीफ़ की:- वाह श्वेता ! मजा आ गया ! तुम तो बहुत उस्ताद हो यार ! वाओ, मजा आ रहा है.
श्वेता ने एक नजर मेरे से मिलाई और फ़िर मेरे लंड को दोगुने जोश से चूसने लगी.
कोई 7:-8 मिनट मे मुझे लगा कि मै झड़ जाऊँगा. मै अभी 5:-7 मिनट और रुक कर झड़ना चाहता था इसलिए श्वेता को कहा:- आअह, अब रुको बेटा. मुझे जोर की सु:-सु आई है.
श्वेता ने लंड मुंह से बाहर कर दिया. मै तो थोड़ा समय चाहता था कि लंड एक बार थोड़ा शान्त हो ले तो फ़िर चूसवाऊँ ! सो मै बाथरूम की ओर नंगे ही चल दिया.
बाथरूम मे मै सुन रहा था कि श्वेता और नगमा बात कर रही हैं. श्वेता ने उससे पूछा कि वो कब ज्वाईन करेगी?
तब नगमा ने कहा कि वो सिर्फ़ देखेगी अभी सब.
श्वेता ने कहा:- क्यों ? आ जाईए दीदी, आपको भी मजा आयेगा.
पर नगमा ने छोटा सा जवाब दिया:- नहीं ऐसे ही ठीक है.
मै समझ गया कि यह साली नगमा आसानी से नहीं चुदेगी, “साली कुतिया” मै बड़बड़ाया.

अब तक पेशाब करने के बाद मैने लंड को पानी से धोया और वो अब तक आधा ढ़ीला हो चुका था, जैसा मै चाहता था.
मै कमरे मे आ गया, बिस्तर पर लेट कर कहा:- यहाँ आ जाओ और चूसो, एक पानी निकाल दो मेरा. तुम भी तो नीचे बैठ कर थक गई होगी.
श्वेता ने फ़िर से मेरे लंड को मुंह मे डाला और शुरू हो गई. मै अब नगमा साली को उसके हाल पर छोड़ श्वेता से मजे लेने की मूड मे आने लगा था.
मेरे मुंह से अनायास निकलने लगा:- वाह स्वीटी, बहुत खूब…., अच्छा चूसती हो लंड, मजा आ गया….
श्वेता ने भी लंड मुंह से बाहर करके कहा:- थैक्यू, अंकल !
और फ़िर से चूसने लगी.
मै बोल रहा था:- बहुत खूब बेटा, चूसो और खेलो इसके साथ… आज तुम्हें बहुत मजा दूँगा, तुम बहुत अच्छी हो. थोड़ा हाथ से भी करो रानी…मै तुम्हें सिखाऊँगा कि कैसे मर्द को खुश किया जाता है, वेरी गुड… ऐसे ही करो !
श्वेता ने हाथ से लंड सहलाना शुरु किया और अंडकोष चाटने लगी:- अब ठीक है, अंकल?
मैने जवाब दिया:- हाँ बेटी, बहुत अच्छा… सही कर रही हो.आआआह्ह्ह्ह मजा आ रहा है, चूस अब और निकाल कर सारा माल चाट जा.!
रगिनी अब जोर जोर से लंड चूस रही थी. मै झड़ने की स्थिति आने पर बिस्तर से उठा और श्वेता को कहा:- मुंह खोलो बेटा, सब पी जाओ !
और उसके मुंह मे झड़ गया. श्वेता भी सहयोग करते हुए सारा निगल गई, चूस:-चाट कर लंड साफ़ कर दिया. लंड अब हल्के:-हल्के ढीला होने लगा.
मेरा पूरा ध्यान अब श्वेता पर था, नगमा को मैने उसके हाल पर छोड़ दिया था.
मैने अब श्वेता को कहा कि अब वो आराम से लेटे और मैने अपनी ऊँगलियाँ उसकी ताजा:-ताजा साफ़ हुई चुत पर घुमाई. उसकी चुत एक दम गीली हो गई थी, ऐसा लग रहा था कि पसीज रही हो. मैने एक नजर नगमा पर डाली, वो एक टक हमे ही देख रही थी, उसकी नजर भी श्वेता की चुत पर थी.
मै झुका और एक प्यारा सा चुम्मा उसके चुत की फ़ाँक की ऊपर की तरफ़ चिपका दिया:- मजा आया श्वेता बेटा?
हल्के से काँपती आवाज मे उसने कहा:- हाँ अंकल, बहुत ! आप बहुत अच्छे हैं.
मै अब अपनी जीभ उसकी चुत की फ़ाँक पर घुमा रहा था और नमकीन पानी चाट रहा था. फ़िर मैने उसके पैरों को फ़ैला कर उसकी चुत खोल ली और उसके चुत तो चाटने:-चूसने लगा. श्वेता कभी आह भरती, कभी सिसकती, तो कभी एक हल्का सा उउउम्म्म्म्म्म्म आअह्ह्ह…. उसे मजा आने लगा था.
लड़की चोदते हुए मुझे करीब 25 साल हो गए थे और मै अपने अनुभव से किसी भी रन्डी को मस्ती करा सकता था. श्वेता तो अभी भी बछिया ही थी मेरे लिए, जब कि मै एक साँड, जो शायद तब से चुत चोद रहा था जब से इसकी मम्मी ने चुदाना भी नहीं शुरु किया होगा. मै अब श्वेता को सातों आसमान की सैर एक साथ करा रहा था.
थोड़ी देर बाद मैने श्वेता की चुत से मुंह हटाया. वो बिल्कुल निढ़ाल दिख रही थी. मैने उसको तकिये के सहारे बिठा दिया और अपने दाहिने हाथ की बीच वाली ऊँगली चुत मे घुसा दी. फ़िर ऊपर की तरफ़ उँगली को चलाते हुए श्वेता के जी:-स्पॉट को खोजना शुरु किया, और तभी श्वेता का बदन हल्के से काँपा. मुझे अपने खोज मे सफ़लता मिल गई थी. मैने अपनी उँगली से चुत के भीतर उस जगह कुरेदना शुरु किया तो श्वेता मचलने लगी:- आआआआआअह्ह्ह्ह्ह अंकल ! उउईईईमाँ…. इइइस्सस….
अचानक वो छटपटाई और फ़िर एकदम से ढीली हो गई.
मै समझ गया कि साली को पहला चरमसुख मिल गया. मैने ऊँगली बाहर निकाल ली. उसको पहली बार जी:-स्पॉट का मजा मिला.
श्वेता एकदम से शांत हो गई थी. मैने उसे पुकारा:- श्वेता बेटा, कैसा लगा… कुछ बताओ तो !
वो उठी और मेरे से लिपट गई, मुझे जवाब मिल गया. हम दोनों एक:-एक बार झड़ गए थे. मेरा लंड फ़िर से मस्त हो चुका था. मै बिस्तर से उठा और साईड:-टेबल पर रखे जग से थोड़ा पानी पिया, और श्वेता की तरफ़ देखा तो उसने इशारे से पानी माँगा.
एक गिलास पानी पीने के बाद उसके मुंह से बोल निकले:- ओह अंकल, आज तक ऐसा नहीं लगा था. बहुत अच्छा लगा अंकल, थैंक्स. अभी तक तो मेरा अनुभव था कि मर्द लोग धक्के लगा:-लगा कर खुद मजा लेते, पर मेरे मजा आने के पहले ही, शांत हो जाते. आज पहली बार पता चला असल चुदाई क्या है.
मैने नगमा की तरफ़ देखा. वो शांति से सब देख रही थी, पर अब उसकी टाँगें थोड़ी आपस मे जोर से सटी हुई लगी. उसकी भी चुत गीली हो गई थी.
मैने उसी को देखते हुए कहा:- अभी कहाँ तुम्हें पता चला है कि चुदाई क्या होता है. वो तो अब पता चलेगा जब इस लंड को तुम्हारी बुर मे पेल कर तुम्हारी चुदाई करुँगा. जल्दी से तैयार हो जाओ चुदवाने के लिए.
मै अपने लंड को सहला:-सहला कर सांत्वना दे रहा था कि पप्पू जल्दी ना कर, अभी लाल मुनिया मिलेगी चोदने के लिए.
दो मिनट बाद श्वेता बोली:- आ जाइए अंकल, मै तैयार हूं.
वो तकिये पर सिर रख कर सीधा लेट गई. मैने उसके पैरों को घुटने से हल्का मोड़ कर उपर उठा दिया जिससे उसके गीली गीली बुर एक दम से खुल गई. भीतर का नन्हा सा गुलाबी फ़ूल सामने दिख रहा था. मै उसकी खुली टाँगों के बीच आ गया और अपने 72 किलो के बदन को उसके ऊपर ले आया. फ़िर अपने बाँए हाथ से थूक निकाला और अपने लंड की फ़ूले हुए सुपारे पर लगा कर लंड श्वेता की बुर पर टिका लिया, पूछा:- पेल दूँ अब भीतर श्वेता?
उसका सिर हाँ मे हिला.

ठीक है फ़िर चुदो बेटा ! कहते हुए मैने लंड भीतर ठाँसने लगा. श्वेता हल्के से कुनमुनाई. मैने एक जोर का ध्क्का लगाया और पुरा ८” लंड भीतर पेल दिया. श्वेता की आँख बन्द थी, “आआअह” मुंह से निकली, और उसने आँख खोल कर भरपुर नजरों से मुझे देखा.
मैने उसके कान मे कहा:- जब मै चोदूँगा तो मुझे खूब गाली देना, मजा आएगा !
मैने श्वेता से पूछा:- बोलो मेरी बच्ची, चोदूँ तुम्हें?
और नगमा की देख उससे पूछा:- दिखा साफ़:-साफ़, नहीं तो एक बार फ़िर बाहर निकाल कर पेलूँ भीतर?
यह कहते हुए मैने लंड बाहर खींचा और दुबारा से श्वेता की बुर मे पेल दिया. श्वेता के मुंह से दुबारा आऽऽ आऽऽ आह निकली. नगमा इस बार खड़ी हो गई ताकि सब साफ़ देख सके.
श्वेता ने नगमा को खड़ा देख बोला:- आईए न दीदी आप भी. अंकल बहुत अच्छे हैं.
आगे कुछ कहने से पहले ही मैने लंड को बुर के बाहर भीतर करके लौण्डिया की चुदाई शुरु कर दी. नगमा का चेहरा चुदाई देख एकदम लाल हो गया था, पर वो सिर्फ़ खड़े:-खड़े देख रही थी. श्वेता को पहली बार मेरे जैसे मर्द से वास्ता पड़ा था जो लड़की को खूब मजे लेकर चोदता है और लड़की को भी साथ मे मजे देता है.
मेरी आदत है कि मै रन्डी भी चोदता तो प्रेमिका बना कर. जब भी किसी को चोदा तो उसको अपने लिए भगवान का उपहार माना और उसके शरीर को पूरे मन से भोगा.
मैने श्वेता से कहा:- मजा आया श्वेता?
उसकी आँख बंद थी, होठ से कांपती आवाज आई:- हाँ अंकल बहुत. आप बहुत अच्छे हैं. आऽऽ अह अंकल अब थोड़ा जोर से धक्का लगा कर चोदिए ना ! जैसा धक्का लंड पेलते समय लगाया था. असल मे अभी खूब प्यार से धीरे:-धीरे लंड अंदर:-बाहर करके उसको चोद रहा था. पूरा पैसा वसूल हो इसके लिए जरूरी था कि उसकी बुर कम से कम आध घंटा मेरे लंड से चुदे.
उसके जोर का धक्का लगाने की फ़रमाईश पर मैने आठ:-दस दमदार धक्के लगाए और धक्के पर श्वेता के मुंह से आह की आवाज आई.
मैने श्वेता से कहा:- आँख खोल और देख ना कौन चोद रहा है तुझे ! मुझसे आँख मिला, कुछ बात कर ना. रन्डी हो तो थोड़ा रन्डीपना दिखा.
उसे मेरी बात से ठेस पहुँची शायद ! पर वो आँख खोल कर बोली:- हाँ साले बेटीचोद, लूट मजा मेरी चुत का साले. मेरे बाप की उमर का होकर साले, मुझे चोद रहा है?
मुझे उसकी गालियों से जोश आ गया:- चुप साली ! फाड़ दूँगा तेरी चुत आज ! साली कुतिया ! मुझे बेटी:-चोद बोलती है ! बाप से चुदा:-चुदा के जवान हुई है साली और मुझे बोल रही है बेटी चोद… ? ले साली चुद, और चुद, और चुद, रन्डी साली.
और मैने कई जोरदार धक्के लगा दिए.
8:-10 मिनट चोदने के बाद मै थोड़ा थक गया तो लंड बाहर निकाल लिया और बोला:-“अब बेटा तुम मेरे ऊपर बैठ कर चोदो, मुझे थोड़ा आराम से लेटने दो, फ़िर मै चोदूँगा.
उसने कहा:- ठीक है अंकल !
और मेरे ऊपर चढ़ कर बैठ गई. नगमा बार:-बार अपने पैर सिकोड़ रही थी, उसकी चुत भी गीली थी, पर उसमे गजब का धैर्य था. खड़े:-खड़े ही वो हम दोनों की चुदाई देख रही थी:- चुपचाप !
श्वेता के मुंह से हुम्म्म हुम्म्म की अवाज निकल रही थी पर वो मेरे लंड पर उछल उछल कर खुद ही अपनी बुर चुदा रही थी. मै ऐसी मस्त लौन्डिया को पाकर धन्य हो गया.
कुछ देर बाद मैने कहा:- चल साली, अब घोड़ी बन. घुड़सवारी करने का मन है.
वो बोली:- जरूर अंकल, आपके लिए तो आप जो बोलो करुँगी. आपने मुझे सच्ची मजा दिया है और मुझे पहली बार रन्डीपन का मजा मिल रहा है.

और वो बड़े प्यार मेरे ऊपर से उठी और फिर बिस्तर से उतर कर जमीन पर हाथ:-घुटनों के सहारे झुक गई. वो अब नगमा के बिल्कुल पास झुकी हुई थी. उसकी खुली हुई बुर अपने भीतर की गुलाबी कली के दर्शन करा रही थी.
मै भी बिस्तर से उतर कर पास आ गया और नगमा से पूछा:- मस्ती तो आ रही होगी, कम से कम अपनी उंगली से ही कर लो मेरी बच्ची !
मैने प्यार से उसके गाल सहला दिए.
फिर श्वेता पर सवार हो गया. मेरा लंड अब मजे से उसकी गीली चुत के भीतर की दुनिया का मजा ले रहा था. करीब 40 मिनट हो गए थे, हम दोनों को खेलते हुए. श्वेता एक बार और परम आनन्द प्राप्त कर चुकी थी.
मेरा भी अब झड़ने वाला था तो मैने उससे पूछा:- कहाँ निकालूँ श्वेता?
वो तपाक से बोली:- मेरे मुंह मे ! मेरे मुंह मे अंकल ! आपका एक बूंद भी बेकार नहीं करुँगी.
मैने अपना लंड बाहर निकाल और उसके मुंह की तरफ़ आया. उसने अपना मुंह खोला और मै उसके मुंह को अब चोदने लगा. दस:-बारह धक्के के बाद मेरे लंड से पिचकारी निकलने लगी, जिसे श्वेता अपने होंठ दबा कर मुंह मे लेने लगी और फ़िर मैने लंड बाहर खींच लिया तब उसने मुंह खोल कर मेरे माल को अपने मुंह मे दिखाया और फिर मुंह बन्द करके निगल गई.
मैने उसको जमीन से उठाया और फ़िर अपने गले लगा लिया और कहा:- तुम बहुत अच्छी हो श्वेता, मैने जो गालियाँ तुम्हें दी, उसके लिए माफ़ करना. चोदते समय यह सब तो होता ही है.

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