मस्त नगमा – भाग 4 (very hot sex kahani)

और क्या कहना ही था। उस समय श्वेता भावुक हो गई थी. उसकी आँखों मे आँसू के दमन्द्र तैर गए, भरी भरकम आवाज मे बोली:- नहीं सर, आप तो बहुत ही अच्छे हैं. मै रन्डी हूं, पर आपने इतनी इज्ज्त दी, वरना बाकी लोग तो मेरे बदन से सिर्फ़ पैसा वसूल करते हैं. थैंक्यू सर.
उसकी यह बात दिल से निकली थी, मैने उसकी पीठ थपथपाई:- सर नहीं अंकल. अब मै तुम्हारा अंकल हीं हूं. जब भी परेशानी मे रहो, मुझे बताना. मै पूरी मदद करुँगा.
एक:-एक बूँद आँसू उसके दोनों गालों पर बह निकले. उसने अपने हाथों से अपना चेहरा ढक लिया.
5:-6 सेकेण्ड बाद मुस्कुराते हुए हाथ हटाए और बोली:- बेटीचोद !
और मेरे गले से लिपट गई.
नगमा की आँख भी गीली हो गई. उसकी नजरों मे भी मेरे लिए अब प्यार दिख रहा था. वो बोली:- मै आप दोनों के लिए पानी लाती हूं !
और वो बाहर चली गई.
जब वो पानी लेकर आई तब मै कुर्सी पर बैठा था और श्वेता बिस्तर ठीक कर रही थी. हम दोनों अभी भी नंगे ही थे. मेरा लंड एक दम शांत और भोला बच्चा बन गया था. पानी आगे करते हुए नगमा बोली:- चाचू ! अब आप दोनों सो जाएँ, बारह बजने को हो रहे हैं. अब कल सुबह मै चाय लाऊँगी आप दोनों के लिए.
फ़िर हँसते हुए कमरे मे से भाग गई.
अगली सुबह नगमा ने ही कमरे मे आकर मुझे और श्वेता को जगाया. मैने देखा कि नगमा के हाथ की ट्रे मे दो गिलास पानी और अखबार है. मै और श्वेता अभी भी नंगे थे जैसे कि हम रात को सो गए थे. श्वेता पानी पीकर बाथरुम की तरफ़ चल दी और मैने उसका तकिया उठा कर अपने गोद मे रख लिया जिससे मेरे लंड को नगमा नहीं देखे. नगमा यह सब देख बड़े कातिलाना अंदाज मे मुस्कुराई, फ़िर चाय लाने चली गई.
मैने अखबार खोल लिया. जब नगमा चाय लेकर आई, तब तक श्वेता भी बाहर आ गई थी और अपने कपड़े जमीन पर से समेट रही थी. नगमा सिर्फ़ एक कप चाय लाई थी, जिसे उसने श्वेता की तरफ़ बढ़ा दिया.
श्वेता ने चाय ली और पूछा:- अंकल की और तुम्हारी चाय ?
अब जो नगमा ने कहा उसे सुन कर मेरी नसें गर्म हो गई. बड़ी चुदाईी आवाज मे हल्के से फ़ुसफ़ुसा कर नगमा बोली:- तुम पीयो चाय, चाचू को आज मै अपना दूध पिलाऊँगी !
और उसने अपने टॉप को नीचे से पकड़ कर उठाते हुए एक ही लय मे अपने सर के उपर से निकाल दिया.
मेरे मुंह से निकल गया:- जीयो जान ! क्या मस्त चूचियाँ निकली है तेरी.
सच उसकी संतरे जैसी गोल:-गोल गोरी:-गोरी चूचियाँ गजब का नजारा पेश कर रही थी और उन पर गुलाबी:-गुलाबी लगभग आधे आकार को घेरे हुए चुचक बेमिसाल लग रहे थे. नगमा के बदन के गोरेपन का जवाब नहीं था. वो इसके बाद मेरे बदन पर ही चढ़ आई.
मैने पहले उसके चेहरे को पकड़ा और फ़िर उसके गुलाबी होठों का रस पीने लगा. उसका बदन हल्का सा गर्म हो रहा था, जैसे बुखार सा चढ़ रहा हो. बन्द आँखों के साथ वो हसीना अब टॉपलेस मेरे बाहों मे थी. मैने श्वेता की तरफ़ देखा. वो मुझे देख मुस्कुरा रही थी और चाय की चुस्की ले रही थी.
मैने नगमा को अपने बदन से थोड़ा हटाया और फ़िर उसकी दाहिनी बूब का चुचूक मुंह मे लेकर उसे चुभलाने लगा. नगमा आँख बंद करके सिसकी भर रही थी और मै मस्त होकर उसकी चूचियों से खेल रहा था, चूस रहा था.
वो भी मस्त हो रही थी.
मैने अपने हाथ थोड़ा आगे कर उसकी कैप्री के बटन खोले और फ़िर उसको अपने सामने बिस्तर पर सीधा लिटा दिया. भीतर काली पैन्टी की झलक मुझे मिल रही थी. प्यार से पहले मैने कैप्री उतार दी. फ़िर मक्खन जैसी जाँघों को सहलाते हुए भीतर की तरफ़ जाँघ पर 2:-3 चुम्बन लिए. उसका बदन अब हल्के से काँप गया था. और जब मै उसकी पैन्टी नीचे कर रहा था तब उसने शर्म से अपना चेहरा अपने हाथों से ढ़क लिया. इस तरह से उसका शर्माना गजब ढ़ा गया.
चुत को उसने एक दिन पहले ही साफ़ किया था, सो उसकी गोरी चुत बग:-बग चमक रही थी. मैने उसके चुत को पूरा अपने मुट्ठी मे पकड़ कर हल्के से दबा दिया, तो वो आआह्ह्ह्ह कर उठी.
मैने अपना मुंह उसकी चुत से लगा दिया और वो चुसाई की, वो चुसाई की गोरी:-गोरी चुत की कि वो एक दम लाल हो गई जैसे अब खून उतर जाएगा.
वो अब चुदास से भर कर कसमसा रही थी, कराह रही थी. उसकी हालत देख मैने श्वेता की तरफ़ आँख मारी और कहा:- नगमा बेटा, अब जरा तुम भी मेरा चूसो, अच्छा लगेगा.
वो काँपते आवाज मे बोली:- नहीं चाचू, अब कुछ नहीं ! अब बस आप घुसा दो मेरे भीतर ! अब बर्दाश्त नहीं होगा, प्लीज…!
मैने उसको छेड़ा:- क्या घुसा दूँ, जरा ठीक से बोलो ना.
श्वेता मेरे बदमाशी पर हँस दी, बोली:- अंकल, क्यों दीदी को तड़पा रहे हो, कर दो जल्दी.
नगमा लगातार प्लीज घुसाओ ! प्लीज ! कर रही थी. मैने फ़िर कहा:- बोलो भी ! अब क्या घुसा दूँ, कहाँ घुसा दूँ, मुझे समझाओ भी जरा.
नगमा सच अब गिड़गिराने लगी, बोली:- चाचा, प्लीज…!
वो अपने हाथ से अपनी चुत सहला रही थी.
मैने भी कहा:- एक बार कह दो साफ़ साफ़ डार्लिंग, उसके बाद देखो, जन्न्त की सैर करा दूंगा, बस तुम्हारे मुंह से एक बार सुनना चाहता हूं पहले.
अब नगमा ने बोल ही दिया:- मेरे अच्छे चाचू, प्लीज अपने लंड को मेरी चुत मे डाल कर मुझे चोद दो एक बार, अब रहा नहीं जा रहा.
मेरा लंड जैसे फ़टने को तैयार हो गया था ये सब सुन कर. वर्षों से यही सोच सोच कर मैने मुठ मारी थी सैकड़ों बार. मै जोश मे भर कह उठा:- ओके, मेरे से चुदाना चाहती हो, ठीक है खोलो जाँघें. और मैने उसकी जाँघों के बीच बैठ कर लंड को उसकी लाल भभूका चुत की छेद से भिड़ा दिया.
मैने कहा:- डालूँ अब भीतर?
नगमा चिढ़ गई:- ओह, अब चोद साले ! बात मत कर ! आह.
इस तरह जब वो बोल पड़ी तो मै समझ गया कि अब साली को रन्डी बन जाने मे देर ना लगेगी. मैने एक जोर के धक्के के साथ आधा लंड भीतर पेल दिया. उसके चेहरे पर दर्द की रेखा उभरी पर उसने होंठ भींच लिए. अगला धक्का और जोर का मारा और पूरा 8″ जड़ तक नगमा की चुत मे घुसेड़ दिया.
वो चीख पड़ी:- हाय माँ, मर गई रे।
उसकी आँखें बन्द थी और उस जोरदार धक्के के बाद मै थोड़ा एक क्षण के लिए रुका कि श्वेता की आवाज सुनाई दी:- ओह माँ.
मैने आँख खोली, देखा नगमा की दोनों आँखों से एक:-एक बूँद आँसू निकल कर गाल पर बह रहे थे, श्वेता साँस रोके अपने हाथों से मुंह ढ़के बिस्तर देख रही थी.
और तब मुझे अहसास हुआ कि नगमा कुँवारी कली थी और मैने उसकी सील तोड़ी अभी:-अभी. बिस्तर पर उसकी कुँवारी चुत की गवाही के निशान बन गए थे, बल्कि अभी और बन रहे थे.
मै समझ गया कि कितनी तकलीफ़ हुई है नगमा को, सो अब मैने उसको पुचकारा:- हो गया बेटा हो गया सब, अब कुछ दर्द ना होगा कभी.
श्वेता भी उसके बाल सहला रही थी:- सच दीदी, अब सब ठीक है, इतना तो सब लड़की को सहना होता है….
नगमा भी अब थोड़ा सम्भली और होंठ भींचे भींचे सर को हिलाया कि सब ठीक है. और तब मैने अपना लंड बाहर:-भीतर करना शुरु किया. 4:-6 बार बाद लंड ने अपना रास्ता बना लिया और फ़िर हौले:-हौले मै भी अब सही स्पीड से नगमा की चुदाई करने लगा. वो भी अब साथ दे रही थी. 8:-10 मिनट बाद मैने अपना सारा माल चुत के ऊपर पेट की तरफ़ निकाल दिया. वो निढ़ाल सी बिस्तर पर पड़ी थी. श्वेता ने चादर से ही उसकी चुत पौंछ दी और फ़िर उसको सब दिखाया.
नगमा बोली:- अब तो पक्का हुआ ना कि मैने रेहान के साथ कुछ नहीं किया था, पर ये सब अम्मी:-अब्बू कैसे जान पाएँगें?
उसकी आँखों मे आँसू आ गए. मैने उसे अपनी बाँहों मे समेट लिया:- छोड़ो यह सब बात, आज तो सिर्फ़ अपनी जवानी का जश्न मनाओ.
मुझे अब पेशाब लग रही थी, सो मै बिस्तर से उठ गया. अब दोनों लड़कियाँ भी उठ कर कपड़े पहनने लगीं. आधे घन्टे बाद चाय:-बिस्कुट के साथ नगमा अपनी पहली चुदाई का अनुभव बता रही थी.
श्वेता ने उसे समझाया कि अभी एक:-दो बार और दर्द महसूस होगा पर ऐसा नहीं, मीठा दर्द लगेगा, उसके बाद जब बूर का मुंह पुरा खुल जायेगा तब बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा, चाहे जैसा भी लंड भीतर डलवा लो. मुझे अब बिल्कुल भी दर्द नहीं होता.

करीब नौ बजे श्वेता चली गई. नगमा ने उससे वादा लिया कि वो फ़िर एक बार आयेगी, तब शुक्रवार को आने की बात कही, क्योंकि शनि और रविवार को राजिन्दर उसकी मेरे साथ बुकिंग के बाद एक घन्टे मे अगले 5 सप्ताह की बुकिंग कर चुका था. मुझे भी श्वेता बहुत अच्छी लगी थी.
जाते:-जाते वो मुझे कह गई:- अंकल आपको जब मन हो, फ़ोन कर दीजिएगा, रोशन सर वाले दिन छोड़ कर ! चली आऊँगी, अब आपसे पैसे नहीं लूँगी, आपने सच मुझे बहुत इज्ज्त और प्यार दिया, धन्यवाद.
उसके जाने के बाद मैने और नगमा ने अगले एक घण्टे मे घर साफ़ किया और फ़िर कपड़े वाशिंग मशीन मे डालने के बाद नगमा मेरे पास आई और बोली:- चाचू, एक बार और कीजिएगा, अब दर्द बिल्कुल ठीक हो गया है.
सुबह साढ़े छः के करीब नगमा पहली बार चुदी और अभी साढ़े दस बजे वो दूसरी बार चुदाने को तैयार थी. मेरे लिए तो नगमा का जिस्म दुनिया का सबसे बड़ा नशा था सालों से ! कैसे मना करता. तुरंत ही अपने कपड़े उतार दिए और बोला:- आओ.
नगमा आई और घुटनों पर बैठ गई. मै समझ गया कि अब वो होगा जो मैने हमेशा सपने मे होने की उम्मीद करता था.
हाँ, नगमा ने मेरे ढीले लंड को पकड़ अपने मुंह मे डाल लिया और उस पर अपनी जीभ चलाने लगी.
अचानक वो बोली:-“चाचू, अब आपका बूढ़ा होने लगा है, देखिए कई बाल सफ़ेद हो गए हैं.
वो मेरी झाँट के बारे मे बात कर रही थी. उसे इस प्रकार बात करते देख अच्छा लगा कि अब ज्यादा मजा आएगा, पहली बार तो कुछ खास बातचीत हुई नहीं थी.
मैने उसे थोड़ा उत्साहित किया:- अभी बूढ़ा न कहो इसको. बारह घण्टे मे दो जवान लौन्डियों को चोदा है इस पट्ठे ने. एक की तो सील तोड़ी है. मर्द तो साठ साल मे पट्ठा होता है:- साठा तब पाठा – सुना नहीं क्या? अभी पाँच मिनट रुको, पता चलेगा जब तेरी बुर की बीन बजाएगा ये काला नाग.
उसने अपनी आँख गोल:-गोल नचाई:- हूं ! ऐसा क्या?
सच मे उसकी यह अदा लाजवाब थी. वो चूस:-चूस कर मेरे लंड को खड़ा कर रही थी और काफ़ी अच्छा चूस रही थी.
मैने कहा:- अभी थोड़ा और चूसो आआअह्ह्ह, नगमा तुम तो सब बहुत जल्दी सीख गई.
उसने नजर मिला कर कहा:- मेरा प्यारा चाचू सिखाए और मै ना सीखूँ? ऐसा कैसे होगा?
मै:- आय हाय, बड़ी मस्त लौन्डिया हो रे तुम चाचा की भतीजी.
उसने मुझसे हँसते हुए पूछा:- मै लौन्डिया हूं?
मैने जवाब दिया:- हाँ तुम लौन्डिया हो लौन्डिया, मेरी लौन्डिया, मेरी लौन्डी हो.
वो बोली:- अच्छा और क्या हूं मै?
और मेरे लंड को हल्के:-हल्के चूसती जा रही थी. मै मस्ती की मूड मे आ गया:- दिखने मे तो तुम माल हो माल ! वो भी टॉप क्लास का ! आआअह्ह्ह, मक्खन हो साली तुम. खिलती हुई गुलाब की कली हो जान. वाह बहुत अच्छा चूस रही हो, इइस्स्स, मजा आ रहा है. और चूस मेरी लौन्डी. कैसा लग रहा है, जरा बता ना साली. थोड़ा खेल भी हाथ मे लेकर.
नगमा ने लंड को अब हाथ से सहलाना शुरु किया:- बहुत बढ़िया है आपका लवड़ा.
मैने सुधारा:- लवड़ा नहीं लौड़ा बोल इसे. चुदाते समय रन्डियों की तरह बोलना सीख.
वो मचल कर बोली:- तो सिखाओ ना कैसी रन्डी बोलती है, मुझे थोड़े न पता है. मै तो सीधी:-साधी लड़की हूं, अम्मी:-अब्बू ने इतने प्यार से पाला और अब आप मुझे यह सब कह रहे हो, कैसे होगा?
मै बोला:- तुझे लड़की कौन बेवकूफ़ कहेगा. मैने बताया न, तुम माल हो वो भी एक दम टंच माल. एक चुदाई के बाद जैसे लंड खा रही है, लगता है कि अम्मी:-अब्बू के घर जाने तक तू पूरी रन्डी बन जाएगी.
नगमा मेरी बात सुन कर बोली:- हाँ चाचू, मुझे सब सीखना है, जल्दी:-जल्दी सीखाओ न अब, एक सप्ताह तो तुमने बर्बाद कर दिया मेरा उदघाटन करने मे. वो भी हुआ तब, जब मै कालगर्ल लाने को बोली, वर्ना तुम तो मुझे ऐसे ही अपने घर से विदा कर देते. मै जब आई थी तब से यह सब सोच कर आई थी. शुरु से तुमको लाईन दे रही थी और तुम साधु बने हुए थे. पहले दिन से ही मैने तुम्हारे बाथरुम मे अपना अन्डरगार्मेन्ट छोड़ना शुरु किया पर तुम थे कि आगे बढ़ ही नहीं रहे थे.
मैने सब सुना और कहा:- हाँ बेटा, तुम सही कह रही हो. असल मे मुझ लग रहा था कि थोड़ी:-बहुत छेड़:-छाड़ तो ठीक है, पर शायद तुम चुदाई के लिए ना कह दोगी तो मुझे बहुत शर्म आयेगी फ़िर तुमसे. यही सब सोच मै आगे नहीं बढ़ रहा था. पर मैने भी धीरे:-धीरे ही सही पर तुम्हारी तरफ़ आगे बढ़ रहा था ये तो मानोगी. और पता है, रोज हस्त:-मैथुन करके तुम्हारी पैन्टी पर अपना लंड का रस डाल देता था, तुम्हें पता चला कुछ?
वो मुस्कुराई:- सब पता है, सूखने पर भी थोड़ा तो अलग लगता है. अब ऐसे अपना क्रीम मत फ़ेंकना, मै हूं ना, सब खा जाऊँगी. कहीं पढ़ा है कि मर्द का रस बहुत पौष्टिक होता है.
मेरा लंड अब जैसे माल निकालने की स्थिति मे आ गया था. मैने समय लेने के लिए कहा:- अब बात बन्द कर और चल बिस्तर पर लेट. तेरे चुत का स्वाद लेना है अब मुझे.
वो झट से उठी और बिस्तर पर लेट गई. मै भी साथ ही आ गया और तुरंत उसकी चुत पर मुंह भिड़ा दिया. पूरे दस मिनट तक उसकी चुत को खूब चुभला:-चुभला कर चूसा, चबाया. उसकी गीली चुत का नमकीन स्वाद मस्त था. साली खूब मस्त हो कर अपना चुत चटवा रही थी. एक बार पानी भी छोड़ा, पर थोड़ा सा. इसके बाद वो थोड़ा शान्त हो गई.
तब मैने पूछा:- क्या हाल है? कैसा लगा इस चुतिया चाचा के मुंह का मजा?
बेचारी कुछ बोल न सकी, बस हाँफ़ती रही, और मुझे समझ आ गया कि बछिया अब हार चुकी है. मै एक बार फ़िर साँड बन कर बछिया पर चढ़ गया और सिर्फ़ उसके चेहरे पर नजर गड़ा कर साली की जोरदार चुदाई शुरु कर दी.
अब वो जैसे छोटे पिल्ले केंकीयाते हैं, वैसा आवाज मुंह से निकाल रही थी. आप सबने ऐसी आवाज चाईनीज या जपानी लड़की की चुदाई वाली ब्लू:-फ़िल्म मे सुनी होगी. उसकी चुत से निकलने वाला “राग मस्त:-चुदाई” मुझे एक विशेष मजा दे रहा था.
थोड़ी देर मे मैने पूछा:- क्या रे ! अब रोना:-चीखना छोड़ और बोल कहाँ निकालूँ अपना वीर्य, अब मेरा छुटेगा.
वो संभली और बोली:- मेरे मुंह मे चाचु, मेरे मुंह मे.
यह सुन मैने अपना लंड बाहर खींचा और उसके चेहरे की ओर आ गया. उसने अपना मुंह खोला और मै उसके मुंह मे लंड घुसा उसका मुंह चोदने लगा. मै अपने किस्मत पर खुश था, मुझे नगमा जैसी हूर चोदने को भगवान ने दे दी थी.
दस:-बारह बार के बाद मेरे लंड ने पहली पिचकारी छोड़ी और फ़िर अगले 5 बड़े झटके मे मेरा कम:-से:-कम एक बड़ा चम्मच वीर्य उसकी मुंह मे गिरा. वो बड़े चाव से वो सब माल निगल गई, हाँफ़ रही थी पर शौक से खा गई. फ़िर मेरे लौंड़े को चाट:-चूस कर साफ़ भी किया. जब वो मेरा लंड चाट रही थी, तब मैने भी उसकी ताजा चुदी चुत को चाटा और उसके नमकीन गीलेपन और कसैले:-खट्टेपन से भरी गंध का मजा लिया.

करीब बारह बजे हम दोनों साथ ही नहाए और नंगे ही बाहर आए तो मैने कहा:- जल्दी तैयार हो जाओ, आज बाहर ही लंच लेंगे.
वो जल्दी ही आ गई. उसने एक सफ़ेद स्कर्ट और गोल गले का लाल टॉप पहन रखा था और पोनी टेल मे बंधे बाल के साथ वो बहुत सुन्दर दिख रही थी.
मैने आँख मारी और कहा:- ऐसा जानमारूँ माल बन कर घर से निकलोगी, तो सड़क पर हंगामा हो जायेगा.
वो हँस दी और मै उसकी मोहक मुस्कान पे फ़िदा हो उसके होंठों पर एक हल्का सा चुम्बन जड़ दिया. हम अब एक अच्छे से रेस्तराँ मे गए और खाना खाया. फ़िर पास के ही एक मल्टीप्लेक्स मे दो बजे के शो मे एक अंग्रेजी रोमांटिक फ़िल्म देखी.
फ़िल्म मे तीन शानदार बैड़रूम दृश्य थे. हॉल मे इधर:-उधर कई सिसकारियाँ सुनाई दे रही थी. मैने नगमा का ध्यान एक जोड़े की तरफ़ किया. एक 21:-22 साल की लड़की नीचे झुक कर शायद अपने बायफ़्रेन्ड का लंड चूस रही थी. हम दोनों अब बीच:-बीच मे उस जोड़े की हरकतों का भी मजा ले रहे थे. नगमा ने भी मेरे लंड को अपने हाथ से मसल मसल कर झाड़ा और जब मेरा वीर्य उसके हाथों पर फ़ैल गया तब उसने उसके चाट कर अपना हाथ साफ़ किया.
फ़िल्म के बाद हम मार्केट गए और वहाँ पर मैने नगमा के लिए एक सुन्दर सा लाल और हरा का एक कामदार सलवार:-सूट खरीदा.
तभी नगमा की अम्मी का फ़ोन आ गया कि अभी वो लोग एक सप्ताह और रुकेंगे. सुन कर हम दोनों खुश हो गए. उन्होंने जब नगमा से पूछा कि कोई परेशानी तो नहीं, तब नगमा ने मेरी तरफ़ देख कर हँसते हुए कहा कि कोई परेशानी नहीं है, चाचा मेरा बहुत ख्याल रखते हैं, मुझे बहुत प्यार करते हैं.

फ़िर भाभी जी ने मुझसे बात की और मुझसे माफ़ी माँगी कि उनके बाहर रहने से नगमा के कारण मुझे परेशानी उठानी पर रही है.
मैने भी कहा कि वो संकोच ना करें, मुझे नगमा से कोई परेशानी नहीं है. बल्कि नगमा की वजह से अब मै ज्यादा घरेलू हो गया हूं, शाम मे घर आने पर अच्छा लगता है. नगमा ही मुझे चाय पिलाती है बना कर. भाभी जी संतुष्ट हो गईं और फ़ोन काट दिया.
नगमा बोली:- अम्मी से तो ऐसे कह रहे थे जैसे मै आपकी बीवी की तरह चाय पिला रही हूं आपको?
मैने तपाक जड़ दिया:- और नहीं तो क्या? न सिर्फ़ बीवी की तरह चाय पिलाती हो, अब तो रोज़ बीवी की तरह चुदाती भी हो. कहो तो यह भी कह दूँ तेरी अम्मी से?
नगमा शर्मा गई:- छिः, ये बात कहीं अम्मी से कही जाती है?
फ़िर हम करीब आठ बजे डिनर लेकर घर लौटने लगे, तब नगमा ने कहा:- मैने कभी ब्लू:-फ़िल्म नहीं देखी है, अगर हो सके तो एक ब्लू:-फ़िल्म दिखा दो, वर्ना अपने घर जाने के बाद तो ऐसी चीज कभी देख नहीं पाउंगी.
मेरे लिए यह कौन सी मुश्किल बात थी. मैने रास्ते से ही तीन डीवीडी अपने एक परिचित दुकानदार से ले ली. नगमा तो उनके कवर को देख कर ही खुश हो रही थी.
घर आने पर उसने तुरंत ही एक को प्लेयर मे डाला और सोफ़े पर बैठ गई. मैने रात के कपड़े पहने और फ़िर कॉफ़ी बनाने लगा. जब कमरे मे आया तो नगमा को फ़िल्म देखने मे मग्न पाया. सामने टीवी पर एक काली लड़की को दो काले लड़के चोद रहे थे. एक का लंड लड़की के मुंह मे था और दूसरे का उसकी चुत मे ! उसकी काली:-काली चुत के चारों तरफ़ खूब झाँट थी. आह, ओह खूब हो रहा था. फ़िर दोनों बारी:-बारी से लड़की की झाँट पर झड़े, तब उसकी काली झाँट पर सफ़ेद वीर्य खूब चमक रहा था. झड़ते समय ही मै कमरे मे आया था. मैने एक कॉफ़ी मग नगमा को पकड़ाया और फ़िर वहीं सामने सोफ़े पर बैठ गया.

अगली फ़िल्म मे एक लड़की का इन्टरव्यू हो रहा था. एक से एक गन्दे सवाल पूछे जा रहे थे और वो भी बेशर्म की तरह बेबाक जवाब दे रही थी. वो लड़की ब्रा:-पैन्टी मे थी. वो नई थी और तीसरी बार अपनी चुदाई का वीडियो बनवा रही थी, इसलिए ब्लू:-फ़िल्म निर्माता उसका परिचय करा रहा था. मर्द की आवाज से शुरुआत हुई, लड़की का नाम और उमर पूछी, फ़िर उसने पूछा कि वो कब से चुदाई इन्डस्ट्री मे है?
तब उसने हँस कर कहा करीब एक साल से ! पर उसने पिछले महीने से ही वीडियो करना शुरु किया, इसके पहले वो नाईट कल्ब मे स्ट्रीप:-डाँसर थी. जब उससे पूछा गया कि क्या उसके घरवालों को पता है कि वो क्या करती है. तब थोड़ा रुक कर उसने कहा:- दुर्भाग्य से हाँ, दो महीने पहले पता चल गया. जब उसके छोटे भाई ने उसको नाईट क्लब मे डाँस करते देखा. मै जब घर आई तब मम्मी ने बहुत डाँटा और तब मैने घर छोड़ दिया और एक दोस्त के पास आ गई. इसके एक महिने के बाद जब ठीक:-ठाक पैसे का ऑफ़र मिला तो मैने वीडियो के लिए काम करना मंजूर कर लिया. फ़िर अब जब आप अच्छे पैसे दे रहे हैं तब मै आज आपके प्रोडक्शन के लिए काम कर रही हूं.
तब मर्द की आवाज आई:- हाँ, सो तो है, पर आज तुम्हें तीन मर्द एक साथ चोदेंगे. बहुत जबर्दस्त चुदाई होगी तुम्हारी आज. तीनों प्रोफ़ेशनल हैं, और लड़की को चोद:-चोद कर बेदम कर देते हैं. हमारे दर्शकों के लिए तुम चुदवाने को तैयार हो? 19 साल की उमर मे तुम शायद उन लोगों के लिए कुछ कम उमर की ही हो और कम अनुभवी भी.
वो लड़की भी हँस कर बोली:- ठीक है तीन हैं तो कोई बात नहीं, जब पोर्न करना है तो ये सब क्या सोचना.
और अब जब उस मर्द की आवाज आई:- और अगर यह वीडियो तुम्हारे घर के लोगों ने देख लिया तब?
वो फ़िर हँसकर बोली:- तब क्या ? कुछ नहीं ! उन्हें भी मजा आए देख कर ! कोशिश तो यही करुँगी कि मेरी चुदाई देख कर उनको दूसरी कोई फ़िल्म पंसद न आए और वो बार:-बार मेरी वीडियो को ही देखें.
फ़िर आवाज आई:- ठीक है ! अब तुम अपने कपड़े उतारो और अपने घर वालों को और हमारे दर्शकों को भी अपने नंगे बदन की नुमाईश कराओ और देखो तुमको चोदने के लिए तीनों मुस्टंडे आ गये हैं. उसने खूब आराम से अपने कपड़े खोले और फ़िर पास आये तीनों मर्दों की तरफ़ बढ़ कर उनके पैन्ट खोल कर उनके लंडों को बाहर खींच लिया. वो बारी:-बारी से उन्हें चूस:-चूस कर खड़ा कर रही थी. इसके बाद खूब जम कर उन लंडों द्वारा उस लड़की की चुदाई हुई, बल्कि उसकी बूब, चुत, चुतड़ और गाल सब पर उसको कई थप्पड़ भी खाने पड़े, पर उसने खूब मजे लेकर चुदवाया. थप्पड़ लगने पर चीखती, फ़िर तुरंत ही उन मर्दॊं को उकसाने लगती और वो सब खूब जोर से उसको पेलते और फ़िर वो कराह उठती.
बड़ी गर्म फ़िल्म थी. मुझ जैसे अनुभवी की नसें गर्म हो गईं तो नगमा साली का क्या हाल हुआ होगा आप सब समझ सकते हैं.
इसके बाद रात को नगमा ने फ़िर मेरे साथ चुदाई का खेल खेला. साली को नई जवानी आई थी सो सब्र ही नहीं था, लगातार चुदा रही थी. दो बार चुदाने के बाद वो सोने की बात की, फ़िर हम दोनों सो गये.
अगली सुबह नगमा नंगी ही उठी और चाय बनाने चली गई. दोनों ने एक साथ बिस्तर पर बैठ चाय पीने के बाद कपड़े पहने और फ़िर रोज की दिनचर्या शुरु हुई. आज मुझे ऑफ़िस भी जाना था.
शाम को घर आने पर नगमा ने एक अनोखी बात कही.

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