मस्त नगमा – भाग 5 (very hot sex kahani)

हमेशा ही की तरह. डीनर के बाद हम दनों टहलने निकल गए और तभी नगमा ने अपने मन की बात की. उसने कहा कि वो एक बार जैसे श्वेता मेरे घर चुदाने आई थी वैसे ही किसी एकदम अनजान आदमी से चुदा कर देखना चाहती है.
यह सुन मेरा लंड एक झटके मे खड़ा हो गया. ये साली ढंग से चार दिन नहीं चुदी थी और रन्डी बनने को तैयार थी. मुझे चुप देख वो घबरा गई, बोली:- आप अम्मी:-अब्बू से यह बात तो नहीं कहेंगे ना प्लीज.
उसके डरी देख मुझे मजा आया, मै बोला:- अरे नहीं बेटी, तुम डरो मत. यहाँ मेरे घर रह कर जो तुम कर रही हो वो बात तुम्हारे घर पर कोइ नहीं जानेगा. मै तुम्हें बेइज्जत नहीं होने दूंगा.
उसको तसल्ली हुई तो फ़िर बोली:- असल मे चाचू, जब तक आपके घर हूं, सब तरह का मजा कर लेना चाहती हूं, अपने घर तो मुस्लिम कल्चर हैं इसलिए यह सब मजा लेने को नहीं मिलेगा. मै एक दम अनजान के साथ एक बार चुदाई करना चाहती हूं कि कैसा लगता है. आप कोई उपाय कीजिए न प्लीज.
मैने देखा कि साली एक दम चुदास से बहक कर बोल रही है तो कहा:- ठीक है देखता हूं कि क्या कर सकता हूं, पर तुमको ऐसा करके डर नहीं लगेगा?
वो बोली:- यही डर तो खत्म करने के लिए ऐसे चुदना चाहती हूं. आपके साथ करने मे भी तो डर था, पर अपनी अन्डरवीयर दिखा कर पटा लिया ना आपको, अब जब मन होगा आपके साथ तो कर ही लूंगी. अम्मी:-अब्बा को ना आप बताएँगे ना मै.
मै समझ गया कि अब साली बिना रन्डी बने मानेगी नहीं, तो मैने सोचा को अब एक बार दलाली मै भी कर लूँ. नगमा साली जैसी मस्त माल का दलाल बनना भी कम किस्मत की बात नहीं थी.

मैने रोशन को फ़ोन लगाया:-“यार रोशन, एक लड़की है, बहुत मस्त. उसको सिर्फ़ एक बार के लिए बुक कर दो आज:-कल मे. नहीं:-नहीं घंटा वाला नहीं, फ़ुल टाईम. हाँ दिन मे भी ( मैने नगमा से इशारे से पूछा और नगमा ने हाँ की) कर सकते हो. पर उसको मर्द थोड़ा सही देना. बच्ची है. हाँ, अपनी ही समझो, घर की बच्ची है, जरा मस्ती के मूड मे है. अरे यार रोशन, नहीं, मै तो ठीक है पर उसका मन जरा पैसा कमाने का है. नहीं बस एक बार अभी. ठीक है, तुम फ़ोटो ले लो एक उसकी. किधर हो? वाह, फ़िर आ जाओ मेरे घर मै हूं, ओके.
मैने अब नगमा से कहा:- रोशन इसी इलाके मे है, अभी आ कर तुम्हारी फ़ोटो ले लेगा, फ़िर एक दो दिन मे कोई फ़िक्स कर देगा. पर तुम एक बार सोच लो.
नगमा बोली:- अभी पूरा एक हफ़्ता है ना अम्मी को आने मे ! तब तक तो हो जायेगा ना एक दिन कोई?
मै उसकी बेताबी देख हैरान था. करीब आधे घन्टे बाद रोशन आ गया. मैने नगमा को बुलाया. रोशन उसकी सुन्दरता पर दंग था. एक पल के लिए तो सन्न था नगमा के मक्खन बदन से नजर ना हट रही थी साले भड़वे की.
नगमा सर नीचे करके खड़ी थी सामने.
मैने ही कमरे की शान्ति भंग की:- यही लड़की है रोशन, कब तक सेट कर दोगे? मेरे घर तीन दिन है. (मैने झूठ कहा, ताकि जल्दी काम हो), जिसमे एक दिन तुम इसको ले जा सकते हो.
रोशन बोला (उसकी आवाज हल्का सा लड़की जैसा लगता था):- अरे सर, ऐसी चीज के लिए तो लाईन लगा दूँगा. एकदम फ़्रेश दिख रही है, कहाँ से लाये सर?
उसकी आवाज मे शरारत थी.
मैने कहा:- अरे कहा ना घर की लड़की है. यार हमेशा दूसरे की बेटी चोदता हूं तो फ़र्ज बनता है कि अपने घर से भी थोड़ा दे दूँ दुनिया के लिए.
मै अपनी ही बात पर हँस दिया.
वो बोला:- हाँ सर, हम लोग तो धर्म का काम करते हैं, लड़के को लड़की से मिला देते हैं और लड़की को पैसे दिला देते हैं, दोनों खुश और हम भी खुश.
हम दोनों हँस दिए.
नगमा बोली:- मै पानी लाती हूं.

और चली गई.
शायद उसको शर्म आ रही थी अब.
मैने रोशन को बता दिया कि नगमा को मै रोज चोद रहा हूं, जब से वो शुरु हुई है, और अब वही चाहती है कि थोड़ा स्वाद बदल कर देखे और पैसा भी कमा ले.
मैने कहा कि तब मुझे रोशन की याद आई कि क्यों न रोशन भी थोड़ा कमा ले, वर्ना जब लड़की का मन हो गया तो उसको चोदने वाले बहुत मिल जाएँगे.
रोशन मेरा अहसान माना और बोला:- सर अगर यह हफ़्ते मे एक बार भी आए ना तो मेरा 5000 पक्का हो जायेगा. तभी नगमा पानी ले कर आ गई. रोशन ने उपर से नीचे तक उसको घुरा फ़िर उसके चारों तरफ़ घूम कर उसको सब तरफ़ से देखा, बोला:- बहुत सही चीज खोजी है सर आपने ! इसके एक रात की बुकिंग दस हज़ार की करुँगा कम से कम.
फ़िर नगमा से बोला:- क्यों ठीक है? 10000 तुमको मिल जायेगा, पर एक बार मेरे साथ करना पड़ेगा फ़्री, मेरा कमीशन यही होगा पहली बार का. उसके बाद तुमको जो मिलेगा उस्का 20% मेरा, और मेरे लिए 500 पर शॉट. मंजूर है तो बोलो?
रोशन थोड़ा भारी बदन का था, और ऐसे तो कोई चुदाईी लड़की उससे नहीं चुदाती, पक्का. नगमा को यह सब समझ नहीं आया ठीक से, तो वो मुझे देखने लगी.
मैने कहा:- अरे बेटी, सब ठीक है, पहली बार करा लो, फ़िर बाद का बाद मे सोच लेना. आगे तो तुम्हारी मर्जी है.
नगमा ने हाँ कर दी. रोशन ने उसको टॉप और पैन्ट खोलने को कहा, और फ़िर ब्रा पैन्टी मे उसकी अपने मोबाईल मे 3:-4 फ़ोटो खींची, फ़िर चला गया.
नगमा कपड़े पहनने लगी तो मैने कहा:- क्यों अब सिर्फ़ दस हज़ार देने वाले से ही चुदाओगी क्या, फ़िर मेरा क्या होगा?
बच्ची शरमा गई, और मै उसको अपने बाहों मे उठा कर बेडरूम मे आ गया.
आगे की बात आप को पता है, कि क्या हुआ होगा उस माल के साथ जब मेरे जैसा चुदक्कड़ हरामी बिस्तर पर हो तो.
अगले दिन सुबह 8 बजे रोशन का फ़ोन आया:- सर, आज दस बजे उसको तैयार रहने बोलिए, कल सुबह तक के लिए बुक किया है उसको. बहुत किस्मत से मेरे एक क्लाईंट का फ़ोन आया अभी. पाकिस्तानी हैं, अबुधाबी मे रहते हैं. बाप:-बेटा हैं पर एक साथ ही लड़की चोदते है. पूरी दुनिया मे बिजनेस है उनका. जहाँ जाते हैं पहले एक दिन सिर्फ़ वहाँ की स्थानीय लड़की चोदते हैं. पैसा बहुत देते हैं सर. उसको बीस हज़ार मे बुक किया है, आज दिन और फ़िर रात के लिए. काफ़ी भाग्यशाली है यह माल. पहली बार ही बुड्ढा और जवान दोनों मिल जायेंगे उसको.
नगमा तब बाथरुम मे थी. मैने जब उसको बताया तो वो बहुत खुश हुई.
मैने कहा:- मुझे ट्रीट देना पड़ेगा !
तो वो जवाब मे बोली:- रोज तो आपको टीट(चुची) देती हूं, अभी ट्रीट बाकी है क्या?
नगमा ने शब्दों से अच्छा खेला था. फ़िर मेरे ऑफ़िस जाते समय वो भी साथ ही घर से निकली. रास्ते मे मैने रोशन को फ़ोन किया कि नगमा को मै कहाँ छोड़ूँ !
रोशन ने नगमा को एक चौराहे पर छोड़ने को कहा कि वो खुद नगमा को लेकर के होटल ले जायेगा.
रोशन हम लोग का वहाँ इंतजार कर रहा था. मैने नगमा को “बेस्ट ऑफ़ लक” कहा और ऑफ़िस के लिए निकल गया.
मेरे दोस्त की बेटी सनिया खान एक टीपिकल मुस्लिम लड़की बनी हुई थी. आज उसने सफ़ेद जौर्जेट का हल्का कामदार सलवार:-सूट पहना था और हरे दुपट्टे को सर पर से ओढ़ा था. उसका गोरा चेहरा सुर्ख हो कर दमक रहा था. पूरे आत्मविश्वास के साथ वो मुझे बाय करके रोशन की गाड़ी मे बैठ गई.

रोशन ने कहा:- सर, सुबह को आठ बजे तक इसकी बुकिंग है, फ़िर एक:-सवा घन्टा मै इसके साथ हूंगा और करीब दस बजे तक मै इसको आपके घर के पास छोड़ दूँगा.
इसके आगे की बात नगमा के शब्दों मे : क्योंकि जब वो लौटी तो अगले एक दिन उसने मुझसे नहीं चुदवाया और इस दौरान उसने जो बताया वही मै लिख रहा हूं.
उसने तीन बार नोट:-बुक को पढ़ा और फ़िर जब अपनी कहानी से संतुष्ट हो गई तब खुश हो गई कि अब वो भी कहानी लिख सकती है.
तो पढ़िए नगमा की कहानी नगमा की जुबानी !
रोशन मुझे होटल पोल्का मे एक स्यूएट मे ले गया. वहाँ पहले से ही दोनों मौजूद थे. बाप का नाम था सैफ अली खान और बेटे का फरहाज अली खान. बेटा 25:-26 साल का खूबसूरत मर्द था जबकि बाप 55 साल के करीब होगा, मेरे अब्बा से बड़ा था उमर मे पर फ़िट था. बाल सब सफ़ेद हो गये थे पर दिखने मे वो भी अच्छा था.
मुझे देख दोनों बहुत खुश हुए और रोशन से कहा:- इसीलिए रोशन हम तुम्हें ही खोजते हैं. तुम माल बहुत जानदार लाते हो.

रोशन भी दाँत निकाल कर हँसा और झूठ कहा:- सर आपके लिए इसको लखनऊ से बुलवाया है. इसकी मौसेरी बहन सबीहा मेरे साथ टीम मे है, वही इसको लाई है. एक दम घर की चीज है सर. आप चखेंगे तो खुद समझ जाएँगे.
सैफ अली बोला:- देखने मे तो हूर है, पर थोड़ा अनुभवी भी हो तो मजा ज्यादा आयेगा. कच्ची लड़की चुदाते समय बहुत ड्रामा करती है.
इस पर रोशन बोला:- कच्ची नहीं है सर, घर पर चुदी है, दो:-चार बार अपने रिश्ते के एक चाचा से. सबीहा के साथ तो हमेशा ही मजे करती है, जब सबीहा इसके घर जाती है.
फ़िर मुझसे कहा:- तुम भी बोलो न, सर जो कह रहे हैं तो बात करना चाहिए.
फ़िर उन दोनों से बोला:- पहली बार आज होटल मे आई है सर, इसलिए शायद सकपका रही है.
फरहाज चुपचाप बैठ कर मुझे घूर रहा था, उसके अब्बा ही सारी बात कर रहे थे. उन्होंने रोशन को एक बीयर ऑफ़र किया और मुझसे पूछा:- तुम भी लोगी क्या?
तो मैने मना कर दिया. रोशन ने जब तक बीयर पी, सैफ ने पैसे उसको दे दिए.
रोशन ने मुझसे पूछा:- पैसे तुम रखोगी?
मैने ना मे सर हिला दिया, तो वो सब पैसे अपने साथ ले कर निकल गया कि वो अब कल सात बजे आ जायेगा.
रोशन के जाने के बाद सैफ ने मुझसे मेरा नाम पूछा तो मैने अपना असली नाम नगमा खान बता दिया.
उन्होने फ़िर पूछा:- पठान हो?
मैने हाँ मे सर हिलाया तो पहली बार मुझे छुआ उन्होंने. मेरा हाथ अपने हाथ मे लेकर बोले:- डरो मत, इस तरह चुप मत रहो. बात करो ! तुम तो चुदा चुकी हो, तुम्हें सब पता है. तुम्हारी मर्जी है ना इस काम की, या रोशन किसी मजबूरी मे पकड़ लाया है?
मैने कहा:- ऐसी बात नहीं है. मुझे यह सब करने मे मजा भी बहुत आता है.
अब फरहाज पहली बार बोला:- कुछ खाओगी, मँगाऊ?
तो मैने कहा:- मै नाश्ता करके आई हूं.
सैफ अब बोले:- फरहाज बेटा, ले जाओ इसको बेड पर और तुम्हीं पहले चोद लो इसको, जवान हो तुम बार बार चोद सकते हो. मै शाम मे एक बार चोदूँगा. साढ़े ग्यारह बज गए हैं, डेढ़ बजे के लिए लंच ऑर्डर कर देता हूं.
ओके अब्बू ! कहते हुए असिफ़ उठ गया.
सैफ ने रुम सर्विस को ऑर्डर किया:- चार बीयर अभी और खाना डेढ़ बजे.
फरहाज बेडरूम के दरवाजे पर पहुँच कर मुझे बोला:- आ जाओ नगमा डार्लिंग !
और मै भी उठ कर पीछे पीछे चल दी. सैफ हँसते हुए पास आया और मेरा दुपट्टा मेरे बदन से खींच लिया, कहा:- पहले बुजुर्ग से इजाजत लो बेटी !
मै सिटपिटा गई, तो वो हँसा और मेरे चेहरे पर नजर गड़ा कर कहा:- जाओ और मेरे बेटे को अपने बदन का पूरा मजा दो.
फरहाज अब बोला:- अब्बूज़ान, आप इसको ठीक से चेक कर लो ना पहले. तब तक मै जरा फ़ारिग हो ही लूँ ! फ़िर जरा जम के लूटूँगा इसे. ऐसी मस्त हूर जैसी चीज हरदम नहीं मिलती !
और उसने पेट पर हाथ फ़ेरा कि उसे टट्टी जाना है. मुझे कहा:- जाओ अब्बूज़ानी का एक बार चूस कर खाली कर दो.
मुझे समझ आ गया कि ये दोनों बाप:-बेटे मिल कर आज मुझे एक बार की बुकिंग मे ही रन्डीपने की डिग्री देने लायक पढ़ा देंगे. मेरी चुत गीली होने लगी.
फरहाज बाथरुम चला गया और सैफ ने इशारे से मुझे अपने पास बुलाया और अपने पजामे की डोरी को ढीला कर दिया. साफ़ था कि मुझे अब उसका लंड चूसना था.
मैने पजामा नीचे खींच दिया. उसका लंड लगभग सिकुड़ा हुआ था, करीब 5″. थैली भी ढीली थी, पर बड़ी थी और उसके भीतर का दोनों गोटी साफ़ दिख रहा था फ़ूली हुई. लंड के चारों तरफ़ बड़ी:-बड़ी झाँटे थी और उसमे से कई बाल सफ़ेद थे. लंड का सुपारा भी थोड़ा सफ़ेद रंगत लिए था.
मैने लंड हाथ मे लिया और मुंह मे डाल चूसने लगी. सैफ का वो इलाका हल्के पसीने की खुश्बू या बदबू से भरा था, पर मुझे तो ये सब कहना नहीं था. धीरे:-धीरे लंड मे ताव आने लगा. जब वो 6″ का हो गया तब सैफ बोला:- बेटा अब तुम भी कपड़े हल्के कर लो. तुम्हारे तराशे हुए बदन को देख यह साला जल्दी निपट जायेगा.

मै उठी और कुर्ते के ऊपर के दो बटन खोल कर उसको अपने सर के ऊपर से निकाल दिया. फ़िर मैने अपनी सलवार को खोला और अपने पैरों से बाहर कर दिया.
सैफ सब देख रहा था. मैने अब अपनी सफ़ेद शमीज भी उतार दी. फ़िर पहली बार सैफ से नज़र मिलाई. अभी मेरे बदन पर एक सफ़ेद ब्रा और काली पैन्टी थी. मैने अपना हाथ पीछे किया और ब्रा का हुक छुआ हीं था कि सैफ बोला:- अब रहने दो, कुछ फरहाज के सामने खोलना.
मै रुक गई और एक बार फ़िर उसका लंड चूसने लगी. वो अब मेरे पीठ और चूचियों पर अपने हाथ घुमा रहा था. मेरा बदन हल्की सिहरन से भर रहा था और चुत भी गीली हो रही थी. वो मेरे लंड चूसने की कला की दाद देता और मै और जोर से चूसती.
तभी फरहाज आ गया और पास आकर मेरी ब्रा का हुक खोल दिया, जिसके बाद उसके अब्बा का हाथ अब मेरे चुचूक से खेलने लगा और मै सिसक उठी.
सैफ यह देख फरहाज से बोला:-“बहुत ताज़ा माल दिया है रोशन इस बार, पूरा पैसा वसूल.
सैफ अब छुटने वाला था, तब वो बोला:- तुमको मेरा सारा मणि खा जाना है.
मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं थी, पर यह शब्द नया था, शायद पाकिस्तान मे वीर्य को मणि बोलते हैं. मुझे तो हिन्दी के शब्द ही आते थे. मै मुंह खोल कर सामने जमीन पर बैठ गई और सैफ ने हाथ से अपना लंड हिला:-हिला कर पिचकारी मारी. छः बार मे सारा वीर्य मेरे मुंह मे डाल दिया जिसे मै चाट गई.
अब उसने मेरा मुंह चूम लिया और बोला:- अब जाओ और फरहाज से चुदो अच्छे से.
मै उठी तो फरहाज ने मेरी पैन्टी खींच दी, कहा:- इतना सा बदन अब्बू से क्यों छुपा रही हो, सब दिखा दो एक बार फ़िर चलना.
मै उठी और अपना पैन्टी खोल दी. आज सुबह ही जब मुझे चाचू ने बताया तो अपने झाँट को साईड से साफ़ की थी, जिससे 1″ चौड़ी पट्टी मे पिछले 5:-6 दिन मे उगे छोटे:-छोटे काले:-काले झाँट मेरी गोरी बुर की खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे.

मेरी ऐसी मस्त चुत देख दोनों के मुंह से एक साथ आह निकली और फ़िर निकला:- सुभानल्लाह !
फरहाज बोला:- अब चल पहले चोदूँ तुमको वरना अफ़सोस होने लगेगा कि देरी क्यों की.
मै बोली:- पहले बुर को धो लूँ, बहुत गीली हो गई है और रास्ते मे आते समय गर्मी से थोड़ा पसीने की भी बदबू आ रही है.
मुझे तो सैफ के पसीने की बू याद आ रही थी. पर फरहाज की बेकरारी मे कोई फ़र्क नहीं पड़ा, बोला:- अबे चल, जवानी लौन्डी की बुर के पसीने की बू से यार लोग का लौड़ा ठनक जाता है. अभी तक घर मे चुदी है ना, इसीलिए बदबू/खुश्बू की बात करती है. कुतिया की चुत से बदबू कभी नहीं आती. अपने अब्बा के देखते झुका और चुत की फ़ाँक से शुरु करके हलके झाँटों वाली पट्टी तक अपने जीभ से चाट लिया.
मेरा बदन गुदगुदी से भर गया. उसने एक चपत मेरे चुतड़ों पर लगाई और बेडरुम की तरफ़ बढ़ गया.
बिस्तर पर लिटा वो मेरे चुत के पीछे पड़ गया. लगातार जोरदार तरीके से चाटा, या कहिए खाया उस पूरे इलाके को. मेरे मुंह से अजीब:-अजीब आवाज निकली, जो पहले नहीं निकली थी और मै एक बार झड़ी तो उसने पूरी बुर उँगली से खोल चाटा. मै शान्त हो गई थी. पर फरहाज पक्का हरामी था. उसने अब अपनी पैन्ट खोली और पहली बार मैने उसके लंड को देखा. नौ इन्च से कम न था, गहरा भूरा और खूब मोटा. उसकी चमड़ी देख लगा नहीं था कि उसका लंड इतना काला होगा. मुसलमान था, सो खतना किया हुआ था और उसके लंड की चमड़ी उसके आधे लंड से ज्यादा नहीं पहुँच रही थी.
मै एक बार झड़ कर शान्त लेटी थी, इतनी मस्ती कभी मिली नहीं थी पहले. शायद माहौल का असर था. पर फरहाज का इरादा कुछ और था. उसने बिना कुछ बोले मेरे पैरों को फ़ैलाया और ऊपर चढ़ गया. मै जब तक कुछ समझूँ उसने मेरे चुत मे अपना लंड ठांस दिया. दो धक्के मे पूरा नौ इन्च भीतर. मै दर्द से बिलबिला उठी:- उईईई माँआँआआँ, छोड़ो मुझे प्लीज !
आज पहली बार चुदाते समय अम्मी याद आई और आँखों मे आँसू आ गए. फरहाज बोला:- अब चुप भी कर साली रन्डी ! दलाल को बीस हज़ार देकर चलता कर दिया और अब चुदाने मे नानी मर रही है? ज्यादा नखरे ना कर और आराम से चुद पहले. ऐसे ही लंडों की बदौलत तो तू बाज़ार की रानी बनेगी एक दिन.
मै रोने लगी थी, सोचा था कि सब, चाचू ने जैसे श्वेता को चोदा था, वैसे चोदते हैं.
श्वेता की बात सब याद आई.

पर मुझे रोता देख फरहाज प्यार से समझने लगा:- देख चुप हो जा, अभी तू नई है, इसलिए तकलीफ़ है, पर तू तो चुदी हुई है पहले से, फ़िर क्यों डर रही है? आम लोगों से मेरा थोड़ा बड़ा है पर अपनी तरह का अनोखा मजा देगा जब भीतर तक धक्के खाएगी तू. पहले मेरे दो:-चार धक्के बर्दाश्त कर ! फ़िर खुद से फ़ुदक फ़ुदक कर मरवायेगी अपनी चुत !
सच ! जल्दी ही मेरी बुर उसके इस भारी भरकम लंड के धक्के बर्दाश्त कर के एक बार फ़िर पानी छोड़ने लगी और कमरा हच:-हच, फ़च:-फ़च की आवाज से भर गया.
दस:-बारह मिनट मेरी चुत ठोकने के बाद फरहाज ने लंड बाहर खींचा और कहा:- चल चूस अब इसको.
मै हिचक रही थी क्योंकि लंड पर मेरे चुत का गीलापन लगा हुआ था. एक बार चेहरा पास ले गई पर मन न हुआ, बोली:- इसमे से कैसी खट्टी सी बू आ रही है.
फरहाज हँसा:-“अबे, यह बू ही तो खुशबू है, बताया था न तुझे. और यह खट्टी बू तेरी ही मस्त चुत की है. अब आजा बच्ची ! देर ना कर ! अभी तुझे पीछे से ठुकना बाकी है.
मैने लंड मुंह मे डाला और खुद की चुत के पानी का स्वाद लिया. पाँच मिनट मे बिना कोई चेतावनी के फरहाज मेरे मुंह मे झड़ गया और बोला:- बिना रुके चूसती रह.
उसका लंड हल्का सा ढ़ीला हुआ और फ़िर जल्द ही टनटना गया. इस बार फरहाज ने मुझे पलट दिया और जैसे कुत्ता कुतिया पर चढ़ कर चोदता है, वैसे मुझे चोदा. हर धक्के पर मस्ती से मै कराह उठती और वो आवाज सुन एक और धक्का और जोर से देता. ऐसे ही मै थकने लगी और धीरे:-धीरे बिस्तर की तरफ़ झुकने लगी. जल्द ही मै लगभग बिस्तर पर पेट के बल हो गई, और फरहाज मेरे ऊपर लेट मेरी चुदाई करता रहा. मेरे नीचे हो जाने से उसको अब परेशानी हो रही थी धक्का लगाने मे, तो बोला:- चल अब पलट, सीधी हो. इस बार की ठुकाई मे तेरी चुत को भर देता हूं मणि से.
अब मुझे याद आया कि ऐसा तो मैने सोचा न था, अब अगर इसके वीर्य से मुझे बच्चा रह गया तो. पर मै कुछ बोलने की हालत मे न थी. बस एक बार अल्लाह को याद किया और सीधी हो कर पैर खोल कर ऊपर उठा दिए. फरहाज ने अपने लंड को तीन बार मेरे चुत की ऊपर की घुन्डी पर पटका. उसकी चोट मुझे एक अजीब सी मस्ती दे रही थी कि तभी उसने एक झटके मे पूरा नौ इन्च भीतर पेल दिया.
मै अब आआह उउउउह इइइस्स्स हुम्म्म्म्म जैसी आवाज कर रही थी. मै एक बार और झड़ चुकी थी पर फरहाज अपनी धुन मे मुझे चोदे जा रहा था. फ़िर 5:-6 तगड़े झटके के साथ उसके वीर्य ने मेरी चुत की प्यास बुझा दी. फरहाज ने अपना लंड भीतर ही घुसा कर रखा था.थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही शान्त पड़ रहे फ़िर उसने अपना लंड निकाला और मेरे मुंह मे डाल दिया:- साफ़ कर चाट कर इसे मेरी कुतिया !
और प्रोफ़ेसर जमील अहमद खान की प्यारी इकलौती बेटी बीस हज़ार लेकर एक रन्डी की तरह चुदाने के बाद अब लंड पर लगे हुए वीर्य को चाट रही थी.
तभी बाहर से सैफ ने आवाज लगाई:- अब खत्म करो भाई ! एक से ज्यादा बज गए, खाना आ जायेगा अब. थोड़ा आराम भी करो खाने से पहले.
करीब डेढ़ घंटे से मै लगातार चुद रही थी. अब मुझे लगा कि हाँ, यह अनुभव हमेशा याद रखने वाला है.
मै उठी और सिर्फ़ सलवार और शमीज पहन ली. तभी रुम:-सर्विस खाना ले आया. दोनों वेटरों के लिए यह सब देखना नई बात नहीं थी.
मेरी सलवार और शमीज के बीच से करीब 5″ के सपाट पेट पर उन वेटरों की नज़र बार:-बार जा रही थी. 20:-22 साल के नौजवान वेटरों को दिखा कर जमीन पर पड़ी हुई अपनी ब्रा और पैन्टी उठाई. मेरे झुकने से उनको मेरी सुन्दर चूचियों की झलक मिल गई.
चुत मे जो वीर्य भरा हुआ था अब हल्के:-हल्के बाहर आने लगा था. मैने सब को दिखा कर अपनी सलवार की मियानी से अपनी चुत को पौंछा और फ़िर गीली हुई मियानी को देख कहा:- भीतर निकाल दिया, देख लीजिए, कपड़े खराब हो गए.
सैफ हँस दिया:- अरे बच्ची, अगर पेट से रह जायेगी तो पूरा ताजमहल बिगड़ जायेगा और तू कपड़े की चिन्ता कर रही है.
बेशर्म बूढ़ा मेरी फ़िगर की बात कर रहा था. मुझे अब उन दोनों के साथ मजा आ रहा था. फरहाज मेरे बदन की खूब तारीफ़ कर रहा था और उसका बाप मजे लेकर सुन रहा था, फ़िर पूछा:- तुझे मजा आया ना बेटा इसको चोद कर?
फरहाज खुशी से बोला:- बहुत अब्बा, चुत तो बिल्कुल कसी हुई है. पर लौन्डिया मस्त है, आँखों से आँसू निकल आए जब दो ही धक्कों मे पेल दिया था पूरा भीतर. यह रान्ड साली इतनी सुन्दर है कि मै बेकाबू हो गया. पर क्या मस्त चुदी अब्बा, अम्मीजान की कसम मजा आ गया.
हम सब ने साथ खाना खाया और सैफ ने कहा कि मै दो घन्टे आराम कर लूँ. क्योंकि शाम की चाय के पहले वह मुझे चोदेगा और फ़िर रात मे तो मुझे लगातार चुदना है. मै भी आराम से बेड पर जा कर आराम करने लगी और मुझे नींद आ गई.
करीब साढ़े चार बजे मुझे लगा कि कोई मेरा चेहरा सहला रहा है, तो हड़बड़ा कर उठी.

सैफ बिल्कुल नंगा मेरी बगल मे लेटा हुआ था. मुझे जगा हुआ देख वो मेरे मुंह को चूमने लगा और फ़िर अपने मुंह से ढ़ेर सारा थूक मेरे मुंह मे गिरा दिया. मै इसके लिए तैयार नहीं थी, पर वो मेरी हकबकाहट देख खुश हुआ और बोला:- निगल ले मेरा थूक, जब मेरा मणि खा सकती है तो मेरे थूक से क्या परेशानी.
मुझे अब समझ आ या कि मै तो उसके लिए एक रन्डी थी, और मुझे वही करना था जो वो कहे.
मै जब य्हूक निगल गई तो वो मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गया, मुझे अपने बदन से पूरी तरह से दबा कर और फ़िर से मेरे होंठ चूसने शुरु कर दिए. फ़िर पलट गया और वो नीचे था, मै ऊपर ! होंठ से होंठ मिले हुए.
तभी वो मेरे चुतड़ सहलाने लगा और फ़िर अचानक मेरी सलवार की मियानी पकड़ कर उसे एक झटके से करीब 3:-4″ फ़ाड़ दिया.
मै चौंक गई:- हाय अल्लाह, अब मै घर कैसे जाउँगी?
मै एकदम से परेशान हो गई और बिस्तर पर बैठ गई. सैफ मेरी बेचैनी देख हँस पड़ा, बोला:- क्यों ? फ़टी सलवार पहन कर जाना, अम्मा खुश होएगी. इतना सज धज के आई है तो तेरी अम्मी को पता तो चले कि बेटी सही से चुदी, क्यों?
उस हरामी को कहाँ पता थी कि मेरे अम्मीजान को जरा भी अंदाजा न था कि बेटी रन्डी बन चुद रही है. पर ऐसी मजबूरी मे मेरी आँख फ़िर नम होने लगी, तभी वह बोला:- अरे खुश हो जा, तुझे नये कपड़े मे विदा कर देंगे. फरहाज को भेजा है, तेरे लिए नये कपड़े लेने. इससे अच्छे कपड़े मे घर जाना.
मेरे चेहरे को अपने हाथ मे पकड़ बड़े प्यार से पूछा:- अब तो खुश है तू. देख अगर तू दुखी होगी तो चोदने का मजा कम हो जाएगा. अरे तू इतनी हसीन है, जवान है कि तेरे साथ शरारत करने का मन बन गया. अब हँस भी दे.
उसके ऐसे मनाने से मुझे दिल से खुशी हुई और मै मुस्कुरा दी.
वो भी मुस्कुराया:- जवान लौन्डिया को कपड़े फ़ाड़ कर चोदने मे जो मजा है वो किसी चीज मे नहीं है.
और मेरे छाती पर हाथ रख मेरी शमीज को भी चीर दिया. मेरी दोनों चूचियों को देख हल्के से उन पर चपत लगाया तो वो हल्के से हिल गए. उनके हिलते देख वो खुशी से बोला:- देख कैसे ये कबूतर मचल रहे हैं और 3:-4 चपत और लगा दए. इसके बाद उसने मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया और मेरी चुत चूसने लगा. धीरे:-धीरे मुझमे मस्ती छाने लगी और तब मुझे मस्त देख बुढ़्ढ़ा मेरे पैरों के बीच आ अपना लंड मेरी चुत मे घुसा कर धक्के लगाने लगा. बीच:-बीच मे बूब पर चपत भी लगा रहा था और मै मस्त थी.
थोड़ी देर बाद वो लेट गया और मुझे ऊपर से उसके लंड की सवारी करनी पड़ी. 2:-3 मिनट बाद वो फ़िर मुझे नीचे लिटा दिया और ऊपर से मुझे चोदने लगा. वो अब तेजी से धक्के लगा रहा था और मै मस्त हो गई थी. तभी लगा वो झड़ रहा है. 4:-5 झटके के बाद उसका माल मेरी चुत मे निकल गया. वो मेरे ऊपर लेट मुझे चूमने लगा फ़िर उठा और बोला:- जाओ, अब हाथ मुंह धो लो. खाकर सो गई थी सो मुंह से हलकी बास आ रही है.
मुझे याद आया कि मुझे उठने के बाद मौका ही नहीं दिया था साला हरामी. तभी फरहाज लौट आया एक बड़ा सा पैकेट ले कर और हम दोनों को नंगा देख पूछा:- चोद लिया इसको अब्बू?
सैफ बोला:-“हाँ बच्चे, गीले खेत मे बीज डाल दिया इस बार.
यह सुन मै मस्त हो गई, और थोड़ी चिंतित भी. मै बाथरुम मे चली गई.
मै जब नहा कर आई तो फरहाज मेरे साथ चुदाई करने के लिए तैयार था. एक बार मुझे उसने अपने अब्बू के सामने चोदा और फ़िर मुझे वो पैकेट दे दिया कि अब मै ये कपड़े उन बाप:-बेटों के सामने पहनूँ.
मै नंगी ही उठी और बाथरुम मे जा कर अपने आप को साफ़ किया फ़िर नंगी ही लौटी और पैकेट खोला. उसमे एक खूबसूरत सा गुलाबी सिल्क का जरी:-काम वाला डिजायनर सलवार:-सूट था और एक लाल रेशमी धागे से काम किया हुआ मैरून रंग का ब्रा:-पैन्टी का सेट.
मैने एक:-एक कर के कपड़े पहने और फरहाज सामने खड़ा हो कर मेरे बदन और मुझे कपड़ों को एक:-एक कर पहनते हुए अपने मोबाईल फ़ोन से वीडियो बनाता रहा. हम सबने रात का खाना खाया. वो दोनों भी थक गये थे, सो अब हम सब बैठ कर टीवी देखने लगे और इधर:-उधर की बातें करने लगे. हम सब सो गये और अगले दिन करीब 8 बजे सुबह रोशन आ गया. हम सबने साथ मे चाय पी और फ़िर रोशन मुझे ले कर आ गया.
समाप्त

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