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Apni vidhwa aunty ko bus me choda ungliyon se

Vidhwa aunty ko choda anguli se
हैलो, दोस्तों लण्ड खड़ा कर दे ऐसी एक सेक्सी आंटी को चोदने की कहानी ले के आया हूँ। और वैसे ये पूरी की पूरी हकीकत है। मेरी एक आंटी है जो 5 साल पहले भरी जवानी में विधवा हो गई। आंटी के दो बच्चे है लेकिन उसके अन्दर की चुदास आज भी वैसी की वैसी है। और वो बड़ी वो वाली नजर से मुझे देखती थी। पहले पहले तो मुझे लगा की ये सिर्फ मेरा भ्रम है। लेकिन फिर मैंने आंटी के पीछे अपने अन्दर का जासूस को लगाया तो मुझे असली बात का पता चला।

आंटी एक दिन रसोई बना रही थी तब मैं उसके कमरे में घुसा। उसके बेड के निचे देखा तो मुझे एक पोर्न फिल्म की सीडी और कुछ मेग्जिन मिले। वो मेग्जिन एकदम क्सक्सक्स फोटो वाले थे जिसके अन्दर आंटी, सेक्सी विदेशी छिनालो के पिक्स थे जो बड़े बड़े लण्ड लेती है।

मैं समझ गया की आंटी के अन्दर की औरत विधवा होने के बाद भी कुलबुला रही है और उसे लण्ड की जल्दी ही जरूरत है! मैंने सोचा की आंटी के साथ चुदाई के चान्सिस भी बढ़िया है क्यूंकि वो खुद पहले से तपी हूँई है। लेकिन चोदुं तो कैसे चोदुं अपनी सेक्सी नंदिनी आंटी को! आंटी के वक्ष और पुष्ठ को देख के अब लिंग और अंग अंग में शोले भड़क रहै थे मेरे।

आंटी अभी भी वही नजरो से देखती थी। फिर हूँआ ऐसा की मेरे एक कजिन की शादी थी और हम सब को लक्जरी बस में बारात ले के जाना था। बस के अन्दर जब मैं चढ़ा तो वो एकदम पेक थी। आंटी अपने दोनों बच्चो को ले के दो वाली सिट पर बैठी थी। मुझे देख के उसने कहा, यहाँ बैठोगे? पहले तो मैंने इम्प्रेशन के चक्कर में कहा नहीं आप बैठो आंटी आराम से। लेकिन फिर मैंने सोचा की साला एक भी सिट नहीं बची है और मैंने तो कजिन को कह दिया की मैं कार में नहीं बस में आऊंगा। मैंने सोचा था की बस में मजे होंगे लेकिन साले मेरे सब दोस्त सिट में ऐसे बैठे थे की जैसे अनजान हो। आंटी ने दुबारा पूछा तो मैं बैठ ही गया। आंटी ने एक लड़के को अपनी गोदी में ले ली। और जो उनकी छोटी बेटी है उसे उन्होंने बस की आइल में लिटा दिया।

आंटी की जांघ मेरे को टच हो रही थी। और मेरे रोम रोम में अन्तर्वासना सुलग रही थी। बारात के लिए दूसरी सिटी जा रहै थे और कुछ 7 घंटे का सफ़र था। बस 11 बजे उठी थी लेकिन रस्ते में दो बार रुकना भी था नास्ते और बाथरूम के लिए। सुबह 9 बजे तक पहूँँचने का एस्टीमेट था। रात के डेढ़ बजे मैं बस रुकने पर निचे गया और अपने और आंटी के लिए सेंडविच मिरिंडा ले आया। आंटी के दोनों बच्चे अब आइल में थे। आंटी ने ठंडी के लिए एक चादर निकाल के उन्के ऊपर डाली थी। हमने खा पी के गाने सुनने का सोचा। आधे से ज्यादा लोग सोये हूँए थे बस में। बस आगे ड्राईवर के नजदीक की पहली 3 4 लाइन में जो घर के बड़े मर्द थे वो बातें कर रहै थे।

मैं अपनी इयरफोन की एक टूटी आंटी के कान में और एक अपने काम में लगाईं। गाने चलने लगे और बस भी। थोड़ी देर गानों के बाद एक सेक्सी मोअनिंग वाली क्लिप चल गई। मैंने छेंक करूँ उसके पहले आंटी ने भी अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह कर के चुदाई के आवाज निकालती हूँई लड़की का आवाज सुन लिया। वो फुसफुसा के हंस पड़ी। मेरा डर कम हो गया। मैंने कहा, सोरी।

वो बोली, अरे कोई बात नहीं है। (realkahani.com)

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मैंने फिर से गाने लगा दिया। आंटी ने कहा, हम दोनों भी चद्दर ओढ़ ले काफी ठंड है आज। फिर उसने अपनी बेग से एक और चद्दर निकाली और अपने और मेरे ऊपर डाली। मेरा दिल जोर जोर से धडक रहा था। मैं आंटी की तरफ देखने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। फिर वो बोली, चलो मुझे तो नींद आ रही थी।

वो सो गई और मैं दोनों कान में टूटी लगा के सुनने लगा। लेकिन मेरा दिमाग गानों में नहीं लेकिन आंटी की जांघो पर था जो मेरे बदन से घिस रही थी। मेरे लण्ड के अन्दर गुदगुदी सी हो रही थी। मैंने आंटी के तरफ देखा तो वो सो चुकी थी। उसकी आँखे बंद थी। मैं हिम्मत कर के अपने हाथ को नंदिनी आंटी की जांघ पर रख दिया। वो हिली नहीं लेकिन मुझे बहूँत डर लग रहा था। एक तो छेड़खानी और ऊपर से विधवा औरत! बाप रे कूट ना दे सब मुझे मिल के! लेकिन आंटी हिली नहीं तो मेरी हिम्मत थोड़ी खुली। मैंने सोचा की सिर्फ जांघ को सहला के थोडा लण्ड खड़ा कर के हिला लूँगा।
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पर एक बार सेक्सी आंटी की चिकनी जांघ को टच किया तो बगावत के ऊपर दिल आ गया मेरा। नंदिनी आंटी नींद में थी और मैंने हाथ को उसकी जांघ के ऊपर धीरे धीरे से हिलाया। वो सो रही थी क्यूंकि कुछ बोली जो नहीं, ना ही उसका बदन हिला। हिलती हूँई बस में एक बहाना हाथ फिसलने का था मेरे पास। मैंने हाथ एक मिनिट तक वही पर रहने दिया। वो भी ऐसी ही रही। आंटी की चुत के ऊपर हाथ को ले जाने की लालसा थी और डर भी।

मैंने सोचा की जांघ को थोड़ा दबा के देखूं। आंटी जाग रही होगी तो वो कह देगी। मैंने हाथ को जांघ में प्रेस किया। और तभी एक अजीब बात हूँई। आंटी उठी लेकिन मुझे डांटने के लिए नहीं। उसने तो जहाँ पर मेरे ऊपर से चद्दर हट गई थी वहां पर चद्दर डाल दी। शायद वो कब से जाग ही रही थी। और वो भी शायद एन्जॉय कर रही थी मेरे साथ में!

मैं आंटी की तरफ देख के उसकी आँखों में देखने लगा। अब वो मेरे से आँख नहीं मिला पा रही थी शायद। चद्दर के ऊपर आते ही मैं सीधे अपने हाथ को उसकी चुत वाले हिस्से पर ले गया। आंटी की झांट भरी पड़ी थी जैसे की हाथ जंगल में था मेरा। कबूतर के घोंश्ले से भी ज्यादा बाल थे वहां पर!

आंटी ने अपने होंठो को दांतों के तले दबा दिया। शायद काफी समय के बाद कोई उसकी चुत को टच कर रहा था। मैंने हाथ टटोल के आंटी के नाडा ढूंढा। आंटी की मदद से ही मैं उसे खोल सका। फिर मैंने अपने हाथ को आंटी की चुत के ऊपर रख दिया। आंटी की चुत एकदम से गरम हो चुकी थी और उसके अन्दर से पानी निकल आया था। मैंने अपने हाथ की दुसरी यानी की सब से लम्बी ऊँगली को आंटी के चुत के ऊपर घुमाया तो उसकी आह निकल पड़ी। शुक्र है की मेरे सिवा किसी ने सुना नहीं। मैंने हाथ को फ्रिज कर दिया और अपनी आँखे बंद कर ली। आंटी भी पथ्थर हो गई। हमको किसी ने नहीं देखा था!

मैंने फिर धीरे से अपनी ऊँगली को अपनी इस विधवा आंटी की प्यासी चुत के ऊपर हिलाई। आंटी ने अपने हाथ से मेरे हाथ को अपने ऊपर दबा दिया। वो बहूँत ही प्यासी लग रही थी।

फिर मैंने अपनी ऊँगली को आंटी की चुत के अन्दर डाल ही दी। आंटी ने हाथ को दबाये रखा था। और मैंने अपनी ऊँगली को अन्दर बाहर करने लगा था। आंटी के बूब्स को दुसरे हाथ से दबाए ये ध्यान रखते हूँए की कोई देख न ले की चद्दर हिल रही है। आंटी के निपल्स अकड चुके थे। फिर उसका हाथ मेरे लण्ड के ऊपर आ गया और वो उसे हिलाने लगी। मेरा लण्ड आज से पहले कभी इतना खड़ा नहीं हूँआ था। आंटी ने जिप खोल के अब अपनी उँगलियाँ अन्दर कर दी और वो मेरे लण्ड को सहलाने लगी थी। उसके नाख़ून मेरे लण्ड के ऊपर चिभ रहै थे लेकिन बहूँत मजा आ रहा था। आंटी ने लण्ड को अपनी मुठी में दबा के हिलाया।
Vidhwa aunty ko choda
मेरी ऊपर की सांस ऊपर और निचे की सांस निचे रह गई। आंटी मेरी मुठ मार रही थी और मैं उसकी चुत को ऊँगली से चोद रहा था। आंटी भी पूरी मस्ती में थी और मेरे लण्ड को ऊपर से निचे तक अपने हाथ से हिला रही थी। मेरे लण्ड के आगे प्रीकम छुट गया था जिसे आंटी ने अपनी ऊँगली से ले के लण्ड पर ही घिस दिया। मैं सातवें आसमान के ऊपर था। अब मैंने पहली ऊँगली भी दूसरी के साथ मिला ली और आंटी की गरम चुत में पेल दी। आंटी को बड़ा ही मजा आ रहा था और वो मजे से ऊँगली से चुदवा रही थी। तभी मुझे लगा की मेरा वीर्य छूटेगा। मैंने फटाक से अपना रुमाल लिया और चद्दर के अंदर हाथ कर के अपने लण्ड पर रख दिया। आंटी हंस पड़ी और मैंने अपने लण्ड के सब पानी को रुमाल के अन्दर ही ले लिया। लण्ड को साफ़ कर के मैंने आंटी को दे दिया रुमाल। आंटी ने उस से अपनी चुत साफ़ की। फिर उसने मुझे इशारे से पूछा तो मैंने कहा खिड़की से बहार फेंक दो। हम दोनों के सेक्स का रस रुमाल में सडक पर फेंक दिया गया।

लेकिन उस दिन से मेरे लिए रास्ता खुल गया नंदिनी आंटी को चोदने का। इस विधवा आंटी के अन्दर बड़ी ही आग थी जो मैं आप को आगे की कहानियों में बताऊंगा दोस्तों!

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