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भाभीजान के दोनो छेद को कई बार चोदा

हेल्लो दोस्तों, भाभिजान के दोनों छिद्रों को कई बार चोदा. यानि की चूत को और गांड दोनों को कई बार चोदा. पर कैसे जाने। मेरे दोस्तो, मैं आपका दोस्त तस्सुव्वर ख़ान, मैं लाया हूँ एक सच्ची कहानी।

एक मेरी भाभीजान मुस्कान है। जिनकी शादी एक साल पहले ही हुई है.
एक दिन भाई किसी काम से बाहर गए थे, भाई दो दिन के लिए गए थे.
भाई के जाने के बाद मैं भाई के घर गया। क्योंकि हमारे यहाँ शादी के बाद अलग कर देते हैं.

तो मैं उनके घर गया, भाभीजान घर में काम कर रही थी। तो मैं जाकर बाहर चारपाई पर बैठ गया.
फिर भाभीजान बोली- ऐसा कर। मार्केट से सब्जी ले आ.
मैंने कहा- ठीक है.

मैं मार्केट गया और सब्जी लाकर भाभीजान को दे दी.
मैं वापिस आने लगा। तो भाभीजान बोली- आ जा। बैठ जा। कभी-कभी तो आता है.
मैंने कहा- वैसे ही नहीं आ पता हूँ। टाइम ही नहीं मिलता.
भाभीजान बोली- कोई फ़्रेंड बना रखी होगी। उसी में मस्त रहता होगा.
मैंने कहा- नहीं तो। मैं तो इन चीजों में ध्यान ही नहीं देता हूँ.

भाभीजान मेरे पास आकर बैठ गई। और बोली- सच बता कि अब तक किसी के साथ कुछ।
मैंने उनकी बात काटकर बोला- क्या। कुछ?
तो भाभीजान बोली- मेरा मतलब है कि किसी के साथ सेक्स किया है?

मैंने कहा- नहीं। अभी तो मैं छोटा हूँ.
भाभीजान आँख मारते हुए बोली- अच्छा। छोटा है।
इससे मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैं लोवर में था। तो मेरा जब लंड खड़ा हो जाता है तो लोवर में दिख जाता है.

मैंने अपने लंड पर हाथ रख लिया और अन्दर की तरफ दबाने लगा। तो भाभीजान मुझे देख रही थी.

भाभीजान ने मेरा हाथ हटा दिया। मेरा लंड लोवर के बाहर से साफ़ नज़र आ रहा था.

भाभीजान बोली- ये क्या है?
मैंने कहा- क्या?
भाभीजान ने लंड पर हाथ रख कर कहा- ये।!

मैं एकदम चुप हो गया. भाभीजान ने मेरा लोवर नीचे की ओर खिसका दिया. लंड अंडरवियर में था। तो भाभीजान ने वो भी नीचे खिसका दिया. मेरा लंड आज़ाद हो गया. भाभीजान लंड को देखकर और ज्यादा मेरे पास को आ गई.

भाभीजान ने मेरे लंड को हाथ में ले लिया और ऊपर-नीचे करने लगी. तभी भाभीजान ने भी अपनी सलवार उतार दी और कमीज़ भी उतार दी. अब भाभीजान एक छोटी सी ब्रा में थी. भाभीजान मुझसे चिपक गई. उसने अब अपनी ब्रा को भी उतार दिया. साथ में मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया. भाभीजान काफ़ी टाइम तक लौड़े को मुँह में लिए रही और चचोरती रही.

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मेरी सिसकारियाँ निकलती रहीं। मुझे बेहद मजा आ रहा था.
मेरे लंड ने भाभीजान के मुँह में माल निकाल दिया, भाभीजान को एकदम से उल्टी सी आई। क्योंकि मुँह में सारा वीर्य चला गया था लेकिन भाभीजान ने माल थूक कर लंड को फिर से मुँह में डाल लिया.

अब मुझे से भी रुका नहीं गया और मैंने भी उनको 69 की अवस्था में लिटा कर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया. भाभीजान ‘आहह। ऊहह। आह।’ करने लगी.

कुछ टाइम बाद भाभीजानजान बोली- अब अपना लंड मेरे अन्दर डालो.
तो मैंने अपना लंड भाभीजान की चूत के ऊपर रख दिया. लंड गीला था। क्योंकि अभी भाभीजान ने अपने मुँह से ही तो निकाला था ना। तो लंड एक झटके में उनकी चूत के अन्दर घुसता चला गया.
भाभीजान एकदम से चिल्लाई। क्योंकि जब दमदार लंड अन्दर एकदम से जाता है। तो दर्द होता ही ना।

मैंने भाभीजान को 15 मिनट तक लगातार हचक कर चोदा. उनका दूसरी बार माल छूट गया और मेरा वीर्य भी निकल गया. अब मेरा भी लंड नीचे की ओर झुकने लगा। जैसे हार गया हो. तो भाभीजान बोली- बस इतना ही दम था?
मैंने कहा- नहीं। मेरी भाभीजान जान अभी 5 मिनट रूको.

इतने में मैंने उनके अमरूद जैसे मम्मों को भींचा। तो मेरा लंड एक बार फिर खड़ा हो गया. मैंने फिर भाभीजान की चूत में पेल दिया. लेकिन इस बार भाभीजान को ज्यादा दर्द नहीं हुआ क्योंकि वो चुद चुद कर वैसे भी खुली हुई थी. फिर मैं भी चालाक था। मैंने अपना लंड भाभीजान की गांड पर रख दिया.

भाभीजान बोली- आज तक तो तेरे भाई ने ऐसा नहीं किया। ऐसा मत करो.
भाभीजान ऐसा बोली।
तो मैंने भी जानबूझ कर अपना लंड गांड पर रख कर अन्दर डालने की कोशिश की। लेकिन लंड अन्दर नहीं गया। क्योंकि भाभीजान की गांड अभी तक किसी ने मारी नहीं थी. मैंने भी सरसों का तेल लंड पर लगा कर गांड के अन्दर डालने लगा. थोड़ा ही अन्दर जाने लगा कि भाभीजान दर्द से चिल्ला कर बोली- ओह्ह। बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने उनकी बात नहीं सुनी। मैंने एकदम झटके से अपना लंड अन्दर पेल दिया. भाभीजान एकदम तेज आवाज में चिल्लाई- ऊहह। मर गई। आहह। ओह मेरी अम्मी की गान्ड मार दी कमीने ने।
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मैंने उनकी गांड की तरफ देखा तो उनकी गांड से खून आने लगा. लेकिन मैंने गांड से लंड बाहर नहीं निकाला और अन्दर ही डाले रखा. अब मैं तेज झटके देने लगा। भाभीजान बोली- आज तो मार ही देगा.
मेरे अन्दर भूख इतनी ज्यादा थी कि भाभीजान को मैंने चार बार चोदा.

फिर भाभीजान बोली- अब जल्दी हटो। कोई आ जाएगा.
तो मैंने उनको छोड़ दिया। अपना लोवर पहना और वापस आने लगा.
भाभीजान बोली- जिसने मेरी गांड में खून निकाला। एक बार और सामने लाओ.

मैंने अपना लंड निकाल दिया. मेरे लंड पर अब भी थोड़ा सा खून लगा हुआ था. तो भाभीजान मेरे लंड को कपड़े से पोंछने लगी. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। फिर भाभीजान ने मेरे लंड को 10 मिनट तक चूसा। फिर मैंने उनके मुँह में सारा वीर्य निकाल दिया। लेकिन इस बार भाभीजान को उल्टी नहीं लगी और मेरे वीर्य को अपने मुँह ले लिया और अन्दर जाने दिया.

मैं फिर अपने घर आ गया। उस दिन के बाद से मैंने अपनी भाभीजान जान को कई बार चोद दिया है.

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