loading...

भैया की साली की कुँवारी चुत की चुदाई

Desi chut Chudai ki kahani, antarvasna hindi sex story, desi sex kahani, Chudai story. Bhai ki saali ki chut ko choda.

मै अब पचास साल के ऊपर का हो गया हूँ। ऊपर वाले कि बड़ी इनायत है कि आज भी सेक्स में खूब मज़ा आता है और मुझे अभी भी चुदाई के लिए साथी मिल जाते हैं।
आज करीब 36 साल हो गए चोदते हुए और 50 से ज्यादा चुतों के साथ मै हमबिस्तर हो चुका हूँ।

आज जो मै लिख रहा हूँ, वो मेरी ज़िन्दगी में मेरे साथ हुआ है। मेरी इस घटना में कल्पना का कोई स्थान नहीं है।
मै आज उस चुदाई के बारे में बता रहा हूँ जब मेरे जीवन की पहली कुंवारी लड़की आई थी और जिसका मैने कौमोर्य भंग किया था।
आपकी आशानुसार नाम और जगह दोनों ही काल्पनिक हैं।

यह घटना 1980 के दशक के आखिरी सालों की है, तब मै ग्रेजुएशन कर रहा था, चुदाई का अनुभव पहले से ही था इसलिए कुछ फितरत हो गई थी लड़की पटाने की, लेकिन एक दिक्कत थी कि छोटा शहर था और मै और मेरा परिवार काफी जाना हुआ था, इसलिए बिना पूरा भरोसा हुए किसी को प्रपोज करना बड़ी समस्या थी।
मेरे घर से लगा हुआ ही एक परिवार और रहता था, जो बहुत बढ़िया लोग थे। कुछ साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। हमारे दोनों परिवार के बीच काफी घनिष्ठता थी। मै उन लोगों को भईया और भाभी कहता था। मेरे इन भाई साहब की ससुराल भी उसी शहर में थी, इसलिए उनके ससुराल के सारे सदस्यों से हम लोगों काफी घुले-मिले हुए थे।

उसमें से एक लड़की थी, जिसका नाम सुधा था, वो मेरे पड़ोसी भईया की साली थी। चढ़ती जवानी का माल थी और मेरी बहनों के साथ की ही थी।
जैसा कि होता है, घर में आना-जाना था और बातें भी होती थीं। वो मुझे भईया कहती और रक्षा बंधन में राखी भी बाँधती थी।

हकीकतन मेरा उसको लेकर कोई भी गलत इरादा नहीं था, लेकिन ज़िन्दगी में कुछ ऐसे पल आ जाते हैं कि इंसान उस रास्ते पर चल पड़ता है, जिस पर उसने कभी सोचा नहीं होता है।

शुरूआत होली से हुई थी, मै होली खेलने अपने दोस्तों के साथ तैयार बैठा था और उन्हीं में से किसी दोस्त के आने का इंतज़ार कर रहा था।
तभी भईया के ससुराल वाले आ गए और उनके यहाँ होली खेलने लगे। मेरे माता पिता और बहनें भी उन्हीं के यहाँ उन लोगों से खेलने चली गईं।

औपचारिकता निभाने के लिए मै भी वहाँ गया, लेकिन जब गीली होली होने लगी तो मै वहाँ से खिसक कर बाहर बरामदे में आ गया, क्योंकि अभी से मुझे भीगने का बिल्कुल भी मन नहीं था।

मै वहीं खड़े बाहर गेट की तरफ टकटकी लगाए अपने दोस्त का इंतज़ार करने लगा। तभी किसी ने पीछे से मेरे ऊपर रंग की बाल्टी डाल दी। अचानक इस हमले से मै अचकचा गया और गुस्से से पीछे मुड़ कर देखा तो सुधा ‘खी, खी,’ करके हँस रही थी और चिल्ला रही थी ‘भईया होली है, बुरा न मानो होली है,’

मेरा बहुत तेज़ दिमाग ख़राब हुआ, लेकिन हँस भी दिया, आखिर होली है। कब तक मै सजा-धजा बचा रहूंगा।
मैने हंसते हुए कहा- सुधा यह तो बदमाशी है, थोड़ा रंग लगा देती, पूरा गीला कर दिया और अभी दिन भी नहीं शुरू हुआ है, चल, अब देख, तेरी खैर नहीं,

वो मुझे हंसते हुए चिढ़ाती हुई अन्दर भाग गई और मै भी हाथों में रंग लगा कर उसके पीछे गया। मै उसको रंग लगाना चाहता था लेकिन वो इधर-उधर भाग रही थी।
मैने उसको आखिर ड्राइंग रूम के बाहर वाले आंगन में दबोच लिया, वह ‘न, न,’ करती रही, फिर भी मैने उसके चेहरे पर रंग लगा दिया।

मैने ज़ब उसको छोड़ा, तो उसने भी कुछ देर के बाद आकर पीछे से रंग लगा दिया। मैने उसी वक्त उसको पकड़ लिया और उसके ही हाथों से उसका चेहरा रंग दिया। वह कसमसाने लगी, तो उसको मैने दीवार के सहारे बांध दिया। उसी वक़्त कुछ ऐसा हुआ कि मैने अपने बदन का भार उस पर डाल कर दीवार से चिपका दिया और उसकी चुचियाँ मेरे सीने से लग गईं।

तभी हमारी आँखें मिलीं और मैने हल्के से अपनी पकड़ उस पर से छोड़ दी, वह वहीं खड़ी रही और उसने अपनी आँखें झुका दीं।
फिर बिना सोचे-समझे जब मै उससे अलग हुआ, तो उसकी चूचियों को दबा दिया।
वह चिहुंक पड़ी और भाग गई।

मेरी हालत ख़राब हो गई, मुझे डर था कि वो कहीं किसी से कह न दे। लेकिन 2-3 दिनों तक जब किसी ने कुछ नहीं कहा, तो मै समझ गया कि उसने किसी से नहीं कहा है।
फिर तो मेरी हिम्मत खुल गई, ज़ब अगली बार कुछ दिनों के बाद वह मुझे अकेले में मिली, उस वक्त वो मेरी बहन से मिलने आई थी, इस वक्त वो सीधे स्कूल से अपनी बहन से मिलने आई थी, लेकिन उसकी बहन थी नहीं इसलिए मेरे घर मेरी छोटी बहन से मिलने चली आई।

उस वक्त मेरी बहन बाथरूम में कपड़े बदल रही थी, तो वो मुझे कमरे में अकेले खड़ी मिल गई।
मैने पीछे से आकर उसकी पीठ पर हाथ रख दिया और पीछे से उसकी गर्दन पर चुम्बन कर लिया, वो चिहुंक गई और मुझको खड़ा पाकर कर उसने कहा- भैया यह म़त कीजिए, ये क्या कर रहे हैं, कोई देख लेगा तो?

मैने उसको वहीं उसका मुँह मोड़ते हुए उसके होंठों पर चुम्बन कर लिया और एक हाथ से चूचियों को उसके स्कूल वाले ब्लाउज के ऊपर से दबा दिया।
साथ में, मै उसे ‘आई लव यू’ कहने लगा। करीब दो मिनट तक मै उसको चुमता रहा और उसकी चूचियों को सहलाता रहा।
मेरा शरीर पीछे से उससे सटा हुआ था और मेरा खड़ा लंड उसके गाँड में रगड़ रहा था।

ज़ब मैने उसके ब्लाउज में हाथ डालने की कोशिश की, तो मुझसे अपने को छुड़ा कर वो भाग गई। इसी तरह ज़ब भी मौका मिलता रहा, हम लोग चुमने लगे और धीरे-धीरे वो मुझसे खुलने लगी।

एक दिन ऐसा भी मौका आया कि मुझे उसके साथ एकांत मिल गया। उस दिन मैने पहली बार उसकी चूचियों को उसके ब्लाउज ऊपर से निकाल लिया और उनको चुसा।
उसकी चुचियाँ बहुत ही कड़ी और मस्त थीं, उनमें काफी भराव था।
मेरे उस तरह से चुसने से वो सिसया गई और बदहवास हो गई।

मै भी साल भर बाद किसी लड़की के साथ इस अवस्था तक पहुँचा था, इसलिए मेरे दिमाग में केवल उसको चोदने के अलावा कुछ घूम ही नहीं रहा था।

उस दिन के बाद जब भी मौका लगता, वो मुझे अपनी चूचियों से खेलने देती और मै भी पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को स्कर्ट के ऊपर से ही उसकी गांड उसकी चुत पर रगड़ता था।

एक दिन, जब मालूम था कि हम अकेले है, मैने उसको स्टोर रूम में खींच लिया और अपना लंड अपनी पैन्ट से निकाल कर उसके हाथ पर रख दिया।
वहाँ अँधेरा था, इसलिए जब उसने अपने हाथ में मेरा लंड महसूस किया तो कूद पड़ी।
जवानी का भन्नाया लंड था बिल्कुल सख्त और गर्म,

एक बारगी तो उसने हाथ ही हटा दिया, बड़ी मुश्किल से मैने उसके हाथ को पकड़ कर अपना लंड उसको पकड़ाया।
जैसा मेरा अनुभव था, जैसे-जैसे मै उसको चुमने और उसकी चूचियों को दबाने लगा, वो भी मेरे लंड को दबाने लगी।

उस दिन से उसका लंड का डर खत्म हो गया और मौके बे मौके वो मेरा लंड सहलाने लगी।
यह कहानी आप रियलकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

एक दिन वह दिन में अपनी दीदी से मिलने आई, उस दिन सन्डे था। मेरी बहनों के स्कूल में स्कूल का वार्षिक दिवस था, तो सब लोग वहीं गए थे।

वो ज़ब आई, तो वह मुझसे बाहर ही मिल गई। मैने इशारे से अपने पास बुलाया तो वह बोली- दीदी के पास जा रही हूँ।
मैने कहा- उनसे बाद में मिल लेना, अभी यहाँ आ जाओ।

वह एक बार रुकी, इधर-उधर देखा और तेजी से मेरे पास अन्दर आ गई।
तब मैने कहा- आज कोई नहीं है घर पर,

वह थोड़ा घबड़ाई, लेकिन मैने उसको बाँहों में लेकर उसके होंठों को अपने होंठों से दबा दिया और चुमने लगा।

अब आज मै सुधा की चुदाई का मन बना चुका था पर शायद इसके लिए वो पूरी तरह से तैयार नहीं थी और मुझे तो आज उसकी चुत चोदनी हो थी,

वह टॉप और स्कर्ट पहने थी, उसको लेकर में अन्दर कमरे में आ गया और अपने बिस्तर पर बैठा दिया। मै उसके गालों, होंठों, गर्दन और कान को चुमने लगा। इसी के साथ मैने धीरे से उसका टॉप ऊपर कर दिया और पीछे उंगली डाल कर उसकी ब्रा भी ख़ोल दी।

loading...

वह जानती थी कि घर में कोई नहीं हैं तो उसने मना भी नहीं किया।

मै उसकी चूचियों को चुसने लगा और उसकी घुंडियों को उंगली के बीच लेकर रगड़ने लगा। मेरी हालत ख़राब हो रही थी, इससे पहले कभी हम लोगों को इतना सुकून से मौका नहीं मिला था और वह भी सिसकारी लेने लगी थी।

तब मैने पैंट की ज़िप खोल कर अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में दे दिया और वह उसको सहलाने लगी।

हम दोनों एक-दूसरे से चिपटे हुए चुम-चाट रहे थे कि मैने अपना हाथ पहली बार उसकी स्कर्ट के अन्दर डाला और उसकी चुत को पैंटी के ऊपर से छुआ।
वह कसमसाई और थोड़ा असहज हुई।
तब मैने उसको कस कर होंठों को चुमते हुए बिस्तर पर जोर देकर लेटा दिया। झटके से लेटने से उसकी स्कर्ट ऊपर हो गई और सफ़ेद पैंटी दिखने लगी।

मैने उसको जोर से अपने बदन से चिपटा लिया और अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया और उसकी चुत को अपने हाथ से दबा लिया।

वह एकदम से कस के मुझसे चिपक गई। उसकी चुत पर हल्के से बाल थे और बिल्कुल गरम हो रही थी। मैने उसकी पैंटी उतारनी चाही, तो उसने कांपते हुए कहा- भैया यह म़त कीजिए, कोई आ जाएगा,
मैने कहा- कोई नहीं आएगा, बार-बार इतना मौका नहीं मिलता, तुम मुझको प्यार करती हो और मै भी तुमको बहुत प्यार करता हूँ।

यह कह कर मै उसकी चुत को रगड़ने लगा, उसके मुँह से ‘आह, आह,’ की आवाजें निकलने लगी थीं और आँखें भी अधमुंदी सी हो रही थी।
उसने विचलित सी आवाज में कहा- कुछ और म़त करना भैया,
मैने पूछा- और क्या नहीं करना है?

वह शरमा गई और अपना मुँह मेरे सीने में छुपा दिया। मैने अब उसकी चुत में आहिस्ते से उंगली डाल दी और वह जोर से चिहुंक गई।
मैने धीरे से फिर से वही सवाल पूछा जिस पर उसने कहा- वही जो दीदी करती हैं।
मैने पूछा- क्या तुमने दीदी को करते हुए देखा है?

उसने सर हिलाकर ‘हाँ’ कहा, यह सुन कर मै और गर्म हो गया, और कस कर उसकी चूचियों को चुसने लगा और उसकी चुत को रगड़ने लगा।
अब वो निढाल होकर मेरी हर हरकत का आँख बंद करके मजा लेने लगी थी।

तभी मैने अपनी पैंट उतार दी और ज़ब तक वह मना करती, मैने उसकी पैंटी खींच उतार दी।
उसकी नंगी जांघें, नंगी चुत देख कर मै अपने को रोक नहीं सका और उसके ऊपर चढ़ कर अपने बदन को रगड़ने लगा।
मै अपने बदन से उसके बदन को रगड़ रहा था और साथ मै उसको चुमता भी जा रहा था।

उसकी रसभरी कोरी चुचियाँ मेरे हाथों से मसल रही थीं, मेरा लाल गर्म लंड उसकी चुत से रगड़ खा रहा था, उत्तेजना में मेरे लंड से मदन रस निकल रहा था और मेरे लंड का सुपारा भीग गया था।
वह सिसकारी लेने लगी।

तभी मौका देख कर मैने अपने लंड को उसकी चुत पर रख दिया, वह मेरे लंड का सुपारा अपनी चुत के छेद पर पाकर बिदक गई और नीचे से निकलने की कोशिश करने लगी।

वो कहती जा रही थी- भैया यह म़त करो, मै मर जाऊंगी।
मैने शरारत से पूछा- क्या नहीं करूँ?
वो बोली- आप जानते हो भईया, प्लीज मत करो,
मैने थोड़ा सा ढील देकर कहा- बोलो ना सुधा, मेरी कसम!

तब उसने कहा- जीजा जी जो दीदी के साथ करते हैं!
मैने कहा- मालूम है, उसे क्या कहते हैं?
उसने कहा- चुदाई,
मैने कसके उसको चिपका लिया और कहा- उसको चुदाई कहते हैं, जो हर प्यार करने वाला करता है।

मै उसको चिपका कर उसके सारे बदन पर अपने हाथ से सहला रहा था, तब मैने उसका अधखुला टॉप और ब्रा भी उतार दी। वह आंख बंद करके लेटी रही।
अब मेरी हिम्मत बढ़ी और मैने उसके पैर फैलाकर उसकी चुत पर मुँह रख दिया और जैसे ही मैने अपनी जीभ से उसकी चुत को चाटा, वो ‘अईईईईईईए,’ करके चिल्लाई।

मैने कसके उसकी चुत चाटना शुरू कर दिया और जीभ उसकी कुंवारी चुत में डालने लगा।
यह मेरी पहली कुंवारी चुत थी, जिसका स्वाद मै चख रहा था, उसकी महक मेरे अन्दर तक समा गई थी और उस दिन मै समझ गया था कि मुझे चुत चाटना, उसकी महक और उसका स्वाद मुझे पसंद है।

मेरी जीभ जब उसकी क्लिट को रगड़ रही थी, तब उसके पैर बिल्कुल ही ढीले पड़ गए थे।
मैने तब उसके गाँड के नीचे तकिया लगा दिया, जिससे उसकी चुत ऊपर उठ कर सामने आ गई।

मै अपने लंड का सुपारा उसकी चुत पर रख कर उसकी चुत पर रगड़ने लगा। तब उसने कहा- भैया इसको अन्दर म़त करना, बहन हूँ तुम्हारी, राखी बांधती हूँ।
यह कहानी आप रियलकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मैने अपन लंड उसकी चुत पर रगड़ते हुए, उसको पुचकारते हुए कहा- सुधा तुम मेरी सबसे प्यारी बहन हो और हम दोनों एक-दूसरे को प्यार करते हैं। कई बहन-भाई ऐसा करते हैं, इतने दिनों से हम लोग भी तो इसके अलावा सब कुछ करते थे।

मैने उसका एक हाथ अपने लंड पर रख दिया और उसके होंठ चुमने लगा। मेरे लंड से मदन रस निकल रहा था और सुपारा गीला हो गया था और वह उसके हाथ में लगने लगा था।
मै थोड़ा उठ कर एक रुमाल ले आया और क्रीम भी ले ली।

मैने उसका हाथ पोंछा और लंड पर क्रीम लगा दी और उंगली से उसकी चुत में भी लगा दी। अब तक उसका और मेरा हाल बेहाल हो गया था।
मैने कहा- सुधा आई लव यू,

मै उसके ऊपर फिर आ गया, मैने उसके पैर फैलाकर अपना लंड उसकी चुत की फांकों को फैलाकर डालने लगा,
तब सुधा बोली- भैया कुछ गड़बड़ तो नहीं होगी?
मैने कहा- नहीं, कुछ नहीं होगा, मै बाहर निकाल कर झाड़ दूंगा।

यह कहते हुए मैने एकदम से लंड उसकी चुत में डाल कर तगड़ा धक्का मार दिया।
वह एकदम से चिल्लाई- ऊ मम्मी, मर गईइइ, मार डाला रे,ओह्ह, भईया निकाल लो, छोड़ दो,
लेकिन मैने 2-3 धक्के में आधा लंड उसकी चुत में डाल दिया और उस पर लेट गया।
अब मै उसको चुमने लगा।
उसकी आँखों में आंसू आ गए थे।

मै उसको सहलाता रहा और सान्त्वना देता रहा- अब कुछ ही देर में सब ठीक हो जाएगा।
फिर धीरे-धीरे मै उसको चोदने लगा।
अब भी वह दर्द में थी, लेकिन मै उसकी चुत में धक्का मारता रहा।
वह भी कस कर मेरे से चिपटी रही और रोते हुए बोलती रही- भैया अब बस करो, फिर कर लेना,

लेकिन मै उसको चुमते हुए उसकी चूचियों को चुसते हुए चोदता रहा। उसकी कुंवारी चुत इतनी तंग थी कि मेरा लंड उसकी गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था और एकदम से मुझे लगा कि मै झड़ जाऊँगा।

मैने जल्दी से अपना लंड उसकी चुत से निकाल लिया और उसके पेट पर अपना पानी गिरा दिया।
उसकी चुत से बड़ा हल्का सा खून निकला था, जिसको मैने रुमाल से पोंछ दिया।
वह उठने लगी, तब मैने उसको चिपका करके खूब प्यार किया।

सुधा ने तब कहा- भैया किसी को पता नहीं चलना चाहिए।
मैने कहा- पागल हो क्या? तुम मेरी बहन हो और यह हम दोनों के बीच ही रहेगा।

फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और बाल ठीक किए और जाते वक़्त कस कर एक-दूसरे से गले मिले और फिर वह तेजी से मेरे घर से बाहर निकल गई।

वह अपनी दीदी के घर ना जाकर सीधे अपने घर को चली गई।
इसके बाद मैने सुधा को करीब दस बार चोदा, बाद में मेरे पिता जी का तबादला हो गया और मेरी यह कहानी बंद हो गई।

बाद में कई साल बाद वो मिली, तब वह शादीशुदा हो गई थी, हम दोनों एक-दूसरे से कटते रहे, लेकिन कभी भी उसको यह एहसास नहीं होने दिया कि मै फिर से उसको चोदना चाहता हूँ।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...