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चिंकी की चुत – मजेदार कहानी

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रियलकहानी के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। एक बार फिर से मै आप सभी के लिए कहानी लेकर आई हूँ। आज की यह कहानी मेरी नहीं है। बल्कि मेरे एक दोस्त की है। तो आइए मेरे इस दोस्त की कहानी उसी जुबानी सुनते हैं।

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम ऋषि है। मै दिल्ली का रहने वाला हूँ।
आज जो कहानी मै आपको बताने जा रहा हूँ। वो आज से लगभग 6 साल पुरानी है।

हमारा घर काफी बड़ा है। उसमें 3 फ्लोर हैं जिसमें दो फ्लोर में हम लोग रहते हैं और एक फ्लोर हम किराए पर देते हैं। अभी उस फ्लोर पर एक फैमिली रहने के लिए आई थी, उनकी दो बेटी और एक बेटा था।

उनकी बड़ी बेटी। जिसका नाम चिंकी था बहुत प्यारी थी। वो उस टाइम 12वीं क्लास में पढ़ती थी। क्या कमल का फिगर था उसका। कसे हुए मम्मे और उठे हुए चुतड़ थे. उसे देख कर मेरे होश उड़ जाते थे। वो खूबसूरत भी बहुत थी।

उन लोगों का हमारे घर में काफी आना:-जाना था। पर जब भी मै उनके घर जाता। तो चिंकी देख कर वहाँ से चली जाती।
मै जब भी उसके पास जाने की कोशिश करता। वो हमेशा मुझसे दूर भाग जाती थी।

कुछ टाइम तक ऐसे ही चलता रहा। फिर चिंकी के बोर्ड के एग्जाम शुरू हो गए।
जिस दिन उसका एग्जाम था। चिंकी के पापा मेरे पास आए और उन्होंने मुझसे कहा:- बेटे। मुझे आज ऑफिस जल्दी जाना है। और चिंकी का आज एग्जाम भी है। और उसका एग्जाम सेंटर भी काफी दूर है। तो क्या तुम उसे आज एग्जाम दिलवाने ले जा सकते हो?

तो मैने अंकल को ‘हाँ’ कह दिया और मै चिंकी को एग्जाम दिलवाने ले गया।

एग्जाम छूटने के बाद जब हम घर आ रहे थे। तो मैने चिंकी से पूछा:- तुम मुझसे इतना डरी:-डरी क्यों रहती हो। जब भी मै तुम्हारे सामने आता हूँ। तुम वहाँ से चली जाती हो?
तब उसने मुझसे कहा:- मै आपसे डरी नहीं हूँ। बस मुझे थोड़ी शर्म आती है। इसलिए मै आपके सामने से चली जाती हूँ।
तो मैने उससे पूछा:- किस बात की शर्म आती है तुमको?

उसने मेरे सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। बस चुप रही। तो मैने भी उससे ज्यादा कुछ नहीं कहा।

मैने थोड़ा डरते:-डरते उससे दोस्ती के लिए कहा। तब भी उसने कुछ नहीं कहा। फिर में थोड़ी मस्ती के मूड में आ गया और बाइक के ब्रेक थोड़ी जोर से लगाने लगा। इससे उसके मम्मे मेरी पीठ से आकर टकराने लगे, मुझे बहुत मजा आने लगा था।

कुछ देर बाद हम दोनों घर पहुँच गए और चिंकी अपने घर चली गई। फिर शाम को चिंकी मेरे पास आई और दोस्ती के लिए ‘हाँ’ करके चली गई।
फिर हम दोनों में बातचीत शुरू हो गई।

एक दिन चिंकी के पापा फिर से मेरे पास आए और उन्होंने मुझे अपने घर की चाभी दी और कहा:- बेटे। मै और मेरी वाइफ हमारे एक रिलेटिव के घर जा रहे हैं। चिंकी का आज आखिरी एग्जाम है। मैने उसे एग्जाम सेंटर छोड़ दिया है। और उसने कहा है कि वो अपनी सहेलियों के साथ वापस आ जाएगी। मेरी छोटी बेटी रोशनी और बेटा अंकित भी स्कूल गए हैं। तो वो लोग जब घर आ जाएं तो उन्हें ये चाबी दे देना और कह देना कि हम शाम तक घर वपिस आ जाएंगे।

मैने भी कह दिया:- ठीक है अंकल। मै उनको बता दूंगा और चाभी भी दे दूंगा।

दोपहर का टाइम था। तो मै सोया हुआ था। एक बजे के करीब दोनों बच्चे और चिंकी वापिस आए। घर पर ताला बंद देख कर चिंकी मेरे घर आई। उस वक़्त मेरे घर में भी कोई नहीं था और मै कमरे में अकेला सो रहा था।

चिंकी मेरे कमरे में आई। मै उस वक़्त तौलिया पहन कर ही सोया हुआ था। चिंकी ने मुझे जगाया और बोली:- घर में ताला लगा हुआ है। मम्मी:-पापा कहाँ गए हैं?

मै उठा और चिंकी को चाबी देते हुए बोला:- तुम्हारे मम्मी:-पापा किसी रिलेटिव के घर गए हुए हैं शाम तक आ जाएंगे। मैने देखा चिंकी की नजरें मेरे तौलिये की तरफ थीं। मै सोकर उठा था तो मेरा लंड बिल्कुल तन कर खड़ा हुआ था क्योंकि मेरे सिर्फ तौलिया पहने हुए होने के कारण वो कुछ ज्यादा ही बड़ा दिखाई दे रहा था।

मै तुरंत पलट कर बिस्तर पर बैठ गया और चिंकी से कहा:- और कुछ?
वो बोली:- नहीं।
और पलट कर वापिस चली गई।

मै फिर सोने के लिए लेट गया। पर मुझे अब नींद नहीं आ रही थी। मेरा लंड बहुत ही ज्यादा कसमसा रहा था। उसे उस वक़्त किसी लड़की की चुत की तलाश थी।

एक घंटे तक मै अलग:-अलग ख्यालों में खोया रहा। मेरा दिल चिंकी को पटाने का कर रहा था। फिर मैने चाय बनाई और चाय पीते हुए टीवी देखने लगा। तभी चिंकी फिर से आई और दरवाजे पर खड़ी हो गई।

मैने उसे देखा और बोला:- कोई काम है?
वो बोली:- नहीं। वो रोशनी और अंकित सो गए थे। और मुझे नींद नहीं आ रही थी। घर में अकेले बोर हो रही थी इसलिए आ गई।
मैने कहा:- ठीक है। आओ बैठो।
वो मेरे पास आकर बिस्तर पर बैठ गई।

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मैने पूछा:- चाय पियोगी?
वो बोली:- हाँ।
मैने कहा:- ठीक है। और बना देता हूँ।
तो चिंकी बोली:- बनाने की क्या जरूरत है। अपनी वाली में से ही थोड़ी सी दे दो।
मैने कहा:- जूठी है।
वो बोली:- कोई बात नहीं।
तो फिर मैने कप में डालकर उसे चाय दे दी और हम बातें करने लगे।

इस समय मेरा ध्यान तो उसके शरीर पर ही था। क्या खूब लग रही थी वो।
मै मन ही मन चिंकी को चोदने की सोच रहा था।

चिंकी के मम्मों की झलक ऊपर से ही दिखाई दे रही थी। उसके मम्मों के उठाव देखते ही मेरा लंड फिर से खड़ा होना शुरू हो गया। वो चाय का कप रखने के लिए मुड़ी। मैने देखा कि उसने पीछे से ज़िप वाली कुर्ती पहनी हुई थी और उसकी ज़िप आधी नीचे थी। जिससे उसकी ब्रा साफ नज़र आ रही थी। उसको देख कर तो मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया।

हमारी हँसी:-मजाक अभी भी चल रही थी। फिर चिंकी ने मजाक से मेरे कंधे पर हाथ मारा। कुछ देर बाद उसने इसी तरह 2:-3 बार मेरे कंधे पर हाथ मारा। तो मैने भी अचानक से उसके कंधे पर हाथ मारना चाहा। तो वो पीछे की तरफ हट गई। जिससे मेरा हाथ उसके मम्मों पर जा कर लगा।

इससे वो रोने लगी। मै भी घबरा गया और उसे चुप करने की कोशिश करने लगा। इस दौरान उसे चुप कराते हुए मैने उसके माथे पर चुम्बन ले लिए। तो वह कहने लगी:- तुमको शर्म नहीं आती। तुमने मुझे किस क्यों किया?

तो मैने उसको बोला:- मैने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया है। तुम रो रही थीं। तो तुमको मनाने के लिए मैने किस किया है।
तो वो कहने लगी:- कमरे का दरवाजा भी खुला है। और खिड़कियाँ भी खुली हैं। अगर कोई देख लेता तो।

तब मेरी जान में जान आई कि वो रोने का नाटक कर रही थी और अब उसने इशारा भी दे दिया कि अगर कुछ करे तो कमरे का दरवाजा और खिड़की बंद करके करना।

फिर वो उठ कर जाने लगी और मुझसे कहा:- देखो तुमने मुझे किस किया। ये बात तुम किसी को भी मत बताना।
तो मैने कहा:- फ़िक्र मत करो। ये बात किसी को भी नहीं पता चलेगी।

मैने उसका हाथ पकड़ लिया और उसको अपने सीने से लगा कर उसे चुम्बन कर दिया।
चिंकी कहने लगी:- छोड़ो मुझे।

पर मैने उसे नहीं छोड़ा और फिर चुम्बन करने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी गरम होने लगी और जवाब में अब चिंकी भी मुझे चुम्बन करने लगी। मैने अपने एक हाथ से उसके मम्मों को पकड़ा और दबाने लगा और दूसरा हाथ उसकी कमर पर था। उसकी साँसें अब तेज़:-तेज़ चल रही थीं।

इधर मेरा लंड उसकी टांगों के बीच से उसकी चुत को चुम्बन करने की कोशिश कर रहा था।
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फिर उसने अपने होंठ हटा दिए और बोली:- बस इससे ज्यादा कुछ नहीं करना।
मैने कहा:- ठीक है। इससे ज्यादा कुछ नहीं।
मै उसके गरम जिस्म की गर्मी महसूस कर रहा था और चिंकी को चोदने की सोच रहा था।

वो कहने लगी:- अब मै जा रही हूँ।
मैने कहा:- थोड़ी देर में चली जाना।
तो कहने लगी:- नहीं रोशनी और अंकित जग गए होंगे।
मैने कहा:- ठीक है जाओ।
चिंकी चली गई।

शाम के टाइम चिंकी के पापा का फ़ोन आया और उन्होंने मुझसे कहा कि मै चिंकी को ये बता दूँ कि वो दोनों आज नहीं आ सकते। वो लोग कल आएंगे। वो अपने छोटे भाई:-बहन का ख्याल रखे और उन्होंने मुझसे भी कहा कि बेटा तुम भी हमारे बच्चों का ख्याल रखना। चिंकी को किसी चीज की जरूरत हो दो उसे लाकर दे देना।

यह बात मैने जाकर चिंकी को बता दी।

मै अभी भी चिंकी को चोदने का सपना देख रहा था। फिर मैने सोचा आज तो मेरे घर में भी कोई नहीं है और चिंकी के घर में भी उसके मम्मी:-पापा नहीं है तो आज तो रात में मै चिंकी को चोद कर ही रहूँगा।

मैने खाना खाया और टीवी देख रहा था कि तभी चिंकी आई और उसने मुझसे कहा:- घर में मुझे अकेले डर लग रहा है तुम भी चल कर हमारे साथ हमारे घर पर ही सो सकते हो क्या?
दिन की किसिंग के बाद मुझे अब ये यकीन हो गया था कि चिंकी भी मुझ से चुदना चाहती है।
तो मैने चिंकी से कहा:- ठीक है तुम चलो। मै आता हूँ।

रात में गरमी बहुत थी। तो हम चारों यानि मै चिंकी। और उसके भाई:-बहन रोशनी और अंकित ऊपर छत पर सोने चले गए।

रात के करीब 12 बज गए। चिंकी के भाई:-बहन तो सो गए थे। पर हम दोनों अभी भी बातें कर रहे थे।
मैने देखा कि उसके भाई:-बहन सो गए हैं अब रास्ता साफ है। तो मैने अपने हाथ से उसके हाथ को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा। वो एकदम से मेरे पास आ गई।

मैने फ़ौरन ही उस को अपनी बांहों में ले कर चुम्बन करना शुरू कर दिया, वो भी मज़े ले रही थी।
उसके बाद चिंकी ने मुझसे कहा:- यहाँ कुछ मत करो। अगर रोशनी और अंकित जाग गए तो दिक्कत हो सकती है।

मैने भी उसकी बात मान ली और हम दोनों वहाँ से उठ कर छत पर ही बने एक कमरे में चले गए।
वहाँ चिंकी ने एक गद्दा बिछाया और वो उस पर लेट गई। मै भी चिंकी के ऊपर ही लेट गया और उसे फिर से किस करने लगा। चिंकी भी मजे ले:-ले कर मेरा साथ दे रही थी।

फिर मैने धीरे से उसकी कुर्ती को उतार दिया और उसकी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बार उसकी ब्रा भी उतार दी और उसके मम्मों को मुँह में लेकर चूसने लगा।

आगे की कहानी पेज 2 पर।

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