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मेरी चूत की बेरहमी से चुदाई चाचू ने की

यह एक पाकिस्तानी चुदाई की कहानी है, एक बेरहमी से चुदाई की है.
मेरा नाम सलमा है और अब मै कराची में रहती हूँ.
मेरी उम्र 19 साल है. मेरा रंग बिल्कुल दूध की तरह गोरा है.
मेरा कद 5’3″ का है, मेरे जिस्म का कटाव 32-28-33 है.
मै बहुत प्यारी और सेक्सी हूँ. यह मै नहीं. लोग कहते हैं.
मेरे जिस्म का आगे का हिस्सा या यूँ कहूँ कि मेरे स्तन बहुत ही उठे और उभरे हुए हैं. मेरी सहेलियाँ भी मुझे यही कहती हैं.
अब मै अपनी कहानी सुनाती हूँ.
मेरे अब्बू के चचेरे bhai का हमारे घर बहुत आना-जाना था.
वे मुझे प्यार से हीर कहते थे. दरअसल उनकी देखा देखी कई लोग मुझसे हीर ही कहने लगे थे.
वो पहले ऐसे नहीं थे. वो बचपन में मुझे बेटी की तरह उठाते थे और एक चाचू के लिहाज़ से मुझे बहुत प्यार करते थे.
वो रिश्ते में मेरे चाचू थे लेकिन मै उन्हें रकीब bhai कहती थी.

उन्होंने कभी मेरे बारे में ऐसा नहीं सोचा था और ना ही मैने कभी उनको इस नजरिए से देखा था.
आहिस्ता-आहिस्ता जब मै बड़ी होने लगी. तो खूबसूरत भी होने लगी.
लेकिन उन्हें इस बात की परवाह नहीं थी.
मै अपनी सहेलियों को मैसेज करने के लिए अपनी अम्मी के मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करती थी.
मुझे मेरे एक कज़िन खालिद से मुहब्बत हो गई थी और उसे मुझसे मुहब्बत हो गई थी. मै उसे भी मैसेज करती थी.
एक दिन जब मै घर से बाहर धूप में बैठी अपने ब्वॉय-फ्रेंड खालिद को मैसेज कर रही थी.
रकीब bhai अचानक आ गए तो मैने जल्दी से मोबाइल फ़ोन नीचे कर लिया और सीधी बैठ गई.
कहा जाता है कि समझदार के लिए इशारा ही काफ़ी होता है.
रकीब bhai समझ गए और उनके दिल में यह ख्याल भी आ ही गया कि मै अब बड़ी हो गई हूँ.
वो अब मुझे दूसरी नज़रों से देखने लगे.
वो अब मुझसे ज्यादा बातें करने लगे और मुझे अपनी गर्ल-फ्रेंड्स के बारे में बताने लगे.
मै भी बड़े शौक़ से ये सब सुनती थी.
फिर उन्होंने मुझे एक दिन कहा- हीर. अब हम बेस्ट-फ्रेंड हैं और अब हम एक-दूसरे से कुछ नहीं छुपाएंगे.
मै मान गई.
मै चूंकि उस वक़्त गाँव में रहती थी. उस वक़्त मै स्कूल में पढ़ती थी.
तो मैने एक दिन उनसे पूछा- रकीब bhai. आप नेट इस्तेमाल करते हैं. मेरी स्कूल की सहेलियाँ तो इस्तेमाल करती हैं. और याहू पर चैट करती हैं.
उन्होंने कहा- हाँ करता हूँ. लेकिन हीर क्या पता. तुम्हारी फ्रेंड्स वहाँ चैट ही करती हैं. या कुछ और देखती हैं. आई मीन कि एक्ट्रेस की फोटोज वगैरह.

मुझे समझ नहीं आया कि वो क्या कहना चाहते हैं.
मैने कहा- हाँ तो. देखती हैं तो क्या हुआ. इसमें बुरा क्या है?
उन्होंने कहा- बेवक़ूफ़. वो वाले नॉर्मल फोटो नहीं. बल्कि नंगे फोटोज.
यह सुनते ही मेरे पूरे जिस्म में करेंट दौड़ गया और हैरान रह गई- क्या कह रहे हैं आप रकीब bhai. पागल तो नहीं हो गए हैं?

मै वहाँ से चली गई. अब रकीब bhai की नियत खराब होने लग गई.
अगर मै उन्हें डांटती या अम्मी को बताने की बोलती तो वो फिर ऐसी बातें ना करते. लेकिन मेरी खामोशी से उन्हें हौसला मिला और सच कहूँ तो मेरा दिल भी नंगे फोटोज को देखने का कर रहा था.
वो अपने घर चले गए और जब एक महीने के बाद दुबारा आए. तो मुझसे मिले और हमने बात भी की.
फिर उन्होंने मुझसे कहा- मै ‘वो’ ले आया हूँ.
मैने थोड़ा सख़्त लहजे में कहा- मै नहीं देखती.
तो वो बोले- प्लीज़ ना. यार. तुम मेरी दोस्त नहीं हो.
खैर अगले दिन घर में कोई नहीं था. सब किसी शादी में गए हुए थे. घर में मेरे अलावा मेरी दादी थीं.
मै नहा रही थी और दादी सोई हुई थीं क्यूँकि दिन का वक़्त था और गर्मियाँ थीं.
इतने में रकीब bhai भी आ गए. मै नहा कर निकली तो वो वहाँ ही खड़े थे.
फिर मै रसोई में गई. जहाँ पास ही के बरामदे में मेरी दादी सोई हुई थीं.
मै वहाँ चाय पीने लगी.
रकीब bhai उधर आकर बाहर खड़े हो गए और मुझे बाहर आने का इशारा करने लगे.
मैने इशारा किया कि दादी हैं. तो उन्होंने इशारा किया कि वो सोई हुई हैं.
फिर थोड़ी देर बाद उनके बार-बार कहने पर मै बाहर आई और उनका मोबाइल फ़ोन उनसे ले लिया.
जिसमें मै नंगी फोटोज थीं.
मैने कहा- रकीब bhai. आप मुझे पिक्स लगा कर दें और दूसरी कमरे में जाएं. मै आप के सामने नहीं देखूँगी.
वो मान गए और दूसरे कमरे में चले गए.

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मैने जब पहली नंगी फोटो देखी. तो मेरे पूरे जिस्म में करेंट दौड़ गया.
मैने ये सब देखा तो मुझे हैरानी हुई और मै गरम भी होने लगी.
फिर मै उठी. अपने आप पर क़ाबू किया और बाहर निकल गई.
मैने रकीब bhai को मोबाइल फ़ोन दिया और कहा- तौबा है रकीब bhai.
वो हंसे और बोले- मेरे पास तो नंगी वीडियो भी हैं.
मैने कहा- नहीं. अब नहीं देखनी.
वो मुस्कुराए और चले गए.
अब वो मुझसे खुलने लग गए. मुझसे गंदी बातें करते. मेरे हाथ को छूते. और एक दफ़ा तो मेरे मम्मों को भी छूने लगे.
तो मैने उनका हाथ रोक लिया. लेकिन छोटी थी इसलिए किसी को ना कह सकी.
अब वो हर वक़्त मेरे साथ होने का बहाना ढूँढने लगे.
मैने भी इतना गौर नहीं किया.
फिर कुछ दिनों बाद मेरा ब्वॉय-फ्रेंड खालिद कराची से आया हुआ था.
वो भी मेरा रिश्तेदार था तो मेरे घर आया हुआ था.
हम एक-दूसरे से मुहब्बत भी करते थे. लेकिन यह बात किसी को पता नहीं थी.
एक दिन मै और खालिद हमारे घर के एक कमरे में सीट पर दोनों साथ बैठे बातें कर रहे थे.
सारे घर वाले बाहर थे. और दरवाज़ा थोड़ा सा बंद था.
खालिद ने मेरा हाथ पकड़ा ही था कि अचानक दरवाज़ा खुला और रकीब bhai. मेरे एक और रिश्तेदार अनवार अन्दर आए.
फिर कुछ दिनों बाद मेरा ब्वॉय-फ्रेंड खालिद कराची से आया हुआ था.
वो भी मेरा रिश्तेदार था तो मेरे घर आया हुआ था.
हम एक-दूसरे से मुहब्बत भी करते थे. लेकिन यह बात किसी को पता नहीं थी.

एक दिन मै और खालिद हमारे घर के एक कमरे में सीट पर दोनों साथ बैठे बातें कर रहे थे.
सारे घर वाले बाहर थे. और दरवाज़ा थोड़ा सा बंद था.
खालिद ने मेरा हाथ पकड़ा ही था कि अचानक दरवाज़ा खुला और रकीब bhai. मेरे एक और रिश्तेदार संवर अन्दर आए.
उन्हें देखते ही खालिद डर कर उठा और एकदम शीशे के सामने खड़ा हो कर बालों पर कंघी करने लगा.
मै भी एकदम से उठ कर अपनी बुक्स लेने लगी.
हमने ऐसा ज़ाहिर किया कि हम दोनों के दरमियाँ कुछ नहीं है. लेकिन रकीब bhai और संवर bhai नादान ना थे. दोनों की उम्र 26 और 24 थी.
जब कि मेरी और खालिद की उम्र उनकी उम्र से काफी कम थी.
उन दोनों ने हम पर शक किया. यह हमें यक़ीन हो गया था.
वो दोनों चले गए.
बाद में रकीब bhai ने मुझसे कहा- अफ़सोस हीर. तुमने मुझसे एक बात छुपाई. अफ़सोस.
मुझे तो यक़ीन हो गया था कि रकीब bhai को मेरे और खालिद के अफेयर का पता चल गया है.
मैने एकदम अपने आपको ठीक से बात करने के लिए और रकीब bhai से जान छुड़ाने के लिए कहा- मुझे पता है रकीब bhai कि आप क्या सोच रहे हैं. ऐसा कुछ नहीं है और अब मै आपसे बात भी नहीं करती और आपकी-हमारी दोस्ती भी ख़त्म.
यह कह कर मै चली गई.
रकीब bhai की तो जान निकल गई.
वो मुझसे माफी माँगने लगे और कहने लगे- सलमा मै तो मज़ाक़ कर रहा था. प्लीज़ ऐसा मत करो.
लेकिन मै नहीं मानी और सच्ची बात तो यह है कि मुझे रकीब bhai की हरकतें अच्छी नहीं लगती थीं तो मैने कहा- नो. मीन्स. नो. अब मुझे तंग किया. तो मै अम्मी को बोलूँगी.
उन्होंने बहुत मिन्नतें कीं. लेकिन मेरे ना मानने पर वो चले गए.
अब रकीब bhai मेरे लिए बेचैन होने लगे और वो मुझसे लव करने लगे. उन्हें यह तो पता था कि मै भी किसी से लव करती हूँ तो वो समझे कि उनका काम भी बन जाएगा.
लेकिन यह तो उन की गलतफहमी थी.
फिर एक-दो माह वो नहीं आए और इस दौरान खालिद भी वापस कराची चला गया.
फिर एक दिन रकीब bhai आए तो मैने बिल्कुल सामान्य होकर उन्हें सलाम किया और चली गई.
वो उदास-उदास से लग रहे थे. मै जहाँ भी बैठी होती वो मुझे मासूम बच्चों की तरह देखते रहते और मुझसे नज़र ना हटाते.
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. संवर bhai से मेरी अच्छी बनती थी. क्योंकि वो मेरे पड़ोसी भी थे और गाँव के माहौल तो ऐसा होता है कि हर कोई एक-दूसरे के घर बिना किसी रोक-टोक के आता-जाता है.
उसी रात को मै संवर bhai के पास बैठी हुई बातें कर रही थी. तो रकीब bhai हमसे दूर बैठे मुझे देख रहे थे और उदास भी थे.
मुझसे रहा ना गया तो मैने संवर bhai से पूछा- क्या बात है रकीब bhai को?
तो वो बोले- इनकी gf की शादी है और ये उसी बात से परेशान हैं.

मेरा दिल बहुत खफा हुआ और जिस तरह वो मुझे देख रहे थे. मुझे शक होने लगा कि शायद वो मुझे पसन्द करते हैं.
फिर जब संवर bhai ने रकीब bhai से पूछा तो उसने कहा- यार संवर, मुझे सलमा से लव हो गया है और मै उससे शादी करना चाहता हूँ.
संवर bhai ने कहा- पागल है क्या. वो तुझसे छोटी है. और रिश्ते में भी तेरी बेटी लगती है.
रकीब ने कहा- आई नो. लेकिन संवर तू बोल ना उससे यार. तेरी उससे बनती है. वो मान जाएगी.
संवर ने कहा- सोच ले रकीब. देख कोई मसला बन गया तो बदनामी हो जाएगी और सलमा ने अपना अम्मी को बोला तो पूरी कुनबे में हंगामा हो जाएगा.
लेकिन रकीब ने कहा- तुम बोलो तो. बाक़ी देखा जाएगा.
फिर रकीब bhai अपने घर वापस चले गए.
दो दिन बाद संवर bhai ने मुझे बुलाया और पहले इधर-उधर की बातें करने लगे और फिर कहा- हीर. तुम्हें पता है कि रकीब क्यों उस दिन उदास था?
मैने कहा- नहीं. आप बताएँ ना. वे क्यों खफा थे. उन्हें देख कर तो मेरे दिल भी खफा हो गया था.
तो उन्होंने कहा- अगर तुम प्रॉमिस करो कि किसी को नहीं बताओगी. तो मै बता देता हूँ.
मैने कहा- ओके आई प्रॉमिस.
संवर bhai ने कहा- सलमा. रकीब तुमसे बहुत प्यार करता है और वो तुमसे शादी करना चाहता है. वो पागल है तुम्हारे पीछे.
मुझे शक तो था ही लेकिन अब यक़ीन हो गया कि रकीब bhai मुझे मुहब्बत करते हैं.
मेरे दिल को थोड़ी खुशी भी हुई लेकिन फिर मैने एकदम से कहा- ये आप क्या कह रहे हैं? मैने कभी उन्हें इस नज़र से नहीं देखा और वो मेरे चाचू की तरह हैं. वो ऐसा नहीं कह सकते.
संवर ने कहा- तुम उससे बात करके देख लो. मै बात करवाता हूँ.
मैने कहा- ओके. करवाइए.
संवर ने फिर रकीब bhai को कॉल की और उससे कहा- रकीब ये लो. सलमा बात करेगी.
मैने मोबाइल फ़ोन लिया और कहा- हैलो रकीब bhai. मै यह क्या सुन रही हूँ?
रकीब ने कहा- क्या हुआ?
मैने फिर उन्हें सारी बात बता दी तो वो बोले- यार मैने संवर को मना किया था कि तुमसे बात ना करे लेकिन उसने पता नहीं क्यों ऐसा किया.

मैने कहा- वो छोड़िए. यह बताएँ कि यह सच है कि नहीं?
तो रकीब ने कहा- हाँ हीर. ये सच है. प्लीज़ मुझे गलत मत समझो. मै तुम्हारे बिना मर जाऊँगा. आई लव यू सलमा.
मैने कहा- प्लीज़ रकीब bhai ऐसा मत कहें और उदास मत हों. हम नहीं मिल सकते.
लेकिन वो तो रोने लग गए तो मिन्नतें करने लगे.
तो मुझे भी शक होने लगा कि शायद ये मुझसे सच्चा प्यार करते हैं.
मैने कहा- प्लीज़ रकीब bhai रोईए मत. जो होगा अच्छा होगा. आप परेशन मत हों. चलिए आप यहाँ गाँव आइए. तो बात करते हैं.
वो खुश हो गए और मै भी थोड़ी खुश हो कर चली गई.
ज़ाहिर है मै लड़की थी. मुझसे कहाँ बात पेट में रहती है.
मैने अपनी सारी सहेलियों और कज़िन को बता दिया कि रकीब मुझसे लव करता है.
फिर जब रकीब गाँव आए तो मेरी सहेलियों ने मौका मिलने पर हम दोनों को मिलाया और बातें कीं.
मै फिर भी ना मानी तो मेरी सहेली ने कहा- रकीब bhai ये नखरे कर रही है. मान जाएगी. मै इसे मना लूँगी.
अब आहिस्ता-आहिस्ता मै भी रकीब को पसंद करने लगी और जब मैने सोचा कि रकीब bhai को बता दूँ कि आई लव हिम. तो तो किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि मै ना तो रकीब bhai की रही और ना खालिद की.
मुझे पता ही नहीं चला और कराची में मेरे अब्बू ने हमारे एक रिश्तेदार के बेटे हिलाल से मेरा रिश्ता तय कर दिया और मेरी मंगनी हो गई.
खालिद, रकीब bhai ओर मै शॉक में चले गए.
खैर. मै तो संभल गई और अपने अब्बू की खुशी में खुश हो गई और खालिद को भी समझा दिया.
लेकिन रकीब bhai न संभल सके. वो मुझसे और प्रेम करने लगे.
मै उन्हें मना भी करने लगी और मैने उनसे बात भी करनी छोड़ दी.
वो पागल हो गए. उन्होंने अपनी अम्मी को बोल दिया तो उनकी अम्मी ने मेरी अम्मी को कहा.
मेरी अम्मी ने कहा- अब तो बहुत देर हो चुकी है. आप लोग पहले कहाँ थे. अब कुछ नहीं हो सकता.
रकीब bhai तो टूट गए. वो मुझसे मिन्नतें करते. मैने मना किया और अब मै अपने मंगेतर हिलाल से बातें करने लगी और उसको पसंद करने लगी.
कहानी अभी जारी है.

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