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दोस्ती से चुदाई तक का सफ़र

Dost ki Chut Chudai ki kahani, desi sex stories, antarvasna, desi kahani

नमस्कार दोस्तो, मैं अवि उम्र 22 साल, जयपुर से आपके लिए एक मस्त सेक्सी स्टोरी लेकर आया हु.
रियलकहानी डॉट कॉम का मैं आभारी हु कि मुझे यहाँ अपनी स्टोरी लिखने का मौका मिला. मैं रियलकहानी डॉट कॉम पर कामुकता भरी हिन्दी सेक्स स्टोरी का पिछले सात सालों से नियमित पाठक हु.

आज मैं पहली बार अपनी स्टोरी पोस्ट कर रहा हु, यह मेरे जीवन मे, घटी सच्ची घटना है.

अब आपकी मुलाकात इस स्टोरी की नायिका से करवाता हु.

नाम रीतिका,

उम्र 25 साल,

हाइट 5 फुट 5 इंच,

साँवला सा बदन,

पर तीखे नयन:-नक्स,

फिगर 36:-30:-34 की.

मेरी और रीतिका की दोस्ती एक साल पहले शुरू हुई थी, साथ मे, घूमना, फिल्म देखना, रेस्तरां मे, लंच:-डिनर अक्सर होता था.

मेरी नजर हमेशा उसके उन्नत चूचियों पर होती थी, मैं उन्हें खा जाने वाली नजरों से देखता था.
रीतिका को चोदना तो मैं पहले से चाहता था, लेकिन चोद नहीं पाया था.

कुछ समय बाद वो जयपुर से अपने घर चली गई. इस दौरान भी हमारी बातें होती रहती थीं.

लगभग दो महीने बाद रीतिका को किसी काम की वजह से जयपुर आना था.
उसने मुझे पहले से बता दिया और उसने मेरे फ्लैट पर रुकने की इच्छा जाहिर की, तब मैंने उसे ‘हाँ’ बोल दिया.

जयपुर पहुँचने के बाद रीतिका अपने रिश्तेदार के घर गई और दिन भर वहाँ रुकी, फिर शाम को उसने फोन करके मुझे बुलाया.
मैं उसे लेकर नए जयपुर की ओर घूमने जा रहा था.

उसने मुझसे कहा:- तुम्हारे लिए एक खुशखबरी है.
मैंने पूछा:- बता दो.
तब उसने बताया कि उसका अपने बायफ्रेंड के साथ ब्रेकअप हो गया है.
यह कहते हुए वो मेरे करीब आ गई और मुझे कस कर गले लगा लिया.

मैं बाइक चला रहा था, वो पीछे से मुझसे चिपक कर बैठी थी.
मैं उसके बाएँ हाथ को अपने हाथ मे, लेकर सहलाने लगा.
वो गर्म हो गई और अपने उन्नत चूचियों को मेरी पीठ पर दबाने लगी.

वाह… क्या मस्त एहसास था, उसके नरम:-नरम चूचे, मुझे जन्नत का मजा दे रहे थे.
जयपुर की खाली सड़क पर हम दोनों की रासलीला चल रही थी.

मैंने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर उसके चूचे मसल दिए. वो और गरम हो गई, अपनी जाँघों से मुझे दबाने लगी. उसकी सिसकारियाँ और तेज होने लगीं, ‘उम्म, उआह, उह,’ जैसी आवाजें निकालने लगी.

उसने बोला:- अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है, चलो फ्लैट पर चलते हैं.
मैंने बाइक अपने फ्लैट की ओर मोड़ ली.

रास्ते मे, मेडिकल से कन्डोम के पैकेट ले लिए.

इसके बाद कुछ खाने का सामान ले लिया और परमिट से व्हिस्की की एक बोतल भी ले ली.
जब हम अपने फ्लैट पर पहुँचे और जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, वो अन्दर आई और बिस्तर पर जाकर बैठ गई.

मैंने जल्दी से गेट बंद किया, सभी सामान को साइड पर रखा और उस पर टूट पड़ा.
उसके होंठों पर इमरान हाशमी की तरह किस करने लगा, वो भी मेरा भरपूर साथ देने लगी.

हम दोनों बस एक:-दूसरे को खा जाना चाहते थे.
उसकी सिसकारियों से पूरा रूम गूँज रहा था, ‘उमम्ममम, आह्ह्ह्ह्हह,’ जैसी आवाजें मुझे मदहोश कर रही थीं.

अब मुझसे रहा ना गया और मैंने जल्दी से उसके टॅाप को उतारा, उसकी लाल ब्रा को देखकर मेरा दिल खुश हो गया, मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचों को चूमने लगा.

फिर धीरे से मैं अपना हाथ उसकी पीठ पर फेर रहा था तभी उसकी ब्रा का स्ट्रेप मेरे हाथों मे, आ गया और मैंने उसे खोल दिया.
अब मेरे सामने आजाद चूचे सिर उठा कर खड़े थे.

मैंने आव देखा ना ताव, उन चूचों को मुह मे, भरकर चूसने लगा.
मुझे सर्दी के मौसम मे, मस्त मीठे:-मीठे आम चूसने को मिल रहे थे.

मैं बहुत खुश हो गया अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी जींस और पैन्टी एक:-एक कर उतार दी.

उसकी सुन्दर चूत को देखकर मैंने एक उंगली उसकी चूत के छोटे से छेद पर लगा दी. उंगली चूत मे, पेलने की कोशिश की, पर इतनी कसी हुई चूत थी उसकी, कि मेरी उंगली पहली बार मे, अन्दर नहीं गई.

फिर धीरे:-धीरे उंगली को अन्दर:-बाहर करता रहा.
अब उसकी चूत पहले से ज्यादा खुली हुई लग रही थी, मैंने एक और उंगली से उसको चोदना शुरू किया, वो दर्द से उछल गई, पर अगले ही पल शान्त हो गई और मजे से दोनों उंगलियों से चुदने लगी.

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इसी क्रिया के दौरान मैं एक हाथ से उसके चूचे चूस रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी मेरा लंड पूरे जोश के साथ अकड़ कर खड़ा था और चुम्बनों का आदान:-प्रदान जारी था.

इसी बीच रीतिका ने मुझे कस कर पकड़ा और जोर:-जोर से सिसकारी लेते हुए अपने नाखून मुझ पर गड़ाते हुए झड़ गई.
मेरा लंड अभी भी अपना सर उठा कर खड़ा था.

मैंने रीतिका को बोला:- यार तुम तो झड़ गईं, अब मेरा भी कुछ करो.
तब उसने एक कटीली सी मुस्कान देकर मेरा लंड अपने मुह मे, ले लिया और मजे से चूसने लगी.

अचानक मुझे याद आया कि रीतिका को चॅाकलेट बहुत पसंद है और मैंने जल्दी से चॅाकलेट लाकर अपने लंड पर लगा दिया.
अब रीतिका को कंट्रोल करना मुश्किल था, वो बस मेरे लंड को खा जाना चाहती थी, उसके चूसने की रफ्तार भी दुगुनी हो गई थी.
यह स्टोरी आप रियलकहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

रीतिका की पाँच मिनट की धमाकेदार चुसाई के बाद मैं उसके मुह मे, ही झड़ गया, वह माल पीने के बाद मेरे लंड मे, लगे वीर्य के हर एक कतरे को चाट गई.

हम दोनों फ्रेश होने बाथरूम गए, वहाँ पर एक दूसरे के अंगों को साफ किया और वापस बेडरूम मे, आ गए.

रीतिका ने बिना ब्रा:-पैन्टी के एक झीनी सी नाइटी पहन ली, जिसमें से उसके उभार मुझे और ज्यादा आकर्षित कर रहे थे.

अब हम दोनों को भूख लग रही थी तो कुछ नमकीन मिक्सचर और चिप्स निकाल लिए, साथ मे, व्हिस्की की बोतल से दो पैग बनाकर एक उसको दे दिया.

हम दोनों ने साथ मे, मिलकर दारू पी और फिर चिकन के साथ व्हिस्की का मजा लेना शुरू किया.

इसी बीच रीतिका ने नशे मे, चूर हो कर अपने बायफ्रेंड को फोन लगा दिया और उससे झगड़ा करने लगी.
उसने शराब के नशे मे, अपने एक्स को बहुत गन्दी:-गन्दी गालियाँ दीं, फिर वो मुझसे लिपटकर रोने लगी.

आधा:-पौने घण्टे मे, हम दोनों डिनर के लिए रेडी हो गए.

व्हिस्की का नशा माहौल को और भी रोमांटिक बना रहा था.
डिनर करने के बाद हम दोनों जल्दी से बेड पर आ गए, मैंने उसकी नाइटी निकाल दी.

अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक:-दूसरे के सामने उत्तेजित होकर एक:-दूसरे को किस करने लगे.
वो मेरे लंड से खेलने लगी.

उसकी चूत तो पहले से गीली थी.
अब मैंने ज्यादा इंतजार नहीं किया और रीतिका की चूत के दाने को अपने लंड से छेड़ने लगा.

उसके मुह से बस यही शब्द निकल रहे थे:- और मत तड़पाओ जानू जल्दी से अपना लंड मेरी चूत मे, पेल दो.

मैंने भी देर न करते हुए उसकी गाँड के नीचे तकिया सैट किया और अपना लंड रीतिका की चूत मे, डाल दिया, जिससे रीतिका दर्द से बिलबिलाते हुए जोर से चीखी:- आह्ह्ह्ह ह्हह जानू छोड़ दो मुझे, बहुत दर्द हो रहा, प्लीज जानू मत करो ना,

मैं एक झटके के बाद रुक गया रीतिका के मम्मों को दबाने लगा और साथ मे, निप्पलों को उंगली के बीच लेकर मसल देता, जिससे धीरे:-धीरे रीतिका का दर्द कम हो गया और वो नीचे से अपनी गाँड उछालने लगी.

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेजी से रीतिका को चोदने लगा.
उसकी कमसिन चूत को मैंने बीस मिनट तक चोदा.
इतने मे, वो दो बार झड़ गई थी.

फिर मैंने लौड़ा निकाल कर यूं ही उसके साथ खेला, इतने मे, मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
एक बार फिर से मैंने देर ना करते हुए उसकी चूत मे, अपना लंड डाल दिया और हचक हचक कर चोदना शुरू किया.
रीतिका हर झटके के साथ गाँड उछालती और ताल से ताल मिलाती.

लगभग दस मिनट बाद वो मुझे कस कर पकड़ने लगी और उसने अपनी चूत से रस छोड़ दिया. मेरा पानी इतनी जल्दी झड़ने वाला नहीं था.

मैंने रीतिका को घोड़ी बनाया और चोदना शुरू किया.
क्यूंकि मैं पहले झड़ चुका था, इसलिए इस बार देर तक बमफाड़ चुदाई के बावजूद मैं नहीं झड़ा था.

रीतिका दो बार और झड़ गई, तब मेरा भी पानी निकल गया.

थोड़ी देर चूचों को चूसने और दबाने के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
मैं रीतिका को कुतिया बना कर उसकी गाँड मे, उंगली करने लगा.
उसकी गाँड का छेद बहुत तंग था. तब थोड़ी सी क्रीम लेकर उसके छेद के अन्दर पूरी गोलाई मे, घुमा:-घुमा कर लगाने लगा.
दारू के नशे मे, टुन्न रीतिका को मजा आ रहा था.

कुछ देर ऐसा करने के बाद मेरी दो उंगलियां आराम से अन्दर जाने लगी थीं. फिर मैंने धीरे से अपने लंड का टोपा रीतिका की गाँड के छेद मे, सैट किया और जोर से पेल दिया.

वो दर्द से तड़फ उठी, मैंने उसकी चीख को नजरअंदाज कर दिया, और धकापेल चुदाई करने लगा.

उसकी गाँड का कसाव इतना था कि मेरा लंड की थोड़ी सी चमड़ी भी छिल गई और मुझे जलन होने लगी थी. फिर भी चुदाई का इतना सुरूर था कि उसके सामने कोई दर्द पता नहीं चलता.
उसकी गाँड मे, झड़ने के बाद मैं निढाल हो गया था.

अब हम दोनों को नींद आने लगी और हम एक:-दूसरे से चिपक कर सो गए. सुबह जब नींद खुली तो हम दोनों ने एक:-दूसरे को किस किया और फिर चुदाई का एक दौर चला.

फिर वो शाम को अपने घर चली गई.
अब छह महीने हो गए, मैं उससे मिला नहीं हु.

मेरी स्टोरी आप सभी रीडर्स को कैसी लगी. 
मुझे कमेंट करके जरूर बताइयेगा.

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