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मैं और मेरी हॉस्टल की लड़कियाँ

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मैं गर्ल्स-हॉस्टल में रहने गई तो वहाँ की गर्ल्स ने मुझे लेस्बीयन चुदाई से अवगत करवाया. इससे पहले मुझे नहीं पता था कि लड़कियां आपस में भी चुदाई कर सकती हैं.
उस दिन मैंने पहली बार इस हॉस्टल में कदम रखा था. मुझे अजीब सा लग रहा था, सब मुझे यूँ देख रहे थे जैसे खा जाएँगे. मुझे ऊपर वाले रूम में रुकने मिला था, नीता मेरी रूममेट थी. वो देखने में बहुत सुंदर थी. उसने हँस कर मेरा स्वागत किया.

मैंने अपना सारा सामान ठीक:-ठाक इधर:-उधर करके रख लिया. दोपहर को खाने के लिए मैं नीचे गई, तो हॉस्टल के मेस में सारी लड़कियाँ फिर से मुझे ऐसे देख रही थीं मानो मैं कोई राजकुमारी हूँ और सब मुझे एप्रीशियेट कर रही थीं. खाने की टेबल पर ही बहुत सारी लड़कियों से बातें हुईं, सबने मेरे बारे में बहुत सारे सवाल किए. मुझे एक पल के लिए लगा मानो मैं यहाँ बरसों से हूँ और ये सारी लड़कियाँ मेरे सहेलियाँ हैं. मेरे मन से हॉस्टल का भूत दूर होता जा रहा था.

शाम को मेरे कमरे में सिमा दीदी आईं, जो उम्र में मुझसे बहुत बड़ी थीं. दिखने में कुछ ख़ास ना सही, पर बातें इतनी मीठी करती थीं कि मानो अभी सबको खरीद लेंगी.
हॉस्टल में एक दिन कैसे गुजरा, पता ही नहीं चला. रात को सोने के लिए जा रही थी कि मेरी रूममेट नीता बोली:- तुम घर पर ना रह के यहाँ हॉस्टल में रहने क्यों आईं?
मैंने बताया कि जाहिर है मैं नौकरी करती थी, इसीलिए यहाँ पर शिफ्ट करना पड़ा था.
फिर बोली:- दो हज़ार की नौकरी के लिए इतना दूर क्यों आईं? अपने शहर में नौकरी नहीं मिलती थी क्या?
पहले मैं चुप रही, फिर बोली:- मिलता तो था पर वहाँ घर वाले मेरा जीना परेशान कर देते. हमेशा मेरे पीछे पड़े रहते कि अब शादी कर लो. अभी शादी कर लो.
‘तो तुम क्या शादी नहीं करोगी?’ नीता ने पूछा.
‘पता नहीं, मैं अभी कुछ कह नहीं सकती.’ मैं बोली.

फिर हम दोनों सो गए. दूसरे दिन सुबह जब मैं उठी तो सुबह के साढ़े पाँच ही बजे थे. इस वक्त हॉस्टल में सब घोड़े बेच के सो रहे थे. मैं नहा के तैयार हो गई और जल्दी:-जल्दी हॉस्टल से मेरी नई नौकरी के जगह के लिए निकल आई.
मेरी नौकरी की जगह एक स्कूल था, नर्सरी स्कूल.

मैं वहाँ पहुँच कर हेड मिस्ट्रस से मिली, तो बहुत खुश हुईं, उन्होंने मेरा स्वागत किया. फिर मेरे इन्टरव्यू वाले काग़ज़ात निकाल के पढ़ते हुए बोलीं:- तुम्हें कंप्यूटर आता है?

मैंने अपना सिर हिला के ‘हाँ’ बोला. तो उन्होंने मुझे कंप्यूटर रूम की एक्सट्रा ड्यूटी पकड़ा दी और साथ ही साथ एक हज़ार और रुपए की सेलरी भी बढ़ा दी. यह मेरे लिए खुशी की बात थी कि नौकरी के पहले दिन और मेरी प्रमोशन हो गई.
वो जो भी हो, उस दिन से मुझे फ्रीडम थी कि मैं जब चाहूँ कंप्यूटर रूम में जाकर इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकती थी.

दोपहर तक तो स्कूल बंद हो जाता था और मैं तभी इस रूम में आती थी. कुछ दिनों तक मुझे हॉस्टल में सब ठीक:-ठाक लगा, लेकिन वहाँ लड़कियों के बर्ताव मुझे कुछ ठीक नहीं लगे.
सब ऐसे बिहेव कर रही थीं मानो प्रेमी हों, बात:-बात पर एक:-दूसरे को चूमा दे देना, हाथ इधर:-उधर घुमाना.

मैंने एक रात यही बात नीता से पूछ ली, तो वो हँस पड़ी और बोली:- इसमें क्या ग़लत है? सब आपस में मिलजुल के रहते हैं. एक:-दूसरे से प्यार भी करते हैं. तो गलत कहाँ है?
‘लेकिन, वो सब लड़कियाँ हैं? लड़कियां कैसे एक:-दूसरे से प्यार कर सकती हैं?’
मैंने सवाल किया, तो वो बोली:- देख अगर एक लड़की लड़के से प्यार करे तो सब जानते है यह प्यार है, मगर क्यों होता है यह प्यार? क्योंकि सबको जरूरत होती है अपने तन:-मन की प्यास बुझाना. बस तो यहाँ हॉस्टल में एक:-दूसरे के तन मन की प्यास बुझ जाती है. और लड़कियाँ खुश रहती हैं. अब अगर किसी लड़के से यह सब प्यार करेंगी तो उनसे मिलने के लिए जाएँगी कब? नौकरी से छुट्टी मिलती नहीं और जगह कहीं है नहीं और फिर प्रेग्नेन्सी का ख़तरा अलग, तो बस हॉस्टल में एक:-दूसरे के तन:-मन की प्यास बुझाना सबसे अच्छा तरीका है.’

मैं उसको देखती रह गई. बात तो सही थी. अगर किसी लड़के से प्यार करो तो क्या पता कब मिलना हो, कहाँ मिलना हो. फिर कुछ ग़लत कर दिया तो पेट से हो सकती हैं.
मैं हँस दी.
वो बोली:- सिमा दीदी तुझसे इस बारे में कुछ बातें करना चाहती थीं, मैंने ही मना कर दिया. मुझे पता था तुम अभी नादान हो इस बारे में ज्ञान नहीं रखती होगी.
मैं बोली:- लेकिन इसमें वो सब कोई ग़लती तो नहीं करते है ना? क्योंकि मैंने फिल्म देखी थी ‘फायर’. उसमें ऐसे ही दिखाया था जिसके बाद उन दो औरतों को घर से बाहर कर दिया था.
वो हँस पड़ी और बोली:- तुम भोली हो, अरे अगर तुम सबसे कहोगी कि तुम यह सब करती हो तो लोग तुम पर हँसेंगे, समाज से अलग कर देंगे, इसीलिए एक काम करो किसी को इस बारे में बोलना ही नहीं, घर में भी नहीं. फिर क्या घबराना. इसमें कोई डर नहीं और जो भी होता है दो लड़कियों के बीच होता है, तो प्रेग्नेन्सी नहीं होगी, ना ही तुम्हारी वर्जिनिटी को कोई नुकसान होगा.

मैं तो चकित हो के रह गई थी.

रात के साढ़े आठ बज़ने को आए थे, हम नीचे मेस में डिनर के लिए गए. आज मुझे सबकी हरकतें अच्छी लग रही थीं. नीता ने जाकर सिमा दीदी को कुछ कहा, वो मेरी ओर देख कर मुस्कुराईं और मैं भी मुस्कुरा दी.

डिनर के बाद हम कमरे में आए तो नीता बोली:- चलो आज छत के ऊपर चल कर टहलते हैं.
हम वहाँ गए, थोड़ी देर बाद सिमा दीदी भी वहाँ आ गईं. हम तीनों ऐसे ही बातें कर रहे थे.

सिमा दीदी ने पूछा:- तुमने कभी चुदाई किया है?
चुदाई की बात सुन के मेरी चूत में सनसनाहट होने लगी. मैंने ‘ना’ बोला, तो वो बोलीं:- होमोचुदाई मतलब लेस्बियन कभी किया है? मतलब लड़की से लड़की वाला चुदाई?
मैं पागल हुए जा रही थी. जिंदगी में कभी किसी ने मुझसे ऐसे बातें नहीं की थीं.
मैं ‘ना’ बोल दी.

‘किसी लड़के से प्यार करती है?’ वो मुझसे पूछने लगीं.
मैंने सिर हिला कर ना बोला तो वो हँस दीं और मेरे पास आकर बोलीं:- कभी तुम्हें किसी ने कहा कि तुम कितना सुंदर हो?
मेरे बदन से पसीना छूट रहा था, तभी वो बोलीं:- क्या हुआ तबियत ठीक नहीं है क्या? या फिर डर रही हो? अरे हमसे क्या डरना. हम सब तो तुम्हारे सीनियर है यहाँ. तुम्हें सारी चीज़ों की जानकारी देना हमारा काम है.

मैं सिर्फ़ सिर हिला रही थी.

कुछ देर तक खामोश रहने के बाद सिमा दीदी मेरे पीछे चली गईं और उन्होंने एक झटके में मेरे चूचियों को अपने हाथों में भर कर बोलीं:- बहुत मस्त है तुम्हारे ये स्तन. मन करता है इनको चूम लूँ.
नीता दीदी हँसती हुई बोली:- सिमा दीदी आप चाहें तो चूम लें, कोई नहीं देख रहा है.

मैं क्या करूँ. कुछ समझ ही नहीं पा रही थी. पसीना छूटने मेरी नाइटी गीली हो गई थी. मैंने नीता को देखा तो वो बोली:- सिमा दीदी छोड़ दीजिए. अभी पहली बार है ना. इसीलिए डर रही है बेचारी.
सिमा दीदी ने मुझे छोड़ दिया.
हम सब नीचे अपने कमरे में आ गए.

कमरे में आते ही नीता ने दरवाजे की कुण्डी बंद कर दी.
अब सिमा दीदी बोलीं:- चल हमें दिखा क्या छुपा रही है तु?

मैं क्या करूँ. कुछ समझ नहीं पा रही थी कि तभी नीता आकर मेरी नाइटी को ऊपर कर लिया.
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मैं लज्जा के मारे मुरझा गई, तभी सिमा दीदी बोलीं:- मैं सचमुच तेरे चूचियों को चूमना चाहती हूँ.
उन्होंने मेरी किसी बात का इन्तजार किए बिना मेरे चूचियों को मुँह में भर लिया और चूसते हुए चूमने लगीं.

मेरे बदन में आग लग रही थी. मैं क्या कहूँ. क्या करूँ कुछ नहीं जान पा रही थी. सो मैंने जो हो रहा था उसे होने दिया.

सिमा दीदी मेरे चूचियों को मुँह में भर के चूस रही थीं और मेरी जान निकली जा रही थी. इतने में नीचे से किसी ने सिमा दीदी को आवाज़ दी तो उन्होंने मेरे चूचे चूसना बंद किए और बाहर जा कर जोर से आवाज लगा कर बोलीं:- थोड़ी देर में आती हूँ.
पर नीचे से आवाज़ आई:- नहीं आप अभी आ जाओ.

तो वो चली गईं.

सच कहूँ मैं मन ही मन तरस गई थी. जिंदगी में पहली बार कोई मुझसे चुदाई की बातें करके गई थी और मेरे बदन को नंगा कर के चुदाई करने की शुरूआत की थी.

नीता मेरी चेहरे को देख रही थी, वो बोली:- सिमा दीदी की रूममेट ने उन्हें बुला लिया. वो जलती है तुमसे… क्योंकि जिस दिन से तुम यहाँ आई हो, सिमा दीदी सिर्फ़ तुमसे चुदाई करने की सोच रही थीं, इसीलिए निम्मी गुस्सा है तुमसे!

पर मेरा मन कहीं और था, मुझे बहुत मजा आने लगा था.
नीता बोली:- सिमा दीदी बहुत अच्छी हैं, सबके मन की बात जान लेती हैं, सबको अपने जैसा ही प्यार करती हैं.
मैं मन ही मन सोचने लगी, तो क्या इस का मतलब वो हॉस्टल की सारी लड़कियों से चुदाई भी करती हैं.
नीता बोली:- मुझे पता है कि तुम क्या सोच रही हो?

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जब मैं यहाँ पहली बार आई थी तो सिमा दीदी से मिली थी. वह हमारे शहर से ही हैं और उन्होंने मुझे चुदाई के बारे में बताया था. पहले पहले मुझे शर्म बहुत आती थी, पर धीरे:-धीरे यह आदत हो गई. अब तो ऐसा है कि रोज़ ना करूं तो मन नहीं भरता. दिन भर काम से थकान होती है और ऑफिस में सब जाने कैसे कैसे गंदी नज़रों से देखते हैं. यहाँ बहुत ही सकून है. रात को थोड़ी देर मन की भी और तन की भी मालिश हो जाती है, तो फ्रेश लगता है. तुम्हें कोई प्राब्लम नहीं है, क्योंकि तुम अभी स्कूल में पढ़ती हो. तो वहाँ सिर्फ़ बच्चे हैं इसीलिए तुम्हें कोई टेंशन नहीं होती होगी.

रात ज्यूँ:-ज्यूँ बढ़ रही थी. मेरे मन की आग भी बढ़ती रही. मैं यह सोच रही थी कि काश फिर से सिमा दीदी आ जातीं. तभी नीचे से फिर आवाज़ आई और नीता नीचे जाने के लिए तैयार होने लगी.

तभी मैंने कहा:- मुझे यहाँ अकेला मत छोड़ो, डर लगता है. प्लीज़ मैं भी तुम्हारे साथ नीचे आ जाऊँ?

वो हँस दी और बोली:- क्या तुम्हें चुदाई की मिठास अच्छी लगी?
मैं शरमा गई और वो फिर हँसती हुई बोली:- तुम बहुत हसीन हो, मैं नहीं चाहती कि कोई भी तुम्हारे साथ चुदाई कर ले. थोड़ी देर रुक जाओ मैं अभी नीचे जाकर आती हूँ, फिर बैठ के बातें करेंगे.

वो नीचे चली गई. मेरे मन में तभी बहुत सारे ख्याल उठ रहे थे, मैं सोच रही थी कि काश सिमा दीदी फिर से आ जाएं.
थोड़ी ही देर हुई नहीं कि नीता लौट आई और अन्दर से दरवाज़ा बंद कर दिया. मैं बिस्तर पर लेटी थी.

नीता बोली:- आज तुम्हें कैसा लगा? सिमा दीदी को बुरा तो नहीं माना ना?
मैं हँस दी और बोली:- नहीं, मुझे सच कहूँ तो अच्छा लगा.
वो बोली:- मुझसे चुदाई करेगी? देखो मैं तुम्हारे साथ इसी रूम में रहूंगी तो यह आसान भी है. और फिर हम दोनों आपस में प्यार करते रहेंगे, किसी को इसमें टांग भी अड़ाने नहीं देंगे.

मेरे मन में फिर से फूलों का झड़ना शुरू हो गया.

पर फिर मैंने पूछा:- और वो सब… जिनके साथ आप चुदाई करती थीं. वो क्या कहेंगी?
वो थोड़ी देर सोचती रही. फिर बोली:- किसी किसी रात उनके कमरे में भी चली जाऊँगी. कोई प्राब्लम नहीं होगी.

सच कहूँ मैं इस बात से बहुत खुश हुई थी, मैं सोच रही थी कि अभी अपने कपड़े उतार दूँ और मेरे चूचियों को नीता के मुँह में भर के कहूँ कि ले खाले.

तभी दरवाज़े पर खट:-खट की आवाज़ हुई तो मुझे लगा मेरे सपनों में पानी फिर गया है. लेकिन दरवाज़ा खोला तो देखा कि सिमा दीदी और निम्मी दीदी खड़ी हैं.

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निम्मी दीदी बहुत चुदाईी हैं, मेरी जैसी ही उनका बदन स्लिम है. फेयर भी हैं और उनके चूचियों का आकार भी छोटा है. पता नहीं क्यों मुझे बड़े चूचियों से इतना प्यार नहीं था. जितना छोटे:-छोटे चूचियों से है. वो दोनों अन्दर आकर बिस्तर पर बैठ गईं.

फिर हँसते हुए बोलीं:- अभी तक नींद नहीं आई या सिर्फ़ बातें करती रही?
नीता बोली:- दीदी हम अभी सोने ही वाले थे, बस इधर:-उधर की बातें कर रहे थे.
निम्मी दीदी मेरे पास आ गईं और मेरे गालों पर हाथ फेर कर बोलीं:- रेशम जैसी है. और बदन बभी देख लूँ.

ऐसे कह के उन्होंने मेरे चूचियों पर हाथ डाल दिया और दबाने लगीं. मुझे अच्छा लग रहा था.

सिमा दीदी उठीं और कहने लगीं:- दबाने से मजा नहीं आएगा, चूस के देख. कितना मस्त स्वाद है.

तभी नीता आगे आई और उसने मेरी नाइटी को पूरा उतार दिया. मैंने जो ब्रा पहनी थी, उसे निकाल दिया.

तो मेरी दो छोटी चुची उठ कर रॉकेट की तरह तनने लगीं.

निम्मी दीदी सीधे मेरे चूचियों को चूमने लगीं, खाने लगीं. सिमा दीदी तब मेरे पूरे शरीर पे अपना हाथ चला रही थीं. इतने में निम्मी दीदी बोलीं:- ऊपर इतनी मस्त है, तो नीचे जरूर जबरदस्त होगी ना.

निम्मी दीदी की बात सुनकर मेरे हलक से पानी सूख गया जैसे.
‘नीचे… मतलब??’

अभी मैं कुछ पूछ पाती, इससे पहले ही नीता ने मेरी पेंटी को नीचे खींच लिया.
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जैसे ही नीता ने मेरी पेंटी नीचे की, मैं शर्मा गई और निम्मी दीदी और सिमा दीदी एक साथ बोल पड़ीं:- वाउ, कितना साफ है यहाँ.! क्या रोज़ शेव करती है?

इतनी साफ़ और पिंक चूत तो हमने कभी देखी ही नहीं.

निम्मी दीदी बोलीं:- इसमें तो उंगली भी नहीं जाएगी. पूरी वर्जिन है क्या तु?

मैंने सिर हिला के ‘हाँ’ किया.

सिमा दीदी मेरे हाथों को पकड़ कर ले गईं और मुझे बिस्तर पर लेटा दिया. सभी मेरी चूत को ऐसे देख रहे थे मानो नई दुल्हन घर में आई है और सब उसको ही देख रही हैं.

सिमा दीदी ने अपना हाथ जैसे ही मेरी चूत पर रखा, मेरे बदन में कंपकंपी सी मच गई. और मैंने आँखें मूंद लीं.

पर फिर अचानक मेरी आँखें खुल गईं, जब यह एहसास हुआ कि निम्मी दीदी ने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया और बस रखा ही नहीं, खूब जोर:-जोर से चूस भी रही थीं.

बिना चाहे भी मेरे कंठ से सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गईं ‘आहह. उउउ. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ईईई. उम्म्मं.’

वो सब जोर:-जोर से हँस रही थीं और मैं मानो स्वर्ग में थी. कुछ मिनट तक मुझे चाट:-चाट कर निम्मी दीदी थक गईं तो सिमा दीदी ने मोर्चा संभाला. वो भी चूस रही थीं और नीता मेरी चूचियों को खाती जा रही थी. इतने में निम्मी दीदी अपनी नाइटी उतार कर मेरे सिर के पास आ गईं और मेरे मुँह में अपना स्तन भर दिया, मैं मज़े से उसे चूस रही थी.

फिर थोड़ी देर बाद वो उठ गईं और अपनी चूत को मेरे मुँह के पास लेकर रख दी. मैंने पहली बार किसी की चूत को मुँह के पास पाया तो मज़े से चूसने में लग गई.

तभी निम्मी दीदी ने जैसे ही कामुक सिसकारियाँ भरना शुरू की तो सब ऊपर आ गए और मुझे चूत को चाटते और चूसते हुए देखने लगीं.
नीता बोली:- तु चूसती अच्छी है.

फिर सिमा दीदी और नीता मेरे बगल में ही लेट गईं और एक दूसरी की चूत को सहलाने लगीं.

तभी सिमा दीदी बोलीं:- निम्मी, अब देर होने वाली है यार जल्दी फिनिश कर. फिर कमरे में चलते हैं, इनको भी सोने दे ना!

तो निम्मी दीदी उल्टी होकर मेरी चूत को चूसने लगीं. जब मैं उनकी चूत को चूस रही थी. तो जानकारी मिली कि इसे हॉस्टल में 69 कहते हैं. सिमा दीदी और नीता भी इसी तरह 69 कर रही थीं. काफ़ी देर तक यह सब चलता रहा. फिर यूं लगा मेरे बदन में भूकंप आ गया और महसूस हुआ जैसे मेरी चूत से कुछ निकल कर निम्मी दीदी के मुँह में चला गया. तभी निम्मी दीदी से चूत से मेरे मुँह में भी थोड़ा सा पानी निकल कर आ गया.

थोड़ी देर बाद सिमा दीदी और निम्मी दीदी चली गईं.

नीता बोली:- कैसा लगा?
मैं मुस्कुरा कर बोली:- मुझे पता नहीं था यह इतना मज़ेदार होगा.
‘तो फिर से हम करें क्या?’ नीता बोली.
मैं हँस दी और बोली:- नेकी और पूछ:-पूछ. चलो जल्दी से आ जाओ.

फिर से हम दोनों नंगे हो गए और एक:-दूसरे के बदन को चूसने लग गए. थोड़ी देर बाद हम 69 करने लगे. तो नीता ने मेरी चूत में एक उंगली डाल दी और कहने लगी:- कैसा लगता है?

मुझे थोड़ी अजीब सा लग रहा था पर मज़ा भी आ रहा था.

तभी वो उठी और कपबोर्ड से लकड़ी का एक गोल डंडा लेकर आई, मैंने देखा कि वो काफ़ी बड़ा था लगभग सवा फुट लम्बा सवा इंच व्यास का… उसके किनारे भी गोल थे.

नीता बोली:- ले इसे मेरी चूत में डाल!

मैं चौंक गई. पर फिर उसने मुझे बॉडी लोशन का डिब्बा दिया और कहा:- इसे लगा ले. आसानी से घुस जाएगा.
मैंने ऐसा ही किया. जैसे मैंने क्रीम लगाई. वो धीरे से उसकी चूत में घुस गया.

वो बोली:- अब इसको आगे:-पीछे करके मुझे चोद.
मैं चौंक गई. पर जैसे वो कहती रही मैंने किया.
तक़रीबन 15 मिनट बाद उसके बदन में भूकंप सा आया और चूत से पानी निकल गया.

वो हँस कर बोली:- अब मुझे कोई टेंशन नहीं है. किसी के पास जाने की जरूरत नहीं है. तु आ गई है, अब रोज़ रात को हम चुदाई करेंगे.

मैं कुछ बोल पाती, तभी वो बोली:- इसे (डंडा) लेगी अपने अन्दर? दर्द तो होगा लेकिन मजा बहुत आएगा.

मैं कुछ नहीं बोली और अपनी आँखें मूंद लीं. तभी उसने उस डंडे को कपड़े से पोंछ कर उस पर फिर से क्रीम लगाई और मेरी चूत में घुसेड़ना शुरू किया. शुरूआत में दर्द तो हो रहा था. लेकिन फिर एक झटके में वो मेरे अन्दर घुसा दिया और धीरे:-धीरे धक्का देने लगी.

मुझे बहुत मजा आ रहा था. वो आगे:-पीछे करती रही और कुछ मिनट बाद जाकर मेरी चूत से पानी निकल गया.
हम दोनों उस दिन बहुत खुश थे.

वो बोली:- ले. तु भी अब होमो हो गई. लेस्बीयन!

और अब मैं पूरी लेसबो यानि लेस्बीयन हूँ, मुझे अब तो नई लड़कियों के साथ चुदाई करने का मजा आता है.

जब हम लड़कियाँ ही एक:-दूसरी की भूख लेस्बीयां चुदाई से मिटा सकती हैं तो लड़कों की क्या ज़रूरत. मैं आपके मेल का वेट कर रही हूँ और बाथरूम में जा रही हूँ. इस चुदाई स्टोरी को लिखते-लिखते मेरी पेंटी भीग गई है. बाय.

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