loading...

भांजी की कुवारी चूत का रसपान

Chut chudai ki kahani, antarvasna hindi sex kahani, hindi chudai story, desi kahani, hindi sex stories, bhanji ki kuwari chut ki chudai.

चुदाई तो मैं पहले भी कई लड़कियों की कर चुका हूँ पर दोस्तों कुंवारी चुत को चोदने का मजा कुछ और होता है.

जब मैने अपनी भाँजी प्रिया की कुंवारी चुत को चोदा तो पिछली सारी चुदाई भूल गया.

  • मुझसे बड़ी मेरी चार बहनें हैं.
  • प्रिया मेरी सबसे बड़ी दीदी की लड़की है.
  • वो मुझे 7:-8 साल छोटी है.

वो मुझे 7:-8 साल छोटी है.
जब मैने उसे चोदा था तब उसकी उम्र 18 साल थी.
पर इस उम्र में ही वो बड़ी:-बड़ी लड़कियों को मात देने लगी थी.
गजब की खूबसूरती पाई थी.
उसके सीने पर उसकी बूब्स बड़े:-बड़े नागपुरी सन्तरों के जैसी तनी रहती थीं.
उसकी फिगर 34:24:34 की थी जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रही थी.
बात तब ही है जब मेरे जीजा जी की तबियत खराब हो गई थी.
मुझे मम्मी को लेकर उनके घर जाना पड़ा.
मेरा मन तो नहीं था, पर जाना पड़ा.
सोचा था कि मम्मी को छोड़ कर दूसरे ही दिन वापस आ जाऊँगा, पर वहाँ तो कहानी कुछ और ही हो गई.
एक दिन के बजाय एक महीना रूक कर आया वो भी तब आया, जब पिता जी ने फोन करके बुलाया.
दरअसल जिस दिन गया, उसी दिन रात प्रिया की कुंवारी चुत हाथ लग गई.
फिर भला आने का क्या मन करता.
उस दिन शाम को हल्का:-हल्का अन्धेरा हो चला था.
जिस कमरे में जीजा जी सोये थे, मोहल्ले की कुछ औरतें उन्हें देखने आई थीं.
मम्मी और दीदी उनके साथ बात कर रही थीं.
मैं भी वहीं दूसरी चारपाई पर रजाई ओढ़े आधा अन्दर आधा बाहर लेटा था.
बिजली थी नहीं, प्रिया थोड़ी देर बाद एक मोमबत्ती जला कर लाई, जिससे थोड़ा बहुत उजाला हो गया था.
वो उसे टेबल के ऊपर रख कर मेरी ही रजाई में आ कर अपना पैर डाल कर बैठ गई और औरतों की बातें सुनने लगी.
प्रिया कुछ इस तरह से बैठी थी कि उसकी तनी हुई दोनों बूब्स मेरी नजर के सामने थीं.
जिन्हें देख कर मेरा लंड अपना नियन्त्रण खोने लगा था.
मैं अन्धेरे का पूरा फायदा उठाते हुए उसकी ऊचाईयों को अपनी आँखों से नाप रहा था.
थोड़ी देर में ही प्रिया ने अपना पैर कुछ इस तरह से फैलाया कि उसका पैर मेरे पैर से टकराने लगा.
उसके कोमल चिकने पैरों के स्पर्श ने मेरी भावनाओं को और भड़काने वाला काम किया.
मैने उसे आजमाने के लिए अपने पैरों को जानबूझ कर आगे:-पीछे करने लगा जिससे मेरा पैर प्रिया के चिकने पैरों से रगड़ खाते रहे.
प्रिया ने कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी, बस हल्की सी मुस्कान के साथ एक बार देखा और फिर सामान्य हो गई.
जिससे मेरी हिम्मत को थोड़ा बल मिला.
अब मैं अपने पैर को प्रिया के पैरों के और करीब ले जाने की कोशिश करने लगा.
प्रिया ने भी अपना पैर हटाया नहीं, बस एक:-दो बार इधर:-उधर किया.
जब भी वो मेरी तरफ देखती मुस्कुरा देती थी, जिससे मुझे और हिम्मत मिल जाती थी.
अब मैं पूरी तरह से रजाई के अन्दर घुस गया.
सिर्फ मेरी मुन्डी ही बाहर थी.
मैं अपनी क्रिया धीरे:-धीरे तेज करने लगा.
मेरा लंड तन कर लोहे की रॉड बन चुका था.
काफी देर तक ऐसे ही करने के बाद जब मुझे लगने लगा कि प्रिया को भी मजा आ रहा हैं, तो मैने धीरे:-धीरे अपना पैर प्रिया के पैर के ऊपर चढ़ा लिया.
उसकी टाँगें एकदम संगमरमर की तरह चिकनी और कोमल थीं.
यह कहानी आप रियल कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
इस बार प्रिया ने मेरी तरफ नहीं देखा, पर मैने गौर किया कि प्रिया के चेहरे पर गम्भीरता के भाव उभरने लगे थे.
जैसे वो अपने आप को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही हो.
मैं मौके का फायदा उठाता जा रहा था.
मैने अपने पैरों को उसकी मोटी चिकनी जाँघों तक पहुँचा चुका था.
जब मैने अपना हाथ उसके पेट पर रखा तो वो काँप उठी और झट से मेरे हाथ को पकड़ कर नीचे कर दिया, पर अपने पैरों को अलग नहीं किया.
थोड़ी देर के बाद मैने दोबारा कोशिश की.
इस बार भी उसने मेरे हाथ को हटाने की कोशिश की, पर मैने बल के साथ उसके हाथ के दबाव का नाकाम कर अपना हाथ उसके पेट से हटने नहीं दिया.
प्रिया ने मेरा हाथ नहीं छोड़ा.

मैं ऐसे ही कुछ देर उसके चिकने पेट को सहलाता रहा.
फिर अपने हाथ को ऊपर की ओर खिसकाना शुरू किया तो पहले तो मेरा हाथ रोकने की हल्की कोशिश की, पर जब मैं नहीं माना तो उसने करवट ले ली और मेरी तरफ पीठ करके रजाई ऊपर तक खींच अपने हाथ से दबा लिया.
अब क्या था मैने थोड़ा सा आगे खिसक कर उसकी बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया और हौले:-हौले से दबाते हुए उसकी मस्त नरम बूब्स का भरपूर जायजा लेने लगा.
मुझे गजब का मजा आ रहा था.
इस समय मैं सारे रिश्ते:-नाते भूल कर प्रिया की बूब्स के साथ खेल रहा था.
थोड़ी ही देर बाद प्रिया को भी मजा आने लगा.
वो हल्का सा पीछे आ गई जिससे मेरे हाथ में उसकी दोनों बूब्स आसानी से पकड़ में आने लगें.

अब मैं उसकी दोनों बूब्स के साथ मजे से खेल रहा था.
काफी देर तक ऐसे ही खेलने के बाद मेरा मन उसकी नंगी बूब्स को छूने की इच्छा होने लगी, पर उसकी दोनों बूब्स ब्रा में एकदम टाईट कसी थीं.
हाथ अन्दर जाने का कोई प्रश्न ही नहीं बनता था.
तो मैं उसकी ब्रा का हुक खोलने की कोशिश करने लगा, पर ब्रा भी काफी कसी थी. उसका हुक आसानी से खुलने का नाम ही नहीं ले रहा था.
तो प्रिया ने मेरी मदद के लिए अपनी पीठ को थोड़ा सा घुमा दिया जिससे हुक आसानी से खुल गया.

  • अब क्या था मैने झट से हाथ बढ़ा कर उसकी ब्रा के अन्दर डाल दिया और थोड़ा जोर से दबा दिया.
  • प्रिया के मुँह से हल्की सी चीख निकल पड़ी.
  • उसने मेरा हाथ फौरन पकड़ लिया.
  • मैं भी थोड़ा सतर्क हो गया.

फिर हल्के से दो-तीन बार दबा कर जैसे ही मैने दूसरी चूची को पकड़ा कि बिजली आ गई.
प्रिया ने झट से मेरा हाथ अपनी टी:-शर्ट से खींच कर बाहर निकाल दिया और रजाई से बाहर आ गई.
प्रिया जब खड़ी हुई तो उसकी दोनों चूचियां टी:-शर्ट के अन्दर लटक रही थीं क्योंकि मैने उसकी ब्रा खोल दी थी.
प्रिया मेरी तरफ देखे बिना ही कमरे में भाग गई.
मेरा सारा मजा किरकिरा हो गया था.

उसके जाने के बाद जब मैने अपना लंड पकड़ा तो देखा, मेरा लंड मस्ती का रस छोड़ने लगा था.

बिजली आने के कुछ ही देर बाद पड़ोस की सारी औरतें भी चली गईं.

उनके जाने के बाद मम्मी और दीदी भी रसोई में चली गईं.
थोड़ी देर में प्रिया मेरे और जीजा जी के लिए खाने की थाली ले कर आई.
प्रिया मुझसे नजरें तो नहीं मिला रही थी, पर उसके होंठों पर शर्मीली मुस्कान फैली हुई थी.

मुझे समझते देर नहीं लगी कि प्रिया को भी इस खेल में मजा आया है.
मेरी तो जैसे लाटरी लग गई थी.
मेरे खुशी का ठिकाना नहीं था.
मैं भूल गया कि प्रिया मेरी भाँजी है और वो भी मुझसे 7:-8 साल छोटी है.
मैं तो बस उस कुंवारी चुत को चोदने की सोचने लगा.
प्रिया जैसी मस्त लड़की की कुंवारी चुत को चोदने के ख्याल मात्र से ही मेरा रोम:-रोम रोमान्चित होने लगा था.

मैं तो बस उस कुंवारी चुत को चोदने की सोचने लगा.
मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.
मैं भूल गया कि प्रिया मेरी भाँजी है और वो भी मुझसे 7:-8 साल छोटी है.

प्रिया जैसी मस्त लड़की की कुंवारी चुत को चोदने के ख्याल मात्र से ही मेरा रोम:-रोम रोमान्चित होने लगा था.
रात में मम्मी और दीदी एक कमरे में मैं और जीजा जी एक कमरे में सो रहे थे, पर मेरी आँखों में नीद कहाँ थी मैं तो सबके सोने का इन्तजार कर रहा था.

थोड़ी ही देर में जीजा जी की नाक बजने लगी, मतलब वो सो चुके हैं.
मैने उठ कर मम्मी और दीदी की आहट ली.
उनके कमरे में भी खामोशी थी.
पूरी तरह से यकीन करने के बाद मैं प्रिया के कमरे की ओर बढ़ा.
प्रिया अभी सोई नहीं थी, वो अभी पढ़ रही थी.
मुझे देख चौंक गई और थोड़ा मुस्कुरा कर बोली:- क्या हुआ मामा, सोये नहीं?
मैने पीछे से उसके कन्धे पर हाथ रखा तो वो अपना सर ऊपर उठा कर मुझे देखने लगी.
मैने झुक कर उसके होंठों को चूम लिया.
प्रिया एकदम से घबरा कर खड़ी हो गई.
‘मामा यह क्या कर रहे हैं?’
अभी वह सम्भल भी नहीं पाई थी कि मैने उसे अपनी बाँहों में खींच लिया.
और वो कुछ बोल पाती कि मैने उसके होंठों को अपने मुँह में कैद कर लिया और उसके गुलाब की पखुरियों जैसे होंठों का रस पीने लगा.

प्रिया ने मुझे हल्के से पीछे धकेल दिया और बोली.
‘यह क्या कर रहे हो,,, कोई देख लेगा,,,’ प्रिया मेरी इस हरकत से एकदम घबरा गई थी.
मैने उसकी आँखों में देखते हुए बोला:- प्रिया तुम बड़ी खुबसूरत हो.
यह सुन कर प्रिया थोड़ा शर्मा गई.
मैने धीरे से बोला:- प्रिया, एक पप्पी दो ना,
पहले तो उसने शर्मा कर नजरें नीचे कर लीं और फिर बनावटी गुस्सा दिखाते हुए आँखें तरेर कर बोली:- शर्म नहीं आती, आप मेरे मामा हैं,,,
साथ ही उसके होंठों पर एक शरारत भरी मुस्कान भी थी.
जो मुझे बहुत अच्छी लगी.
मैने झट से कहा:- जिसने की शरम, उसके फूटे करम,
मैने उसका हाथ पकड़ कर दुबारा अपनी बाँहों में खींच लिया.

प्रिया सकुचाती सी बोली:- मामा प्लीज छोड़ो ना, ऐसा मत करो,,, पागल हो गए हो क्या?
पर मैं उसकी बातों को अनसुना कर उसके चेहरे को चूमने लगा.
वो शर्म से लाल होने लगी थी.
वो बार:-बार मुझे यही कहने लगी:- मामा प्लीज,,, अब छोड़ दो बहुत हो गया,,,
मैने उसके होंठों को चूमते हुए बोला:- अभी तो शुरू हुआ है,,, अभी कैसे छोड़ दूँ.
मैने उसकी एक चूची को पकड़ के हौले से दबा दिया.
प्रिया सिहर उठी और झट से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली:- मामा यह गलत है, बड़ी बदनामी होगी.
पर उसकी चूची को पकड़ते ही मेरी मस्ती और भड़क उठी थी.
मैं बोला:- गलत कुछ नहीं है,,, मेरी जान, यही तो जवानी का असली मजा है. जो जी भर के लूटा जाता है,,,
यह कहते हुए मैने अपना एक हाथ उसकी पीठ को सहलाने और दूसरे हाथ से उसकी चूची को दबाते हुए उसके बालों को हटा कर उसकी गरदन पर चूमने लगा तो प्रिया मुझसे कस कर लिपट गई.
अब प्रिया में भी मस्ती छाने लगी थी.
वो भी कसमाने लगी थी.
उसका विरोध अब केवल मुँह से ही रह गया था.
‘मामा प्लीज, मुझे डर लग रहा है, आप समझते क्यों नहीं,,, कोई आ जाएगा.’
‘डरो मत, कोई नहीं आएगा, मैं सब चैक करके आया हूँ, सब सो रहे हैं.’ मैं मुस्कुरा कर बोला तो वो मुक्के से मेरी पीठ पर मारते हुए शर्मा के बोली:- तुम बड़े गन्दे हो,,,

और मेरे सीने से चिपक गई.
उस वक्त प्रिया स्कर्ट और टाईट टी:-शर्ट पहने हुई थी, जिसमें उसकी चूचियां काफी सख्ती से मेरे सीने में चुभने लगी थीं जो मेरी मस्ती को ओर बढ़ा रही थीं.
प्रिया अब मेरे धीरे:-धीरे मेरे बस में आ रही थी, अब उसकी कुंवारी चुत मेरे लौड़े से कुछ ही दूर थी.
मैने प्यार से उसका चेहरा ऊपर उठा कर बोला:- मैं गन्दा हूँ या अच्छा अभी थोड़ी देर बाद पता चलेगा.
यह कहते हुए मैने उसकी टी:-शर्ट को उसके बदन से खींच के बाहर निकाल दिया.
प्रिया शर्मा कर अपनी दोनों बूब्स को ढकने की कोशिश करने लगी, पर मैने झट से उसे अपनी बाँहों में खींचा तो वो एकदम मेरे सीने से चिपक गई.
शर्मा के बस इतना बोली:- मामा,,, यह क्या कर रहे हो,,, मुझे शर्म आती है.

यह कहानी आप रियल कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मैने उससे कहा:- बस दो मिनट रूको, सारी शर्म अपने आप खत्म हो जाएगा.

मैने उसके चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी.
प्रिया भी अब मदहोश होने लगी थी.
मदहोशी से उसकी दोनों आँखें बन्द हो गई थीं.
उसके होंठ मस्ती से काँपने लगे थे.
अब उसके चेहरे पर वासना की झलक साफ नजर आने लगी थी.
मेरा हाथ उसकी नंगी पीठ पर सरकने लगा था.
मैने धीरे से उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया.
ब्रा का हुक खुलते ही उसकी दोनों बूब्स आजाद हो गईं.
प्रिया ने पहले ही अपनी आँखें बन्द कर ली थीं.
ब्रा को अलग किया तो उसकी दूध जैसी गोरी और मस्त बूब्स मेरी आँखों के सामने फुदकने लगी थीं. जिन्हें देखते ही मेरा लंड जो पहले से ही कड़क था और सख्त हो कर झटके मारने लगा.
प्रिया ने शर्मा कर अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया.
उसकी बूब्स क्या गजब थीं दोस्तों,
मैं तो एकदम मस्त हो उठा.
मैने फौरन उसकी बूब्स को अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया और कस कर दबा दिया.
प्रिया के मुँह से तीखी चीख निकल पड़ी:- उई मां,,, मामा क्या करते हो, दर्द होता है.

loading...

‘हाय प्रिया,,, तेरी बूब्स इतनी मस्त हैं कि मैं तो इन्हें देखते ही पागल हो गया,,, कसम से इतनी मस्त बूब्स तो मैने आज तक नहीं देखीं.’
मैं उनसे प्यार से खेलने लगा.
मैने जैसे ही उसकी मस्त बूब्स को प्यार से सहलाते हुए दबाना शुरू किया वो सिहरने लगी.
मैने पागलों की तरह उसकी बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और वो सिसकारियाँ भर रही थी.
‘ई, ई, स स,,,सी आ,,, आहहहह,,,’
मैने उससे पूछा:- क्या हुआ प्रिया?
प्रिया शर्मा गई और मुस्कुरा कर बोली:- कुछ नहीं,,,
मैने एक चूची को फिर जोर से दबा दिया,,, और मजाक से बोला:- कुछ नहीं,,,
वो एकदम से चिहुंक उठी:- उई, मामा दर्द होता है,,,
‘तो सच:-सच बताओ, मजा आ रहा है या नहीं?’
‘हाँ बाबा, आ रहा है,,, पर तेज में नहीं, धीरे:-धीरे से करो ना,’
प्रिया का जवाब सुन कर मैं तो खुशी से झूम उठा और प्रिया को गोद में उठा कर बिस्तर पर लिटाते हुए बोला:- बस प्रिया देखती जाओ,,, आगे और मजा आएगा.

मन ही मन मैं अपनी सगी भांजी की कुंवारी चुत के उदघाटन के आनन्द को महसूस करते हुए मैं उसकी आँखों के सामने ही अपने सारे कपड़े उतारने लगा.
प्रिया ने शर्म के मारे अपना चेहरा अपने दोनों हाथों से ढक लिया.
मैं मुस्कुराता हुआ उसके बगल में जाकर लेट गया और उसके हाथों को उसके चेहरे से हटाया और पूछा:- क्या हुआ?
तो वो बोली:- तुम कितने गन्दे हो,,, मेरे सामने कपड़े उतारते हुए शर्म नहीं आती?
‘मेरी जान, शर्माऊँगा तो तुम्हारी कुंवारी चुत की चुदाई कैसे करूँगा,,,’
मैने झटके से उसके बदन से उसकी स्कर्ट और पैन्टी को खींच कर उससे अलग कर दिया.
‘मामा प्लीज मत करो ना, मुझे शर्म आती है.’
वो अपने दोनों हाथों से अपनी चुत को छुपाने की कोशिश करने लगी.
मैने कहा:- ठीक है, तुम शर्म करो, मैं अपना काम करता हूँ.
मैने उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया, साथ ही उसकी बूब्स को भी मसलने लगा.
मेरा लंड प्रिया के हाथों के ऊपर रगड़ खा रहा था.
प्रिया ज्यादा देर ऐसे नहीं रह सकी.
वो अपने दोनों हाथ ऊपर लाकर मुझे बांधने लगी, उसका एक हाथ मेरे सिर पर बालों को सहला रहे थे, तो दूसरा मेरी पीठ पर सरक रहा था.
जिससे साफ समझ में आ रहा था कि उसे भी भरपूर आनन्द आने लगा था.

उसके होंठ काँपने लगे थे और मुँह से मदमोह सिसकारियाँ निकलने लगी थीं.
उसका हाथ हटते ही मेरा लंड उसकी कुंवारी चुत के संपर्क में आ गया, जिसकी रगड़ उसको और मदहोश करती जा रही थी.
मैं धीरे से अपना एक हाथ नीचे सरका कर उसकी चुत का जायजा लेने लगा जो कि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
मैने जैसे ही अपना हाथ उसकी कुंवारी चुत पर रखा,,,

उसका हाथ हटते ही मेरा लंड उसकी कुंवारी चुत के संपर्क में आ गया, जिसकी रगड़ उसको और मदहोश करती जा रही थी.
मैं धीरे से अपना एक हाथ नीचे सरका कर उसकी चुत का जायजा लेने लगा जो कि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
मैने जैसे ही अपना हाथ उसकी कुंवारी चुत पर रखा,,,
प्रिया बड़ी जोर से सिसिया उठी:- ई,,,ई. ई,,,सस,
जैसे मैने उसकी कमजोरी पर हाथ रख दिया हो.

प्रिया अपना पिछवाड़ा उचकाने लगी.
उसकी कुंवारी चुत काफी गीली हो चुकी थी.
मेरा लंड भी गुलाटें मारने लगा था.
मुझसे भी अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैने उसकी कमर के नीचे एक तकिया रख उसकी कमर को थोड़ा ऊँचा उठा कर झट से अपने लंड को सुपारा उसकी छोटी सी सुरंग पर रख दिया.
सुपारे की गर्मी से प्रिया एकदम चिहुंक गई और मुझे कस कर पकड़ते हुए बोली:- हाय मामा,,, ये क्या है, तुम क्या कर रहे हो?
मैं भी अब तक काफी मदहोश हो चुका था, पूरी मस्ती के नशे में धुत्त हो कर बोला:- हाय प्रिया, अब तैयार हो जाओ,,, मैं अपना लंड तुम्हारी कुंवारी चुत में पेलने जा रहा हूँ, आ आ आहह,,,

मैने अपना लंड कुंवारी चुत में चाँप दिया.
करीब एक इन्च लंड ही अन्दर घुसा था कि प्रिया जोर से चीख उठी:- उई माँ,,, मर गई,,, मामा बाहर निकालो, बड़ा दर्द हो रहा है.
उसकी चीख इतनी तेज थी कि मैं भी डर गया.
मैने झट से उसके मुँह पर हाथ रख दिया और उसे चुप कराते हुए बोला:- प्रिया धीरे बोलो, आवाज बाहर चली जाएगी.
मैने उसका मुँह हाथ से बन्द कर दिया.
उसकी आवाज मुँह के अन्दर की दबी रह गई.
वो मुझे अपने ऊपर से धकेलने लगी.
मुझे लगा कहीं काम बिगड़ ना जाए,
मैं धीरे:-धीरे धक्का लगा कर अपना लंड उसकी चुत की गहराई तक पहुँचाने की कोशिश करने लगा.
क्योंकि मैं जानता था कि पूरा लंड चले जाने के बाद दर्द तो अपने आप खत्म हो जाएगा.

प्रिया दर्द से छटपटाने लगी, पर मुँह पर हाथ रखने की वजह से उसकी आवाज बाहर नहीं निकल पा रही थी.
छेद अभी काफी छोटा था, इसलिए थोड़ी परेशानी तो मुझे भी हो रही थी, पर चार:-पाँच बार के प्रयास के बाद मेरा पूरा लंड उसकी पूरी गहराई में घुस गया.
प्रिया दर्द से रोने लगी थी, उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे.
मैं उसे समझाते हुए बोला:- रोओ मत प्रिया, अब दर्द नहीं होगा, अब मजा आएगा,
मैने अपने लंड को धीरे:-धीरे अन्दर:-बाहर करना चालू किया.
पहले तो मुझे भी थोड़ी तकलीफ हुई, पर जब उसकी चुत के रस ने मेरे लंड के रास्ते को आसान बना दिया तो लंड पेलने में मुझे मजा आने लगा.
अब मैं अपना लंड पूरा जड़ तक उसकी बुर में चांपने लगा.
प्रिया की आँखों से अभी आंसू बह रहे थे, पर उसने अब चीखना बन्द कर दिया था.
जिससे मुझे थोड़ी राहत मिली.
मैने अपना हाथ जैसे ही उसके मुँह से हटाया तो वो धीरे से बोली:- प्लीज मामा निकालो ना,,, बहुत दर्द हो रहा,
मैने उसे समझाते हुए बोला:- बस बेटा थोड़ा और बर्दाश्त कर लो, अब तो मजा ही मजा है,

ये कहते हुए अपनी कमर ऊपर उठा कर एक हल्के झटके के साथ अपना लंड फिर चांप दिया.
इस बार प्रिया के मुँह से एक हल्की सी हिचकी निकली और आँखें बन्द हो गईं.
मैं समझ गया कि इस बार उसे आनन्द का अनुभव हुआ है, तो मैं धीरे:-धीरे अपने लंड को आगे:-पीछे करने लगा.
मेरी इस क्रिया से प्रिया को एक नया अनुभव मिल रहा था क्योंकि वो अपने दोनों होंठों को अपने मुँह के अन्दर दबा कर अपनी आँखें कस कर मूंदने लगी थी, साथ ही साथ उसकी दोनों बाँहें मुझे कसने लगी थीं.
उसके चेहरे के तनाव भरे भाव बता रहे थे कि उसे इस समय जो अनुभव मिल रहा था उसके लिए बिलकुल नया है.
कुछ पल रूक कर मैने उससे पूछा:- प्रिया अब कैसा लग रहा है?
तो प्रिया बोली:- मामा तकलीफ तो अभी हो रही है, पर अच्छा भी लग रहा है.
यह बात उसने थोड़ा शर्माते हुए बोली.
मैं तो खुशी से झूम उठा.
मैने कहा:- बस देखती जाओ, सारा दर्द खत्म हो जाएगा, बस मजा ही मजा आएगा.

मैने जोश में एक जोरदार धक्का जड़ दिया, प्रिया चीख उठी:- मामा,,, क्या करते हो,,, दर्द होता है, धीरे:-धीरे करो ना,,,
‘ओह सारी,,,.मैं जरा जोश में आ गया था.’
‘जोश में मेरी जान ही निकाल दोगे क्या?’
‘अरे नहीं मेरी रानी,,, डोन्ट वरी, अब प्यार से पेलूँगा,’
मैं उसके एक मम्मे को हौले से दबाने लगा.
प्रिया के मुँह से मीठी सिसकारी फूट पड़ी.
‘सीसी,,,सी.मामाअअअआ,’
प्रिया ने मेरी पीठ पर हल्के से मुक्का मारते हुए बोली:- तुम बड़े शैतान हो.
मैने मुस्कुरा कर पूछा:- लो,,, भला मैने क्या शैतानी की?
मैने मासूम सा चेहरा बना कर बोला.
प्रिया खिलखिला कर हँस पड़ी और अपने दोनों पैरों को मेरी कमर में कस कर बाँध लिया.

साथ ही मेरे चेहरे पर चुम्बन की झड़ी लगा दी.
मैं भी खुशी से झूम उठा और खुशी से उसकी दोनों बूब्स को हॉर्न की तरह दबाते हुए धक्के की गति थोड़ी बढ़ा दी.
जिससे प्रिया का आनन्द भी बढ़ गया क्योंकि उसकी सिकारियाँ अब तेज होने लगी थीं.
‘आआहहह,,, ओह माँ,,,. मामा,,,आ,सी. ई,,,’
प्रिया की मस्ती को देख कर मेरी मस्ती भी दुगनी होने लगी थी.
प्रिया की सिसकारी हर पल बढ़ने ही लगी थी उसके साथ ही मेरे लंड की गति भी बढ़ती जा रही थी.
‘आहहह,,, आहहह,,, उई, हाय ये क्या हो रहा है मामा,’
‘यही तो जिन्दगी का असली मजा है मेरी जान,,,आहहह,,,.मुझे तो बहुत मजा आ रहा है,,,हाय प्रिया तुमको कैसा लग रहा है?’
‘हाय मामा,आह्ह, बहुत मजा आ रहा है,,, आआहहह,,, ऐसा मजा तो पहले कभी किसी चीज में नहीं मिला आआआहहह,,,’

(Bhanji ki kuwari chut, kuwari chut, bhanji ki chudai, mama bhanji ki chudai)



अब तक तो मेरी मस्ती भी अपनी चरम सीमा को छूने लगी थी. प्रिया के साथ मेरे मुँह से भी मस्ती भरे स्वर निकलने लगे थे.
‘सच प्रिया मैं अब तक न जाने कितनी लड़कियों को चोद चुका हूँ, पर तुम्हारी चुत को चोदने में जो मजा आ रहा है, मुझे पहले कभी नहीं मिला,,, हाय प्रिया बहुत मजा आ रहा है,,,’

‘आहहहह,,,.मामा मुझे भी बहुत मजा आ रहा है.’
मैं उसके चेहरे पर चुम्बन करने लगा तो प्रिया भी मुझे चूमने लगी.
अब तक प्रिया की चुत काफी पानी छोड़ चुकी थी क्योंकि अब मेरा लंड बड़ी आसानी से अन्दर:-बाहर आ जा रहा था.
साथ ही ‘फच, फच’ की ध्वनि भी उभर रही थी.
जो चुदाई के इस माहौल को और मोहक बनाने लगी थी.
कुछ देर पहले जिस कमरे में खामोशी थी. अब चुदाई के मधुर संगीत से गूंज रहा था.
जहाँ एक ओर घर के सारे लोग गहरी नींद में सो रहे थे, वहीं दूसरी ओर मामा:-भाँजी की चुदाई का खेल चल रहा था.
जहाँ एक ओर घर खामोशी थी, वहीं दूसरी ओर हम दोनों मामा:-भाँजी की मस्ती भरी सिसकारीयाँ कमरे में गूँज रही थीं.
मैने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे प्रिया जैसी माल की कुंवारी चुत को चोदने का ऐसा मौका भी मिलेगा.
इस पल हम दोनों ही मस्ती के अथाह सागर में गोते लगा रहे थे, जिसका कोई वर्णन नहीं किया जा सकता.
हर पल हमारी चुदाई की गति बढ़ती ही जा रही थी.
करीब बीस मिनट तक मैं प्रिया को ऐसे ही चोदता रहा साथ उसकी मस्त दूध जैसी बूब्स को भी दबाता मसलता रहा.
प्रिया भी मस्ती में पागल हो चुकी थी. वो अब खुल कर मेरा साथ दे रही थी.
अचानक प्रिया की सिसकारी और तेज हो गई और वो चिल्ला कर बोली:- हाय मामा मुझे न जाने ये क्या हो रहा है आआहहह,,, जैसे मेरी चुत से कुछ निकल रहा है,आहहहहह,,,
उसने मुझे कस कर पकड़ लिया.
मैं समझ गया कि प्रिया अपनी चरम सीमा को पार कर गई है.

अब मेरी बारी थी, मैने भी अपनी रफ्तार बढ़ा दी.
करीब 6:-7 कड़क धक्के लगाने के बाद ही मैने भी अपना पूरा का पूरा लंड प्रिया की चुत में पेल दिया और पूरी तरह से उसके ऊपर ढह गया.
मेरा लंड अपने गरम:-गरम वीर्य का गुबार प्रिया की चुत में छोड़ने लगा.
वीर्य की गर्मी मिलते ही प्रिया एकदम गनगना गई और मुझसे कस कर चिपक गई.
मैने भी उसे कस कर जकड़ लिया.
हम दोनों एक:-दूसरे को इस कदर कस कर पकड़े हुए थे, जैसे एक:-दूसरे में ही समा जाएँगे.
हम दोनों की सांसें इतनी तेज चल रही थीं जैसे हम दोनों कोई लम्बी दौड़ लगा कर आए हों.
करीब 5 मिनट के बाद जब हम थोड़ा सामान्य हुए तो एक:-दूसरे से अलग हुए.
प्रिया अपनी बुर को खून से सना देख कर डर गई, पर जब मैने उसे समझाया कि पहली चुदाई में खून निकलता ही है, अब दुबारा नहीं निकलेगा, तो वो सामान्य हुई.
मैने जब धीरे से उसके कान में पूछा:- क्यों प्रिया मजा आया या नहीं?
तो वो शर्मा गई.

धत,,,’
और दौड़ कर बाथरूम में भाग गई.
मैं वैसे ही बिस्तर पर पड़ा रहा.
थोड़ी देर में जब वह वापस आई और मुझे वैसे ही नंगा लेटे देखा तो बोली:- क्या मामा, आपने अभी कपड़े नहीं पहने.
मैने धीरे से कहा:- अभी एक बार और तुम्हें चोदने का मन कर रहा है.
दुबारा चोदने के नाम पर प्रिया ने शर्मा कर गर्दन झुका ली और शर्मा कर बोली:- मामा, अब बस भी करो ना,,,
मैने कहा:- बस एक बार,,, बस एक बार और चोदने दो ना, मेरा मन अभी नहीं भरा,,,
एक बार चुदाई का मजा मिलने के बाद उसका भी मन भी झूम उठा था.
इस बार प्रिया ने कुछ नहीं बोला.
मैने उसे अपनी बाँहों में उठा कर एक बार फिर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके कामुक अंगों के साथ खेलना शुरू कर दिया.
वो पहले थोड़ी देर शर्माती रही, पर जैसे:-जैसे उसे मजा मिलता गया, वो भी मेरा साथ देने लगी.
फिर क्या था पल भर में एक बार फिर से पूरा कमरा हम दोनों मामा:-भाँजी की मस्ती भरी सिसकारियों से गूंजने लगा.
इस तरह मैने उस रात अपनी भाँजी की चार बार चुदाई की.
दीदी के घर गया था सिर्फ दो दिन के लिए और पूरा एक महीना रह कर आया.

पहले एक:-दो दिन तो वो थोड़ा शर्माती रही, पर उसके बाद वो मेरे साथ पूरी तरह से खुल गई.
अब वो खुल कर मेरे साथ चुदाई की बातें करने लगी थी.
जब भी मौका मिलता तो वो खुद मुझे चोदने को लिए कहती.
इस तरह पूरे एक महीने में मैने दिन:-रात जब भी मौका मिला, मैने प्रिया को जी भर कर चोदा.

कहानी कैसी लगी कमेंट कर के बतायें.

Bhanji ki kuwari chut, kuwari chut, bhanji ki chudai, mama bhanji ki chudai

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...