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क्या आप मेरे से चुदेंगी

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Hindi sex story, desi kahani
नमस्कार दोस्तों, मैंं लुधियाना का रहने वाला हूँ. मैंं एक 20 वर्ष का छात्र हूँ और पिछले दो साल से रियलकहानी का नियमित पाठक हूँ.
मैंं रंग में गोरा तथा कद में लंबा हूँ। दिखने में सेक्सी बंदा हूँ. मैंंने रियलकहानी पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं और मैंं अक्सर मुठ्ठ मार कर ही काम चला लिया करता था। या फिर कहो कि मुझे सेक्स करने का कभी मौका ही नहीं मिला.
यह मेरी पहली और सच्ची स्टोरी है.
करीब दो महीने पहले की बात है। मैंं हमेशा की तरह कॉलेज से घर जाने के लिए निकला। बरसात का सीज़न था। बरसात होने के कारण बस बहुत देर से आ रही थी तो मैंं अपने एक दोस्त की बाइक पर आ रहा था। पर बरसात होने के कारण मैंं बीच रास्ते में एक बस स्टॉप पर ही उतर गया.
वो जगह एक सोसाइटी के बाजू में है. मैंं भीगने के कारण बस स्टॉप के बजाए उस सोसाइटी के एक घर के बाहर खड़ा हो गया और बस का इंतज़ार करने लगा.
तभी थोड़ी देर बाद मुझे खिड़की से उस घर के अन्दर कुछ हुलचल सी होती महसूस हुई और जब मैंंने झाँक कर देखा तो एक बहुत ही सुंदर सी औरत जीन्स को थोड़ा नीचे करके लण्ड जैसे दिखने वाले खिलौने से मुठ्ठ मार रही थी.
यह सब अचानक ही देख कर मैंं थोड़ा घबरा कर पीछे कुछ कदम लेने लगा। लेकिन जूते और फर्श भीगा होने की वजह से मैंं फिसल कर वहीं गिर गया.
मेरे गिरने की आवाज़ सुनकर वो औरत सब कुछ ठीक करके बाहर आई और मुझसे मेरे बारे में पूछा- कौन हो तुम? और कैसे गिर पड़े?
तो मैंंने उसे बताया कि मैंं कॉलेज का छात्र हूँ और बरसात में भीगने से बचने के कारण वहाँ खड़ा था.
उस औरत ने सहानुभूति जताते हुए मुझे अन्दर बुलाया.
मैंं उस औरत के घर में गया। अन्दर से एकदम शानदार घर था. फिर उन्होंने मुझे एक कप चाय के लिए पूछा। पहले तो मैंंने मना किया। पर उस औरत ने ज़ोर दिया। तो मैंं मान गया.
उसने मुझे एक तौलिया दिया और अन्दर चाय बनाने चली गई.
फिर हम दोनों ने चाय पीना शुरू किया.
पहले-पहल हम दोनों चुप थे तो मैंंने ही बात शुरू की और अपना नाम बताया. फिर उसने अपना नाम ज्योति बताया.
घर में कोई और ना दिखने की वजह से मैंंने ज्योति से पूछ ही लिया- घर के बाकी सदस्य कहाँ गए?
तो उसने बताया कि उसके पति बड़े बिजनेसमैंन हैं और उन दोनों की शादी कुछ 4 महीने पहले ही हुई है.
चाय पीते-पीते मेरी नज़र उसकी चूचियों पर चली जाती थी और चूचियों को देखते-देखते मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. ज्योति की नज़र भी मेरे लण्ड पर जा चुकी थी। पर उसने कुछ नहीं कहा.
फिर मुझे एक ब्लू-फिल्म का सीन सूझा और मैंंने अपनी चाय जानबूझ कर अपनी जीन्स पर गिरा दी.
यह देखकर वो तौलिया लाई और कहा- उसके पति के कुछ कपड़े दूसरे कमरे में पड़े हैं.. मैंं उसे पहन लूँ.
मैंंने शुरू-शुरू में बस दिखावे के लिए मना किया पर बाद में मान गया. दूसरे कमरे में जाकर मैंंने कपड़े बदलने शुरू किए। लेकिन उस रूम का दरवाज़ा मुझसे थोड़ा खुला रह गया.
जब मैंंने कपड़े उतारे तो मैंंने गौर किया कि वो औरत छुप कर दरवाज़े की दरार से मुझे देख रही थी. परंतु थोड़ी शर्म के मारे मैंंने उसे नज़र अंदाज़ किया.
जब बाहर आया तो हम दोनों फिर से कुर्सियों पर बैठे। लेकिन इस बार उसकी चूचियाँ पहले से कहीं ज़्यादा बड़ी लग रही थीं.
मैंंने रिस्क लेते हुए पहले उससे दोस्तों की तरह बातें करते-करते उसके कन्धों पर हाथ रखा। फिर धीरे-धीरे अपना हाथ उसकी कमर की तरफ कर दिया और उसने इस बार भी कुछ नहीं कहा.
फिर तो मेरे ही मुँह से निकल गया- आप मेरे साथ चुदाई करेंगी.
औ यह सुनते ही ज्योति ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया. मैंं तो बहुत मज़े में आ गया था। मानो आज का दिन तो कमाल का निकला.
वो मुझे चूमते-चूमते मेरे लण्ड पे हाथ फिराने लगी और मैंं उसकी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.
अब धीरे-धीरे हम दोनों ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए.
थोड़ी देर बाद हम दोनों नंगे हो चुके थे और फिर मैंंने उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू कर दीं. वो तो आनन्द के मारे मानो मदहोश होने लगी थी. फिर थोड़ी कोशिश के बाद मैंंने अपना लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया.
वाह… वो पहला धक्का तो मानो जन्नत की सैर करने जैसा था और वो दर्द के मारे ‘आ आ..’ चिल्लाने लगी.
चिल्लाने की वजह से मैंंने शुरू-शुरू में थोड़ी धीरे-धीरे धक्के मारे.
फिर जब चूत ने रस छोड़ा तो वो मेरी बाहों में झूल रही थी। उसे कभी दीवार के सहारे चोदता तो कभी बिस्तर पर। कभी सोफा पर। तो कभी ज़मीन पर…! सारा वक़्त वो ‘और.. और’ चिल्लाती रही और मैंं भी लगातार धक्के मारता रहा.
पहले कुछ 5 मिनट में मैंं पहली बार झड़ गया.
फिर दूसरी बार वो मेरा लण्ड चूस रही थी उस वक़्त मैंं दूसरी बार झड़ गया. हम दोनों अब धीरे-धीरे थकने लगे थे.
तो कुछ देर आराम करने के बाद मैंंने उसकी चूत को चोदना चालू किया. सारा वक़्त वो ‘आ… आ..’ की आवाजें निकालती रही. तकरीबन 15 मिनट बाद मैंं तीसरी बार उसकी चूत में झड़ गया.
फिर हम दोनों लेट गए। हम दोनों ने बिस्तर पर आधे घंटे आराम किया और फिर मैंंने घर जाने को कहा.
ज्योति ने भी मना नहीं किया और वैसे भी रात हो चुकी थी.
घर से निकलते ही मैंंने ‘बाय’ कहा और उसने भी ‘बाय’ कह कर मेरे होंठों को चूमा. मन तो किया कि फिर से वहीं उसे चोदना शुरू करूँ। पर घर के लिए देर होने की वजह से खुद को काबू में किया और जाते वक़्त पूछा- तुम्हारे पति कब आ रहे हैं?
उसने मुझे आश्वस्त करते हुए कहा- उसके पति एक-दो हफ्ते बाद ही आएँगे..!
फिर तो मैंं खुशी के मारे अन्दर ही अन्दर झूम उठा और ज्योति से दोबारा आने का वादा किया. हम दोनों ने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर लिए और मैंं बस पकड़ कर घर की तरफ चल दिया.
फिर मेरे अगले एक हफ्ते जन्नत में कटे. मैंं घर से कॉलेज के लिए निकलता। लेकिन बीच रास्ते से ही मुड़कर ज्योति के घर चला जाता. हम दोनों ने एक हफ्ते बेलगाम संभोग किया और फिर करीब दो हफ्ते बाद उसका पति आ गया.
अब ज्योति अपने पति के साथ जर्मनी चली गई है. लेकिन अब भी हम फ़ेसबुक पर चैटिंग करते हैं.
तो दोस्तो। आप लोगों को मेरी यह घटना कैसी लगी। आप के विचारों का स्वागत है। मुझे ईमेल जरूर कीजिए.

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