निशा की चुत की हो गयी बल्ले बल्ले

Chut chudai kahani कहानी सेक्सी अंदाज का मजा लीजिये। सीधा मैं पॉइंट पे आना चाहूँगा अब तो क्युकी मैं आपका ज्यादा टाइम ख़राब नहीं करना चाहता.

अगले ही दिन जब हम लोग फिर से एक बार आफिस पहुँच गये तो निशा आज ज्यादा खुश दिख रही थी। मुझे देख कर उसनें मुझे आँख मारी.. मैंंनें भी मुस्कराकर एक फ्लाइंग किस फेंक दिया.. तो वह शर्मा गई और दौड़ कर अपनें केबिन मेंं चली गई।

लंच टाइम मेंं हम दोनों फिर मिले और चाय पीनें कैंटीन जानें लगे।
मैंं- क्यों निशा आज तुम बहुत खुश और ब्यूटीफुल लग रही हो.. आज तो कहर ढा रही हो.. क्या बात हैं?
तो उसके गाल लाल हो गए।

मैंंनें पूछा- आज का क्या प्रोग्राम हैं?
तो वह बोली- अभी कुछ नहीं बताती.. छुट्टी होनें पर बताऊँगी।

चाय पीनें के बाद हम दोनों अपनें-अपनें केबिन मेंं चले गए।

लगभग एक घंटे बाद निशा मेंरे केबिन मेंं आई.. उस समय मैंं अकेला ही था।
निशा मेंरे पास आई और मुझसे लिपट गई और मेंरे गालों पर चुम्बन किया.. बदले मेंं मैंंनें भी उसके गालों पर चुम्बन किया और जोर से उसके मम्मों को दबा दिया.. तो वह छिटक कर दूर हो गई।

मैंंनें पूछा- क्या हुआ रानी?
तो वह बोली- शर्म नहीं आती.. यह ऑफिस हैं.. कोई देख लेता तो क्या कहता।

  • हम दोनों हंस पड़े.. मैंंनें उससे आनें का कारण पूछा
  • और उसका काम पूरा करवा दिया।
    जब वह जानें लगी तो मैंंनें आज फिर से चुदाई करनें के लिए कहा..
  • तो शाम का कहकर चली गई।
  • अब मुझे ऑफिस मेंं पांच बजाना मुश्किल हो रहा था..
  • किसी तरह से पांच बजे..
  • तो निशा मेंरे केबिन मेंं आई और चलनें का इशारा किया।
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मैंं तुरंत अपना काम बंद कर बाहर आ गया.. बाहर निशा मेंरा इंतजार कर रही थी।
निशा के घर पहुँचते ही मैंंनें डोर लॉक कर दिया और निशा को पीछे से बाँहों मेंं लेकर उसके गाल और कान के नीचे चुम्बन लेनें लगा.. जिसमेंं वह भी मेंरा साथ देनें लगी।

कुछ ही पलों मेंं वह भी गर्म हो गई और मेंरा लंड पैन्ट के अन्दर ठुमका मारनें लगा और मेंरा लौड़ा उसके चुतड़ों के बीच की दरार मेंं फंसनें लगा।

निशा नें तुरंत मुझे अलग कर दिया और फ्रेश होनें के लिए बाथरूम मेंं चली गई।
बाथरूम से निकलनें के बाद कपड़े बदलनें के लिए वह बेडरूम मेंं जानें लगी तो मैंं भी उसके पीछे-पीछे उसके बेडरूम मेंं पहुँच गया।

निशा- यहाँ क्यों आ गए.. हटो यार यहाँ से.. मुझे कपड़े बदलनें हैंं..
मैंं- तो क्या हुआ.. मेंरे सामनें ही बदल लो.. अब काहे की शर्म.. मैंं उतार देता हूँ.. तुम काहे को कष्ट करती हो।
निशा- नहीं.. मुझे शर्म आती हैं! तुम बाहर जाओ।

पर मैंं नहीं माना तो उसको मजबूरन मेंरे सामनें कपड़े बदलनें पड़े।

तब मैंंनें उससे डिनर के लिए पूछा.. तो बोली- मैंं यहीं बनाती हूँ.. पैसे किस लिए खर्च करना हैं।
मैंंनें भी उसे पहले एक-एक कप कॉफ़ी के लिए बोला तो वो कॉफ़ी बनानें के लिए रसोई मेंं जानें लगी।
मैंंनें उसे रोका और कहा- तुम मेंरे साथ रहो.. मैंं काफी बनाता हूँ.. तुम डिनर की तैयारी करो।
काफी पीनें के बाद मैंंनें कहा- मैंं अपनें रूम तक होकर अभी आता हूँ।

तो वह जल्दी आनें को बोली और मैंं अपनें रूम पर चला आया।

आज मैंंनें निशा के घर पर रात भर रहनें के हिसाब से अपनें कपड़े लिए और निशा के घर चला आया। रास्ते मेंं मार्किट से ककड़ी और कुछ फ्रूट भी ले लिए।आज मैंं सारी रात निशा की चुतनिशा करनें के मूड मेंं था।

उसके घर आकर घंटी बजानें के कुछ देर बाद निशा नें दरवाजा खोला। मैंंनें कहा- इतनी देर क्यों लगी?

निशा- तुम्हारे लिए तैयारी कर रही थी।
मैंंनें- कैसी तैयारी?
निशा मुस्कराकर बोली- सब पता चल जाएगा.. थोड़ा सब्र करो।

उसनें यह कहते हुए मेंरे सीनें मेंं चिकोटी काट ली और हंस दी।
उसकी इस शरारत पर मैंंनें भी उसके मम्मों को अपनी मुठ्ठी मेंं भर लिए और दबा दिए।
निशा- उई मांsss.. लगती हैं.. इतनी जोर से दबाते हैंं? छोड़ो न.. खाना बन गया हैं.. बस रोटी भर बनानी हैं।
तो मैंं बोला- चलो आज मेंरे हाथ की बनी रोटी खाना मैंं बनाता हूँ।
निशा- क्या तुम्हें खाना बनाना आता हैं? चलो बनाओ।

फिर मैंंनें अपनी शर्त और पैन्ट उतार दी। अब मेंरे तन पर मात्र बनियान और अंडरवियर था। मैंंनें आंटा गूँथ कर रोटी बनानी चालू कर दी। वह भी मेंरे साथ खड़ी हो गई और मुझे देखनें लगी।

तभी वह जोर से हँसी- हा हा हा हा हा..
मैंंनें पूछा- क्या हुआ.. तुम हँसी क्यों..?
तो वो बोली- देखो तुम्हारे अंडरवियर मेंं मेंंढक उचक रहा हैं।
मैंं- तो सम्हालो उसे..

तभी निशा नें मेंरा अंडरवियर निकाल दिया ओर मेंरा लंड आजाद होकर और जोर से हिलनें लगा.. तो उसनें तुरंत मेंरे लंड को पकड़ लिया.. जिससे अब मेंरा लंड उसके हाथ मेंं अन्दर-बाहर हो रहा था। तभी वह नीचे बैठकर मेंरा लंड ‘उम्म्म..म्हा’ चपड़-चपड़ कर चूसनें लगी।
उसनें पूरी मस्ती से 10-15 मिनट तक मेंरे लौड़े को चूसनें के बाद मेंरे लंड का पानी निकाल दिया और पूरा रस पी गई।
आज वो कुछ ज्यादा मूड मेंं दिख रही थी।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.. अब मैंंनें भी उसके कपड़े उतारनें चालू किए तो वह थोड़ा कसमसाई.. परन्तु वह भी तैयार हो गई।
मैंंनें पीछे से उसको पकड़ कर चूमते हुए एक हाथ से मम्मों को दबानें लगा.. और दूसरे हाथ से उसकी योनि के दानें को मसलनें लगा।

अब वह मुँह से आवाजें निकलनें लगी। मेंरा लण्ड भी उसकी गांड की दरार मेंं फंसा हुआ था.. तभी मैंंनें एक झटका दिया तो लंड का टोपा गांड के अन्दर चला गया.. जिसके कारण वह जोर से चिल्ला उठी।
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निशा- अरे बापsss.. रे.. ये क्या कर रहे हो.. लग रहा हैं.. निकालो.. इतनें बेरहम न बनो.. मैंं मना थोड़े ही कर रही हूँ.. पर कुछ क्रीम वगैरह तो लगाओ.. आह्ह.. नहीं तो फट जाएगी।
मैंंनें उसे क्रीम लानें के लिए कहा तो वह लेकर आ गई।

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अब मैंंनें 69 की स्थिति बनाई! इस अवस्था मेंं वह मेंरे लंड को चूस रही थी और मैंं उसकी चुत का रसपान कर रहा था! उसकी चुत काफी गीली हो गई थी।
वह अपनी कमर उचका रही थी.. जिस कारण मेंरी जीभ सीधे उसकी चुत के अन्दर-बाहर हो रही थी।

मैंंनें दूसरे हाथ से क्रीम लेकर उसकी गांड के छेद मेंं लगाकर धीरे-धीरे क्रीम को अन्दर करनें लगा। पहले एक उंगली अन्दर-बाहर कर रहा था.. बाद मेंं दूसरी उंगली भी अन्दर कर दी।

जब मैंंनें देखा कि छेद कुछ ढीला हो गया हैं.. तो मैंंनें उससे घोड़ी बननें के लिए कहा।
अब उसकी गांड ठीक मेंरे सामनें थी! मैंंनें लंड उसके गांड के छेद पर रखकर एक हल्का झटका दिया.. जिससे मेंरे लंड का सुपारा अन्दर चला गया।
निशा- आआआअह.. धीरेss..

मैंंनें तभी एक झटका और दिया.. अब पूरा लंड अन्दर चला गया। मैंं धीरे-धीरे झटके लगानें लगा। अब उसको भी मजा आनें लगा।
निशा- आआअ ईईईई.. स्स्स् स्स्स्स्स… मजा आ रहा हैं.. इसी तरह करो.. आह.. आज मुझे तृप्त कर दो.. आआअह.. फाड़ दो मादरचोद.. मेंरे दोनों छेद.. आह्ह..

निशा अपनें एक हाथ से अपनी चुत सहलाती जा रही थी.. तभी मैंंनें अपना लण्ड बाहर निकला और एक जोरदार झटके मेंं अन्दर कर दिया।
‘आआहा.. आआआआअ..’
अब निशा भी मेंरे साथ देनें लगी अब वो भी अपनें चुतड़ों को हिलानें लगी। मैंं उसके मम्मों को दबानें के साथ धक्के मारता रहा।

तभी निशा का जिस्म अकड़नें लगा- उम्म्म म्म्म्म्म म्म्म्म्म.. मेंरे होनें वाला हैं और जोर से मारो.. आआआ.. ईईईई.. हो ओहह.. गयाआआ..!!

  • अब मैंं भी जल्दी-जल्दी झटके मारनें लगा..
  • मेंरा भी होनें वाला था।
  • मैंंनें पूछा- कहाँ करूँ..
  • तो निशा नें अन्दर ही करनें को कहा।
  • तो मैंंनें भी अपनी पिचकारी अन्दर छोड़ दी..
  • और उसी अवस्था मेंं हम दोनों लेटे रहे।
  • कुछ देर बाद हम दोनों नें उठ कर एक-दूसरे को साफ किया।
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निशा- हाय.. अब दर्द हो रहा हैं। ऐसा किया जाता हैं। अब मैंं भी तुम्हें नहीं छोडूंगी.. तुमनें मेंरी गांड फाड़ी हैं.. अब मैंं तुम्हारी फाड़ती हूँ।
मैंं- ठीक हैं.. तुम्हारे पास कौन सा लंड हैं.. जो तुम मेंरी गांड फाड़ोगी..? क्या कर लोगी?
निशा- देखते रहो.. देखो मना नहीं करना।

मैंं समझा कि निशा मजाक कर रही हैं लेकिन निशा नें अलमारी से एक मोटी सी कैंडिल निकाली… जिसको देखता ही रह गया। उस कैंडिल की शक्ल बिल्कुल लंड की तरह थी और जिसकी लम्बाई एक फुट की थी। जिसे देख कर मेंरी गांड फटनें लगी कि यदि इसनें सचमुच मेंरे गांड मेंं डाल दिया.. तो मेंरी गांड का क्या होगा।

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पर मैंंनें भी सोच लिया कि देखा जाएगा चलो गांड भी मरवाकर देखते हैंं।

निशा कैंडिल रूपी लंड लेकर आई और मुझे पीठ के बल लेटनें को कहा और मेंरी दोनों टांगों को फैलाकर मेंरी गांड के छेद पर धीरे-धीरे क्रीम लगाते हुए अपनी उंगली डालनें लगी और साथ ही साथ मेंरे लंड को सहलानें लगी।

मेंरी गांड का छेद भी क्रीम की चिकनाई की वजह से ढीला हो चुका था। अब निशा नें उस बनावटी लंड के ऊपर क्रीम लगाकर उसे चिकना कर मेंरी गांड के छेद पर रखकर अन्दर करनें लगी.. जिस कारण मुझे दर्द हो रहा था।

मैंंनें निशा को और क्रीम लगानें को कहा तो निशा नें और क्रीम लगाकर लंड मेंरी गांड मेंं डाल दिया। अबकी बार लंड काफी अन्दर जा चुका था। अब निशा एक हाथ से लंड अन्दर-बाहर कर रही थी और मुँह से लंड भी चूसती जा रही थी। अब मुझे भी अपनी गांड मरवानें मेंं आनन्द आ रहा था मैंंनें निशा के सर को पकड़ कर उसके मुँह को चोदनें लगा।

कुछ देर निशा मेंरे लंड को चूसनें के बाद उठी और केंडिल रूपी लंड के दूसरे किनारे को अपनी चुत मेंं डाल कर चुदाई करनें लगी.. जिससे उसकी भी चुदाई हो रही थी और मेंरी भी गांड मारती जा रही थी।

अब कमरे मैंं सिर्फ ‘ऊऊऊ आआ.. आआआ ईईई.. फक.. फक..’ के अलावा कोई दूसरी आवाज नहीं आ रही थी।
मुझे भी अपनी गांड की चुदाई करवानें मेंं मजा आ रहा था।

निशा का हाल तो और बुरा था.. उसनें लण्ड अपनी चुत मेंं सात इंच तक अन्दर कर लिया था। अब उसकी चुत से जो पानी निकल रहा था.. वह मेंरे गांड के ऊपर जाकर चिकनाई का काम कर रहा था.. जिससे अब मुझे दर्द नहीं हो रहा था और मजा भी आनें लगा था।

करीब 20 मिनट के बाद निशा का पानी छूट गया और एक हाथ से लंड अन्दर-बाहर करनें लगी और दूसरे हाथ से मेंरी मुठ मारनें लगी। तभी मेंरे लंड नें भी पिचकारी छोड़ दी.. तो निशा नें अपना मुँह खोलकर सारा वीर्य पी गई और गांड से लण्ड निकाल कर मेंरे लंड को चाट कर साफ़ कर दिया।

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