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ऑनलाइन मिली लड़की की ठुकाई

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रियल कहानी डॉट कॉम पर आपका स्वागत है। नमस्कार मित्रो, मैंं, आपका फेवरेट दोस्त राजा मेरी अपनी आपबीती के साथ आपकी सेवा में हाजिर हूँ। आशा करता हु की आप सभी तंदरुस्त होंगे। और साथ ही आप जोरों में चुदाई भी कर रहे होंगे।
मित्रो, आज मैंं आपके सामने मेरी और एक कहानी लेकर आया हूँ, उम्मीद है यह कहानी भी आपको बाकी सब कहानियों की तरह पसंद आएगी। मेरी पहली कहानियों के लिए मुझे आप सब का जो प्यार मिला उसके लिए मैंं आप सबका हमेशा शुक्रगुजार रहूँगा। साथ ही मैंं रियलकहानी की पूरे टीम का भी धन्यवाद देता हूँ, जो मेरी हर कहानी को प्रकाशित करते हैं।
तो फ्रेंड्स अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैंं सीधा मेरी कहानी पर आता हूँ।
फ्रेंड्स आप सभी लोग ‘तीन पत्ती’ नाम के मोबाईल गेम से परिचित होंगे ही, इसी तीन पत्ती ने मेरे लिए चुदाई का और एक रास्ता खोल दिया।
कुछ ही दिनों पहले की बात है हमेशा की तरह मैंं तीन पत्ती खेलने में व्यस्त था, तभी मेरे टेबल पर एक लड़की आई और वो भी हमारे साथ खेलने लगी।
इसी दौरान मैंंने उसे संदेश भेजा और उसने भी मेरे संदेश का जवाब दिया। फ़िर मैंंने भी उस लड़की से बात करना शुरु कर दी और मैंंने उस लड़की से उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम रीना बताया।
बात को आगे बढ़ाते हुए मैंंने उससे कुछ यहाँ:-वहाँ की बातें पूछी, फ़िर मैंंने उससे उसका फ़ोन नम्बर पूछा। पहले तो वो नंबर देने से मना कर रही थी, पर मेरे जिद करने पर आखिर उसने मुझे अपना नम्बर दे दिया।
इसके बाद ‘मैंं उसे बाद में फ़ोन करता हूँ’ बोल कर चला गया।
उसका नंबर लेने के थोड़ी देर बाद मैंंने उस नंबर पर फोन लगाया और उसने भी मेरे फ़ोन का जवाब देते हुए उसे उठाया और मुझसे बात करने लगी।
मैंं:- हैलो, क्या आप रीना बात कर रही हो?
रीना:- हैलो, हाँ… जी मैंं रीना बात कर रही हूँ, आप कौन?
पहले तो उसने मुझे पहचाना नहीं!
मैंं:- अरे मैंं राजा… आपका दोस्त, जो आपको तीन पत्ती पर मिला था,, कुछ याद आया?
रीना:- ओ,, ओ,, हाँ याद आया राजा कहिए कैसे हो आप?
मैंं:- मैंं ठीक हूँ, आप बताईए?
रीना:- मैंं भी ठीक हूँ… तो क्या चल रहा है आपका?
मैंं:- बस यही रोज का काम और क्या… आप बताइए!
रीना:- मेरा भी वही सब!
फ़िर हम लोग इसी तरह अक्सर एक:-दूसरे से बातें करने लगे। इसी दौरान मुझे पता चला कि वो मेरे गाँव के काफी करीब रहती है और साथ ही वो मुझसे काफी छोटी भी है।
इसी तरह हमारी बातों का सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा और अब हम एक:-दूसरे को काफ़ी अच्छे से जानने लगे थे। साथ ही हम काफी अच्छे दोस्त भी बन गए थे।
कुछ दिन यूँ ही चलता रहा, फ़िर एक बार हमने सेक्स के बारे में भी फ़ोन पर काफी लम्बी बात की, तब उसने मुझे बताया कि उसे सेक्स का कोई अनुभव नहीं है और उसका भी कभी:-कभार मन करता है, किसी के साथ सेक्स करने का… पर उसका कोई प्रेमी न होने की वजह से वो ये सब नहीं कर पाती।
अब वो मुझसे भी पूछ रही थी कि क्या मैंंने कभी सेक्स किया है?
मैंंने भी उसे ‘ना’ कर दिया। उस दिन तो हम ज्यादा कुछ बात नहीं कर पाए, पर इतना तो पक्का था कि अब वो भी मचलने लगी थी। इसी बीच चार:-पाँच दिन बीत गए फ़िर एक दिन उसका मुझे फ़ोन आया।
वो आज कुछ उदास लग रही थी, तो मैंंने उससे पूछा।
मैंं:- क्या हुआ… आज उदास लग रही हो, कुछ हुआ है क्या?
रीना:- नहीं… कुछ नहीं, बस यूँ ही!
मैंं:- नहीं, कुछ तो बात है… बताओ जल्दी क्या बात है?
रीना:- राजा, क्या मैंं तुझसे एक बात पूछ सकती हूँ?
मैंं:- हाँ हाँ पूछो!
रीना:- क्या तुम मुझसे प्यार करते हो?
मैंं:- क्या? यह कैसा सवाल है… तुम क्या पूछ रही हो?
रीना:- सच बताओ हाँ या नहीं?
मेरे भी मन में अब लड्डू फूटने लगे, आखिर मुझे उसे चोदना जो था… तो मैंंने भी उसे ‘हाँ’ में जवाब दिया।
मैंं:- हाँ… करता तो हूँ… पर मैंं तुम्हें बताने से डरता था,, पर तुम ये सब क्यों पूछ रही हो?
रीना:- असल में मैंं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, पर मैंं भी तुम्हें बताने से डरती थी। कहीं तुम बुरा न मान जाओ!
मैंं:- अरे उसमें डरने की क्या बात है,, चलो जो हुआ सो हुआ, अब तो हम एक हुए ना!
रीना:- हाँ… हाँ पूरी तरह से एक हो चुके हैं हम, अब तुम ही मेरे राजा और मैंं तुम्हारी रानी…!
अब मैंं भी बड़ा खुश था और बस रीना को चोदने के बारे में सोचने लगा। कई बार तो फ़ोन पर ही एक:-दूसरे को संतुष्ट किया करते थे, पर अब फ़ोन पर भी हमें जो मजा चाहिए वो नहीं मिल रहा था, तो हमने एक:-दूसरे से मिलने का सोचा।
उसका गाँव ज्यादा दूर न होने की वजह से उसे भी कोई दिक्कत नहीं थी और वो भी आसानी से मुझसे मिलने के लिए राजी हो गई। इस तरह हमने एक दिन मिलने का तय किया। जिस दिन हमने मिलने का तय किया था, आखिरकार वो दिन आ ही गया। मैंं भी सुबह जल्दी:-जल्दी तैयार हो कर उसे लेने बस अड्डे पर पहुँच गया।
अरे मैंं तो अपको रीना का पूरा परिचय देना ही भूल गया,,! कोई बात नहीं अब दे देता हूँ। रीना एक बहुत ही मस्त लड़की थी उसका रंग गोरा, कद 5’4″, उसका फ़िगर लगभग 30:-28:-30 होगा, दुबली सी थी, पर साला कमाल की लड़की थी। उसके चुचे किसी गेंद की तरह गोल:-मटोल थे, जो मुझे बहुत पसंद थे। उसके कूल्हे भी बड़े प्यारे थे, अब सीधा कहूँ तो वो बहुत मादक लड़की थी। इसीलिए तो मेरा उस पर दिल आ गया था।
कुछ ही देर में उसकी बस आ गई और वो भी मेरे सामने खड़ी हो गई। उसने गुलाबी रंग का टॉप और नीले रंग की जीन्स पहनी हुई थी, वो बहुत ही कामुक लग रही थी।
उसका टॉप और जीन्स बहुत फ़िट होने की वजह से उसके चुचे और गाण्ड काफ़ी उभर कर दिख रहे थे।
उसके वो 34″ चुचे क्या लग रहे थे…! मन तो कर रहा था कि वहीं उसे पटक कर उसके चुचों को जी भर कर चुस लूँ, पर चाह कर भी मैंं वैसा नहीं कर पा रहा था।
खैर… अब हम दोनों वहाँ से निकले और घूमने लगे। वो बाईक पर मेरे पीछे वाली सीट पर बैठी और उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रख दिया, तब मानो मेरे शरीर में बिजली सी कौंधने लगी थी।
इसी तरह हम आगे चलते गए और फ़िर एक सिनेमा घर के सामने मैंंने अपनी बाईक रोक दी और हम सिनेमा देखने अन्दर चल दिए। यह सिनेमा काफी दिनों से चल रहा था तो वहाँ कुछ ज्यादा भीड़ नहीं थी और सिनेमाघर भी लगभग खाली पड़ा हुआ था।
हम अन्दर जाकर कोने वाली सीट पर बैठ गए ताकि कोई हमें देख न पाए।
जैसे ही सिनेमा शुरु हुआ, हाल में अँधेरा हो गया और मैंंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया और बड़े प्यार से उसे मसलने लगा। यह देख कर वो भी मेरा साथ देने लगी।
अब मैंंने भी धीरे:-धीरे अपना हाथ उसके चुचों पर रख कर उसे प्यार से मसलने लगा। मेरा एक हाथ जो उसके कंधों से होकर उसके बाईं चुची पर जा रहा था और एक हाथ उसके दाईं चुची पर था और मैंं दोनों हाथों से उसके चुचुक मसल रहा था।
क्या बताऊँ दोस्तों… क्या मजा आ रहा था,,! वो भी बड़े प्यार से उसके दोनों हाथ मेरे हाथों से लगा कर चुचे मसलने में मेरा साथ दिए जा रही थी और साथ ही बड़ी प्यारी सी सिसकारियाँ भी ले रही थी।
तभी मैंंने अपना एक हाथ उसके चुचे से हटाया और पेट से घुमाते हुए उसकी चुत पर रख दिया। उसकी चुत जो कि दोनों टांगों के बीच में फंसी थी, बहुत फूली हुई लग रही थी,,!
फ़िर मैंंने उसकी चुत पर हाथ फ़ेरना शुरु कर दिया। इसी के साथ वो भी मचलने लगी, अब उस पर भी अब काम का भूत चढ़ने लगा था, जो उसके मुख से निकलने वाली ‘आहों’ से पर साफ़ प्रतीत हो रहा था।
फ़िर मैंंने धीरे से उसकी जीन्स का बटन खोला और अपनी उंगली उसकी चुत में पेल दी और धीरे:-धीरे अपनी उंगली को आगे:-पीछे करने लगा। इसी के साथ उसने भी उसका हाथ मेरे लौड़ा पर रख दिया जो कि काफी पहले से ही तन कर सलामी दे रहा था।
अब वो भी मेरी जीन्स के ऊपर से ही मेरे लौड़ा को मसलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने मेरे लौड़ा को बाहर निकाल लिया और जोर:-जोर से ऊपर:-नीचे करके हिलाने लगी।
अब मैंं भी उसकी चुत में जोरों से अपना हाथ आगे:-पीछे कर रहा था।
तभी मैंंने उसका मुँह अपनी ओर किया, जो अब तक बस ‘आ,,आ,,आ,,ह्हूह्ह्ह्हूऊ,,’ कर रहा था। साथ ही मैंंने उसके लबों पर एक जोरदार चुंबन किया और उसे चुमने लगा।
वो भी मेरा पूरे जोश में साथ दे रही थी। उसमें अब चुदाई का इतना भूत सवार था कि वो मेरे लौड़ा को बड़े जोरों से मसलने लगी। हम दोनों अब एक:-दूजे में खो जाने के लिए काफी बेकरार थे।
तभी उसकी चुत से पानी निकलने लगा और उसमे मेरी उँगलियाँ भी भीग गई थीं। अब वो भी काफी बेचैन थी और मैंं भी,,!
फ़िर उसने धीरे से मेरे कान में कहा:- राजा, अब मैंं और नहीं रुक सकती… मुझे चोदो और फ़ाड़ दो मेरी चुत को,, प्लीज़ राजा चोदो मुझे,, आआह्ह्ह ह्म्म,,!
फ़िर हम वहाँ से निकले और मैंं उसे एक होटल मैंं ले गया। वहाँ हमने एक कमरा बुक किया और कमरे में चल दिए।
कमरे में जाते ही रीना मुझसे लिपट गई और पागलों की तरह मुझे चुमने लगी, वो कभी मुझे गालों पर चुमती, तो कभी गर्दन पर चुमती…!
इसमें मैंं भी उसका पूरा साथ दे रहा था और अब हम पूरी तरह एक:-दूसरे को चुमने में व्यस्त थे, मैंंने अपनी जुबान उसकी जुबान से लगा रखी थी। वो भी मेरे मुँह के प्रेम रस को अपने में समाए जा रही थी और मैंं उसके रस को पिए जा रहा था।
फ़िर चुमते:-चुमते मैंंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर जाकर उसके पूरे शरीर को चुमने लगा। अब वो भी पूरी तरह पागल हुए जा रही थी।
फ़िर मैंंने उसके कपड़ों को उसके शरीर से अलग कर दिया।
वो सिर्फ गुलाबी ब्रा और पैन्टी में मेरे सामने पड़ी थी।
उसके वो मस्त चुचे, उसका पेट, उसकी चुत क्या बताऊँ यारों… क्या गजब ढा रही थी वो,,!
तभी मैंंने उसके पेट को चुमते हुए उसकी पैन्टी भी निकाल दी और उसकी चुत को चुसने लगा,,! इसी के साथ मैंंने उसकी ब्रा भी निकाल फेंकी और फ़िर एक बार उसके चुचे दबाना शुरु कर दिए,,!
वो भी मचल कर मेरा सिर चुत पर दबाए जा रही थी और ‘आह्हहा,, ऽह्ह्ह्ह्,, ह्म्म्म,,’ आवाजें निकाल रही थी।
अब मैंंने भी अपने सारे कपड़े खोल दिए और अपना लौड़ा हाथ में लिए उसके सामने खड़ा हो गया। मेरा लौड़ा देखते ही उसके आँखों में चमक आ गई और उसने जोर से मेरा लौड़ा चुसना शुरु कर दिया।
लगभग दस मिनट तक चुसने के बाद उसने मुझसे फ़िर एक बार कहा:- राजा अब और मत तड़पाओ और फ़ाड़ दो मेरी चुत को… चोदो मुझे,, चोदो मुझे राजा मैंं तुम्हारा लौड़ा लेने के लिए तड़प रही हूँ,,
मैंं:- इतनी भी क्या जल्दी है मेरी रानी… अभी तो और भी मजा बाकी है…!
रीना:- अब और नहीं रुका जाता राजा… प्लीज़ चोदो मुझे… प्लीज़,,आआ,, ह्ह्ह्ह्ह्,,उफ़्फ़ुफ़्फ़ुफ़्फ़्फ़…!
मैंं:- ठीक है… मेरी जान जैसा तू कहे,,!
इतना कहते ही मैंंने उसकी चुत के नीचे एक तकिया लगाया और अपना लौड़ा उसकी चुत पर सैट कर दिया चुँकि यह उसकी पहली चुदाई थी, तो मैंंने थोड़ा लोशन अपने लौड़ा पर भी मसल लिया। अब मैंं पूरी तरह से उसे चोदने के लिए तैयार था और वो भी चुदने के लिए बेचैन थी।
फ़िर मैंंने उसके पैरों को फैलाया और अपना लौड़ा उसकी चुत के छेद के पास सैट कर दिया और धीरे से मैंंने धक्का लगाया, इसी के साथ उसकी चीख निकल पड़ी:- आईईइ,, आआआऊऊ,,
फ़िर मैंंने धीरे:-धीरे लौड़ा को आगे:-पीछे करना शुरु किया, जैसे उसका दर्द कम होता गया, मैंं भी अपनी स्पीड बढ़ाते गया।
करीब 5 मिनट के बाद अब वो भी मस्ती में आ गई। तभी मैंंने मेरी स्पीड और बढ़ाई और जोर:-जोर से उसे चोदना शुरु कर दिया।
अब वो भी चुदाई का भरपूर आनन्द लेने लगी और साथ ही उसकी आवाजें पूरे कमरे मे गूंजने लगीं:- आह्ह्हाह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ह्म्म्म,, इस्स्स,, आअहाह्ह्हाह,, चोदो मुझे राजा और चोदो बस चोदते रहो… मुझे बहुत मजा आ रहा है… तुम बहुत प्यारे हो और तुमसे भी ज्यादा तुम्हारा लौड़ा प्यारा है और चोदो… मुझे… फ़ाड़ दो मेरी चुत को,,आह्हाअह्ह्ह,,
फ़िर मैंंने उसकी टाँगों को मेरे कन्धों पर रख लिया और उसके चुचों को मसलते हुए और जोरों से उसको चोदना शुरु कर दिया।
करीब दस मिनट के बाद उसका बदल अकड़ने लगा, मैंं समझ गया था कि रीना पानी छोड़ने वाली है, इसी के साथ मेरा भी निकलने वाला था।
मैंंने उसे बताया:- मैंं आने वाला हूँ।
तो उसने मुझसे कहा:- वहाँ मत गिराना,, मैंं तुम्हारा रस पीना चाहती हूँ!
फ़िर हम दोनों 69 की पोजिशन में आ गए।
अब वो मेरा लौड़ा चुस रही थी और मैंं उसकी चुत चुस रहा था। बस थोड़ी ही देर में हम दोनों का पानी निकलने लगा। वो बड़े ही प्यार से मेरा रस पी गई और मैंंने भी उसका रस पी कर उसकी चुत साफ़ कर दी।
अब हम दोनों नंगे एक:-दूसरे की बाहों में बाहें डाले लेटे हुए थे, रीना के चेहरे से उसकी खुशी साफ़ झलक रही थी।
फ़िर मैंंने उससे पूछा:- क्यों मजा आया…?
रीना:- क्या बताऊँ राजा,, कितना मजा आया,, तुमने मुझे आज वो सुख दिया है, जो शायद ही मुझे कहीं और से मिल पाता…! थैंक्यू राजा… आज के बाद मैंं तुम्हारी हूँ बस तुम्हारी…!
मैंं:- अरे, मेरी जान अभी शुरुआत है… मैंं तुम्हें और भी मजे कराऊँगा… तुम बस देखती जाओ।
रीना:- बस मुझे यही चाहिए और कुछ नहीं।
फ़िर कुछ देर बाद मेरा लौड़ा फ़िर एक बार चुदाई के लिए तैयार था और फ़िर मैंंने उसे कई अलग:-अलग अंदाज़ में चोदा।
वो कैसे… मैंं आपको मेरी अगली कहानी में बताऊँगा। तब तक के लिए मेरा नमस्कार।
तो मित्रो, मेरी यह कहानी आपको कैसी लगी मुझे जरुर बताना।
मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा

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