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पड़ोस की भाभी बन गयी मेरी घरवाली

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Chudai ki kahani, desi antarvasna sex story एक और मजेदार कहानी पड़ोस की भाभी बन गयी मेरी घरवाली। मेरे प्यारे दोस्तों यह मेरी पहली स्टोरी है। यह बात उन दिनों की है जब मैंं बारहवी वीं क्लास पास करने के बाद इलेक्ट्रिकल का डिप्लोमा करने लगा। तब हमारे गांव में लोगों की टीवी, रेडियो आदि में खराबी आने पर मुझे बुला लिया जाता था और मैंं बिना किसी पैसे के उनकी समस्यायों का हल निकाल दिया करता था।
हमारे गांव में मैंं बहुत ही सीधा और सच्चा लड़का हुआ करता था। पर कॉलेज जाने के बाद कुछ:-कुछ जानकारियाँ मेरे पास आ चुकी थीं। जैसे चुदाई, चुत इत्यादि,,,, और इसके साथ ही लड़कियों के बारे में मेरा नजरिया भी बदल गया था। अब मैंं भी किसी भाभी या लड़की को चोदने की सोचा करता था। अब तो मेरी उम्र भी 18 हो चुकी थी तो लौड़ा भी खड़ा होने लगा था।
एक बार की बात है मेरी छुट्टियाँ चल रही थीं और मैंं घर पर ही था। मेरे गांव की एक भाभी हैं, जो देखने में बहुत ही सुन्दर हैं और उनका फिगर भी बहुत मस्त है।
उनकी शादी 18 साल की उम्र में हुई और वो मुझसे एक साल बड़ी हैं, उनका नाम पूनम है।
मैंं अक्सर छुट्टियों में जब भी गांव में रहता तो उन्हें ही देखता था और वो भी मुझे लाईन देती थीं पर हमने कभी एक:-दूसरे से कहा नहीं।
वो अक्सर मुझे कहती रहती थीं कि आज तो मस्त लग रहे हो, पर मैंं ध्यान नहीं देता था और सोचता था कि वो यूं ही मुझे चिढ़ाने के लिये बोल रही हैं।
एक दिन की बात है उनका टीवी खराब हो गया जो उनके बेडरूम में रखा रहता था।
क्योंकि उनका घर बहुत बड़ा है, उनके घर में केवल दो भाई रहते थे, दोनों भाई जॉब में हैं और दिन भर ऑफिस में होते हैं।
उनकी सास जो अक्सर पड़ोस में इधर:-उधर बैठी रहती हैं।
मैंं उनके घर उनका टीवी सुधारने के लिये गया। उनके बेडरूम में वो अकेली ही थीं, मैंं जैसे ही अन्दर गया, वो मुझे देखकर मुस्कुराईं और मैंंने भी एक स्माइल दी।
इसके बाद मैंंने पूछा:- क्या हुआ है टीवी को,,,, कैसे बंद हो गया?
तो वो बोली:- टीवी तो आप सुधार ही देंगे, पहले चाय तो पी लीजिए।
और फिर हम दोनों ने पलंग पर बैठ कर चाय पी। मैंंने नोटिस किया कि वो चाय पीते हुए भी मुझे ही देख रही हैं और उनका एक हाथ बार:-बार मेरी जांघ को स्पर्श कर रहा है।
फिर मैंंने टीवी को खिसकाने के लिये बोला क्योंकि वह बहुत बड़ा था तो वे झट से उठीं और मेरे ठीक सामने अपनी पीठ करके आ गई और टीवी को खिसकाने में मदद करने लगीं तो बार:-बार उनके चुतड़ मेरे लौड़ा से स्पर्श हो रहे थे जिससे मेरा खड़ा हो गया और शायद उन्हें भी इसका एहसास हो गया था कि मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है।
मुझे भी कुछ शरारत सूझ रही थी तो मैंं भी टीवी को इधर:-उधर करने के बहाने बार:-बार उनके दूधों को छू रहा था जिससे शायद वो बार:-बार अपने होंठ काट रही थीं।
मैंंने टीवी खोला और उसे ठीक किया छोटा सा ही फाल्ट था तो उसे ठीक करने के बाद मैंंने उसे चालू किया और उन्हें बताया:- देखो, ये हो गया आपका टीवी चालू… अब मैंं चलता हूँ!
तो उन्होंने झट से मेरा हाथ पकड़ा और बोली:- इंजीनियर साब, अपनी फीस नहीं लोगे?
तो मैंंने कहा:- आप से कैसी फीस, आप तो अपने ही घर वाली हो!
तो वह बोली:- आप मुझे कहाँ अपनी घर वाली समझते हो?
मैंं थोड़ा चौंका, फिर मैंंने सोचा कि वह मजाक कर रही हैं।
फिर उन्होंने मुझे बैठने को कहा और बोली:- चले जाना,,,, वैसे भी अभी आपकी छुट्टियाँ चल रही हैं।
मैंं बैठ गया और हम दोनों बातें करने लगे। बातों:-बातों में उन्होंने पूछा:- तुम्हारी कोई गर्ल:-फ्रेन्ड नहीं बनी अभी तक? यूं ही चल रहा है या कुछ जुगाड़ भी कर रखा है?
हम दोनों ही अब कुछ खुल कर बातें करने लगे।
मैंंने कहा:- भाभी जी, आप जैसी कोई मिले तो सोच भी सकता हूँ, पर क्या करूँ भगवान ने भी एक ही पीस बना कर छोड़ दिया… नहीं तो मैंं भी उसे अपने लिए रख लेता।
तो वह मुस्कुरा दीं और अपना हाथ मेरी जांघ पर रखकर बोली:- चलो कोई बात नहीं जरूरी तो नहीं कि एक ही चीज को सिर्फ एक ही यूज करे, क्या दो लोग यूज नहीं कर सकते,,,,!
मुझे इशारा मिल गया और मैंं भी उनकी जांघ पर हाथ रखकर बातें करने लगा। वे बहुत ही गर्म लग रही थीं।
मैंंने यूँ ही पूछा:- क्या तबीयत खराब है आपकी,,,, बहुत गर्म लग रही हैं!
वह बोलती है:- तुम तो बिल्कुल ही चुतिया जैसी बातें कर रहे हो। इतना भी नहीं जानते कि लड़की गर्म क्यों होती है?
और उन्होंने धीरे से अपना हाथ मेरे लौड़ा पर रखा और मेरा हाथ उठा कर अपनी चुत पर रखकर बोली:- अब देखो कितना गर्म है!
तब मुझे न जाने कैसा लगने लगा और मैंंने अपना एक हाथ अपने लौड़ा पर रखा और दबाने लगा।
तभी भाभी ने अपना हाथ मेरे लौड़ा पर रखा और बोला:- अब तो तुम भी गर्म लग रहे हो,,,, क्या हुआ तुम्हारी तबीयत खराब हो रही है क्या?
मैंंने कहा:- नहीं भाभी जी… अब तबीयत खराब नहीं और मस्त हो रही है।
मैंंने उनको जोर से चिपका लिया और उन्हें चुम्बन कर दिया। अब तो वो और खुल गईं और मेरे लौड़ा को जोर से दबाने लगीं और मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चुत पर दबाने लगीं।
मैंंने कुछ नहीं सोचा बस अपना हाथ उनकी साड़ी में से सीधा उनकी पैन्टी के अन्दर हाथ डाल दिया और वो सिहर उठी।
वो भी पागल सी हो रही थी और उन्होंने मुझे चुमना शुरू किया और बार:-बार मेरी पैंट खींचने लगी।
दोस्तो, मैंं आपको बता नहीं सकता उस वक्त मुझे कैसा लग रहा था और वो तो जैसे पागल सी हो रही थी। हम दोनों ने ही जल्दी:-जल्दी से अपने कपड़े उतारे और मैंं उनके दूधों को जो बिल्कुल टाईट थे देखता ही रह गया और जल्दी से उनके दूधों पर टूट पड़ा। कभी चुसना तो कभी जोर से दबाना, करीब 15 मिनट तक यह चलता रहा।
फिर उन्होंने मेरे लौड़ा को पकड़ कर अपने मुँह में भर लिया और इतनी जोर से चुसने लगी जैसे कि लॉलीपॉप चुस रही हों और 10 मिनट में ही मेरा माल उनके मुँह में चला गया।
मैंंने उनके सिर को पकड़ कर अपने लौड़ा पर दबा दिया और करीब 2 मिनट तक दबाए रखा।
फिर हम दोनों ही बैठ गए और एक:-दूसरे के अंगों से खेलते रहे।
मेरा लौड़ा अभी भी प्यासा था और उनकी चुत तो प्यास से जैसे फड़फड़ा रही थी। मुझे लग रहा था कि अभी उनकी चुत में पूरा का पूरा अन्दर चला जाऊँ या चुत को खा जाऊँ।
मेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया और अब मैंंने देर न करते हुए सीधे उनकी चुत पर अपना लौड़ा लगाया और दोनों हाथों से उनकी चुत को फाड़ कर उसमें एक जोरदार झटका मारा।
आधा लौड़ा चुत के अन्दर हो गया और मेरे लौड़ा में दर्द हुआ व उनकी चुत से खून निकलना चालू हो गया।
मैंं डर गया कि यह क्या हो गया और सोचने लगा कि उनकी चुत फट गई है मगर जैसे ही लौड़ा में दर्द बढ़ा मैंंने अपना लौड़ा बाहर निकाला तो उसमें से खून निकल रहा था, क्योंकि यह मेरी पहली चुदाई थी तो लौड़ा का धागा टूटा था।
मैंंने उसे साफ किया और थोड़ी सी वैसलीन लगाई और फिर से उनकी चुत पर टूट पड़ा।
लगभग 20 मिनट उनकी चुत चोदने के बाद मेरा माल निकलने ही वाला था तो मैंं रूक गया और लौड़ा को बाहर निकाल लिया।
कुछ देर रूकने के बाद मैंंने उनकी दोनों टांगें फैलाईं, जिससे उनकी चुत साफ नजर आने लगी और चुदाई फिर चालू अब हम दोनों ही मस्त हो कर लौड़ा:-चुत का खेल, खेल रहे थे और दोनों को ही बढ़ा मजा आ रहा था।
वह मेरे से चिपक रही थी और मैंं उनके चुतड़ों को जोर से पकड़ कर उनकी चुत में घुसा जा रहा था। अब मैंं और वो एक:-दूसरे में समाए जा रहे थे।
वह तो ऐसे लग रही थी जैसे उनको कई दिनों से लौड़ा नहीं मिला हो और मेरी तो वैसे भी यह पहली ही चुदाई थी तो करीब 25:-30 मिनट चुदाई के बाद हम दोनों ने ही अपना:-अपना पानी निकाल दिया और उनकी चुत से दोनों का पानी एक साथ बहने लगा।
इस तरह से पहली बार मैंंने चुदाई का स्वाद चखा और मेरी भाभी भी खुश हो गई।
उस दिन से वो मेरी घरवाली बन गई और जब कभी भी मौका मिला, मैंंने उनकी खूब चुदाई की। उन्होंने भी कई और लड़कियों से भी मेरी दोस्ती करवा दी जिससे मैंं जब भी घर आया मेरे दिन मस्त गुजरे।
बाकी और किसके साथ मैंंने क्या किया अगली स्टोरी में लिखूँगा।

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